📍नई दिल्ली | 6 Jun, 2026, 8:25 PM
Mortar Specialist Vehicle: भारतीय सेना अपनी फायरपावर और युद्धक क्षमता को आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। रक्षा मंत्रालय ने पहली बार एक ऐसे अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म के लिए रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन (आरएफआई) जारी की है, जो पारंपरिक मोर्टार सिस्टम को पूरी तरह बदल सकता है। इस नए सिस्टम का नाम “मोर्टार स्पेशलिस्ट व्हीकल” (एमएसवी) है। इसका उद्देश्य बैटलग्राउंड में मोर्टार की मारक क्षमता, सटीकता और रेस्पॉन्स टाइम को बेहतर बनाना है।
रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी डॉक्यूमेंट के मुताबिक यह प्रोजेक्ट डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर-2020 के तहत आगे बढ़ाया जाएगा। इसे “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियान के अनुरूप विकसित करने की योजना बनाई गई है। सेना चाहती है कि भारतीय कंपनियां इस प्रोजेक्ट में हिस्सा लें और देश में ही इसका निर्माण हो।
आखिर क्या है Mortar Specialist Vehicle?
भारतीय सेना की इन्फैंट्री बटालियनों में वर्तमान समय में 81 मिमी और 120 मिमी मोर्टार फायर सपोर्ट हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं। इन मोर्टारों को चलाने की पूरी प्रक्रिया मैनुअल होती है। टारगेट की दिशा, दूरी और एंगल तय करने में सैनिकों की दक्षता पर काफी कुछ निर्भर करता है।
रक्षा मंत्रालय ने अपने डॉक्यूमेंट में माना है कि मानव गलतियों के चलते कई बार फायरिंग की सटीकता प्रभावित होती है। इससे गोला-बारूद की खपत बढ़ जाती है और दुश्मन पर पहला जोरदार हमला करने का अवसर भी कम हो जाता है। इसी समस्या को दूर करने के लिए मोर्टार स्पेशलिस्ट व्हीकल का कॉन्सैप्ट लाया गया है।
एमएसवी एक व्हील्ड मिलिट्री व्हीकल होगा, जिस पर मोर्टार सिस्टम लगाया जाएगा। इसे केवल दो सैनिक ऑपरेट कर सकेंगे। मोर्टार फायर कंट्रोलर या ऑब्जर्वेशन पोस्ट से टारगेट की जानकारी मिलने के बाद यह सिस्टम आटोमैटिक कैल्कुलेशन करेगा और मोर्टार को सही दिशा में सेट कर देगा। इससे फायरिंग की रफ्तार और सटीकता दोनों बढ़ेंगी।
कम होगी मानवीय गलतियां
सेना के लिए इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मोर्टार ऑपरेशन में मानवीय हस्तक्षेप बहुत कम हो जाएगा। अभी किसी टारगेट पर फायर करने से पहले कई कैल्कुलेशंस करनी पड़ती हैं। युद्ध जैसे हालात में समय की कमी और दबाव के चलते गलती की संभावनाएं बनी रहती हैं।
नए सिस्टम में बैलिस्टिक कंप्यूटर, डिजिटल डेटा प्रोसेसिंग और ऑटोमैटिक लेइंग मैकेनिज्म का इस्तेमाल किया जाएगा। टारगेट की जानकारी मिलने के बाद व्हीकल खुद मोर्टार की दिशा और ऊंचाई तय करेगा। इससे पहली ही फायरिंग में टारगेट को निशाना बनाने की संभावना बढ़ जाएगी। (Mortar Specialist Vehicle)
पहाड़ों से रेगिस्तान तक हर जगह तैनाती
रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि एमएसवी को भारत की विविध भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाएगा। यह जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी काम करने में सक्षम होगा।
डॉक्यूमेंट के अनुसार व्हीकल को 4500 मीटर तक की ऊंचाई वाले इलाकों में ऑपरेशन करने योग्य होना चाहिए। इसके अलावा यह मैदानी क्षेत्रों, चट्टानी इलाकों, रेगिस्तान और बर्फ से ढके क्षेत्रों में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकेगा।
सेना ने यह भी तय किया है कि व्हीकल माइनस 25 डिग्री सेल्सियस से लेकर प्लस 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में बिना किसी बाधा के काम कर सके। (Mortar Specialist Vehicle)
बेहद तेज और दमदार होगा व्हीकल
तकनीकी जरूरतों के अनुसार एमएसवी की अधिकतम रफ्तार राजमार्ग पर कम से कम 80 किलोमीटर प्रति घंटा और कच्ची सड़कों पर 40 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। व्हीकल को 12 सेकंड में शून्य से 80 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार हासिल करनी होगी।
इसकी ऑपरेशनल लिमिट भी काफी बड़ी रखी गई है। व्हीकल पूरी क्षमता के साथ राजमार्ग पर कम से कम 400 किलोमीटर और मुश्किल इलाकों में लगभग 250 किलोमीटर तक चल सकेगा।
