📍नई दिल्ली | 28 May, 2026, 8:55 PM
India-China WMCC Meeting: भारत और चीन के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों को लेकर एक बार फिर अहम बातचीत हुई है। दोनों देशों के अधिकारियों ने बीजिंग में आयोजित वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन ऑन इंडिया-चाइना बॉर्डर अफेयर्स (WMCC) की 35वीं बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान सीमा प्रबंधन, वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर स्थिति, सीमा निर्धारण और दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
यह बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत और चीन 2020 के गलवान संघर्ष के बाद खराब हुए रिश्तों को धीरे-धीरे सामान्य करने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों देशों ने बातचीत को “रचनात्मक” और “भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाने वाली” बताया।
India-China WMCC Meeting: बीजिंग में हुई अहम बैठक
27 मई को चीन की राजधानी बीजिंग में हुई इस बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय में जॉइंट सेक्रेटरी (ईस्ट एशिया) सुजीत घोष ने किया। वहीं चीनी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई चीन के विदेश मंत्रालय के बाउंड्री एंड ओशेनिक अफेयर्स विभाग की डायरेक्टर जनरल हौ यानची ने की।
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की और सीमा पर शांति बनाए रखने में हुई प्रगति पर संतोष जताया। भारत और चीन का कहना है कि सीमा क्षेत्रों में स्थिरता आने से दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने में मदद मिल रही है।
क्या होता है WMCC
डब्ल्यूएमसीसी एक स्पेशल मैकेनिज्म है, जिसे भारत और चीन ने 2012 में बनाया था। इसका मकसद सीमा पर पैदा होने वाले तनाव को बातचीत के जरिए संभालना और सैन्य तथा कूटनीतिक स्तर पर समन्वय बनाए रखना है।
यह कोई सैन्य कमांडर स्तर की बातचीत नहीं होती, बल्कि दोनों देशों के विदेश मंत्रालय और संबंधित विभागों के अधिकारी इसमें शामिल होते हैं। यहां सीमा से जुड़े तकनीकी, प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की जाती है।
इस तंत्र का सबसे बड़ा उद्देश्य एलएसी पर शांति बनाए रखना और दोनों देशों के बीच किसी भी गलतफहमी को कम करना माना जाता है। (India-China WMCC Meeting)
सीमा प्रबंधन और सीमांकन पर चर्चा
बैठक के दौरान दोनों देशों ने सीमा सीमांकन यानी “डिलिमिटेशन” पर भी चर्चा की। इसका मतलब है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर दोनों देशों की अलग-अलग धारणाओं को कम करने की कोशिश की जा रही है।
भारत और चीन के बीच करीब 3488 किलोमीटर लंबी सीमा है, लेकिन कई जगहों पर एलएसी को लेकर दोनों देशों की समझ अलग-अलग है। इसी वजह से कई बार दोनों देशों के सैनिक के बीच गतिरोध हो जाता है।
बैठक में सीमा प्रबंधन यानी बॉर्डर मैनेजमेंट पर भी चर्चा हुई। इसमें गश्त, सैनिक गतिविधियां, संचार व्यवस्था और तनाव कम करने के उपाय शामिल थे।
दोनों देशों ने मौजूदा सैन्य और कूटनीतिक तंत्रों के जरिए संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई।
ट्रांस-बॉर्डर नदियों का मुद्दा भी उठा
भारत ने इस बैठक में सीमा पार बहने वाली नदियों का मुद्दा भी उठाया। विदेश मंत्रालय के अनुसार भारतीय पक्ष ने “एक्सपर्ट लेवल मैकेनिज्म ऑन ट्रांस-बॉर्डर रिवर्स” की अगली बैठक जल्द बुलाने पर जोर दिया।
यह मुद्दा इसलिए अहम है क्योंकि ब्रह्मपुत्र जैसी कई बड़ी नदियां चीन से निकलकर भारत में आती हैं। भारत लंबे समय से चाहता रहा है कि चीन समय पर जल संबंधी डेटा साझा करे, ताकि बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में मदद मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रांस-बॉर्डर नदियों का मुद्दा भारत-चीन संबंधों में काफी संवेदनशील माना जाता है। (India-China WMCC Meeting)
2020 के बाद बदले हालात
