HomeLegal Policy Newsनॉन-पेंशनर पूर्व सैनिकों के कैंसर इलाज पर संसद में सरकार का जवाब,...

नॉन-पेंशनर पूर्व सैनिकों के कैंसर इलाज पर संसद में सरकार का जवाब, जानिए किसे मिलेगा ECHS और KSB का लाभ

डॉ. भीम सिंह ने अपने प्रश्न में कहा कि कैंसर का इलाज लगातार महंगा होता जा रहा है। ऐसे में 75 हजार रुपये की सहायता गंभीर मरीजों के लिए काफी नहीं है...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US

📍नई दिल्ली | 21 Jul, 2026, 4:08 PM

Non-Pensioner Ex-Servicemen Cancer Treatment: राज्यसभा में गैर-पेंशनर पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कैंसर इलाज को लेकर सवाल पूछा गया है। डॉ. भीम सिंह ने सरकार से पूछा कि क्या गैर-पेंशनर पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को कैंसर के इलाज के लिए केवल 75 हजार रुपये सालाना की वित्तीय सहायता मिलती है और बढ़ते इलाज खर्च को देखते हुए क्या इसे बढ़ाने की कोई योजना है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या सरकार ऐसे पूर्व सैनिकों के लिए 100 प्रतिशत कैशलेस इलाज की व्यवस्था करने पर विचार कर रही है।

रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 20 जुलाई को राज्यसभा में दिए लिखित जवाब में कहा कि सरकार पहले से ही एक्स-सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS) के जरिए बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। वहीं केंद्रीय सैनिक बोर्ड (KSB) की कैंसर सहायता योजना केवल उन गैर-पेंशनर पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए है, जो ईसीएचएस या किसी अन्य सरकारी स्वास्थ्य योजना के दायरे में नहीं आते।

Non-Pensioner Ex-Servicemen Cancer Treatment: सांसद ने इलाज की बढ़ती लागत का उठाया मुद्दा

डॉ. भीम सिंह ने अपने प्रश्न में कहा कि कैंसर का इलाज लगातार महंगा होता जा रहा है। ऐसे में 75 हजार रुपये की सहायता गंभीर मरीजों के लिए काफी नहीं है। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या सहायता राशि बढ़ाने का प्रस्ताव है और क्या आर्थिक रूप से कमजोर गैर-पेंशनर पूर्व सैनिकों के लिए पूरी तरह कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाएगा।

सरकार ने अपने जवाब में सहायता राशि बढ़ाने या नई कैशलेस व्यवस्था लागू करने की कोई घोषणा नहीं की। मंत्रालय का कहना है कि 2019 के बाद ईसीएचएस का दायरा बढ़ने से अधिकांश गैर-पेंशनर पूर्व सैनिक इस योजना में शामिल हो चुके हैं। इसलिए केएसबी योजना का लाभ लेने वालों की संख्या अब बहुत कम है।

यह भी पढ़ें:  डिफेंस पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत, खत्म हुई CSD कार्ड की सबसे बड़ी परेशानी, अब ऐसे करा सकेंगे रिन्यू

ईसीएचएस से 64 लाख लोगों को मिल रही स्वास्थ्य सुविधा

रक्षा मंत्रालय के अनुसार ईसीएचएस देश के सबसे बड़े पूर्व सैनिक स्वास्थ्य नेटवर्क में से एक है। इस योजना के तहत लगभग 64 लाख लाभार्थियों को चिकित्सा सुविधाएं मिल रही हैं। इनमें पूर्व सैनिकों के साथ उनके पति या पत्नी, बच्चे और अन्य पात्र आश्रित भी शामिल हैं।

यह योजना सैन्य अस्पतालों के अलावा देशभर के सरकारी और निजी सूचीबद्ध अस्पतालों के माध्यम से इलाज की सुविधा देती है। कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों का इलाज भी इसी व्यवस्था के तहत कराया जा सकता है।

