📍नई दिल्ली | 17 Apr, 2026, 10:37 PM
Indigenous Combat Free Fall Parachute System: आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत भारतीय सेना के एक अधिकारी ने स्पेशल फोर्सेस के लिए पूरी तरह स्वदेशी कॉम्बैट फ्री फॉल पैराशूट सिस्टम तैयार किया है। इस सिस्टम को “हंस” नाम दिया गया है और इसे हाई एल्टीट्यूड यानी ऊंचाई से होने वाले गुप्त ऑपरेशनों के लिए डिजाइन किया गया है।
Indigenous Combat Free Fall Parachute System: क्या है कॉम्बैट फ्री फॉल सिस्टम
मिलिट्री ऑपरेशनों में पैराशूट का इस्तेमाल बहुत पुराना है, लेकिन आज भी इसकी अहमियत बनी हुई है। खास तौर पर स्पेशल फोर्सेस के जवानों को दुश्मन के इलाके में चुपचाप उतारने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।
अब तक सैनिकों को पैराशूट और अपने सामान के लिए अलग-अलग सिस्टम पर निर्भर रहना पड़ता था। इसके अलावा कई जरूरी उपकरणों के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भरता बनी रहती थी। इसी कमी को दूर करने के लिए नया सिस्टम तैयार किया गया है।
इस सिस्टम को भारतीय सेना के स्पेशल फोर्सेस अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल अनुज चंद्र श्रीवास्तव ने तैयार किया है। उन्हें डिफेंस इनोवेशन के क्षेत्र में एक खास पहचान मिली है।
उन्होंने पहले डीआरडीओ की लैब में भी काम किया है और स्वदेशी रिसर्च पर लगातार फोकस रखा है। उनके नाम कई पेटेंट भी दर्ज हैं। (Indigenous Combat Free Fall Parachute System)
‘हंस’ सिस्टम की खासियत
इस नए मिलिट्री कॉम्बैट पैराशूट सिस्टम (MCPS) को एक इंटीग्रेटेड सिस्टम के तौर पर तैयार किया गया है। इसमें पैराशूट के साथ-साथ ऑपरेशन से जुड़े कई जरूरी उपकरण एक साथ शामिल किए गए हैं।
इस सिस्टम में हाई एल्टीट्यूड ऑपरेशन के लिए खास ऑक्सीजन सिस्टम, नेविगेशन सिस्टम और मल्टी लेयर कपड़े दिए गए हैं, जिससे जवान बेहद ठंड और मुश्किल हालात में भी काम कर सकें।
इसके अलावा इसमें बुलेटप्रूफ हेलमेट, प्रोटेक्टिव गॉगल्स और टैक्टिकल बैग भी शामिल हैं, जिससे ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा और सुविधा दोनों मिलती हैं। (Indigenous Combat Free Fall Parachute System)
अलग-अलग किट्स से लैस सिस्टम
इस पैराशूट सिस्टम में कई तरह की किट्स जोड़ी गई हैं। इसमें किट शशि नाम का हल्का बुलेटप्रूफ हेलमेट दिया गया है, जो कॉम्बैट फ्री फॉल ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया है।
अदिति गॉगल्स जवानों की आंखों को सुरक्षित रखते हैं, जबकि पीबीओएस (पैराशूट ब्रीदिंग ऑक्सीजन सिस्टम) ऊंचाई पर सांस लेने में मदद करता है।
इसके साथ ही नाविक (NAVIC) आधारित नेविगेशन सिस्टम भी दिया गया है, जिससे जवान सही लोकेशन पर उतर सकें। इसके अलावा किट वार्तिका के जरिए जरूरी सामान को आसानी से साथ ले जाया जा सकता है। (Indigenous Combat Free Fall Parachute System)
200 से ज्यादा सफल परीक्षण
इस सिस्टम को तैयार करने के बाद इसके 200 से ज्यादा लाइव ट्रायल किए गए हैं। इन सभी परीक्षणों में यह सिस्टम सफल रहा है और जरूरी सर्टिफिकेशन भी हासिल कर चुका है।
इन ट्रायल्स के दौरान अलग-अलग हालात में इसकी जांच की गई, ताकि ऑपरेशन के दौरान किसी तरह की परेशानी न आए।
लेफ्टिनेंट कर्नल अनुज चंद्र श्रीवास्तव ने इस पैराशूट सिस्टम के अलावा उन्होंने कई अन्य उपकरण भी डेवलप किए हैं। इनमें किट आदी भी है, जो ऊंचाई का पता लगाने और सुरक्षित जंप में मदद करता है। (Indigenous Combat Free Fall Parachute System)
इसके साथ ही किट शाम्भवी भी तैयार किया गया है, जो आपदा राहत कार्यों में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह पुराने पैराशूट मटेरियल से बनाया गया है।
इस नए सिस्टम के आने से स्पेशल फोर्सेस के ऑपरेशन में आसानी होती है। अब जवानों को अलग-अलग उपकरणों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और सभी जरूरी चीजें एक ही सिस्टम में मिल जाएंगी।
इससे ऑपरेशन के दौरान तेजी और सटीकता दोनों में सुधार होता है, खासकर तब जब जवानों को दुश्मन के इलाके में गुपचुप तरीके से उतरना होता है। (Indigenous Combat Free Fall Parachute System)


