📍नई दिल्ली | 12 May, 2026, 3:38 PM
Defence Ministry Compassionate Job Rules 2026: रक्षा मंत्रालय ने सेना, नौसेना, वायुसेना, डीआरडीओ और रक्षा मंत्रालय के दूसरे संगठनों में कंपैशनेट अपॉइंटमेंट यानी अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। मंत्रालय ने नया ऑफिस मेमोरेंडम जारी करते हुए “रिलेटिव मेरिट पॉइंट सिस्टम” को संशोधित कर दिया है। अब किसी कर्मचारी की मौत या मेडिकल आधार पर सेवा समाप्त होने के बाद उसके परिवार को नौकरी देने का फैसला पूरी तरह 100 पॉइंट मेरिट सिस्टम के आधार पर होगा।
रक्षा मंत्रालय का यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है। मंत्रालय ने साफ कहा है कि अब हर आवेदन को तय पैरामीटर्स के हिसाब से नंबर दिए जाएंगे और सबसे ज्यादा जरूरतमंद परिवार को प्राथमिकता मिलेगी।
यह बदलाव ऐसे समय में किया गया है जब लंबे समय से कंपैशनेट अपॉइंटमेंट में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कई परिवारों का आरोप था कि असली जरूरतमंद लोग पीछे रह जाते हैं जबकि बेहतर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों को नौकरी मिल जाती है। इसी वजह से अब पूरी प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित और डेटा बेस्ड बनाया गया है।
Defence Ministry Compassionate Job Rules 2026: क्या है कंपैशनेट अपॉइंटमेंट
सरकारी नौकरी के दौरान अगर किसी कर्मचारी की अचानक मौत हो जाती है या फिर गंभीर बीमारी अथवा मेडिकल कारणों से उसे समय से पहले नौकरी छोड़नी पड़ती है, तो उसके परिवार की आमदनी अचानक रुक जाती है।
डिफेंस फोर्सेस में यह समस्या और गंभीर मानी जाती है क्योंकि कई बार कर्मचारी की उम्र कम होती है और परिवार पूरी तरह उसी की कमाई पर निर्भर होता है। बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च, शादी, इलाज और बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी एक साथ परिवार पर आ जाती है।
इसी स्थिति में सरकार परिवार के एक सदस्य को नौकरी देकर आर्थिक सहारा देने की कोशिश करती है। इसे ही कंपैशनेट अपॉइंटमेंट कहा जाता है।
लेकिन नौकरी की सीटें सीमित होती हैं और आवेदन हजारों आते हैं। ऐसे में यह तय करना मुश्किल होता है कि सबसे ज्यादा जरूरत किस परिवार को है। इसी वजह से रक्षा मंत्रालय ने कुछ समय पहले 100 पॉइंट का मेरिट सिस्टम बनाया था, जिसे अब और ज्यादा विस्तृत और सख्त बनाया गया है।
नए सिस्टम में कैसे तय होंगे नंबर
रक्षा मंत्रालय ने परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को आठ बड़े हिस्सों में बांटा है। हर हिस्से के लिए अलग-अलग पॉइंट तय किए गए हैं।
सबसे ज्यादा 20 पॉइंट फैमिली पेंशन के लिए रखे गए हैं। यानी अगर परिवार को कम पेंशन मिल रही है तो उसे ज्यादा नंबर मिलेंगे। मंत्रालय का मानना है कि कम पेंशन वाला परिवार ज्यादा आर्थिक संकट में होगा।
वहीं, अगर किसी परिवार को 9 हजार रुपये तक पेंशन मिल रही है तो उसे पूरे 20 पॉइंट मिलेंगे। जैसे-जैसे पेंशन बढ़ेगी, पॉइंट कम होते जाएंगे। 31,500 रुपये से ज्यादा पेंशन होने पर कोई पॉइंट नहीं मिलेगा।
एकमुश्त रकम भी बनेगी बड़ा फैक्टर
किसी कर्मचारी की मौत के बाद परिवार को ग्रेच्युटी, जीपीएफ, लीव इनकैशमेंट, बीमा और दूसरी रकम मिलती है। मंत्रालय ने इसे भी बड़ा फैक्टर माना है।
अगर परिवार को 10 लाख रुपये तक की रकम मिली है, तो उसे पूरे 10 पॉइंट दिए जाएंगे। वहीं ज्यादा रकम मिलने पर पॉइंट घटते जाएंगे।
मंत्रालय का मानना है कि ज्यादा एकमुश्त राशि मिलने वाले परिवार की आर्थिक स्थिति कुछ हद तक बेहतर मानी जा सकती है, इसलिए कम रकम पाने वाले परिवार को प्राथमिकता दी जाएगी।
अब प्रॉपर्टी और दूसरी आमदनी भी छिपाना मुश्किल
नए नियमों में परिवार की दूसरी आय और संपत्ति को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। अगर परिवार के पास जमीन, दुकान, मकान, बैंक बैलेंस या दूसरी संपत्ति है, तो उसका मूल्यांकन किया जाएगा।
इसके अलावा परिवार में दूसरे कमाने वाले सदस्यों की आय भी देखी जाएगी। अगर परिवार के पास कोई दूसरी आमदनी नहीं है तो उसे ज्यादा पॉइंट मिलेंगे। मंत्रालय का कहना है कि इससे वास्तविक आर्थिक स्थिति का बेहतर आकलन हो सकेगा।
