📍नई दिल्ली | 3 Jun, 2026, 10:34 PM
S-400 Sudarshan Air Defence System: रूस से भेजा गया चौथा एस-400 ‘सुदर्शन’ एयर डिफेंस सिस्टम भारत पहुंच चुका है। सूत्रों के अनुसार यह सिस्टम कुछ दिन पहले समुद्री मार्ग से भारत आया और जल्द ही इसे ऑपरेशनल क्षेत्र में तैनात किया जाएगा। माना जा रहा है कि इसकी तैनाती पाकिस्तान सीमा से जुड़े पश्चिमी सेक्टर में की जा सकती है, जहां भारतीय वायुसेना अपनी लंबी दूरी की एयर डिफेंस क्षमता को और मजबूत करना चाहती है।
एस-400 को दुनिया के सबसे एडवांस लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस सिस्टम में गिना जाता है। यह लड़ाकू विमान, ड्रोन, क्रूज मिसाइल, बैलिस्टिक मिसाइल और कुछ प्रकार के स्टील्थ टारगेट्स को भी निशाना बना सकता है। भारतीय वायुसेना पहले से ही तीन एस-400 स्क्वाड्रन ऑपरेट कर रही है और अब चौथे सिस्टम के आने से इसकी क्षमता में और बढ़ोतरी होगी।
S-400 Sudarshan Air Defence System: रूस से भारत तक पहुंचा चौथा सिस्टम
सूत्रों के मुताबिक भारतीय वायुसेना की टीम ने रूस में इस सिस्टम का प्री-डिस्पैच इंस्पेक्शन किया था। सभी तकनीकी जांच पूरी होने के बाद इसे भारत रवाना किया गया। यह डिलीवरी पहले हो जानी थी, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते प्रोडक्शन और सप्लाई शेड्यूल पर असर पड़ा, जिससे डिलीवरी में देरी हुई।
भारत और रूस के बीच साल 2018 में एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद का समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत भारत को कुल पांच स्क्वाड्रन मिलने हैं। इनमें से तीन स्क्वाड्रन पहले ही भारत को मिल चुके हैं और अब चौथा सिस्टम भी पहुंच गया है। पांचवें और अंतिम सिस्टम के इस साल के आखिर तक आने की उम्मीद जताई जा रही है।
पाकिस्तान सीमा पर क्यों बढ़ी जरूरत
शुरुआती योजना के अनुसार चौथे एस-400 सिस्टम को चीन से जुड़े उत्तरी सेक्टर में तैनात किया जाना था। हालांकि सुरक्षा हालात और हाल के सैन्य अनुभवों को देखते हुए इसकी संभावित तैनाती पश्चिमी सीमा पर किए जाने की चर्चा है।
रक्षा अधिकारियों का मानना है कि पश्चिमी क्षेत्र में पहले से तैनात दो एस-400 सिस्टम ने मजबूत सुरक्षा कवच तैयार किया है, लेकिन कुछ इलाकों में अतिरिक्त कवरेज की जरूरत महसूस की गई। ऐसे में चौथे सिस्टम को पाकिस्तान सीमा के पास तैनात कर एयर डिफेंस नेटवर्क को और मजबूत किया जा सकता है।
मौजूदा योजना के अनुसार पांच एस-400 सिस्टम में से तीन पाकिस्तान मोर्चे और दो उत्तरी क्षेत्र के लिए हैं। इसके अलावा भारत अतिरिक्त पांच एस-400 सिस्टम खरीदने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ा रहा है, ताकि पूरे देश के लिए व्यापक एयर डिफेंस कवरेज तैयार किया जा सके। (S-400 Sudarshan Air Defence System)
ऑपरेशन सिंदूर में दिखी एस-400 की ताकत
एस-400 की चर्चा विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी। इस ऑपरेशन के दौरान सिस्टम ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एस-400 ने 300 किमी से ज्यादा लंबी दूरी पर पाकिस्तान के एक अवॉक्स को सफलतापूर्वक निशाना बनाया था। यह सतह से हवा में मार करने वाले मिसाइल सिस्टम द्वारा दर्ज की गई सबसे लंबी दूरी की सफल कार्रवाई में से एक मानी जा रही है।
रक्षा अधिकारियों का कहना है कि इस ऑपरेशन के दौरान एस-400 की एक और खूबी सामने आई। यह सिस्टम तेजी से अपनी स्थिति बदल सकता है। सैन्य भाषा में इसे “शूट एंड स्कूट” क्षमता कहा जाता है। यानी मिसाइल दागने के बाद सिस्टम बहुत कम समय में दूसरी जगह पहुंच सकता है, जिससे दुश्मन के जवाबी हमले से बचना आसान हो जाता है।
पाकिस्तान वायुसेना के खिलाफ प्रभाव
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार मई 2025 में हुए संघर्ष के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान वायुसेना की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखा। इसी दौरान एस-400 नेटवर्क ने दुश्मन के विमानों की निगरानी और ट्रैकिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी वायुसेना के एक जेएफ-17 लड़ाकू विमान को पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र के भीतर ही निशाना बनाया था। इसके बाद पाकिस्तान के कई लड़ाकू विमानों को पीछे हटना पड़ा। हालांकि कुछ विमानों ने सीमित समय के लिए एक ऐसे क्षेत्र का उपयोग किया जहां कवरेज अपेक्षाकृत कम थी।
