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Exclusive: अमेरिका के सुपर कैरियर को टक्कर देगा चीन का 960 फीट लंबा न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर, Type-004 की पहली साफ तस्वीर आई सामने!

रक्षा समाचार की खोजबीन में पता चला कि यह एयरक्राफ्ट कैरियर चीन के डालियान शिपयार्ड में बनाया जा रहा है। नई तस्वीरों से साफ संकेत मिले हैं कि इसका निर्माण तेजी से चल रहा है...

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📍नई दिल्ली | 28 May, 2026, 3:10 PM

China Type-004 Aircraft Carrier: चीन एक बार फिर अपनी नौसैनिक ताकत को तेजी से बढ़ाने में जुटा हुआ है। हाल ही में रक्षा समाचार ने जब जांच-पड़ताल की तो नई सैटेलाइट तस्वीरों में चौंकाने वाला खुलासा देखने को मिला। इन तस्वीरों में चीन का नया और बेहद विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर दिखाई दिया है, जिसे फिलहाल “टाइप-004” के नाम से जाना जा रहा है। सूत्रों का मानना है कि यह चीन का पहला न्यूक्लियर पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर हो सकता है।

रक्षा समाचार की खोजबीन में पता चला कि यह एयरक्राफ्ट कैरियर चीन के डालियान शिपयार्ड में बनाया जा रहा है। नई तस्वीरों से साफ संकेत मिले हैं कि इसका निर्माण तेजी से चल रहा है। यह जहाज आकार और क्षमता के मामले में अमेरिका के सुपरकैरीयर्स को चुनौती दे सकता है।

China Type-004 Nuclear Aircraft Carrier
China Type-004 Nuclear Aircraft Carrier

China Type-004 Aircraft Carrier: सैटेलाइट तस्वीरों में क्या दिखा

मई 2026 की गूगल अर्थ की सैटेलाइट तस्वीरों में चीन के डालियान शिपयार्ड में एक विशाल युद्धपोत का स्ट्रक्चर साफ दिखाई दिया। यह 960 फीट से ज्यादा लंबा और 155 फीट चौड़ा है। इसका साइज चीन के मौजूदा “फुजियान” एयरक्राफ्ट कैरियर से भी बड़ा माना जा रहा है।

तस्वीरों में जहाज का फ्लैट फ्लाइट डेक, आइलैंड सुपर स्ट्रक्चर, विशाल हुल सेक्शन और भारी क्रेन्स दिखाई दे रहे हैं। तस्वीरें देख कर लगा रहा है निर्माण की गति काफी तेज है। शुरुआती हुल सेक्शन 2025 की शुरुआत में दिखाई दिए थे और कुछ ही महीनों में पूरा स्ट्रक्चर स्पष्ट रूप से नजर आने लगा।

यह एयरक्राफ्ट कैरियर लियाओनिंग प्रांत के डालियान शिपयार्ड में तैयार किया जा रहा है। यही वह जगह है जहां चीन के पहले दो एयरक्राफ्ट कैरियर “लियाओनिंग” और “शानदोंग” भी बनाए गए थे। (China Type-004 Aircraft Carrier)

क्या होगा न्यूक्लियर पावर वाला कैरियर

सीएसआईएस की रिपोर्ट में कहा गया है कि टाइप-004 के ऊपर दो बड़े पीले रंग हिस्से ऐसे दिखाई दे रहे हैं, जिन्हें न्यूक्लियर रिएक्टर के लिए बनाया गया माना जा रहा है। इसी वजह से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि चीन पहली बार परमाणु ऊर्जा से चलने वाला एयरक्राफ्ट कैरियर बना रहा है।

अगर यह दावा सही साबित होता है तो चीन दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जिनके पास न्यूक्लियर पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर हैं।

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न्यूक्लियर पावर वाले कैरियर की सबसे बड़ी ताकत उसकी लंबी दूरी तक बिना ईंधन भरे ऑपरेशन करने की क्षमता होती है। ऐसे जहाज महीनों तक समुद्र में रह सकते हैं और उन्हें बार-बार रुककर फ्यूल भरने की जरूरत नहीं पड़ती।

