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जोरावर टैंक के नए अवतार में दिखे कई बदलाव, क्या सेना को मिलने वाला है और ज्यादा ताकतवर प्लेटफॉर्म?

भारतीय सेना के पास मौजूद टी-72 और टी-90 टैंक रेगिस्तान और मैदानी इलाकों के लिए डिजाइन किए गए थे। इन्हें लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात तो किया गया, लेकिन वहां के हालात में उनकी कुछ सीमाएं भी सामने आईं...

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📍नई दिल्ली | 7 Jun, 2026, 1:19 PM

Zorawar Tank Upgrades: भारतीय सेना के लिए बनाए जा रहे स्वदेशी जोरावर लाइट टैंक में कई बदलाव किए गए हैं। हाल ही में गुजरात के हजीरा स्थित एलएंडटी प्लांट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोरावर टैंक का निरीक्षण किया। इस दौरान सामने आईं तस्वीरों की तुलना यदि 2024 और 2025 के शुरुआती प्रोटोटाइप से की जाए, तो कई महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई दे रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि डेवलपमेंट और ट्रायल्स के दौरान सामने आईं खामियों को दूर किया जा रहा है और जोरावर टैंक को 2028-29 के दौरान सेना में शामिल किए जाने की संभावना है।

Zorawar Tank Upgrades: 2020 में गलवान के बाद पड़ी जोरावर प्रोजेक्ट की नींव

पूर्वी लद्दाख में 2020 के बाद भारत और चीन के बीच बढ़े सैन्य तनाव ने भारतीय सेना को एक ऐसे हल्के लेकिन ताकतवर टैंक की जरूरत का अहसास कराया, जो ऊंचे पहाड़ी इलाकों में आसानी से काम कर सके।

भारतीय सेना के पास मौजूद टी-72 और टी-90 टैंक रेगिस्तान और मैदानी इलाकों के लिए डिजाइन किए गए थे। इन्हें लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात तो किया गया, लेकिन वहां के हालात में उनकी कुछ सीमाएं भी सामने आईं।

इसी जरूरत को देखते हुए डीआरडीओ और एलएंडटी ने मिलकर प्रोजेक्ट जोरावर शुरू किया। लगभग 25 टन वजनी यह टैंक खास तौर पर ऊंचाई वाले इलाकों के लिए डेवलप किया जा रहा है। (Zorawar Tank Upgrades)

Zorawar Tank Upgrades
Image Source: DRDO

नई तस्वीरों में सबसे बड़ा बदलाव आर्मर का

पुराने और नए प्रोटोटाइप की तस्वीरों की तुलना करने पर सबसे बड़ा अंतर टैंक के सामने वाले हिस्से में दिखाई देता है।

पहले प्रोटोटाइप में फ्रंट प्लेट अपेक्षाकृत पतली नजर आती थी। वहीं नई तस्वीरों में सामने की आर्मर प्लेटें कहीं अधिक मोटी और कई परतों वाली दिखाई दे रही हैं। सूत्रों का कहना है कि यह बदलाव परीक्षणों से मिले अनुभवों के बाद किया गया हो सकता है।

हालांकि आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन तस्वीरों में लोअर फ्रंट प्लेट पर लगी अतिरिक्त लेयर्स साफ दिखाई दे रही हैं। ऐसा टैंक की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए किया गया है।

सूत्रों का कहना है कि जोरावर को 30 मिमी एपीएफएसडीएस गोले जैसे खतरों से बचाने के लिए नाटो लेवल (STANAG लेवल 4) का सिक्योरिटी लेवल देने की कोशिश की जा रही है। यदि ऐसा है तो यह हल्के टैंक की कैटेगरी में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाएगी। (Zorawar Tank Upgrades)

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Zorawar Tank Upgrades
Image Source: DRDO

पहली बार दिखा फ्यूल पोर्ट आर्मर

नई तस्वीरों में एक और महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई दिया है। टैंक के फ्यूल पोर्ट के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा कवच नजर आ रहा है।

