📍नई दिल्ली/वॉशिंगटन | 24 Apr, 2026, 10:47 AM
Gen Upendra Dwivedi US visit: भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का अमेरिका दौरा बेहद ही खास रहा है। उनका नाम अमेरिका के प्रतिष्ठित यूनाइटेड स्टेट्स आर्मी वॉर कॉलेज के इंटरनेशनल फेलोज हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया है। इसके साथ ही वह इस सम्मान को पाने वाले तीसरे भारतीय सेना प्रमुख बन गए हैं। उनसे पहले जनरल वी.के. सिंह और जनरल बिक्रम सिंह को यह सम्मान मिल चुका है।
Gen Upendra Dwivedi US visit: अमेरिका में मिला बड़ा सम्मान
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अमेरिका के पेंसिल्वेनिया स्थित कार्लिसल बैरक्स में मौजूद आर्मी वॉर कॉलेज का दौरा किया। यहीं पर उन्हें इंटरनेशनल हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया। यह सम्मान उन विदेशी सैन्य अधिकारियों को दिया जाता है, जिन्होंने इस संस्थान से पढ़ाई करने के बाद अपने देश की सेना के शीर्ष पद तक पहुंच हासिल की हो।
इस मौके पर उन्होंने वहां मौजूद फैकल्टी और अलग-अलग देशों से आए सैन्य अधिकारियों को संबोधित भी किया। अपने संबोधन में उन्होंने नेतृत्व, प्रोफेशनल मिलिट्री एजुकेशन और बदलते सुरक्षा हालात जैसे मुद्दों पर बात की।
उसी संस्थान के रहे हैं छात्र
जनरल द्विवेदी खुद भी इस प्रतिष्ठित संस्थान के छात्र रह चुके हैं। उन्होंने साल 2014-15 में यहां से स्ट्रैटेजिक स्टडीज से जुड़ा हाई लेवल कोर्स किया था। उन्हें डिस्टिंग्विश्ड फेलो का सम्मान भी मिला हुआ है। इस कोर्स को भारत के नेशनल डिफेंस कॉलेज के बराबर माना जाता है, जहां वरिष्ठ सैन्य अधिकारी रणनीतिक स्तर की ट्रेनिंग लेते हैं।
दौरे के दौरान उन्होंने कॉलेज की अलग-अलग सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। इसके साथ ही उन्होंने पैनल डिस्कशन में हिस्सा लिया, स्कॉलर्स प्रोग्राम के तहत तैयार किए गए एडवांस्ड स्टडी प्रोजेक्ट्स को देखा और संस्थान के वरिष्ठ सदस्यों से बातचीत की।
COAS inducted into USAWC International Hall of Fame 🇮🇳🇺🇸
General Upendra Dwivedi visited the United States Army War College, where he was inducted into the International Hall of Fame—becoming the third Indian Army Chief to receive this honour after V K Singh and Bikram Singh.
The… pic.twitter.com/CqIJPviv2y— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) April 24, 2026
क्या होता है इंटरनेशनल हॉल ऑफ फेम
आर्मी वॉर कॉलेज का इंटरनेशनल फेलोज हॉल ऑफ फेम एक खास सम्मान माना जाता है। इसकी शुरुआत 1988 में हुई थी। इसमें उन्हीं अधिकारियों को जगह दी जाती है, जो इस कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद अपने देश में सेना प्रमुख या उसके बराबर के उच्च पद तक पहुंचे हों।
दुनिया भर के हजारों इंटरनेशनल फेलोज में से बहुत कम लोगों को यह सम्मान मिलता है। किसी अधिकारी का नाम पहले उसके देश की ओर से प्रस्तावित किया जाता है, जिसके बाद अमेरिकी सैन्य नेतृत्व की मंजूरी के बाद उसे औपचारिक रूप से शामिल किया जाता है।
हवाई और वॉशिंगटन में भी अहम कार्यक्रम
अमेरिका दौरे के दौरान जनरल द्विवेदी ने हवाई स्थित फोर्ट शाफ्टर का भी दौरा किया, जो यूनाइटेड स्टेट्स आर्मी पैसिफिक का मुख्यालय है। यहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उन्होंने यूएसएआरपैक के कमांडिंग जनरल रोनाल्ड पी क्लार्क और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें कीं।
इन बैठकों में दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने, संयुक्त ट्रेनिंग और मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस पर चर्चा हुई। मल्टी-डोमेन का मतलब है जमीन, हवा, समुद्र, साइबर और स्पेस जैसे सभी क्षेत्रों में मिलकर काम करना।
इसके अलावा टेक्नोलॉजी से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत हुई, जिसमें डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, को-प्रोडक्शन और नई तकनीकों पर सहयोग जैसे विषय शामिल रहे।
ओआहू द्वीप का हवाई दौरा
दौरे के दौरान जनरल द्विवेदी ने ओआहू द्वीप का हवाई सर्वे भी किया। इस दौरान उन्हें अमेरिकी सेना के ट्रेनिंग सिस्टम और ऑपरेशनल तैयारी को करीब से समझने का मौका मिला। खासतौर पर जंगल और समुद्री इलाकों में होने वाले अभ्यास और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन की जानकारी दी गई।
इस सर्वे में यह देखा गया कि अलग-अलग क्षेत्रों में एक साथ ऑपरेशन कैसे किए जाते हैं और सेना किस तरह अपनी तैयारी बनाए रखती है।
लगातार बढ़ रहा सैन्य संपर्क
जनरल द्विवेदी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत और अमेरिका के बीच सैन्य स्तर पर लगातार संपर्क बढ़ रहा है। पिछले कुछ महीनों में तीनों भारतीय सेना प्रमुख अमेरिका जा चुके हैं।
नवंबर 2025 में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने अमेरिका का दौरा किया था। इसके बाद अप्रैल 2026 की शुरुआत में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह भी वहां गए। अब थल सेना प्रमुख का दौरा हुआ है।
इन दौरों के दौरान अलग-अलग सैन्य क्षेत्रों में बातचीत हुई है। नौसेना ने समुद्री सुरक्षा और सहयोग पर ध्यान दिया, वायुसेना ने एयर ऑपरेशन और लॉजिस्टिक्स पर चर्चा की, जबकि थल सेना ने जमीन आधारित ऑपरेशन और आपसी तालमेल को लेकर बातचीत की। (Gen Upendra Dwivedi US visit)



