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Explained: क्या है DRDO का विक्रम VT-21 प्लेटफॉर्म? जो भारतीय इन्फैंट्री को बनाएगा दुनिया में सबसे घातक

डीआरडीओ का विक्रम VT-21 प्रोजेक्ट भारतीय सेना की इन्फैंट्री को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह एडवांस्ड आर्मर्ड प्लेटफॉर्म न केवल पुराने BMP-2 व्हीकल्स की जगह लेगा, बल्कि सैनिकों को युद्ध के मैदान में बेजोड़ सुरक्षा और मारक क्षमता भी प्रदान करेगा...

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📍नई दिल्ली | 28 Apr, 2026, 8:49 PM

DRDO Vikram VT-21 Project: भारतीय सेना की मॉडर्न वॉरफेयर की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डीआरडीओ ने एक नया आर्मर्ड प्लेटफॉर्म पेश किया है, जिसका नाम ‘विक्रम VT-21’ रखा गया है। यह एक एडवांस्ड आर्मर्ड प्लेटफॉर्म (AAP) है, जिसे भविष्य के इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल (FICV) की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किया जा रहा है।

यह प्रोजेक्ट खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि यह सेना के पुराने बीएमपी-2 व्हीकल्स को रिप्लेस करेगा। बीएमपी-2 पिछले कई दशकों से सेना में इस्तेमाल हो रहा है और अब उसे आधुनिक सिस्टम से बदलने की जरूरत महसूस की जा रही है।

क्या है DRDO Vikram VT-21 Project

विक्रम VT-21 एक मॉडर्न मिलिट्री व्हीकल है, जिसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह युद्ध के दौरान सैनिकों को बेहतर सुरक्षा, तेज गति और ज्यादा मारक क्षमता दे सके। इसमें मजबूत आर्मर लगाया गया है, जो गोलियों, धमाकों और छर्रों से सुरक्षा प्रदान करता है।

इस प्लेटफॉर्म की खास बात यह है कि इसमें नई तकनीक के हथियार और निगरानी सिस्टम लगाए गए हैं, जिससे यह सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट व्हीकल नहीं बल्कि एक पूरी कॉम्बैट यूनिट की तरह काम कर सकता है।

दो अलग-अलग वेरिएंट में तैयार

विक्रम VT-21 को दो तरह के वेरिएंट में डेवलप किया गया है। पहला वेरिएंट व्हील्ड है, यानी इसमें टायर लगे होते हैं। यह सड़कों और शहर जैसे इलाकों में तेज चलता है और इसकी मेंटेनेंस भी आसान होती है।

दूसरा वेरिएंट ट्रैक्ड है, जो टैंकों की तरह ट्रैक पर चलता है। यह खराब और ऊबड़-खाबड़ इलाकों में ज्यादा बेहतर पकड़ और स्टैबिलिटी देता है। पहाड़ी, रेगिस्तानी या ऑफ-रोड इलाकों में इसका प्रदर्शन ज्यादा प्रभावी माना जाता है।

इस प्लेटफॉर्म को डीआरडीओ की व्हीकल्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (VRDE) ने बनाया है। इसके साथ भारत फोर्ज लिमिटेड और उसकी डिफेंस कंपनी कल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम्स लिमिटेड (केएसएसएल) और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड जैसी कंपनियों ने भी मिलकर काम किया है। इसके अलावा कई छोटे उद्योग और डीआरडीओ की अन्य लैब्स ने भी इसमें सहयोग दिया है।

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इस तरह यह प्रोजेक्ट सरकारी और निजी क्षेत्र के सहयोग से तैयार किया गया है, जिसमें स्वदेशी तकनीक पर खास जोर दिया गया है। (DRDO Vikram VT-21 Project)

खास है इसका आर्मर सिस्टम

विक्रम VT-21 में मजबूत सुरक्षा व्यवस्था दी गई है। इसे STANAG लेवल 4 और 5 के अनुसार तैयार किया गया है, जो नाटो के मानक हैं। इसका मतलब है कि यह भारी गोलीबारी, विस्फोट और आर्टिलरी के छर्रों से बचाव कर सकता है।

इसके अलावा इसमें मॉड्यूलर प्रोटेक्शन सिस्टम लगाया गया है, जिसे जरूरत के हिसाब से बदला या अपग्रेड किया जा सकता है। इससे अलग-अलग मिशन के अनुसार इसकी सुरक्षा क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। (DRDO Vikram VT-21 Project)

30 मिमी का एक क्रूलेस टर्रेट

इस प्लेटफॉर्म में 30 मिमी का एक क्रूलेस टर्रेट लगाया गया है। इसका मतलब है कि इस गन सिस्टम को रिमोट से ऑपरेट किया जाता है और इसमें कोई सैनिक बैठता नहीं है। इससे सैनिकों की सुरक्षा बढ़ जाती है।