2019 में बढ़ाया गया था योजना का दायरा

सरकार ने अपने जवाब में बताया कि साल 2019 में ईसीएचएस का विस्तार किया गया था। इसके बाद कई ऐसी श्रेणियों के पूर्व सैनिकों को भी इसमें शामिल किया गया जो पहले इस सुविधा से बाहर थे।

इनमें प्री-मैच्योर रिटायर पूर्व सैनिक, शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी और कुछ अन्य गैर-पेंशनर श्रेणियां शामिल हैं। ये लोग निर्धारित योगदान जमा करके ईसीएचएस के सदस्य बन सकते हैं।

हालांकि गैर-पेंशनर कैटेगरी में इलाज का लाभ कई मामलों में रिम्बर्समेंट व्यवस्था के तहत मिलता है। यानी पहले मरीज को इलाज का खर्च देना पड़ सकता है और बाद में निर्धारित नियमों के अनुसार राशि वापस मिलती है।

केएसबी की योजना किन लोगों के लिए है

केंद्रीय सैनिक बोर्ड की कैंसर सहायता योजना वर्ष 2006 से चल रही है। यह योजना केवल उन गैर-पेंशनर पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए बनाई गई है, जो ईसीएचएस, आयुष्मान भारत या किसी अन्य सरकारी स्वास्थ्य योजना से जुड़े नहीं हैं।

यह भी पढ़ें:  Underwater Surveillance: रक्षा मंत्रालय और कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स में करार, नौसेना के लिए बनाएगी एडवांस अंडरवाटर सिस्टम

इस योजना के तहत कैंसर के इलाज के लिए अधिकतम 75 हजार रुपये प्रति वर्ष तक की आर्थिक सहायता दी जाती है।

रक्षा मंत्रालय ने राज्यसभा में बताया कि केएसबी के रिकॉर्ड के अनुसार इस योजना का लाभ लेने वाले गैर-पेंशनर पूर्व सैनिकों की संख्या बहुत कम है।

कैंसर इलाज की लागत कई गुना अधिक

देश में कैंसर के इलाज का खर्च बीमारी के प्रकार, अस्पताल और इलाज की तकनीक के आधार पर अलग-अलग होता है।

सामान्य कीमोथेरेपी की एक साइकिल पर ही हजारों से लेकर लाख रुपये तक खर्च हो सकता है। रेडिएशन थेरेपी, सर्जरी, टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी आधुनिक उपचार पद्धतियों में कुल खर्च कई लाख रुपये तक पहुंच जाता है। कई मरीजों का इलाज महीनों या सालों तक चलता है। वहीं, 2006 से चली आ रही 75 हजार रुपये की सहायता राशि वर्तमान चिकित्सा खर्च की तुलना में काफी कम मानी जा रही है।

गैर-पेंशनर पूर्व सैनिकों की अलग स्थिति

गैर-पेंशनर पूर्व सैनिकों में ऐसे लोग शामिल हैं जो विभिन्न कारणों से पेंशन के दायरे में नहीं आते। इनमें कुछ प्री-मैच्योर रिटायर सैनिक और शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी भी शामिल हैं।

2019 में ईसीएचएस का विस्तार होने के बाद इनकी स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई, लेकिन कई मामलों में सदस्यता, दस्तावेजी प्रक्रिया और रिम्बर्समेंट व्यवस्था जैसी चुनौतियां बनी रहती हैं। ऐसे लोगों के लिए केएसबी की सहायता योजना एक अलग विकल्प के रूप में मौजूद है। (Non-Pensioner Ex-Servicemen Cancer Treatment)

Author

  • News Desk

    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

यह भी पढ़ें:  Veterans Achievers Award: लखनऊ में वेटरंस अचीवर्स अवार्ड से सम्मानित हुए रिटायर्ड कर्नल सिद्दीकी और सूबेदार उदय राज सिंह
रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
News Desk
News Desk
रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

Most Popular