📍नई दिल्ली | 17 Apr, 2026, 9:11 PM
Naval Commanders Conference 2026: भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने स्पष्ट कहा है कि मौजूदा सुरक्षा माहौल में कॉम्बैट रेडीनेस यानी युद्ध के लिए तैयारी को लगातार मजबूत रखना बेहद जरूरी है। भारतीय नौसेना की अहम नेवल कमांडर्स कॉन्फ्रेंस 2026 में बोलते हुए उन्होंने नई और उभरती टेक्नोलॉजी को तेजी से अपनाने पर जोर दिया, ताकि नौसेना को एक फ्यूचर रेडी फोर्स के रूप में तैयार किया जा सके।
चार दिन तक चली भारतीय नौसेना की अहम नेवल कमांडर्स कॉन्फ्रेंस शुक्रवार को खत्म हो गई। यह कॉन्फ्रेंस 14 से 17 अप्रैल तक नई दिल्ली में आयोजित की गई थी, जिसमें नौसेना के शीर्ष कमांडर्स और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान नौसेना की ऑपरेशनल तैयारी, टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
Naval Commanders Conference 2026: बदलते समुद्री हालात पर फोकस
कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने कहा कि आज समुद्री सुरक्षा का माहौल पहले से ज्यादा जटिल हो गया है। एक साथ कई क्षेत्रों में तनाव, नियम आधारित व्यवस्था में कमजोरी और नॉन-स्टेट एक्टर्स के बढ़ते खतरे ने समुद्र को ज्यादा चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
उन्होंने बताया कि अब नौसेना को हर समय तैयार रहना होगा, क्योंकि समुद्री क्षेत्र में हालात तेजी से बदल रहे हैं और हर दिन नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। (Naval Commanders Conference 2026)
कॉम्बैट रेडीनेस और टेक्नोलॉजी पर जोर
नौसेना प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि कॉम्बैट रेडीनेस यानी युद्ध के लिए तैयारी को लगातार मजबूत रखना जरूरी है। इसके साथ ही नई और उभरती टेक्नोलॉजी को अपनाने पर भी ध्यान देना होगा, ताकि नौसेना को फ्यूचर रेडी फोर्स बनाया जा सके।
कॉन्फ्रेंस में यह भी चर्चा हुई कि ऑपरेशन के दौरान बेहतर नतीजे पाने के लिए आधुनिक सिस्टम, नेटवर्किंग और बेहतर कम्युनिकेशन का इस्तेमाल जरूरी है।
हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका पर जोर
बैठक के दौरान इंडियन ओशन रीजन (IOR) में भारत की भूमिका पर भी जोर दिया गया। नौसेना प्रमुख ने कहा कि इस क्षेत्र में भारत की जिम्मेदारी अहम है और इसे निभाने के लिए लगातार सक्रिय रहना जरूरी है।
इसके लिए फ्रेंडली फॉरेन कंट्रीज के साथ मिलकर मल्टीलेटरल और बाइलेटरल एक्सरसाइज में भाग लेने और तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया गया, ताकि समुद्री सुरक्षा मजबूत बनी रहे। (Naval Commanders Conference 2026)
वेस्ट एशिया के हालात का असर
कॉन्फ्रेंस में वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष का भी जिक्र हुआ। अधिकारियों ने कहा कि इस क्षेत्र में तनाव का असर समुद्री रास्तों और व्यापार पर पड़ रहा है।
इसी वजह से नौसेना की तैनाती और ऑपरेशनल एक्टिविटी में भी बढ़ोतरी देखी गई है। समुद्री रास्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करना इस समय एक अहम जिम्मेदारी बन गया है।
ऑपरेशनल और लॉजिस्टिक्स तैयारियों की समीक्षा
चार दिन चली इस बैठक में नौसेना की ऑपरेशनल तैयारी के साथ-साथ मैटेरियल रेडीनेस, इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और ह्यूमन रिसोर्स से जुड़े मुद्दों की भी समीक्षा की गई।
इस दौरान यह देखा गया कि किस तरह से अलग-अलग यूनिट्स बेहतर तरीके से काम कर रही हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है। (Naval Commanders Conference 2026)
नई मैरिटाइम सिक्योरिटी स्ट्रेटजी जारी
कॉन्फ्रेंस के दौरान नौसेना प्रमुख ने इंडियन नेवी मैरिटाइम सिक्योरिटी स्ट्रेटजी (INMSS 2026) भी जारी की। इस डॉक्यूमेंट में आने वाले समय के लिए समुद्री सुरक्षा की रणनीति को विस्तार से बताया गया है।
इसमें बदलते भू-राजनीतिक हालात, नई टेक्नोलॉजी, रक्षा सुधार और युद्ध के बदलते तरीके को ध्यान में रखते हुए योजना तैयार की गई है।
कॉन्फ्रेंस में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) और होम सेक्रेटरी भी शामिल हुए। सीडीएस ने बदलते वैश्विक हालात और युद्ध के नए स्वरूप पर बात करते हुए नौसेना को तैयार रहने की सलाह दी। वहीं होम सेक्रेटरी ने तटीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नौसेना और पैरामिलिट्री फोर्स के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। उन्होंने ट्रांसनेशनल क्राइम और अवैध गतिविधियों से निपटने के लिए संयुक्त प्रयासों पर जोर दिया। (Naval Commanders Conference 2026)
‘सागर मंथन’ में इंडस्ट्री की भूमिका पर चर्चा
कॉन्फ्रेंस के दौरान एक खास सत्र ‘सागर मंथन’ भी आयोजित किया गया। इसमें नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों के बीच रक्षा अनुसंधान और क्षमता विकास पर चर्चा हुई। जिसमें रक्षा क्षेत्र में इंडस्ट्री की भागीदारी बढ़ाने से नई टेक्नोलॉजी और बेहतर सिस्टम विकसित करने पर जोर दिया गया। (Naval Commanders Conference 2026)