इसके साथ 7.62 मिमी की मशीन गन भी लगाई गई है, जो नजदीकी हमलों के लिए इस्तेमाल होती है। इसके अलावा इसमें नाग एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल भी फिट की जा सकती है, जो भारी बख्तरबंद वाहनों को निशाना बनाने के लिए उपयोगी होती है। (DRDO Vikram VT-21 Project)

मोबिलिटी और परफॉर्मेंस

विक्रम VT-21 को एक पावरफुल इंजन और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के साथ तैयार किया गया है। इसका पावर-टू-वेट रेशियो अच्छा है, यानी इसके आकार के हिसाब से इसमें ज्यादा ताकत मिलती है। इससे यह तेज गति से चल सकता है और मुश्किल रास्तों पर भी आसानी से आगे बढ़ सकता है।

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यह वाहन खाई पार कर सकता है, ऊंची ढलानों पर चढ़ सकता है और कठिन इलाकों में भी संतुलन बनाए रख सकता है। इसकी मोबिलिटी इसे अलग-अलग तरह के ऑपरेशन के लिए उपयोगी बनाती है।

पानी में चलने की क्षमता

इस प्लेटफॉर्म की एक और खासियत यह है कि यह एम्फीबियस है, यानी पानी में भी चल सकता है। इसमें हाइड्रो जेट और वॉटर प्रोपल्शन सिस्टम दिया गया है, जिससे यह नदियों और पानी के अन्य हिस्सों को पार कर सकता है।

यह क्षमता खासतौर पर उन इलाकों में काम आती है जहां नदी या पानी के रास्ते ऑपरेशन का हिस्सा होते हैं। (DRDO Vikram VT-21 Project)

मल्टीपर्पज डिजाइन

विक्रम VT-21 को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे अलग-अलग कामों के लिए इस्तेमाल किया जा सके। इसे सैनिकों को ले जाने, दुश्मन की जानकारी जुटाने या सीधे युद्ध में भाग लेने के लिए तैयार किया जा सकता है।

इसकी मॉड्यूलर डिजाइन की वजह से जरूरत के अनुसार इसमें बदलाव करना आसान होता है, जिससे एक ही प्लेटफॉर्म कई तरह के रोल निभा सकता है। (DRDO Vikram VT-21 Project)

FICV की जरूरत क्यों

भारतीय सेना लंबे समय से एक नए फ्यूचरिस्टिक इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल की जरूरत महसूस कर रही है। इसके पीछे मुख्य कारण बीएमपी-2 जैसे पुराने व्हीकल्स का लंबे समय से इस्तेमाल है।

आज के समय में युद्ध का तरीका बदल गया है। अब नेटवर्क आधारित युद्ध यानी नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर का महत्व बढ़ गया है, जिसमें अलग-अलग यूनिट्स, सेंसर और कमांड सिस्टम एक साथ जुड़े होते हैं।

इससे रियल टाइम में जानकारी साझा होती है, फैसले तेजी से लिए जाते हैं और ऑपरेशन ज्यादा प्रभावी बनते हैं। ऐसे माहौल में नए और तकनीकी रूप से एडवांस व्हीकल की जरूरत होती है।

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सेना के लिए क्यों है जरूरी

विक्रम VT-21 जैसे प्लेटफॉर्म सेना के लिए इसलिए अहम हैं क्योंकि ये बेहतर सुरक्षा, ज्यादा फायरपावर और तेज मूवमेंट देते हैं। खासकर चीन और पाकिस्तान के साथ लगने वाले सीमावर्ती इलाकों में ऐसे व्हीकल की जरूरत ज्यादा महसूस होती है।

इन इलाकों में तेजी से तैनाती, बेहतर निगरानी और सटीक कार्रवाई बहुत जरूरी होती है, जिसके लिए ऐसे आधुनिक सिस्टम तैयार किए जा रहे हैं।

हालांकि इस प्लेटफॉर्म को अभी कई चरणों से गुजरना होगा। इसमें डेवलपमेंट ट्रायल, यूजर ट्रायल और सेना की मंजूरी जैसे स्टेप शामिल हैं। इन सभी चरणों के बाद ही इसे सेना में शामिल किया जा सकेगा।

डीआरडीओ के अनुसार, इस सिस्टम में अभी करीब 65 प्रतिशत तक स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल हुआ है, जिसे आगे बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक ले जाने की योजना है। खास बात यह है कि विक्रम वीटी-21 प्लेटफॉर्म को कॉन्सेप्ट से लेकर कॉम्बैट-रेडी स्थिति तक पहुंचाने में तीन साल से भी कम समय लगा है। वहीं इस प्लेटफॉर्म को रक्षा मंत्रालय की टेक्निकल इवैल्यूएशन कमेटी से भी क्लियरेंस मिल चुकी है। (DRDO Vikram VT-21 Project)

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  • News Desk

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