पुराने प्रोटोटाइप में यह हिस्सा खुला दिखाई देता था, लेकिन अब वहां अतिरिक्त आर्मर लगाया गया है। युद्ध के दौरान फ्यूल सिस्टम पर हमला किसी भी आर्मर्ड व्हीकल के लिए बड़ा खतरा होता है। ऐसे में इस हिस्से की सुरक्षा बढ़ाना व्यावहारिक सुधार माना जा रहा है। (Zorawar Tank Upgrades)

ट्रैक आर्मर में भी बदलाव

पुरानी और नई तस्वीरों की तुलना करने पर साफ दिखाई देता है कि टैंक के ट्रैक सेक्शन के ऊपर लगे साइड आर्मर में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। जोरावर टैंक के शुरुआती प्रोटोटाइप की तस्वीरों में ट्रैक के ऊपर लगे साइड स्कर्ट कई छोटे-छोटे हिस्सों में बंटे हुए दिखाई देते थे। इन पर बोल्ट, जोड़ और अलग-अलग मॉड्यूल साफ नजर आते थे।

लेकिन नए प्रोटोटाइप में ट्रैक के ऊपर लगी आर्मर प्लेटें पहले की तुलना में अधिक बड़ी, मोटी और इंटीग्रेटेड दिखाई दे रही हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब अलग-अलग मॉड्यूल की जगह एक लंबी और प्लेन प्लेट दिखाई दे रही है। पहले जहां कई जोड़ और बोल्ट नजर आते थे, वहीं नए डिजाइन में पूरा हिस्सा अधिक साफ और मजबूत दिख रहा है।

किसी भी टैंक में ट्रैक, रोड व्हील्स और सस्पेंशन सिस्टम बेहद अहम होते हैं। यदि दुश्मन इन हिस्सों को नुकसान पहुंचा दे तो टैंक अपनी जगह पर रुक सकता है, चाहे उसकी मुख्य तोप और अन्य हथियार पूरी तरह काम कर रहे हों। इसी वजह से ट्रैक के ऊपर अतिरिक्त सुरक्षा कवच लगाया जाता है। इसे साइड स्कर्ट कहा जाता है। इसका काम छोटे हथियारों की गोलियों, छर्रों, रॉकेट चालित हथियारों और ड्रोन से होने वाले हमलों से सुरक्षा प्रदान करना होता है। (Zorawar Tank Upgrades)

कैमोफ्लाज पैटर्न में भी बदलाव

नई तस्वीरों में टैंक का रंग और कैमोफ्लाज पैटर्न भी अलग दिखाई दे रहा है। पुराने प्रोटोटाइप में अपेक्षाकृत हल्के रंगों का इस्तेमाल किया गया था। नई तस्वीरों में गहरे भूरे, हरे और टैन रंगों का कॉम्बिनेशन है। यह पैटर्न पहड़ी और रेगिस्तानी दोनों इलाकों के लिए बेहतर माना जाता है। बता दें कि कैमोफ्लाज केवल रंग भर नहीं होता, बल्कि यह थर्मल और विजुअल सिग्नेचर कम करने की रणनीति का हिस्सा भी होता है।

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Zorawar Tank Upgrades
Image Source: DRDO

टरेट और सेंसर सिस्टम में दिखाई दिए सुधार

नई तस्वीरों में टरेट के ऊपर लगे सेंसर और ऑप्टिकल सिस्टम में कुछ बदलाव दिखाई दे रहा है। जोरावर में आधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम, थर्मल साइट, लेजर रेंज फाइंडर और रिमोट वेपन स्टेशन जैसी क्षमताएं शामिल की गई हैं। नए प्रोटोटाइप वर्जन में इन सभी सिस्टम्स का इंटीग्रेशन पहले से बेहतर नजर आ रहा है। इससे क्रू को बैटलफील्ड की बेहतर जानकारी मिलती है और टारगेट पर तेजी से कार्रवाई की जा सकती है। (Zorawar Tank Upgrades)

