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नई किताब के लॉन्च पर जनरल नरवणे ने बताया “जो उचित समझो, वो करो” का असली मतलब? पहली बार तोड़ी चुप्पी

जनरल नरवणे ने साफ कहा कि भारत के जमीन खोने की बात सही नहीं है। उन्होंने बताया कि सेना ऑपरेशन के दौरान कुछ तय गाइडलाइंस के तहत काम करती है, लेकिन जमीन पर फैसले मौके की स्थिति के अनुसार लिए जाते हैं...

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📍नई दिल्ली | 23 Apr, 2026, 6:54 PM

Gen MM Naravane Remark: सैन्य अधिकारी से लेखक बने पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे एक बार फिर चर्चा में हैं। उनकी नई किताब “द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड” (The Curious and the Classified: Unearthing Military Myths and Mysteries) काफी चर्चा में है। इस किताब में उन्होंने भारतीय सेनाओं से जुड़ी कई अनसुनी कहानियों, रहस्यों और परंपराओं को सामने लाने की कोशिश की है।

किताब के लॉन्च के दौरान उन्होंने अपनी पिछली किताब को लेकर हुए विवाद पर भी खुलकर बात की और कहा कि उन्हें बेवजह उस मामले में घसीटा गया था। साथ ही उन्होंने “जो उचित समझो, वो करो” वाले बयान का मतलब भी समझाया।

Gen MM Naravane Remark: नई किताब में क्या है खास

जनरल नरवणे की नई किताब का फोकस उनकी पिछली किताब से अलग है। पहले जहां उन्होंने अपने करियर और बड़े सैन्य घटनाक्रमों के बारे में लिखा था, वहीं इस बार उन्होंने हल्के अंदाज में सेना की कहानियों को सामने रखा है।

इस किताब में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़े ऐसे किस्से शामिल हैं, जो आमतौर पर लोगों को पता नहीं होते। इसमें मिलिट्री लाइफ के अलग-अलग पहलुओं, परंपराओं और दिलचस्प घटनाओं को सरल तरीके से समझाया गया है।

पब्लिशर रूपा पब्लिकेशंस के मुताबिक, यह किताब उन कहानियों को सामने लाती है जो अब तक पर्दे के पीछे रही हैं। इसमें मिलिट्री से जुड़े मिथक, रहस्य और अंदर की बातें शामिल हैं।

पिछली किताब से शुरू हुआ विवाद

जनरल नरवणे की पिछली किताब “फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी” अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है। लेकिन उसके कुछ हिस्सों को लेकर पिछले संसदीय सत्र में विवाद खड़ा हो गया था।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस किताब के कुछ हिस्सों का जिक्र किया था। इसके बाद संसद में इस मुद्दे पर बहस शुरू हो गई। सत्तापक्ष के नेताओं ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि एक ऐसी किताब का जिक्र नहीं किया जाना चाहिए, जो अभी आधिकारिक रूप से जारी ही नहीं हुई है।

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी थी और बिना पुष्टि वाली सामग्री का हवाला देने की आलोचना की थी। इसके बाद संसद में माहौल काफी गर्म हो गया था।

“मुझे गलत तरीके से घसीटा गया”

इस पूरे विवाद पर जनरल नरवणे ने कहा कि यह उनके लिए ठीक नहीं था। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें ऐसे मामले में शामिल कर दिया गया, जिसका उनसे सीधा कोई लेना-देना नहीं था।

उन्होंने कहा कि देश में और भी कई अहम मुद्दे हैं, जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि उस समय सरकार ने उनका समर्थन किया था।

उनके अनुसार, उनकी किताब एक सामान्य प्रक्रिया से गुजर रही थी और उसे लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा करना सही नहीं था।

“जो उचित समझो, वो करो” की बताई सच्चाई

पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने अपनी किताब से जुड़े विवाद के बाद पहली बार विस्तार से बात करते हुए “जो उचित समझो, वो करो” वाले बयान का मतलब साफ किया। उन्होंने कहा कि इस वाक्य का मतलब यह नहीं था कि सरकार जिम्मेदारी से पीछे हट गई थी, बल्कि इसका मतलब था कि सरकार को सेना पर पूरा भरोसा था।