अमेरिका की नेवी लंबे समय से इसी तरह के न्यूक्लियर सुपरकैरीयर्स का इस्तेमाल करती आ रही है। अब चीन भी उसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। (China Type-004 Aircraft Carrier)

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट से लैस होगा जहाज

टाइप-004 में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट सिस्टम लगाया जा सकता है। यह वही तकनीक है जिसका इस्तेमाल अमेरिका के आधुनिक “जेराल्ड आर. फोर्ड क्लास” एयरक्राफ्ट कैरियर में किया जाता है।

इस तकनीक की मदद से लड़ाकू विमानों को ज्यादा तेजी और कम समय में लॉन्च किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार इस कैरियर में चार कैटापल्ट सिस्टम हो सकते हैं, जबकि चीन के मौजूदा फुजियान कैरियर में तीन कैटापल्ट हैं।

अगर चार कैटापल्ट लगाए जाते हैं तो चीन एक साथ ज्यादा लड़ाकू विमान लॉन्च कर सकेगा। इससे लंबी दूरी के एयर मिशन और बड़े हवाई ऑपरेशन करना आसान होगा। (China Type-004 Aircraft Carrier)

China Type-004 Nuclear Aircraft Carrier
China Type-004 Nuclear Aircraft Carrier

कैसे बढ़ी चीन की एयरक्राफ्ट कैरियर ताकत

चीन ने पिछले कुछ सालों में अपनी नौसैनिक ताकत तेजी से बढ़ाई है। शुरुआत में उसने सोवियत संघ के पुराने युद्धपोत “वारयाग” को खरीदकर उसे “लियाओनिंग” एयरक्राफ्ट कैरियर में बदला।

इसके बाद चीन ने “शानदोंग” नाम का अपना दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर बनाया। यह स्की-जंप डिजाइन वाला जहाज था।

फिर चीन ने कुछ साल पहले “फुजियान” एयरक्राफ्ट कैरियर लॉन्च किया, जो पूरी तरह चीन में डिजाइन और विकसित किया गया पहला आधुनिक कैरियर माना जाता है।

अब टाइप-004 को चीन की अगली पीढ़ी का सबसे ताकतवर एयरक्राफ्ट कैरियर माना जा रहा है।

China Type-004 Nuclear Aircraft Carrier
Image Credit: Raksha Samachar/Google Earth

अमेरिका जैसी ब्लू-वॉटर नेवी बनाना चाहता है चीन

चीन अब केवल अपने तटीय इलाकों तक सीमित नौसेना नहीं रखना चाहता। वह ऐसी “ब्लू-वॉटर नेवी” बनाना चाहता है, जो दुनिया के किसी भी हिस्से में जाकर मिलिटरी पावर दिखा सके।

ब्लू-वॉटर नेवी का मतलब ऐसी नौसेना से है जो हजारों किलोमीटर दूर समुद्री इलाकों में लंबे समय तक ऑपरेशन चला सके।

चीन के बढ़ते एयरक्राफ्ट कैरियर प्रोग्राम को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इसका मकसद प्रशांत महासागर और हिंद महासागर में चीन की मौजूदगी बढ़ाना बताया जा रहा है। (China Type-004 Aircraft Carrier)

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टाइप-004 के साथ चलेंगे बड़े वॉरशिप

चीन केवल एयरक्राफ्ट कैरियर ही नहीं बना रहा, बल्कि उसके साथ चलने वाले पूरे “कैरियर स्ट्राइक ग्रुप” को भी मजबूत कर रहा है।

इन स्ट्राइक ग्रुप्स में बड़े डेस्ट्रॉयर, फ्रिगेट, पनडुब्बियां और सप्लाई जहाज शामिल होंगे।

विशेषज्ञ डेनियल राइस की रिपोर्ट के अनुसार चीन अपने कैरियर ग्रुप्स के लिए तीन स्तर की सुरक्षा प्रणाली तैयार कर रहा है।

बाहरी सुरक्षा घेरे में जे-15 लड़ाकू विमान और पनडुब्बियां तैनात होंगी। मध्य सुरक्षा घेरे में टाइप-052डी डेस्ट्रॉयर और टाइप-054ए फ्रिगेट जैसे युद्धपोत रहेंगे। सबसे अंदरूनी सुरक्षा घेरे में छोटे रेंज वाले हथियार और डिफेंस सिस्टम लगाए जाएंगे। (China Type-004 Aircraft Carrier)