डॉक्यूमेंट के अनुसार व्हीकल में प्रति टन कम से कम 30 हॉर्सपावर की शक्ति होनी चाहिए। यह 30 डिग्री तक की चढ़ाई चढ़ सकेगा और 17 डिग्री तक के ढलान पर संतुलन बनाए रख सकेगा।
दुश्मन के ड्रोन से भी सुरक्षा
यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने दिखाया है कि छोटे कामिकाजे ड्रोन भी सैन्य व्हीकलों के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना ने एमएसवी में एंटी-ड्रोन कोप केज लगाने की भी मांग की है।
यह सिक्योरिटी स्ट्रक्चर व्हीकल को ऊपर से आने वाले ड्रोन हमलों से बचाने में मदद करेगी। जिसे आधुनिक युद्धक्षेत्र की नई जरूरत माना जा रहा है। (Mortar Specialist Vehicle)
मोर्टार तैनात करने में लगेगा सिर्फ कुछ सेकंड
एमएसवी की सबसे बड़ी विशेषता इसका फास्ट रेस्पॉन्स टाइम होगी। डॉक्यूमेंट के अनुसार मोर्टार को फायरिंग के लिए तैयार करने में 20 सेकंड से कम समय लगना चाहिए। टारगेट पर निशाना साधने में भी 20 सेकंड से कम समय लगेगा।
यदि फायरिंग के बाद दोबारा टारगेट बदलना हो तो सिस्टम पांच सेकंड के भीतर मोर्टार को नई दिशा में घुमा सकेगा। दुश्मन की जवाबी कार्रवाई से बचने के लिए फायरिंग के बाद व्हीकल को तुरंत जगह बदलने की क्षमता भी दी जा रही है। इसके लिए 20 सेकंड से कम समय का मानक तय किया गया है।
81 मिमी और 120 मिमी दोनों मोर्टारों के साथ काम करेगा
सेना चाहती है कि यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह मॉड्यूलर हो। एक ही व्हीकल पर 81 मिमी और 120 मिमी दोनों प्रकार के मोर्टार लगाए जा सकें। भविष्य में यदि बड़े कैलिबर के मोर्टारों की जरूरत पड़े तो उन्हें भी इसमें जोड़ा जा सके।
व्हीकल में लगभग 54 राउंड गोला-बारूद ले जाने की क्षमता रखने की भी योजना है। अलग-अलग प्रकार के हाई एक्सप्लोसिव, स्मोक और इल्यूमिनेशन राउंड के लिए विशेष स्टोरेज सिस्टम उपलब्ध होगा। (Mortar Specialist Vehicle)
हेलीकॉप्टर से भी ले जाया जा सकेगा
भारतीय सेना ने इस व्हीकल को अत्यधिक मोबाइल बनाने पर जोर दिया है। इसलिए इसे रेल के अलावा चिनूक सीएच-47 और एमआई-17 हेलीकॉप्टरों के जरिए भी ले जाने योग्य बनाने की मांग की गई है। डॉक्यूमेंट में इसे पैरा ड्रॉप योग्य बनाने का भी उल्लेख है। ताकि जरूरत पड़ने पर सेना इसे दूरदराज के इलाकों में हवाई मार्ग से भी तेजी से पहुंचा सके।
चालक दल की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
एमएसवी में स्टैनैग लेवल-1 बैलिस्टिक सुरक्षा की मांग की गई है। व्हीकल में फायर डिटेक्शन सिस्टम, अग्निशमन उपकरण, फर्स्ट एड किट, रिकवरी सिस्टम और अन्य सुरक्षा सुविधाएं भी होंगी।
इसके अलावा रग्डाइज्ड मिलिट्री ग्रेड टचस्क्रीन आधारित व्हीकल इंफॉर्मेशन सिस्टम लगाया जाएगा, जिससे ड्राइवर को व्हीकल की स्थिति और अन्य आवश्यक जानकारियां मिलती रहेंगी। (Mortar Specialist Vehicle)
स्वदेशी कंपनियों के लिए बड़ा मौका
रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया कार्यक्रमों के तहत आगे बढ़ेगी। कंपनियों को स्वदेशीकरण की विस्तृत योजना प्रस्तुत करनी होगी। साथ ही महत्वपूर्ण तकनीकों को भारत में विकसित करने का रोडमैप भी बताना होगा।
आरएफआई में यह भी कहा गया है कि कॉन्ट्रैक्ट मिलने के दो साल के भीतर व्हीकल की सप्लाई शुरू होनी चाहिए। कंपनियों को तकनीकी क्षमता, उत्पादन क्षमता, वित्तीय स्थिति और स्वदेशी सामग्री के स्तर की जानकारी भी देनी होगी।
सेना क्यों मान रही है इसे अहम परियोजना?
भारतीय सेना लंबे समय से फायर सपोर्ट सिस्टम को अधिक मोबाइल और प्रिसाइज बनाने पर काम कर रही है। आधुनिक युद्धों में दुश्मन की स्थिति का पता लगते ही तुरंत जवाब देना जरूरी होता है। ऐसे में पारंपरिक मोर्टारों की तुलना में एक ऑटोमेटेड प्लेटफॉर्म सैनिकों को बड़ा फायदा दे सकता है।
रक्षा मंत्रालय के डॉक्यूमेंट में भी कहा गया है कि मोर्टार स्पेशलिस्ट व्हीकल का उद्देश्य सटीकता बढ़ाना, प्रतिक्रिया समय कम करना और इन्फैंट्री यूनिट्स को अधिक प्रभावी फायर सपोर्ट उपलब्ध कराना है। यही वजह है कि सेना इसे अपनी युद्धक क्षमता में महत्वपूर्ण सुधार के तौर पर देख रही है। (Mortar Specialist Vehicle)



