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भारतीय वायुसेना की सबसे मुश्किल रेटिंग हासिल करने वाली पहली महिला पायलट बनीं स्क्वाड्रन लीडर सान्या

स्क्वाड्रन लीडर सान्या 20 जून 2015 को भारतीय वायु सेना में शामिल हुई थीं। उन्होंने 42 एसएससी (डब्ल्यू) फ्लाइंग पायलट कोर्स के जरिए कमीशन हासिल किया था...

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📍नई दिल्ली | 18 May, 2026, 6:24 PM

Sqn Ldr Saanya Cat-A QFI: भारतीय वायुसेना में स्क्वाड्रन लीडर सान्या पहली महिला अधिकारी बन गई हैं, जिन्हें कैटेगरी-ए क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर यानी कैट-ए क्यूएफआई रेटिंग मिली है। यह वायु सेना में फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स को दी जाने वाली सबसे ऊंची इंस्ट्रक्शनल क्वालिफिकेशन मानी जाती है।

भारतीय वायु सेना ने इस उपलब्धि की आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए कहा कि स्क्वाड्रन लीडर सान्या ने अपने समर्पण, मेहनत और प्रोफेशनल स्किल्स के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भी उन्हें सम्मानित किया।

यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि अब महिलाएं केवल फाइटर जेट उड़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के पायलटों को ट्रेन करने की भूमिका भी निभा रही हैं।

Sqn Ldr Saanya Cat-A QFI: 2015 में वायुसेना में हुई थीं शामिल

स्क्वाड्रन लीडर सान्या 20 जून 2015 को भारतीय वायु सेना में शामिल हुई थीं। उन्होंने 42 एसएससी (डब्ल्यू) फ्लाइंग पायलट कोर्स के जरिए कमीशन हासिल किया था।

वायुसेना में शामिल होने के बाद उन्होंने लगातार अलग-अलग चरणों की ट्रेनिंग और ऑपरेशनल जिम्मेदारियां निभाईं। जून 2017 में उन्हें फ्लाइट लेफ्टिनेंट बनाया गया और जून 2021 में वह स्क्वाड्रन लीडर बनीं।

वायुसेना की पॉलिसी के तहत सर्विंग अफसरों की निजी जानकारी सार्वजनिक तौर पर ज्यादा साझा नहीं की जाती है, लेकिन उनकी इस उपलब्धि ने उन्हें भारतीय वायु सेना की अग्रणी महिला अधिकारियों की सूची में शामिल कर दिया है।

क्या होता है कैट-ए क्यूएफआई

भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स के लिए अलग-अलग ग्रेडिंग सिस्टम होता है। इसे मुख्य रूप से कैट-सी, कैट-बी और कैट-ए में बांटा गया है।

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कैट-सी शुरुआती स्तर की इंस्ट्रक्टर रेटिंग मानी जाती है। इसमें पायलट बेसिक इंस्ट्रक्शनल स्किल्स सीखते हैं।

इसके बाद कैट-बी रेटिंग आती है। इसमें इंस्ट्रक्टर ज्यादा अनुभवी माने जाते हैं और उन्हें बेहतर ट्रेनिंग क्षमता के आधार पर आंका जाता है।

सबसे ऊपर कैट-ए रेटिंग होती है। यह केवल उन्हीं पायलटों को दी जाती है, जो फ्लाइंग स्किल, ट्रेनिंग क्षमता, प्रोफेशनल नॉलेज और लीडरशिप में बेहद उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं।

कैट-ए क्यूएफआई बनने वाले अधिकारी नए और अनुभवी दोनों तरह के पायलटों को ट्रेन करते हैं। उन्हें वायु सेना के सबसे कुशल इंस्ट्रक्टर्स में गिना जाता है।

सूत्रों के मुताबिक यह केवल एक बैज नहीं, बल्कि वायु सेना के अंदर सबसे ऊंची इंस्ट्रक्शनल पहचान मानी जाती है।

बेहद कठिन होती है ट्रेनिंग

कैट-ए रेटिंग हासिल करना आसान नहीं होता। इसके लिए फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स स्कूल यानी एफआईएस में लंबी और कठिन ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है।

यह ट्रेनिंग करीब 22 हफ्तों तक चलती है। इसमें 10 अलग-अलग चरणों की फ्लाइंग ट्रेनिंग और 200 घंटे से ज्यादा ग्राउंड ट्रेनिंग शामिल होती है।

