📍नई दिल्ली/कोलकाता | 15 Jun, 2026, 8:08 PM
Indian Navy Tri-Commissioning: जून के तीसरे हफ्ते में भारतीय नौसेना को एक बड़ा रणनीतिक तोहफा मिल सकता है। कोलकाता में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) शिपयार्ड में आयोजित विशेष समारोह में भारतीय नौसेना के तीन नए स्वदेशी युद्धपोतों को औपचारिक रूप से कमीशन किया जाएगा। इनमें स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस दूनागिरी, एंटी सबमरीन वेसल आईएनएस अग्रय और रिसर्च वेसल आईएनएस संशोधक शामिल हैं।
इन तीनों जहाजों का एक साथ कमीशन होना केवल नौसेना की ताकत बढ़ाने तक सीमित नहीं है। यह भारतीय जहाज निर्माण क्षमता, स्वदेशी तकनीक और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में देश की बढ़ती ताकत को भी दर्शाता है। खास बात यह है कि तीनों प्लेटफॉर्म अलग-अलग भूमिकाओं के लिए तैयार किए गए हैं और समुद्र में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाएंगे।
Indian Navy Tri-Commissioning: एक बार फिर होगी ऐतिहासिक ट्राई-कमीशनिंग
भारतीय नौसेना के इतिहास में एक साथ तीन बड़े प्लेटफॉर्म्स को कमीशन करने की घटनाएं बहुत कम हुई हैं। जनवरी 2025 में प्रधानमंत्री मोदी ने मुंबई स्थित नौसेना डॉकयार्ड में आईएनएस सूरत, आईएनएस नीलगिरी और आईएनएस वाघशीर को एक साथ राष्ट्र को समर्पित किया था। उस समारोह में एक डिस्ट्रॉयर, एक फ्रिगेट और एक पनडुब्बी को एक साथ शामिल किया गया था।
अब कोलकाता में होने वाला यह समारोह भी उसी तरह ऐतिहासिक माना जा रहा है। हालांकि इस बार तीनों प्लेटफॉर्म अलग-अलग भूमिकाओं के लिए बनाए गए हैं। एक जहाज समुद्री युद्ध के लिए है, दूसरा दुश्मन पनडुब्बियों की तलाश और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए, जबकि तीसरा समुद्र की गहराइयों का सर्वेक्षण और समुद्री मानचित्र तैयार करने का काम करेगा।
जीआरएसई ने रचा नया रिकॉर्ड
कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) भारत के सबसे पुराने और प्रमुख रक्षा शिपयार्ड में से एक है। मार्च 2026 में जीआरएसई ने इन तीनों जहाजों को एक साथ भारतीय नौसेना को सौंपकर नया रिकॉर्ड बनाया था।
कंपनी अब तक 118 से अधिक युद्धपोत और सहायक जहाज बना चुका है। इनमें से 80 से ज्यादा जहाज भारतीय नौसेना को दिए जा चुके हैं। सूत्रों का कहना है कि तीन अलग-अलग कैटेगरी के वॉरशिप्स को लगभग एक साथ तैयार करना किसी भी शिपयार्ड की तकनीकी क्षमता और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट का बड़ा उदाहरण माना जाता है।
इन जहाजों में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इससे देश के छोटे और मध्यम उद्योगों को भी बड़ा लाभ मिला है। (Indian Navy Tri-Commissioning)
आईएनएस दूनागिरी बढ़ाएगा नौसेना की मारक क्षमता
तीनों जहाजों में सबसे ज्यादा चर्चा आईएनएस दूनागिरी की हो रही है। यह प्रोजेक्ट-17ए के तहत बनाया गया आधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट है। इसका नाम भारतीय हिमालयी पर्वत श्रृंखला की दूनागिरी चोटी के नाम पर रखा गया है।
दूनागिरी लगभग 149 मीटर लंबा और 6,670 टन वजनी युद्धपोत है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि दुश्मन के रडार पर इसकी पहचान करना मुश्किल हो। आधुनिक स्टेल्थ तकनीक इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।
यह जहाज समुद्र में लंबी दूरी तक ऑपरेशन करने में सक्षम है। इसकी अधिकतम रफ्तार 30 नॉट्स से अधिक है और यह हजारों किलोमीटर तक लगातार मिशन पर रह सकता है।
दूनागिरी कई भूमिकाएं निभाने में सक्षम है। यह दुश्मन के जहाजों पर हमला कर सकता है, हवाई खतरों का मुकाबला कर सकता है और पनडुब्बियों को खोजकर उन पर कार्रवाई भी कर सकता है।
ब्रह्मोस और बराक-8 से लैस होगा दूनागिरी
आईएनएस दूनागिरी की मारक क्षमता इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है। इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें तैनात होंगी, जो समुद्र में दुश्मन के जहाजों को लंबी दूरी से निशाना बना सकती हैं।
इसके अलावा बराक-8 एयर डिफेंस सिस्टम इसे हवाई खतरों से बचाने का काम करेगी। जहाज पर आधुनिक रडार, सोनार और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम भी लगाए गए हैं।
भारतीय नौसेना के अधिकारियों के अनुसार यह जहाज हिंद महासागर क्षेत्र में लंबी दूरी की तैनाती और समुद्री निगरानी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। (Indian Navy Tri-Commissioning)
दुश्मन पनडुब्बियों की तलाश करेगा आईएनएस अग्रय
दूसरा जहाज आईएनएस अग्रय है। यह अर्नाला क्लास के एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट कार्यक्रम का हिस्सा है। इसका मुख्य काम तटीय इलाकों और उथले समुद्री क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना और उन्हें निष्क्रिय करना है।