हाई-एल्टीट्यूड युद्ध के लिए तैयार किया जा रहा प्लेटफॉर्म

जोरावर को भारतीय भूभाग की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है। यह एक हल्का, फुर्तीला और तकनीकी रूप से एडवांस आर्मर्ड प्लेटफॉर्म होगा, जिसे विशेष रूप से ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए तैयार किया जा रहा है।

लगभग 25 टन वजन वाला यह टैंक बड़े मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट्स के जरिए तेजी से एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में पहुंचाया जा सकता है। इसके अलावा यह ऊंचे इलाकों में तेजी से तैनाती के लिए भी उपयुक्त माना जा रहा है।

सेना के लिए यह क्षमता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहाड़ी इलाकों में समय पर भारी हथियार पहुंचाना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है।

वहीं, जोरावर को केवल पहाड़ों के लिए नहीं बनाया जा रहा है। इस प्लेटफॉर्म को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह पानी में भी लिमिटेड फ्लोट कर सकता। हाई एलीवेशन पर फायरिंग करने की क्षमता भी इसमें शामिल की गई है, जिससे यह जरूरत पड़ने पर सीमित आर्टिलरी भूमिका भी निभा सकता है। (Zorawar Tank Upgrades)

सेना को नए प्रोटोटाइप का है इंतजार

सेना को अभी तक यूजर ट्रायल्स के लिए दूसरा प्रोटोटाइप औपचारिक रूप से नहीं मिला है। जोरावर टैंक का पहला प्रोटोटाइप पहले ही हाई एल्टीट्यूड इलाके में तैनात किया जा चुका है, जहां इसके शुरुआती परीक्षण किए गए थे। हाई एल्टीट्यूड में तैनाती के दौरान कुछ तकनीकी कमियां सामने आईं, क्योंकि ऊंचाई पर मौसम, ऑक्सीजन की कमी और तापमान जैसे नए फैक्टर्स काम करते हैं। इसी वजह से जोरावर टैंक का दूसरा प्रोटोटाइप तैयार किया है। यह दूसरा प्रोटोटाइप गुजरात के हजीरा में बनाया गया है।

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सूत्रों का कहना है कि इस साल विंटर में भारतीय सेना के यूजर ट्रायल्स शुरू होने की उम्मीद है। ये ट्रायल्स 12-18 महीने तक चल सकते हैं, जिसमें समर, विंटर, हाई-एल्टीट्यूड और विभिन्न टेरेंस में टैंक की परफॉर्मेंस टेस्ट की जाएगी। अगर यूजर ट्रायल्स सफल रहे, तो टैंक का इंडक्शन शुरू किया जा सकता है। (Zorawar Tank Upgrades)

354 टैंकों की जरूरत

भारतीय सेना ने ऐसे 354 लाइट टैंकों की आवश्यकता जताई है। मौजूदा योजना के अनुसार डीआरडीओ और एलएंडटी शुरुआती 59 टैंक उपलब्ध कराएंगे। बाकी टैंकों के लिए अलग प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिसमें अन्य कंपनियां भी भाग ले सकती हैं। यह पूरा प्रोजेक्ट लगभग 17,500 करोड़ रुपये का है।

हाल ही में एक इंटरव्यू में जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा था कि मौजूदा समय-सीमा के अनुसार जोरावर को 2028-29 में शामिल किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अपनी चुनौतियों के लिए भारतीय समाधान चाहिए, क्योंकि देश की भौगोलिक परिस्थितियां और सुरक्षा चुनौतियां अलग हैं।

सेना प्रमुख ने कहा कि भारत में पहाड़, रेगिस्तान, जंगल, मैदानी क्षेत्र, नदी क्षेत्र और लंबे विवादित सीमावर्ती इलाके हैं। ऐसे माहौल में सेना को पारंपरिक युद्ध से लेकर तकनीक आधारित आधुनिक युद्ध तक हर स्थिति के लिए तैयार रहना पड़ता है। (Zorawar Tank Upgrades)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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