इस दौरान पायलटों को केवल विमान उड़ाना ही नहीं सिखाया जाता, बल्कि यह भी सिखाया जाता है कि वे दूसरे पायलटों को किस तरह ट्रेन करें।

ट्रेनिंग में इमरजेंसी हैंडलिंग, एविएशन सेफ्टी, एयर कॉम्बैट, इंस्ट्रक्शनल टेक्नीक और अलग-अलग तरह की उड़ान परिस्थितियों से निपटने का अभ्यास कराया जाता है।

उम्मीदवारों की लगातार जांच होती रहती है। केवल वही अधिकारी आगे बढ़ पाते हैं जो हर स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

चेन्नई के पास है फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स स्कूल

भारतीय वायु सेना का फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स स्कूल तमिलनाडु के तांबरम एयर फोर्स स्टेशन पर स्थित है। यह चेन्नई के पास है।

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इस संस्थान की स्थापना 1 अप्रैल 1948 को अंबाला में हुई थी। बाद में 1954 में इसे तांबरम शिफ्ट कर दिया गया। एफआईएस का मोटो है- “विद्या दानेन वर्धते”, यानी ज्ञान बांटने से बढ़ता है।

यह संस्थान पिछले 75 साल से ज्यादा समय से वायु सेना के पायलटों को इंस्ट्रक्टर के रूप में तैयार कर रहा है।
यहां केवल भारतीय वायु सेना के पायलट ही नहीं, बल्कि थल सेना, नौसेना, पैरामिलिट्री फोर्स और मित्र देशों के पायलट भी ट्रेनिंग लेते हैं।

एफआईएस से निकले इंस्ट्रक्टर्स आगे चलकर देश के नए एयर वॉरियर्स को तैयार करते हैं।

फाइटर स्ट्रीम में महिलाओं की एंट्री

भारतीय वायु सेना में पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं की भूमिका तेजी से बढ़ी है। फाइटर स्ट्रीम में महिलाओं की एंट्री के बाद कई महिला अधिकारी लगातार नए रिकॉर्ड बना रही हैं।

अक्टूबर 2025 में राफेल फाइटर पायलट स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह पहली महिला फाइटर पायलट बनी थीं जिन्हें 159 बैच में क्यूएफआई बैज मिला था।

अब स्क्वाड्रन लीडर सान्या पहली महिला अधिकारी बन गई हैं, जिन्होंने कैट-ए लेवल हासिल किया है।

इससे पहले हरिता कौर देओल पहली महिला पायलट बनी थीं, जिन्होंने सोलो उड़ान भरी थी। इसके बाद अवनी चतुर्वेदी, भावना कांत और मोहना सिंह जैसी महिला अधिकारियों ने फाइटर पायलट बनकर इतिहास रचा।

कैसे तैयार किए जाते हैं नए पायलट

क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स की जिम्मेदारी बेहद अहम होती है। ये अधिकारी शुरुआती स्तर के पायलटों को बेसिक फ्लाइंग सिखाते हैं। इसके बाद एडवांस फ्लाइंग, एयर कॉम्बैट और ऑपरेशनल मिशन की ट्रेनिंग भी देते हैं।

पायलटों को उड़ान के दौरान छोटी-छोटी गलतियों से बचाने, इमरजेंसी स्थिति संभालने और एयरक्राफ्ट सिस्टम्स को समझाने में इंस्ट्रक्टर्स की बड़ी भूमिका होती है।

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कैट-ए इंस्ट्रक्टर्स को अक्सर सबसे कठिन ट्रेनिंग जिम्मेदारियां दी जाती हैं। वे दूसरे इंस्ट्रक्टर्स का मूल्यांकन भी करते हैं।

ट्रेनिंग के दौरान होता है भारी दबाव

एफआईएस में ट्रेनिंग को भारतीय मिलिट्री एविएशन की सबसे कठिन ट्रेनिंग में गिना जाता है। पायलटों को लगातार फ्लाइंग टेस्ट, क्लासरूम सेशन और इंस्ट्रक्शनल असेसमेंट से गुजरना पड़ता है।

उन्हें यह साबित करना होता है कि वे केवल अच्छे पायलट ही नहीं, बल्कि अच्छे शिक्षक भी हैं। कई बार ट्रेनिंग के दौरान हाई-प्रेशर फ्लाइंग, सटीक एयरक्राफ्ट कंट्रोल और तेजी से फैसले लेने की क्षमता की जांच की जाती है। इसी वजह से हर कोर्स में शामिल होने वाले सभी अधिकारी कैट-ए स्तर तक नहीं पहुंच पाते।

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