हाल के वर्षों में हिंद महासागर क्षेत्र में विभिन्न देशों की पनडुब्बियों की गतिविधियां बढ़ी हैं। ऐसे में भारतीय नौसेना के लिए विशेष पनडुब्बी रोधी जहाजों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
आईएनएस अग्रय इसी जरूरत को पूरा करेगा। लगभग 900 टन वजनी यह जहाज अपेक्षाकृत छोटे आकार का है, लेकिन इसकी तकनीकी क्षमता बेहद आधुनिक है। करीब 77 मीटर लंबे इस युद्धपोत में आधुनिक सोनार सिस्टम लगाए गए हैं, जो समुद्र के भीतर छिपे खतरों को पहचान सकते हैं। (Indian Navy Tri-Commissioning)
उथले समुद्र में भी कर सकेगा ऑपरेशन
अग्रय का ड्राफ्ट काफी कम है, जिससे यह तटीय और उथले समुद्री क्षेत्रों में भी आसानी से ऑपरेट कर सकता है। यही वजह है कि इसे बंदरगाह सुरक्षा और तटीय निगरानी के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस जहाज में अत्याधुनिक सोनार प्रणाली सिस्टम है जो समुद्र के भीतर छिपी पनडुब्बियों की पहचान कर सकता है। जहाज में टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर और आधुनिक सेंसर लगाए गए हैं। इसे भारतीय नौसेना के सबसे आधुनिक पनडुब्बी रोधी प्लेटफॉर्म में से एक माना जा रहा है।
डीआरडीओ द्वारा विकसित कई स्वदेशी प्रणालियां भी इस जहाज में शामिल की गई हैं। (Indian Navy Tri-Commissioning)
समुद्र का नक्शा तैयार करेगा आईएनएस संशोधक
जहां दूनागिरी और अग्रय सीधे सैन्य अभियानों के लिए तैयार किए गए हैं, वहीं आईएनएस संशोधक की भूमिका कुछ अलग है। यह एक आधुनिक सर्वे जहाज है, जिसका काम समुद्र की गहराई, समुद्री मार्गों और नौवहन से जुड़ी जानकारी जुटाना होगा।
यह सैंडहायक क्लास का रिसर्च वेसल है और समुद्र की गहराइयों का अध्ययन करने के लिए बनाया गया है। किसी भी नौसेना के लिए समुद्र की सटीक जानकारी बेहद जरूरी होती है। सुरक्षित नौवहन, नए समुद्री मार्गों की पहचान और समुद्री नक्शों को अपडेट करने के लिए ऐसे जहाजों की जरूरत पड़ती है।
करीब 110 मीटर लंबा संशोधक तटीय और गहरे समुद्र दोनों क्षेत्रों में सर्वेक्षण कर सकेगा। नौसेना के लिए समुद्री सर्वेक्षण बेहद महत्वपूर्ण काम होता है। समुद्र के भीतर की गहराई, चट्टानों, समुद्री मार्गों और अन्य भौगोलिक जानकारियों का सटीक रिकॉर्ड तैयार करना किसी भी नौसैनिक अभियान के लिए आवश्यक होता है।
आईएनएस संशोधक इसी कार्य को और अधिक आधुनिक तरीके से करेगा। (Indian Navy Tri-Commissioning)
आधुनिक उपकरणों से लैस है संशोधक
संशोधक में अत्याधुनिक सर्वेक्षण उपकरण लगाए गए हैं। इसमें डिजिटल साइड स्कैन सोनार, ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल्स, रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स और एडवांस डेटा प्रोसेसिंग सिस्टम शामिल हैं।
इनकी मदद से जहाज समुद्र की सतह के नीचे की गतिविधियों और संरचनाओं का विस्तृत अध्ययन कर सकता है।
इसके अलावा जहाज में ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल्स और रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स जैसी आधुनिक प्रणालियां भी मौजूद हैं।
जरूरत पड़ने पर यह जहाज मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। सीमित चिकित्सा सुविधाओं के कारण यह अस्पताल जहाज की भूमिका भी निभा सकता है। (Indian Navy Tri-Commissioning)
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
इन तीनों जहाजों की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इनमें इस्तेमाल की गई स्वदेशी तकनीक है। आज भारतीय शिपयार्ड न केवल आधुनिक युद्धपोत बना रहे हैं बल्कि सेंसर, वेपन सिस्टम्स और प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन भी देश में ही किया जा रहा है।
सरकार लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही है। नौसेना इस दिशा में सबसे आगे मानी जाती है। आज भारतीय नौसेना के लिए बनने वाले अधिकांश युद्धपोत देश के शिपयार्ड्स में तैयार किए जा रहे हैं।
जीआरएसई, मझगांव डॉक, कोचीन शिपयार्ड और गोवा शिपयार्ड जैसी संस्थाएं इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ेगी भारत की मौजूदगी
भारतीय नौसेना पिछले कुछ वर्षों से हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रही है। समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, तटीय निगरानी, समुद्री संसाधनों की रक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना नौसेना की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।
आईएनएस दूनागिरी जैसे आधुनिक फ्रिगेट नौसेना की दूरदराज के क्षेत्रों में संचालन क्षमता को मजबूत करेंगे। वहीं आईएनएस अग्रय तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा को मजबूत बनाएगा। दूसरी ओर आईएनएस संशोधक नौसेना को समुद्र संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराएगा। (Indian Navy Tri-Commissioning)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





