📍नई दिल्ली | 18 Apr, 2026, 10:53 AM
India Iranian oil yuan payment: भारत की तेल रिफाइनरी कंपनियों ने हाल ही में ईरान से कच्चा तेल खरीदा और इसके लिए भुगतान अमेरिकी डॉलर की बजाय चीनी मुद्रा युआन में किया गया। यह खरीद तब हुई, जब अमेरिका ने कुछ समय के लिए अपने प्रतिबंधों में ढील दी थी। इस सीमित अवधि का इस्तेमाल करते हुए भारतीय कंपनियों ने तेल की सप्लाई सुनिश्चित करने की कोशिश की।
अमेरिका ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल की कीमतों में तेजी को देखते हुए कुछ समय के लिए प्रतिबंधों में राहत दी थी। यह राहत लगभग 30 दिन की थी और इसका उद्देश्य बाजार में सप्लाई को बनाए रखना था। इसी दौरान भारत की सरकारी और निजी रिफाइनरी कंपनियों ने ईरान और रूस से तेल खरीदने का फैसला किया।
India Iranian oil yuan payment: डॉलर की जगह युआन में भुगतान
आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार में अमेरिकी डॉलर का इस्तेमाल होता है, लेकिन ईरान पर लगे प्रतिबंधों के चलते यह संभव नहीं था। ऐसे में ईरान ने भुगतान के लिए चीनी युआन को प्राथमिकता दी। इसी वजह से भारतीय कंपनियों को भी भुगतान का तरीका बदलना पड़ा।
इस प्रक्रिया में आईसीआईसीआई बैंक की शंघाई शाखा का इस्तेमाल किया गया, जिसके जरिए युआन में पैसे ट्रांसफर किए गए। यह तरीका इसलिए चुना गया क्योंकि चीन में बैंकिंग चैनल के जरिए यह लेन-देन करना आसान था।
सूत्रों के मुताबिक, देश की सबसे बड़ी रिफाइनरी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने करीब 20 लाख बैरल ईरानी कच्चा तेल खरीदा। इसके अलावा निजी क्षेत्र की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी कुछ खेप मंगाई। यह पिछले कई सालों में पहली बार है जब भारत ने ईरान से फिर से तेल खरीदा है।
लेकिन इस बार भुगतान का तरीका भी सामान्य से अलग रहा। बताया जा रहा है कि तेल की कीमत का बड़ा हिस्सा उस समय ही चुका दिया गया जब तेल लेकर जहाज भारतीय समुद्री क्षेत्र में पहुंचा। आम तौर पर भुगतान डिलीवरी के बाद किया जाता है, लेकिन इस बार शर्तें अलग थीं।
पहले भी बदला है भुगतान का तरीका
हालांकि भारत पहले भी प्रतिबंधों के चलते भुगतान के अलग-अलग तरीके अपनाता रहा है। रूस से तेल खरीद के दौरान रुपये और यूएई दिरहम का इस्तेमाल किया गया था। कुछ मामलों में युआन में भी भुगतान किया गया था।
हाल के वर्षों में यह देखा गया है कि जब डॉलर में भुगतान करना मुश्किल होता है, तब कंपनियां वैकल्पिक मुद्राओं का इस्तेमाल करती हैं। इसका मकसद सप्लाई को बनाए रखना होता है।
ईरान लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। इन प्रतिबंधों के कारण उसे अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम तक सीधी पहुंच नहीं मिलती। इसी वजह से वह तेल बेचने के लिए युआन में भुगतान या अन्य देशों के जरिए व्यापार जैसे वैकल्पिक रास्ते अपनाता है, ।
2019 के बाद भारत ने ईरान से तेल खरीद लगभग बंद कर दी थी। उस समय अमेरिका का दबाव काफी ज्यादा था और भारतीय कंपनियों को खरीद रोकनी पड़ी थी।
भारत की जरूरत और रणनीति
भारत दुनिया के बड़े तेल आयात करने वाले देशों में शामिल है और उसे अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार कच्चे तेल की सप्लाई चाहिए होती है। ऐसे में जब भी अंतरराष्ट्रीय हालात बदलते हैं, कंपनियां उसी हिसाब से अपने विकल्प तलाशती हैं।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि तेल मार्केटिंग कंपनियां घरेलू मांग को पूरा करने के लिए जरूरी कदम उठा रही हैं और सभी फैसले सरकारी नियमों के तहत ही लिए जा रहे हैं।
समुद्र में पहले से मौजूद तेल का इस्तेमाल
इस बार जो तेल खरीदा गया, वह पहले से समुद्र में मौजूद था। यानी जहाजों में लदा हुआ तेल खरीदा गया, जिसे सीधे भारत लाया गया। इस तरह की खरीद को जल्दी सप्लाई सुनिश्चित करने का तरीका माना जाता है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रतिबंधों में मिली इस अस्थायी छूट के खत्म होने से पहले और भी कुछ खेप आने की संभावना जताई गई थी, ताकि सप्लाई में कोई कमी न रहे।
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का असर पूरी दुनिया के तेल बाजार पर पड़ रहा है। कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग रास्ते अपना रहे हैं। भारत ने भी इसी रणनीति के तहत यह कदम उठाया, जिसमें भुगतान के लिए नई मुद्रा का इस्तेमाल किया गया। (India Iranian oil yuan payment)

