📍नई दिल्ली | 18 May, 2026, 5:47 PM
GE Aerospace Pune Investment: अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी जीई एयरोस्पेस ने पुणे स्थित अपनी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में 100 करोड़ रुपये का नया निवेश करने का एलान किया है। इस निवेश के जरिए कंपनी भारत में अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नई तकनीक जोड़ने और ग्लोबल सप्लाई चेन को मजबूत करने पर काम करेगी।
जीई एयरोस्पेस का कहना है कि यह निवेश केवल एक फैक्ट्री का विस्तार नहीं है, बल्कि भारत को ग्लोबल एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। पिछले तीन सालों में कंपनी पुणे फैसिलिटी में कुल 510 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश कर चुकी है। इससे पहले दो वर्षों में कंपनी 410 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा कर चुकी थी।
GE Aerospace Pune Investment: पुणे फैसिलिटी में लगेंगी नई तकनीकें
कंपनी के मुताबिक नए निवेश के तहत एडवांस वेल्डिंग टेक्नोलॉजी, हाई-प्रिसिजन इंस्पेक्शन इक्विपमेंट, नए टूल्स, गेज, फिक्स्चर और दूसरी आधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी। इसके साथ ही फैक्ट्री के इंफ्रास्ट्रक्चर को भी अपग्रेड किया जाएगा ताकि उत्पादन क्षमता बढ़ सके और एयरक्राफ्ट इंजन के पार्ट्स ज्यादा सटीक तरीके से बनाए जा सकें।
जीई एयरोस्पेस ने बताया कि इन नई सुविधाओं का इस्तेमाल दुनिया भर के ग्राहकों के लिए हाई-क्वालिटी एयरोस्पेस कंपोनेंट्स तैयार करने में किया जाएगा। कंपनी का फोकस ऐसे सिस्टम्स पर है जो अगली पीढ़ी के विमान इंजनों के लिए जरूरी हैं।
किन इंजन प्रोग्राम्स के लिए बनेंगे पार्ट्स
पुणे प्लांट में बनने वाले पार्ट्स का इस्तेमाल जीई एयरोस्पेस के कई बड़े इंजन प्रोग्राम्स में किया जाएगा। इनमें जीई90, जीईएनएक्स, जीई9एक्स और सीएफएम इंटरनेशनल के लीप इंजन शामिल हैं।
जीई90 इंजन दुनिया के बड़े कमर्शियल विमानों में इस्तेमाल होता है। वहीं जीईएनएक्स इंजन बोइंग 787 ड्रीमलाइनर और बोइंग 747-8 जैसे विमानों में लगाया जाता है। जीई9एक्स को दुनिया के सबसे ताकतवर जेट इंजनों में गिना जाता है, जिसका इस्तेमाल बोइंग 777एक्स विमान में होना है।
लीप इंजन आज की नई पीढ़ी के सिंगल-आइल कमर्शियल विमानों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। एयरबस ए320 नियो और बोइंग 737 मैक्स जैसे विमानों में यह इंजन बड़ी संख्या में लगाए जा रहे हैं।
जीई एयरोस्पेस का कहना है कि भारत उसके लिए लंबे समय की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल है। कंपनी के पुणे प्लांट के मैनेजिंग डायरेक्टर विश्वजीत सिंह ने कहा कि यह निवेश भारत के प्रति कंपनी की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दिखाता है।
उन्होंने कहा कि पुणे फैसिलिटी अब जीई एयरोस्पेस के ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क का अहम हिस्सा बन चुकी है। पिछले दस वर्षों में यह प्लांट एक हाई-कैपेबिलिटी एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित हुआ है।
विश्वजीत सिंह के मुताबिक इस विस्तार से न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि अप्रेंटिसशिप और रोजगार के नए मौके भी पैदा होंगे। इसका फायदा कंपनी के सप्लायर नेटवर्क को भी मिलेगा।
300 से ज्यादा भारतीय सप्लायर्स जुड़े
पुणे स्थित यह प्लांट भारत के बड़े एयरोस्पेस सप्लाई नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। कंपनी ने बताया कि वह देशभर में 2200 से ज्यादा सप्लायर्स के साथ काम कर रही है। इनमें से 300 से ज्यादा सप्लायर्स सीधे पुणे फैसिलिटी से जुड़े हैं।
इन सप्लायर्स के जरिए भारत में प्रिसीजन इंजीनियरिंग, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग और एयरोस्पेस कंपोनेंट्स का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। रक्षा और एयरोस्पेस सेक्टर के विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारतीय कंपनियों को ग्लोबल क्वालिटी स्टैंडर्ड्स के हिसाब से काम करने का मौका मिल रहा है।
भारत बन रहा है एयरोस्पेस हब
पिछले कुछ सालों में भारत तेजी से एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। सरकार “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियान के तहत विदेशी कंपनियों को भारत में उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
कम लागत, कुशल इंजीनियरिंग वर्कफोर्स और बढ़ते एविएशन मार्केट की वजह से कई ग्लोबल कंपनियां भारत में निवेश बढ़ा रही हैं। जीई एयरोस्पेस भी इसी रणनीति के तहत भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत कर रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एयरोस्पेस सेक्टर में किसी भी कंपोनेंट को तैयार करने के लिए बेहद सटीक इंजीनियरिंग और गुणवत्ता नियंत्रण की जरूरत होती है। ऐसे में पुणे जैसी फैसिलिटीज भारत की तकनीकी क्षमता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
केवल मैन्युफैक्चरिंग नहीं, इंजीनियरिंग पर भी फोकस
जीई एयरोस्पेस केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। कंपनी भारत में इंजीनियरिंग, रिसर्च और सप्लाई चेन डेवलपमेंट पर भी लगातार निवेश कर रही है।
कंपनी का कहना है कि भारत अब केवल लो-कॉस्ट प्रोडक्शन सेंटर नहीं रहा, बल्कि एडवांस इंजीनियरिंग और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र बन रहा है।
रक्षा और एविएशन सेक्टर से जुड़े जानकारों के मुताबिक ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। खासतौर पर विमान इंजन और एयरोस्पेस कंपोनेंट्स जैसे हाई-टेक सेक्टर में भारतीय उद्योगों की भागीदारी पहले के मुकाबले काफी ज्यादा बढ़ी है।

