📍नई दिल्ली | 5 Jun, 2026, 11:33 AM
Agniveer Retention Policy: अग्निपथ योजना को लेकर भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने एक अहम बयान दिया है। 30 जून को रिटायर हो रहे आर्मी चीफ ने कहा है कि अगर जरूरत महसूस हुई तो अग्निवीरों को स्थायी सेवा में रखने का मौजूदा 25 प्रतिशत कोटा बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है।
अपने एक हालिया इंटरव्यू में जनरल द्विवेदी ने अग्निपथ योजना को भारतीय सेना में हुए सबसे बड़े मानव संसाधन सुधारों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि इस योजना का मकसद सेना को अधिक युवा, तकनीक समझने वाली और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बनाना है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी योजना का पहला पूरा चक्र समाप्त नहीं हुआ है, इसलिए किसी भी बदलाव पर अंतिम फैसला लेने का समय नहीं आया है।
Agniveer Permanent Job Policy: क्या है अग्निपथ योजना?
अग्निपथ योजना की शुरुआत साल 2022 में की गई थी। इसके तहत युवाओं को चार साल के लिए सेना में भर्ती किया जाता है। भर्ती होने वाले जवानों को अग्निवीर कहा जाता है।
अभी तक की योजना के मुताबिक चार साल की सेवा पूरी होने के बाद इनमें से 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित कैडर में शामिल किया जाएगा, जबकि बाकी 75 प्रतिशत अग्निवीरों सेवा से बाहर हो जाएंगे। उन्हें सेवा निधि पैकेज, प्रशिक्षण और विभिन्न प्रमाण पत्र दिए जाते हैं ताकि वे आगे रोजगार या अन्य क्षेत्रों में अवसर प्राप्त कर सकें।
सरकार और सेना का मानना है कि इस मॉडल से सेना की औसत उम्र कम होगी और बल अधिक युवा और फुर्तीला बना रहेगा। (Agniveer Permanent Job Policy)
25 प्रतिशत कोटा बढ़ाने की चर्चा क्यों?
अग्निपथ योजना लागू होने के बाद से सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात को लेकर होती रही है कि केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को ही स्थायी नौकरी क्यों मिलती है। अब पहली बार सेना प्रमुख ने सार्वजनिक रूप से संकेत दिया है कि यह संख्या भविष्य में बढ़ाई भी जा सकती है।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि फिलहाल 25 प्रतिशत का प्रावधान योजना का हिस्सा है, लेकिन किसी भी सैन्य व्यवस्था की तरह इसमें भी अनुभव के आधार पर बदलाव संभव हैं। उन्होंने कहा कि यदि जमीनी जरूरतें, प्रशिक्षण में होने वाला निवेश और यूनिट स्तर से मिलने वाला अनुभव यह बताता है कि ज्यादा अग्निवीरों को बनाए रखना सेना के हित में होगा, तो उस पर संस्थागत स्तर पर विचार किया जा सकता है। (Agniveer Permanent Job Policy)
किन आधार पर लिया जाएगा फैसला?
आर्मी चीफ के अनुसार किसी भी बदलाव का फैसला भावनाओं या दबाव के आधार पर नहीं होगा। इसके लिए कई पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा।
सबसे पहले देखा जाएगा कि सेना की ऑपरेशनल जरूरत क्या है। यानी भविष्य के युद्ध और सुरक्षा चुनौतियों के लिए कितने प्रशिक्षित और अनुभवी सैनिकों की आवश्यकता है।
दूसरा महत्वपूर्ण पहलू ट्रेनिंग पर होने वाला खर्च है। किसी भी जवान को प्रशिक्षित करने में सेना समय, संसाधन और धन खर्च करती है। यदि कोई अग्निवीर चार साल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करता है तो उसे बनाए रखना कई मामलों में लाभदायक हो सकता है।
तीसरा पहलू यूनिट और फॉर्मेशन स्तर से मिलने वाला फीडबैक है। सेना यह भी देखेगी कि अग्निवीरों का प्रदर्शन वास्तविक परिस्थितियों में कैसा रहा और उन्होंने यूनिट कल्चर को किस हद तक अपनाया।
आधुनिक युद्ध में बदल रही हैं जरूरतें
जनरल द्विवेदी ने कहा कि आज के युद्ध पहले जैसे नहीं रहे। अब लड़ाई केवल बंदूक और टैंक तक सीमित नहीं है। ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, सर्विलांस सिस्टम, साइबर तकनीक और सुरक्षित कम्युनिकेशन आधुनिक युद्ध का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।
ऐसे में सेना को ऐसे जवानों की जरूरत है जो नई तकनीक जल्दी सीख सकें और बदलते माहौल में खुद को ढाल सकें। उन्होंने कहा कि अग्निवीर इस दिशा में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और नई तकनीकों को समझने में रुचि दिखा रहे हैं।
किन क्षेत्रों में अनुभवी अग्निवीरों की जरूरत ज्यादा?