बेटियों और छोटे बच्चों को किया शामिल
इस बार रक्षा मंत्रालय ने परिवार की जिम्मेदारियों को बहुत अहम माना है। अगर परिवार में अविवाहित बेटियां हैं तो उसके हिसाब से अलग पॉइंट दिए जाएंगे। तीन या उससे ज्यादा अविवाहित बेटियां होने पर परिवार को 15 पॉइंट तक मिल सकते हैं।
इसी तरह छोटे बच्चों की संख्या के लिए भी 15 पॉइंट तय किए गए हैं।
रक्षा मंत्रालय का मानना है कि जिन परिवारों में छोटे बच्चे और बेटियां ज्यादा हैं, वहां आर्थिक और सामाजिक दबाव ज्यादा होता है। इसलिए ऐसे परिवारों को नौकरी में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
अगर कम उम्र में हुई कर्मचारी की मौत…
नए सिस्टम में “लेफ्ट ओवर सर्विस” को भी शामिल किया गया है। यह देखा जाएगा कि कर्मचारी की नौकरी में कितने साल बाकी थे। अगर कर्मचारी की मौत तब हुई जब उसकी नौकरी में 20 साल या उससे ज्यादा समय बाकी था, तो परिवार को पूरे 10 पॉइंट मिलेंगे।
मंत्रालय का मानना है कि कम उम्र में कर्मचारी की मौत होने पर परिवार पर ज्यादा आर्थिक बोझ पड़ता है क्योंकि बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की जिम्मेदारियां बाकी होती हैं।
विधवा और अनाथ बच्चों के लिए विशेष राहत
नए नियमों में कुछ मामलों को “स्पेशल केस” माना गया है। अगर कर्मचारी और उसकी पत्नी दोनों की मौत हो चुकी है और बच्चे पूरी तरह अनाथ हो गए हैं, तो ऐसे मामलों में 20 अतिरिक्त ग्रेस पॉइंट मिलेंगे।
अगर मृत कर्मचारी की पत्नी खुद नौकरी के लिए आवेदन करती है तो उसे 15 अतिरिक्त पॉइंट दिए जाएंगे। वहीं अगर परिवार में कोई सदस्य दिव्यांग है तो अलग से अतिरिक्त पॉइंट मिलेंगे।
देर से आवेदन करने वालों को भी राहत
पहले कई परिवार समय पर आवेदन नहीं कर पाते थे। कई बार परिवार को नियमों की जानकारी ही नहीं होती थी।
अब मंत्रालय ने ऐसे मामलों के लिए भी अलग पॉइंट सिस्टम बनाया है।
अगर मौत के दो साल के भीतर आवेदन किया गया है तो 10 पॉइंट मिलेंगे। दो से तीन साल के बीच आवेदन करने पर सात पॉइंट और पांच साल बाद आवेदन करने पर भी तीन पॉइंट दिए जाएंगे।
इसे बड़ी राहत माना जा रहा है क्योंकि पहले देरी होने पर परिवार की स्थिति कमजोर हो जाती थी।
बराबर नंबर होने पर कैसे होगा फैसला
रक्षा मंत्रालय ने बराबर स्कोर वाले मामलों के लिए भी साफ नियम बना दिए हैं। अगर दो परिवारों के पॉइंट बराबर हैं तो सबसे पहले प्रति सदस्य उपलब्ध आय देखी जाएगी। यानी परिवार की कुल आय को आश्रितों की संख्या से बांटा जाएगा। जिस परिवार की प्रति सदस्य आय कम होगी, उसे प्राथमिकता मिलेगी।
अगर इसके बाद भी मामला बराबर रहता है तो कर्मचारी की बची हुई सेवा, दिव्यांग सदस्य, अविवाहित बेटियां और आवेदक की उम्र को देखा जाएगा। बड़ी उम्र वाले आवेदक को प्राथमिकता दी जाएगी।
पुराने मामलों के लिए भी अलग व्यवस्था
रक्षा मंत्रालय ने यह भी माना कि पुराने मामलों में पेंशन और टर्मिनल बेनिफिट आज की तुलना में बहुत कम थे। इसी वजह से प्री-2006 और प्री-2016 मामलों के लिए अलग पेंशन स्लैब और पॉइंट सिस्टम बनाया गया है ताकि पुराने परिवारों के साथ अन्याय न हो।
सेना, नौसेना, वायुसेना और डीआरडीओ सब पर लागू होंगे नियम
यह नया सिस्टम केवल सेना तक सीमित नहीं है। रक्षा मंत्रालय ने इसे आर्मी मुख्यालय, नेवल मुख्यालय, एयर मुख्यालय, डीआरडीओ, कोस्ट गार्ड, डीजीक्यूए और रक्षा मंत्रालय के बाकी संगठनों पर भी लागू किया है। अब रक्षा मंत्रालय से जुड़े हर कर्मचारी के परिवार के लिए यही नया नियम लागू होगा।
पुराने मामलों को दोबारा नहीं खोला जाएगा
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जिन मामलों पर पहले ही बोर्ड ऑफ ऑफिसर्स फैसला ले चुका है, उन्हें दोबारा नहीं खोला जाएगा। हालांकि जो मामले अभी प्रक्रिया में हैं या नए आवेदन आएंगे, उन पर यही नया सिस्टम लागू होगा। (Defence Ministry Compassionate Job Rules 2026)
Defence Ministry Revises Compassionate Appointment Rules, New 100-Point Merit System to Prioritise Needy Families.
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।