जनरल नरवणे के मुताबिक, जब चीन के साथ सीमा पर तनाव चल रहा था, उस समय सरकार ने सेना को हालात के हिसाब से फैसले लेने की पूरी छूट दी थी। उन्होंने कहा कि “जो उचित समझो, वो करो” यह दिखाता है कि सरकार को सेना, उसके वरिष्ठ अधिकारियों और पूरी कमांड चेन पर पूरा विश्वास था।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि सेना पूरी तरह गैर-राजनीतिक संस्था होती है। उन्होंने कहा कि सेना हमेशा देश के हित में काम करती है और फैसले लेते समय सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है।

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जनरल नरवणे ने यह भी बताया कि उस समय सरकार और सेना के बीच पूरा तालमेल था और सभी फैसले मिलकर लिए जा रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी किताब उनके निजी अनुभवों पर आधारित है और इसमें किसी भी गोपनीय दस्तावेज का इस्तेमाल नहीं किया गया है।

चीन सीमा विवाद पर भी दिया जवाब

जनरल नरवणे ने 2020 के भारत-चीन सीमा तनाव को लेकर भी अपनी बात रखी। जब एलएसी यानी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल की स्थिति और सीमा पर तनाव को लेकर सवाल पूछा गया, तो जनरल नरवणे ने साफ कहा कि भारत के जमीन खोने की बात सही नहीं है। उन्होंने बताया कि सेना ऑपरेशन के दौरान कुछ तय गाइडलाइंस के तहत काम करती है, लेकिन जमीन पर फैसले मौके की स्थिति के अनुसार लिए जाते हैं।

जनरल नरवणे के मुताबिक, सीमा पर हालात को संभालने में सेना और सरकार के बीच अच्छा समन्वय था और उसी के आधार पर फैसले लिए गए।

उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि अगर किसी को शक है कि भारत ने जमीन खोई है, तो इसका जवाब जानने के लिए चीन से ही पूछ लेना चाहिए कि क्या उसने हाल में भारत की कोई जमीन हासिल की है।

क्या हुआ था संसद में

फरवरी में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान लोकसभा में इस मुद्दे को उठाया गया था। उस दौरान राहुल गांधी ने एक मैगजीन में छपे अंश का हवाला दिया था, जो इस किताब से जुड़ा बताया गया।

इस पर सत्तापक्ष ने विरोध जताया और कहा कि यह सामग्री प्रमाणित नहीं है। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई।

बाद में विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया, लेकिन इसे बाद में वॉयस वोट से खारिज कर दिया गया।

कैसे मिली किताब लिखने की प्रेरणा

नई किताब के बारे में बात करते हुए जनरल नरवणे ने बताया कि उन्हें यह विचार अचानक आया। उन्होंने कहा कि जब वह एक अन्य लेखक की किताब पढ़ रहे थे, तब उन्हें लगा कि भारतीय सेना के पास भी ऐसी कई कहानियां हैं, जिन्हें लोगों तक पहुंचाया जाना चाहिए।

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उन्होंने यह भी कहा कि उनके दिमाग में सेना से जुड़ी कई दिलचस्प कहानियां थीं, जिन्हें वे नजरअंदाज नहीं कर सके। इसी वजह से उन्होंने इस विषय पर लिखने का फैसला किया।

किताब में अंतरराष्ट्रीय सैन्य संबंधों की झलक

जनरल नरवणे ने एक और घटना का जिक्र किया, जो 2025 में दुबई एयर शो के दौरान हुई थी। उस समय तेजस एमके-1 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें एक भारतीय पायलट की मौत हो गई थी।

उन्होंने बताया कि इस घटना के बाद रूसी एरोबेटिक टीम ने भारतीय पायलट को श्रद्धांजलि दी थी। उन्होंने अपने प्रदर्शन को भारतीय पायलट के नाम समर्पित किया था।

जनरल नरवणे के मुताबिक, यह दिखाता है कि अलग-अलग देशों की सेनाओं के बीच पेशेवर स्तर पर आपसी सम्मान और जुड़ाव कितना गहरा होता है।

सैन्य जीवन के अलग पहलुओं को दिखाती किताब

जनरल नरवणे की नई किताब का मकसद सैन्य जीवन के उस पहलू को सामने लाना है, जो आमतौर पर खबरों में नहीं दिखता। इसमें युद्ध या रणनीति के बजाय लोगों, परंपराओं और अनुभवों पर ज्यादा ध्यान दिया गया है।

इस किताब के जरिए उन्होंने सेना के मानवीय और सांस्कृतिक पक्ष को सामने रखने की कोशिश की है, जिससे आम लोगों को सेना को समझने का एक नया नजरिया मिल सके।

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