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नए सेना प्रमुख ने आर्मी चीफ लाउंज से हटवाई ‘कर्म क्षेत्र’ पेंटिंग, ऐतिहासिक 1971 वॉर सरेंडर पेंटिंग हटाने पर हुआ था विवाद

यह विवाद दिसंबर 2024 में शुरू हुआ था, जब साउथ ब्लॉक के आर्मी चीफ लाउंज से 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के आत्मसमर्पण को दर्शाने वाली प्रसिद्ध पेंटिंग हटाकर उसकी जगह 'कर्म क्षेत्र' पेंटिंग लगा दी गई थी...

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📍नई दिल्ली | 22 Jul, 2026, 12:46 PM

Army Chief Karm Kshetra Painting: भारतीय सेना के नए प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने कार्यभार संभालने के कुछ ही दिनों के भीतर सेना मुख्यालय के साउथ ब्लॉक स्थित आर्मी चीफ लाउंज में लगी ‘कर्म क्षेत्र’ पेंटिंग को हटाने का फैसला किया है। इसकी जगह अब लाउंज को नए स्वरूप में तैयार किया जा रहा है। यह वही पेंटिंग थी, जिसे पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के कार्यकाल में 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तान के आत्मसमर्पण की ऐतिहासिक पेंटिंग हटाकर लगाया गया था। उस समय इस बदलाव को लेकर पूर्व सैन्य अधिकारियों, रक्षा विशेषज्ञों और सोशल मीडिया पर लंबी बहस छिड़ गई थी।

Army Chief Karm Kshetra Painting: सेना प्रमुख के वीडियो से हुआ खुलासा

कर्म क्षेत्र‘ पेंटिंग को सेना के अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल थॉमस जैकब ने बनाई था। जनरल धीरज सेठ ने इसी महीने सेना प्रमुख का पद संभाला है और उनके कार्यभार ग्रहण करने के बाद लाउंज में यह बदलाव किया गया।

आज जब सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने जब 135वें डूरंड कप को लेकर एक वीडियो जारी किया तो उसमें बैकग्राउंड लगी ‘कर्म क्षेत्र’ पेंटिंग नदारद नजर आई। सूत्रों का कहना है कि यह बदलाव हाल ही में उनके पदभार संभालने के बाद किया गया है।

1971 की ऐतिहासिक पेंटिंग हटने पर उठा था विवाद

यह विवाद दिसंबर 2024 में शुरू हुआ था, जब साउथ ब्लॉक के आर्मी चीफ लाउंज से 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के आत्मसमर्पण को दर्शाने वाली प्रसिद्ध पेंटिंग हटाकर उसकी जगह ‘कर्म क्षेत्र’ पेंटिंग लगा दी गई थी। 1971 की पेंटिंग भारतीय सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी जीतों में से एक का प्रतीक मानी जाती है। इसी युद्ध के दौरान ढाका में पाकिस्तान के लगभग 93 हजार सैनिकों ने भारतीय सेना और संयुक्त कमान के सामने आत्मसमर्पण किया था।

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Army chief Karm Kshetra Painting
Source: Indian Army

पेंटिंग हटने की खबर सामने आने के बाद कई सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों ने सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि भारतीय सेना की सबसे बड़ी ऐतिहासिक जीत को दर्शाने वाली पेंटिंग को आर्मी चीफ लाउंज से हटाना उचित नहीं था। विवाद बढ़ने के बाद 1971 की पेंटिंग को मानेकशॉ सेंटर में प्रमुख स्थान पर स्थापित किया गया।

पूर्व सेना प्रमुख ने किया था फैसले का बचाव

विवाद बढ़ने पर जनवरी 2025 में तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पहली बार सार्वजनिक रूप से इस फैसले पर सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि 1971 की पेंटिंग का महत्व कम नहीं किया गया है। इसे मानेकशॉ सेंटर में 16 दिसंबर, यानी विजय दिवस के दिन स्थापित किया गया था, जिसे उन्होंने शुभ तिथि बताया था।

उन्होंने यह भी कहा था कि सेना के दो चीफ लाउंज हैं। एक साउथ ब्लॉक में और दूसरा मानेकशॉ सेंटर में। उनके अनुसार, साउथ ब्लॉक स्थित लाउंज में नई पेंटिंग भारतीय सेना के अतीत, वर्तमान और भविष्य की सोच को दर्शाने के उद्देश्य से लगाई गई थी, जबकि 1971 की ऐतिहासिक पेंटिंग को सम्मानजनक स्थान दिया गया।

1971 Surrender Painting Row: Army Chief Breaks Silence, Calls Date 'Auspicious'
मानेक शॉ सेंटर में नई जगह पर पेंटिंग

‘कर्म क्षेत्र’ पेंटिंग में क्या दिखाया गया था

लेफ्टिनेंट कर्नल थॉमस जैकब द्वारा बनाई गई ‘कर्म क्षेत्र’ पेंटिंग भारतीय सेना को केवल सीमा की रक्षा करने वाली सेना के रूप में नहीं, बल्कि धर्म, न्याय और राष्ट्रीय मूल्यों के रक्षक के रूप में प्रस्तुत करती थी। पेंटिंग में भगवान श्रीकृष्ण का रथ, आचार्य चाणक्य, पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग झील, बर्फ से ढके पहाड़, आधुनिक टैंक, इन्फैंट्री लड़ाकू वाहन, पेट्रोल बोट, स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर और एएच-64 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर जैसे कई सैन्य प्रतीकों को एक साथ दिखाया गया था।

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Army chief Karm Kshetra Painting
Karm Kshetra Painting

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने उस समय कहा था कि यह पेंटिंग भारतीय सैन्य परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक सैन्य क्षमता के बीच संबंध को दर्शाती है। उन्होंने चाणक्य और श्रीकृष्ण के चित्रण का भी बचाव किया था और कहा था कि भारतीय सैन्य सोच को अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जड़ों से अलग करके नहीं देखा जा सकता। (Army Chief Karm Kshetra Painting)

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  • herry passport

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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