इसी अनुभव के बाद भारतीय रणनीतिकारों ने अतिरिक्त एस-400 सिस्टम की जरूरत पर जोर दिया, ताकि किसी भी संभावित गैप को खत्म किया जा सके। (S-400 Sudarshan Air Defence System)
आखिर क्या है एस-400 सुदर्शन सिस्टम
एस-400 रूस का बनाया एक अत्याधुनिक लंबी दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम है। भारत में इसे सुदर्शन नाम दिया गया है। इसका मुख्य काम दुश्मन के हवाई खतरों को बहुत दूर से पहचानना और उन्हें नष्ट करना है।
यह सिस्टम एक साथ कई टारगेट्स को ट्रैक कर सकता है और अलग-अलग प्रकार की मिसाइलों का इस्तेमाल करके उन्हें निशाना बना सकता है। इसका रडार सिस्टम सैकड़ों किलोमीटर दूर मौजूद टारगेट्स का पता लगाने में सक्षम माना जाता है।
एस-400 लगभग 400 किलोमीटर तक की दूरी पर मौजूद एरियल टारगेट्स को निशाना बना सकता है। इसके अलावा यह बैलिस्टिक मिसाइलों और तेज रफ्तार से उड़ने वाले कुछ हाइपरसोनिक टारगेट्स के खिलाफ भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
एस-400 अपने पूर्ववर्ती एस-300 सिस्टम की तुलना में कहीं अधिक तेज, आधुनिक और प्रभावी है। इसका फायरिंग रेट भी पहले के सिस्टम्स से काफी ज्यादा माना जाता है। (S-400 Sudarshan Air Defence System)
एस-400 में कौन-कौन सी मिसाइलें होती हैं?
एस-400 ट्रायम्फ में अलग-अलग दूरी और अलग-अलग तरह के खतरों के लिए कई प्रकार की मिसाइलें इस्तेमाल की जाती हैं। यही वजह है कि इसे “लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्टम” कहा जाता है।
अगर दुश्मन का विमान बहुत दूर है, तो एस-400 लंबी दूरी वाली मिसाइल इस्तेमाल करेगा। अगर टारगेट करीब है या कोई ड्रोन हमला कर रहा है, तो छोटी दूरी वाली मिसाइल दागी जाएगी। इस तरह यह सिस्टम हर तरह के हवाई खतरे से निपट सकता है।
40N6E: सबसे लंबी दूरी वाली मिसाइल
यह एस-400 की सबसे ताकतवर मिसाइल मानी जाती है। इसकी मारक क्षमता लगभग 400 किलोमीटर तक है। यह दुश्मन के अवाक्स विमान, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर एयरक्राफ्ट, जासूसी विमान और लंबी दूरी के महत्वपूर्ण हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए बनाई गई है।
यह मिसाइल करीब 30 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ रहे टारगेट्स को मार सकती है। इसकी खासियत यह है कि यह बहुत दूर मौजूद लक्ष्य को भी ट्रैक और नष्ट करने में सक्षम है।
48N6DM: मुख्य युद्धक मिसाइल
एस-400 में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली मिसाइल 48N6 सीरीज की मानी जाती है। इसकी रेंज लगभग 200 से 250 किलोमीटर तक होती है।
यह दुश्मन के लड़ाकू विमान, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए इस्तेमाल की जाती है। इसमें शक्तिशाली हाई-एक्सप्लोसिव वारहेड लगा होता है, जो लक्ष्य को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
भारतीय एस-400 सिस्टम में भी इस श्रेणी की मिसाइलें शामिल हैं।
9M96E2: मध्यम दूरी की सटीक मिसाइल
यह मिसाइल लगभग 120 किलोमीटर तक के लक्ष्य को निशाना बना सकती है। इसे खास तौर पर तेजी से दिशा बदलने वाले लड़ाकू विमानों और क्रूज मिसाइलों को मार गिराने के लिए डिजाइन किया गया है।
इसमें एक्टिव रडार होमिंग तकनीक लगी होती है, जिससे यह अंतिम चरण में खुद लक्ष्य को खोजकर हमला कर सकती है। इसकी सटीकता बहुत अधिक मानी जाती है। (S-400 Sudarshan Air Defence System)
9M96E: नजदीकी सुरक्षा के लिए
यह एस-400 की छोटी दूरी वाली मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 40 किलोमीटर तक है।
इसे ड्रोन, प्रिसीजन गाइडेड हथियारों, हेलीकॉप्टरों और नजदीकी हवाई खतरों को रोकने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। जब कोई खतरा एयर डिफेंस सिस्टम के काफी करीब पहुंच जाता है, तब यह मिसाइल सक्रिय भूमिका निभाती है।
कैसे दागी जाती हैं मिसाइलें?