सेना प्रमुख ने संकेत दिया कि कुछ तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षित जवानों को लंबे समय तक बनाए रखना अधिक उपयोगी हो सकता है। इनमें एयर डिफेंस, ड्रोन ऑपरेशन, एंटी-ड्रोन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, कम्युनिकेशन नेटवर्क और सर्विलांस से जुड़े क्षेत्र शामिल हैं।
इन क्षेत्रों में किसी जवान को पूरी तरह एक्सपर्ट बनाने में समय लगता है। ऐसे में यदि प्रशिक्षित कर्मी सेवा छोड़ देते हैं तो सेना को नए लोगों को फिर से तैयार करना पड़ता है। यही वजह है कि भविष्य में इन क्षेत्रों के अनुभव को भी ध्यान में रखा जा सकता है। (Agniveer Permanent Job Policy)
अग्निवीरों के प्रदर्शन पर क्या बोले आर्मी चीफ?
जनरल द्विवेदी ने अग्निवीरों के प्रदर्शन को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि अब तक का अनुभव उत्साहजनक रहा है। उनके अनुसार युवा सैनिकों में सीखने की इच्छा ज्यादा है। वे नई तकनीक को तेजी से अपनाते हैं और अपने दायित्वों को समझने की कोशिश करते हैं। सेना प्रमुख ने कहा कि अग्निपथ योजना का उद्देश्य केवल संख्या कम या ज्यादा करना नहीं है, बल्कि सेना को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।
सेवा के बाद क्या होगा?
अग्निपथ योजना को लेकर एक बड़ा सवाल हमेशा यह रहा है कि सेवा पूरी करने के बाद बाहर जाने वाले 75 प्रतिशत अग्निवीरों का क्या होगा। इस पर भी आर्मी चीफ ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि जो अग्निवीर चार साल बाद सेना से बाहर जाएंगे, उनके लिए सम्मानजनक अवसर उपलब्ध होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि ऐसे युवाओं के पास अनुशासन, प्रशिक्षण और अनुभव होगा, जिसका उपयोग राष्ट्र निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों में किया जा सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि जरूरत हुई तो पुनर्वास और रोजगार से जुड़ी व्यवस्थाओं में भी सुधार किया जा सकता है। (Agniveer Permanent Job Policy)
पहला बैच इस साल के आखिर तक
आर्मी चीफ ने जोर देकर कहा कि अग्निपथ योजना अभी अपने शुरुआती चरण में है। पहले बैच के अग्निवीरों की चार साल की सेवा अवधि अभी पूरी नहीं हुई है। इसलिए अभी किसी भी बड़े निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
उन्होंने कहा कि जब पहले बैच का पूरा अनुभव सामने आएगा, तब योजना के विभिन्न पहलुओं का मूल्यांकन किया जाएगा। उसी आधार पर आगे की दिशा तय होगी।
जनरल उपेंद्र द्विवेदी का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पहली बार सेना की टॉप लीडरशिप से यह संकेत मिला है कि अग्निवीरों के लिए तय 25 प्रतिशत परमानेंट करने नियम पूरी तरह स्थायी नहीं है और जरूरत पड़ने पर इसकी समीक्षा की जा सकती है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल अग्निपथ योजना को सफल माना जा रहा है और सेना इसके परिणामों का विस्तृत अध्ययन कर रही है। (Agniveer Permanent Job Policy)