China Type-004 Nuclear Aircraft Carrier
Image Credit: Raksha Samachar/Google Earth

“कैरियर किलर” मिसाइलों पर भी जोर

चीन केवल एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं बना रहा, बल्कि उन्हें सुरक्षा देने के लिए लंबी दूरी की एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइलें भी डेवलप कर चुका है।

डीएफ-21डी और डीएफ-26बी मिसाइलों को अक्सर “कैरियर किलर” कहा जाता है। इन मिसाइलों का मकसद दुश्मन के एयरक्राफ्ट कैरियर को लंबी दूरी से निशाना बनाना है।

रिपोर्ट के अनुसार डीएफ-21डी करीब 900 मील दूर तक हमला कर सकती है, जबकि डीएफ-26बी की रेंज लगभग 2485 मील बताई जाती है।

इन मिसाइलों के जरिए चीन अमेरिकी नौसेना की गतिविधियों को चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। (China Type-004 Aircraft Carrier)

हिंद महासागर और प्रशांत महासागर पर नजर

चीन की बढ़ती नौसैनिक ताकत का सीधा असर हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के रणनीतिक संतुलन पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर की मदद से चीन लंबे समय तक समुद्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रख सकेगा।

इसी वजह से अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत जैसे देश चीन की नौसैनिक गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहे हैं।

भारत के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हिंद महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी पिछले कुछ वर्षों से चिंता का विषय बनी हुई है। (China Type-004 Aircraft Carrier)

चीन बना रहा है विशाल सप्लाई वॉरशिप

इसके अलावा चीन एक बहुत बड़ा नेवल सप्लाई जहाज भी तैयार कर रहा है। यह जहाज एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप्स को समुद्र में ईंधन, हथियार और भोजन उपलब्ध कराएगा। यह जहाज करीब 889 फीट लंबा और 121 फीट चौड़ा हो सकता है।

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अगर ऐसा होता है तो चीन अपने कैरियर ग्रुप्स को चीन से हजारों किलोमीटर दूर भी लंबे समय तक ऑपरेट करा सकेगा।

हालांकि भौगोलिक स्थिति भी चीन के लिए चुनौती मानी जाती है। खुले प्रशांत महासागर तक पहुंचने के लिए चीनी जहाजों को मियाको स्ट्रेट और बाशी चैनल जैसे संवेदनशील समुद्री रास्तों से गुजरना पड़ता है, जिन पर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की कड़ी नजर रहती है।

दुनिया की नजरें डालियान शिपयार्ड पर

चीन के डालियान शिपयार्ड पर सबकी नजरें हैं। दुनियाभर में यह जानने की कोशिश हो रही है कि टाइप-004 में कौन-कौन सी नई तकनीकें इस्तेमाल की जा रही हैं।

सीएसआईएस की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह जहाज चीन की सैन्य आधुनिकीकरण योजना का बड़ा हिस्सा है। अमेरिकी रक्षा विभाग की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक चीन 2035 तक कुल नौ एयरक्राफ्ट कैरियर रखने का लक्ष्य बना सकता है।

अगर ऐसा होता है तो चीन दुनिया की सबसे बड़ी नौसैनिक ताकतों में शामिल हो जाएगा। (China Type-004 Aircraft Carrier)

2030 तक लॉन्च होने की संभावना

मिलिटरी एक्सपर्ट एरिक वर्टहाइम ने मार्च 2026 की अपनी रिपोर्ट में कहा कि चीन के फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर को निर्माण शुरू होने से लॉन्च होने तक करीब छह साल लगे थे।

अगर टाइप-004 का निर्माण भी उसी रफ्तार से चलता है तो यह 2027-28 तक लॉन्च किया जा सकता है। वहीं इसकी कमीशनिंग 2029-30 के आसपास तक की जा सकती है।

हालांकि इसके बाद भी जहाज को पूरी तरह ऑपरेशनल बनने में कई साल लग सकते हैं क्योंकि समुद्री परीक्षण, हथियार इंटीग्रेशन और फाइनल फिटिंग जैसी प्रक्रियाएं लंबी होती हैं। (China Type-004 Aircraft Carrier)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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