एस-400 में “कोल्ड लॉन्च” तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसका मतलब है कि मिसाइल लॉन्च ट्यूब के अंदर ही इंजन नहीं जलाती।
सबसे पहले गैस जनरेटर मिसाइल को कंटेनर से ऊपर की ओर बाहर निकालता है। मिसाइल लगभग 30 मीटर ऊपर पहुंचने के बाद अपना रॉकेट इंजन चालू करती है और टारगेट की ओर बढ़ जाती है।
इस तकनीक के कई फायदे हैं। लॉन्चर को किसी खास दिशा में घुमाने की जरूरत नहीं पड़ती, लॉन्च ट्यूब सुरक्षित रहती है और सिस्टम बहुत तेजी से दोबारा फायर कर सकता है।
एस-400 के एक लॉन्चर में आमतौर पर चार लॉन्च ट्यूब होती हैं। यदि बड़ी मिसाइलें जैसे 40N6E या 48N6DM लगी हों तो एक ट्यूब में एक मिसाइल रखी जाती है। यानी एक लॉन्चर में कुल चार बड़ी मिसाइलें होंगी।
लेकिन यदि छोटी 9M96E या 9M96E2 मिसाइलें इस्तेमाल की जाएं तो एक ट्यूब में चार-चार मिसाइलें रखी जा सकती हैं। ऐसे में एक लॉन्चर कुल 16 मिसाइलें ले जा सकता है।
वहीं, एक एस-400 बैटरी में आमतौर पर आठ लॉन्चर होते हैं। हर स्क्वाड्रन में 12 लॉन्चर होते हैं। मिसाइलों के प्रकार के अनुसार इसमें 32 से लेकर 128 तक मिसाइलें मौजूद हो सकती हैं। पूरा सिस्टम एक साथ दर्जनों टारगेट्स को ट्रैक कर सकता है और लगभग 36 लक्ष्यों पर एक साथ हमला करने की क्षमता रखता है।
भारत ने रूस से पांच एस-400 स्क्वाड्रन खरीदने का समझौता किया था। इनमें लंबी दूरी वाली 40N6E, 48N6 सीरीज और 9M96 सीरीज की मिसाइलें शामिल हैं।
इन प्रणालियों के साथ शक्तिशाली रडार भी लगे होते हैं, जो लगभग 600 किलोमीटर दूर तक हवाई गतिविधियों का पता लगा सकते हैं। यही कारण है कि एस-400 को भारत की वायु रक्षा प्रणाली का सबसे मजबूत सुरक्षा कवच माना जाता है।
भारतीय एयर डिफेंस नेटवर्क की रीढ़
भारतीय वायुसेना पिछले कुछ वर्षों में मल्टीलेवल एयर डिफेंस नेटवर्क डेवलप कर रही है। इसमें स्वदेशी आकाश मिसाइल सिस्टम, एमआरएसएएम, क्यूआरएसएएम और अन्य कई डिफेंस सिस्टम्स शामिल हैं।
इन सभी के बीच एस-400 को सबसे ऊपरी स्तर का सुरक्षा कवच माना जाता है। इसकी लंबी दूरी की क्षमता इसे दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को काफी पहले पहचानने और नष्ट करने की ताकत देती है।
रक्षा अधिकारियों का मानना है कि एस-400 देश के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों, एयरबेस, औद्योगिक केंद्रों और रणनीतिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। (S-400 Sudarshan Air Defence System)
अतिरिक्त पांच एस-400 खरीदने की तैयारी
रक्षा मंत्रालय पहले ही अतिरिक्त पांच एस-400 स्क्वाड्रन खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे चुका है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सिस्टम के प्रदर्शन के बाद इस आवश्यकता को और मजबूती मिली।
यदि यह योजना आगे बढ़ती है तो भारत के पास कुल 10 एस-400 स्क्वाड्रन हो सकते हैं। इससे देश के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों को एयर डिफेंस सुरक्षा कवच के दायरे में लाना आसान होगा। (S-400 Sudarshan Air Defence System)
स्वदेशी विकल्प पर भी काम जारी
रूस से एस-400 की खरीद के साथ-साथ भारत अपना स्वदेशी लंबी दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम भी डेवलप कर रहा है। इस परियोजना को “प्रोजेक्ट कुशा” नाम दिया गया है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसा स्वदेशी सिस्टम तैयार करना है जो लंबी दूरी पर दुश्मन के विमान, ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम हो। इस परियोजना में कई भारतीय रक्षा कंपनियां और अनुसंधान संस्थान शामिल हैं।
रक्षा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी सोलर इंडस्ट्रीज भी इस कार्यक्रम में विकास एवं उत्पादन भागीदार के रूप में जुड़ी हुई है। प्रोजेक्ट कुशा को भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। (S-400 Sudarshan Air Defence System)

