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भारतीय नौसेना ने जारी किया INS संशोधक का क्रेस्ट, जानिए क्या है इस स्वदेशी सर्वे वेसल की खासियत

आईएनएस संशोधक भारतीय नौसेना के नए संधायक कैटेगरी के सर्वे वेसल्स में चौथा जहाज है। इससे पहले आईएनएस संधायक, आईएनएस निर्देशक और आईएनएस इक्षाक नौसेना में शामिल हो चुके हैं...

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📍नई दिल्ली | 9 Jun, 2026, 12:24 PM

INS Sanshodhak Crest: भारतीय नौसेना ने 9 जून को अपने नए सर्वे पोत आईएनएस संशोधक का आधिकारिक क्रेस्ट (प्रतीक चिन्ह) जारी किया। यह सर्वे वेसल लार्ज (एसवीएल) कैटेगरी का चौथा और आखिरी वेसल है, जिसे भारत में ही बनाया गया है। इस पोत का निर्माण कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने किया है।

नौसेना ने क्रेस्ट जारी करते हुए कहा कि आईएनएस संशोधक भारत की बढ़ती स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता और आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र का प्रतीक है। यह पोत समुद्रों की गहराई मापने, नौवहन मार्गों की पहचान करने और महासागरीय जानकारी जुटाने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए तैयार किया गया है।

INS Sanshodhak Crest: क्या है आईएनएस संशोधक?

संशोधक संस्कृत का शब्द है, जिसका अर्थ है “अनुसंधान करने वाला” या “खोजकर्ता”। पोत का नाम उसके काम को ही दर्शाता है क्योंकि इसका मुख्य दायित्व समुद्री सर्वेक्षण और वैज्ञानिक आंकड़े जुटाना है।

आईएनएस संशोधक भारतीय नौसेना के नए संधायक कैटेगरी के सर्वे वेसल्स में चौथा जहाज है। इससे पहले आईएनएस संधायक, आईएनएस निर्देशक और आईएनएस इक्षाक नौसेना में शामिल हो चुके हैं।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस कैटेगरी के चारों पोत भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किए गए हैं और उनका निर्माण जीआरएसई ने किया है।

क्रेस्ट में छिपा है खास संदेश

आईएनएस संशोधक का क्रेस्ट केवल एक प्रतीक चिन्ह नहीं बल्कि इसकी भूमिका को दर्शाने वाला संदेश भी है।

क्रेस्ट में उर्सा मेजर तारामंडल यानी सप्तर्षि को दर्शाया गया है। सदियों से नाविक दिशा तय करने के लिए इस तारामंडल का उपयोग करते रहे हैं। इसके साथ एक लाल और सफेद रंग का लाइटहाउस भी दिखाया गया है।

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लाइटहाउस समुद्र में सुरक्षित मार्ग दिखाने का प्रतीक माना जाता है। वहीं उर्सा मेजर दिशा और नौवहन का प्रतिनिधित्व करता है। दोनों को मिलाकर यह क्रेस्ट समुद्री सर्वेक्षण, सुरक्षित नौवहन और समुद्री ज्ञान का संदेश देता है।

आईएनएस संशोधक का मोटो है “मार्गस्य नेता, सागरस्य वेत्ता”। इसका अर्थ है — “मार्ग दिखाने वाला और समुद्रों का ज्ञाता”।

नौसेना के अनुसार यह मोटो जहाज की उस भूमिका को दर्शाता है जिसके तहत वह समुद्र में सुरक्षित मार्गों की पहचान करता है और समुद्री जानकारी जुटाता है।

समुद्र के भीतर क्या खोजता है यह पोत?

अधिकांश लोग यह मानते हैं कि युद्धपोत केवल लड़ाई के लिए होते हैं, लेकिन सर्वे पोतों की भूमिका अलग होती है। आईएनएस संशोधक का काम समुद्र की गहराई मापना, बंदरगाहों के प्रवेश मार्गों का सर्वे करना, जहाजों के लिए सुरक्षित नौवहन चैनल तैयार करना और समुद्र से जुड़ा वैज्ञानिक डेटा जुटाना है।

यह पोत तटीय क्षेत्रों से लेकर गहरे समुद्र तक सर्वेक्षण कर सकता है। इसके द्वारा जुटाई गई जानकारी का उपयोग नौसेना के अलावा नागरिक एजेंसियां, बंदरगाह प्राधिकरण और वैज्ञानिक संस्थान भी कर सकते हैं।

आधुनिक तकनीक से लैस है संशोधक

आईएनएस संशोधक में कई अत्याधुनिक हाइड्रोग्राफिक और समुद्री सर्वेक्षण प्रणालियां लगाई गई हैं। इसमें डेटा एक्विजिशन एंड प्रोसेसिंग सिस्टम, ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल, रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल, डिजिटल साइड स्कैन सोनार और डीजीपीएस आधारित लंबी दूरी की पोजिशनिंग प्रणाली शामिल हैं।

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इसके अलावा जहाज में मल्टी-बीम इको साउंडर भी लगाया गया है, जो समुद्र की तलहटी का अत्यंत सटीक नक्शा तैयार कर सकता है। इन उपकरणों की मदद से समुद्र के भीतर मौजूद संरचनाओं, गहराई और भौगोलिक स्थितियों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

आईएनएस संशोधक लगभग 110 मीटर लंबा और करीब 16 मीटर चौड़ा है। इसका वजन लगभग 3400 टन है। जहाज दो डीजल इंजनों से ऑपरेट होता है और 18 नॉट से अधिक गति हासिल कर सकता है।

इसकी ऑपरेशनल रेंज लगभग 6500 समुद्री मील बताई जाती है, जिससे यह लंबे समय तक समुद्र में तैनात रह सकता है। जहाज पर लगभग 231 अधिकारी और नाविक तैनात हो सकते हैं। इसमें महिला अधिकारियों और नाविकों के लिए भी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

हेलिकॉप्टर और बचाव अभियान में भी उपयोगी

आईएनएस संशोधक पर हेलिकॉप्टर ऑपरेशन की सुविधा भी उपलब्ध है। यह एचएएल ध्रुव जैसे हेलिकॉप्टरों को ऑपरेट कर सकता है। जरूरत पड़ने पर इसका उपयोग खोज और बचाव अभियानों, मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों में भी किया जा सकता है। नौसेना के अनुसार जहाज को अस्पताल पोत जैसी भूमिका में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री

आईएनएस संशोधक की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसकी स्वदेशी सामग्री है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस पोत में लागत के आधार पर 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इसमें बड़ी संख्या में भारतीय कंपनियों, एमएसएमई और रक्षा उद्योग से जुड़े सप्लायर्स ने योगदान दिया है। इसी वजह से इसे आत्मनिर्भर भारत अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जा रहा है।

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कब शुरू हुआ था निर्माण?

आईएनएस संशोधक का निर्माण जून 2022 में शुरू हुआ था, जब इसकी कील रखी गई। इसके बाद जून 2023 में इसे लॉन्च किया गया। अगले लगभग तीन वर्षों तक जहाज के विभिन्न परीक्षण किए गए। बंदरगाह और समुद्री परीक्षणों के सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद इस साल 30 मार्च को इसे भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया।

भारत का अधिकांश व्यापार समुद्री मार्गों से होता है। ऐसे में सुरक्षित नौवहन और समुद्री जानकारी का महत्व बहुत बढ़ जाता है। आईएनएस संशोधक जैसे सर्वे पोत समुद्र की नई जानकारी जुटाने, नौवहन चार्ट अपडेट करने और समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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