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ECHS का बड़ा आदेश: बिना रेफरल इलाज कराया तो नहीं मिलेगा रीइंबर्समेंट, पूर्व सैनिकों के लिए नई चेतावनी

यदि कोई अस्पताल कैशलेस सुविधा देने से मना करता है तो इसे समझौते की शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो अन्य अस्पताल भी कैशलेस सुविधा देने से बच सकते हैं...

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📍नई दिल्ली/कोच्चि | 9 Jun, 2026, 12:55 PM

ECHS Reimbursement Rules: पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने वाली एक्स-सर्विसमैन कॉन्ट्रिब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस) ने इलाज से जुड़े नियमों को लेकर एक अहम निर्देश जारी किया है। रीजनल सेंटर ईसीएचएस, कोच्चि ने सभी पॉलीक्लिनिकों को भेजे गए एक सर्कुलर में स्पष्ट कहा है कि यदि कोई लाभार्थी निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना सीधे एम्पैनल्ड अस्पताल में योजनाबद्ध इलाज कराता है, तो उसके रीइंबर्समेंट क्लेम पर गंभीर असर पड़ सकता है।

यह सर्कुलर ऐसे समय जारी किया गया है जब कई मामलों में देखा गया कि लाभार्थी पहले रेफरल लिए बिना निजी एम्पैनल्ड अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं और बाद में खर्च की भरपाई के लिए रीइंबर्समेंट की मांग कर रहे हैं। ईसीएचएस का कहना है कि यह प्रक्रिया मौजूदा नियमों और दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं है।

ECHS Reimbursement Rules: क्या कहा गया है सर्कुलर में?

कोच्चि स्थित रीजनल सेंटर ईसीएचएस द्वारा जारी पत्र में सभी पॉलीक्लिनिकों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने इलाके के लाभार्थियों को रेफरल प्रक्रिया के बारे में जागरूक करें और उन्हें नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करें।

सर्कुलर में कहा गया है कि कुछ लाभार्थी बिना रेफरल लिए एम्पैनल्ड हेल्थकेयर ऑर्गेनाइजेशन यानी सूचीबद्ध अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं। बाद में वे इलाज का खर्च वापस पाने के लिए रीइंबर्समेंट क्लेम दाखिल कर रहे हैं। ईसीएचएस के अनुसार यह व्यवस्था योजना के मूल नियमों के खिलाफ है। (ECHS Reimbursement Rules)

कैशलेस इलाज देना अस्पतालों की जिम्मेदारी

ईसीएचएस ने अपने पत्र में यह भी याद दिलाया है कि एम्पैनल्ड अस्पतालों की जिम्मेदारी है कि वे लाभार्थियों को कैशलेस इलाज उपलब्ध कराएं।

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यदि कोई अस्पताल कैशलेस सुविधा देने से मना करता है तो इसे समझौते की शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो अन्य अस्पताल भी कैशलेस सुविधा देने से बच सकते हैं। इसका सीधा असर पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों पर पड़ेगा, जिन्हें अपनी जेब से बड़ी रकम खर्च करनी पड़ सकती है।

आखिर क्या है रेफरल सिस्टम?

ईसीएचएस के तहत किसी भी योजनाबद्ध इलाज के लिए सबसे पहले लाभार्थी को अपने पैरेंट पॉलीक्लिनिक जाना होता है। वहां मौजूद डॉक्टर मरीज की जांच करते हैं और जरूरत होने पर किसी विशेषज्ञ या अस्पताल के लिए रेफरल जारी करते हैं।

इसी रेफरल के आधार पर मरीज एम्पैनल्ड अस्पताल में कैशलेस इलाज प्राप्त कर सकता है।

सामान्य तौर पर यह रेफरल 30 दिन तक वैध रहता है। कुछ गंभीर बीमारियों, जैसे कैंसर आदि के मामलों में इसकी अवधि अधिक हो सकती है। (ECHS Reimbursement Rules)

कौन से इलाज में जरूरी है रेफरल?

नियमों के अनुसार सर्जरी, विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह, विशेष जांच, भर्ती होकर इलाज और अन्य योजनाबद्ध चिकित्सा प्रक्रियाओं के लिए रेफरल जरूरी होता है।

हालांकि आपातकालीन स्थिति अलग होती है। यदि मरीज को अचानक गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो जाती है तो वह सीधे अस्पताल जा सकता है। ऐसे मामलों में बाद में निर्धारित समय सीमा के भीतर ईसीएचएस को सूचित करना होता है। (ECHS Reimbursement Rules)

क्यों बढ़ी चिंता?

ईसीएचएस अधिकारियों के अनुसार हाल के समय में ऐसे कई मामले सामने आए, जिनमें लाभार्थी सीधे अस्पताल पहुंचे, इलाज कराया और फिर खर्च के वापसी के लिए रीइंबर्समेंट क्लेम दाखिल किया।

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इससे दो तरह की समस्याएं पैदा हुईं। पहली, कैशलेस व्यवस्था का उद्देश्य प्रभावित हुआ। दूसरी, रीइंबर्समेंट क्लेम की संख्या बढ़ने से प्रशासनिक प्रक्रिया पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।

इसी वजह से कोच्चि रीजनल सेंटर ने नियमों को दोबारा स्पष्ट करते हुए सभी पॉलीक्लिनिकों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। (ECHS Reimbursement Rules)

ECHS Reimbursement Rules
AI-Generated Image with original Circular.

बिना रेफरल वाले मामलों में अब क्या होगा?

सर्कुलर के अनुसार यदि कोई लाभार्थी बिना रेफरल के योजनाबद्ध इलाज कराता है और बाद में क्लेम जमा करता है, तो संबंधित अस्पताल से लिखित स्पष्टीकरण लिया जाएगा।

अस्पताल को बताना होगा कि उसने मरीज को कैशलेस सुविधा क्यों नहीं दी। इस स्पष्टीकरण को क्लेम दस्तावेजों के साथ अपलोड करना अनिवार्य होगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अस्पताल भी अपने दायित्वों का पालन करें और लाभार्थियों को अनावश्यक आर्थिक बोझ न उठाना पड़े।

ईसीएचएस की शुरुआत रक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2003 में की थी। इसका उद्देश्य सेवानिवृत्त सैनिकों, उनके आश्रितों और युद्ध वीरांगनाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

आज देशभर में लाखों पूर्व सैनिक और उनके परिवार इस योजना का लाभ ले रहे हैं। योजना के तहत सैकड़ों पॉलीक्लिनिक, सैन्य अस्पताल, सरकारी अस्पताल और हजारों निजी एम्पैनल्ड अस्पताल जुड़े हुए हैं।

ईसीएचएस की सबसे बड़ी विशेषता कैशलेस इलाज की सुविधा मानी जाती है, जिससे लाभार्थियों को इलाज के समय बड़ी रकम खर्च नहीं करनी पड़ती।

अधिकारियों ने सलाह दी है कि किसी भी योजनाबद्ध इलाज से पहले अपने नजदीकी ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक से संपर्क करें। डॉक्टर की सलाह के बाद रेफरल प्राप्त करें और उसी के आधार पर सूचीबद्ध अस्पताल में इलाज कराएं।

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इससे कैशलेस सुविधा का लाभ मिलेगा और बाद में रीइंबर्समेंट से जुड़ी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

कोच्चि रीजनल सेंटर का यह आदेश आर्मी, नेवी और अन्य संबंधित स्टेशन मुख्यालयों को भी भेजा गया है ताकि सभी जगह एक जैसी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जा सके। (ECHS Reimbursement Rules)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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