भारत और चीन के बीच 2020 में गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई थी। इस घटना में दोनों देशों के सैनिकों की जान गई थी और उसके बाद सीमा पर तनाव काफी बढ़ गया था।
पूर्वी लद्दाख के कई इलाकों में दोनों देशों की सेनाएं लंबे समय तक आमने-सामने रहीं। कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत के बाद धीरे-धीरे कुछ क्षेत्रों में डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया पूरी हुई।
अब दोनों देश लगातार बातचीत के जरिए रिश्तों को सामान्य करने की कोशिश कर रहे हैं। हाल के महीनों में दोनों पक्षों के बीच कई स्तरों पर बातचीत हुई है। (India-China WMCC Meeting)
स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव वार्ता की तैयारी
डब्ल्यूएमसीसी बैठक में दोनों देशों ने अगली “स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव” यानी एसआर बैठक की तैयारी पर भी चर्चा की। यह बैठक चीन में आयोजित की जानी है।
एसआर वार्ता भारत-चीन सीमा विवाद को सुलझाने के लिए सबसे ऊंचे स्तर की राजनीतिक और कूटनीतिक बातचीत मानी जाती है। भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और चीन की ओर से वरिष्ठ नेता इसमें शामिल होते हैं।
दोनों देशों ने कहा कि वे अगली एसआर बैठक की ठोस तैयारी के लिए साथ काम करेंगे।
बीजिंग दौरे के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख सुजीत घोष ने चीन के विदेश मंत्रालय के एशियन अफेयर्स विभाग के डायरेक्टर जनरल लियू जिनसॉन्ग से भी मुलाकात की।
इसके अलावा उन्होंने चीन के असिस्टेंट फॉरेन मिनिस्टर हांग लेई से शिष्टाचार मुलाकात भी की। इन बैठकों को दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। (India-China WMCC Meeting)
चीन ने क्या कहा
चीन के विदेश मंत्रालय ने भी इस बैठक को सकारात्मक बताया। चीनी बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों के बीच “व्यावहारिक और मित्रवत माहौल” में बातचीत हुई।
चीन ने कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनी हुई है और दोनों देशों ने सीमा प्रबंधन, सीमांकन और आपसी सहयोग पर बातचीत की।
चीनी विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि दोनों पक्ष सैन्य और कूटनीतिक चैनलों के जरिए संपर्क बनाए रखेंगे।
क्यों अहम मानी जा रही है यह बैठक
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद कई दशकों पुराना है। 1962 के युद्ध के बाद से यह मुद्दा दोनों देशों के रिश्तों का सबसे संवेदनशील हिस्सा बना हुआ है।
हाल के वर्षों में लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और अन्य क्षेत्रों को लेकर तनाव बढ़ा था। ऐसे में बीजिंग में हुई यह बैठक दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रहने का संकेत मानी जा रही है।
रक्षा और विदेश नीति से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि एलएसी पर शांति बनाए रखना दोनों देशों के लिए जरूरी है क्योंकि सीमा तनाव का असर व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी पड़ता है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि WMCC जैसे मैकेनिज्म छोटे स्तर के तनाव को बड़ा संकट बनने से रोकने में मदद करते हैं। (India-China WMCC Meeting)
धीरे-धीरे सामान्य हो रहे रिश्ते
पिछले कुछ महीनों में भारत और चीन के बीच संपर्क बढ़ा है। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच लगातार बातचीत हो रही है। कुछ क्षेत्रों में सैन्य तनाव कम होने के बाद अब रिश्तों को सामान्य करने पर जोर दिया जा रहा है।
हालांकि सीमा विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन दोनों देश फिलहाल बातचीत के जरिए स्थिति संभालने की कोशिश कर रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के बयान में भी कहा गया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता से द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में प्रगति हो रही है। (India-China WMCC Meeting)

