📍नई दिल्ली | 17 Apr, 2026, 9:53 PM
India Mauritius Maritime Security: हिंद महासागर क्षेत्र में भारत ने मैरीटाइम डिप्लोमेसी का बड़ा उदाहरण पेश किया है। महासागर (MAHASAGAR) विजन के तहत भारतीय नौसेना ने पिछले नौ सालों में मॉरीशस के नेशनल कोस्ट गार्ड के 516 कर्मियों को ट्रेनिंग दी है। यह सहयोग केवल सैन्य स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर मॉरीशस की ब्लू इकोनॉमी यानी समुद्री अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ है, जो वहां की अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार है।
India Mauritius Maritime Security: ब्लू इकोनॉमी क्यों है अहम
मॉरीशस जैसे द्वीपीय देश के लिए समुद्र ही सबसे बड़ा संसाधन है। यहां की अर्थव्यवस्था का 10 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा सीधे ब्लू इकोनॉमी से आता है। मछली पकड़ने, समुद्री व्यापार और अन्य गतिविधियों से हजारों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है।
ऐसे में समुद्री इलाकों की सुरक्षा सिर्फ रणनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन से जुड़ा हुआ मामला बन जाता है। अगर समुद्र सुरक्षित रहेगा, तभी वहां का व्यापार और रोजगार सुरक्षित रह पाएगा। (India Mauritius Maritime Security)
अलग-अलग चरणों में दी ट्रेनिंग
भारतीय नौसेना ने मॉरीशस के नेशनल कोस्ट गार्ड के 516 कर्मियों को अलग-अलग चरणों में ट्रेनिंग दी है। यह ट्रेनिंग पिछले नौ सालों में लगातार चलती रही है। इस ट्रेनिंग में केवल बुनियादी जानकारी ही नहीं, बल्कि ऑपरेशन से जुड़ी अहम स्किल्स भी सिखाई गईं। इसमें जहाज की निगरानी, फायर फाइटिंग यानी आग से निपटना और डैमेज कंट्रोल जैसी ट्रेनिंग शामिल रही।
इन स्किल्स का फायदा यह होता है कि कोस्ट गार्ड के जवान किसी भी आपात स्थिति में तेजी से और सही तरीके से कार्रवाई कर सकें। (India Mauritius Maritime Security)
INS त्रिकंड पहुंचा पोर्ट लुई
मार्च 2026 के दूसरे हफ्ते में भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस त्रिकंड मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुई पहुंचा। यह यात्रा केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसके दौरान समुद्र में ऑपरेशनल गतिविधियां और ट्रेनिंग भी हुई।
जहाज पर मौजूद भारतीय नौसैनिकों ने मॉरीशस के जवानों को कई अहम विषयों पर प्रशिक्षण दिया। इससे दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने का काम हुआ।
आईएनएस त्रिकंड के पोर्ट लुई से रवाना होने के बाद मॉरीशस के जहाज सीजीएस वैलिएंट के साथ संयुक्त अभ्यास भी किया गया। इसे पासेज एक्सरसाइज कहा जाता है। (India Mauritius Maritime Security)
इसके साथ ही दोनों देशों ने मॉरीशस के समुद्री क्षेत्र यानी ईईजेड (एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन) में संयुक्त निगरानी भी की। यह निगरानी किसी औपचारिक गतिविधि से ज्यादा एक वास्तविक अभ्यास थी, जिससे समुद्र में सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।
मॉरीशस का समुद्री क्षेत्र बहुत बड़ा है। उसका ईईजेड करीब 23 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, जो उसके जमीन के आकार से कई गुना ज्यादा है।
इतने बड़े क्षेत्र की निगरानी करना आसान नहीं है, खासकर तब जब संसाधन सीमित हों। ऐसे में टेक्नोलॉजी और ट्रेनिंग दोनों की जरूरत होती है, जिसमें भारत लगातार सहयोग कर रहा है। (India Mauritius Maritime Security)
भारत ने अहम उपकरण भी दिए
भारत ने केवल ट्रेनिंग ही नहीं दी, बल्कि मॉरीशस को कई अहम उपकरण भी उपलब्ध कराए हैं। इसमें इंटरसेप्टर बोट, डॉर्नियर एयरक्राफ्ट और कोस्टल सर्विलांस रडार सिस्टम शामिल हैं।
इन उपकरणों की मदद से समुद्र में निगरानी करना आसान हो जाता है। लेकिन इनका सही इस्तेमाल तभी संभव है, जब इन्हें चलाने वाले लोग पूरी तरह प्रशिक्षित हों। इसी कमी को दूर करने के लिए ट्रेनिंग पर खास जोर दिया गया।
भारत और मॉरीशस के बीच सहयोग केवल ट्रेनिंग और उपकरण तक सीमित नहीं है। साल 2024 में अगालेगा आइलैंड पर एयरस्ट्रिप और जेट्टी का निर्माण भी किया गया, जिससे दूरदराज के इलाकों में तेजी से पहुंचना संभव हो सका।
इसके अलावा भारत ने मॉरीशस के समुद्री नक्शों को बेहतर बनाने के लिए हाइड्रोग्राफिक सर्वे में भी मदद की है। इससे जहाजों की आवाजाही और समुद्री संसाधनों के प्रबंधन में सुधार हुआ है। (India Mauritius Maritime Security)
हिंद महासागर क्षेत्र में बेहतर निगरानी के लिए भारत का इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर भी अहम भूमिका निभा रहा है। इसके जरिए अलग-अलग देशों के बीच समुद्री जानकारी साझा की जाती है।
इस तरह की व्यवस्था से किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखना आसान हो जाता है और समय रहते कार्रवाई की जा सकती है।
भारत और मॉरीशस के बीच यह सहयोग केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। इसमें कूटनीतिक, आर्थिक और मानवीय पहलू भी शामिल हैं।
चक्रवात जैसे प्राकृतिक संकट के समय भारत ने तेजी से मदद पहुंचाई है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दोनों देशों के बीच सहयोग देखने को मिलता है। (India Mauritius Maritime Security)

