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प्रयागराज में डिफेंस टेक्नोलॉजी का महाकुंभ, रक्षा मंत्री करेंगे नॉर्थ टेक सिम्पोजियम का उद्घाटन, 284 कंपनियां दिखाएंगी सैन्य तकनीक

इस सिम्पोजियम की सबसे खास बात यह है कि इसमें करीब 284 कंपनियां अपने स्टॉल लगाकर नई तकनीकों का प्रदर्शन करेंगी। इनमें एमएसएमई, प्राइवेट डिफेंस टेक कंपनियां, स्टार्टअप्स और सेना से जुड़े इनोवेटर्स शामिल होंगे...

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📍नई दिल्ली/प्रयागराज | 3 May, 2026, 7:04 PM

North Tech Symposium 2026: देश में डिफेंस टेक्नोलॉजी एंड मिलिट्री इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए 4 मई से प्रयागराज में तीन दिन का ‘नॉर्थ टेक सिम्पोजियम’ शुरू होने जा रहा है। जिसका उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। इस कार्यक्रम की थीम है ‘रक्षा त्रिवेणी संगम’, जिसका मतलब है तकनीक, इंडस्ट्री और सैनिकों के अनुभव का एक साथ मिलना।

यह आयोजन भारतीय सेना के नॉर्दर्न कमांड और सेंट्रल कमांड के साथ-साथ सोसायटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) द्वारा मिलकर किया जा रहा है। यह कार्यक्रम 4 मई से शुरू होकर 6 मई तक चलेगा और इसमें देशभर से रक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, उद्योग प्रतिनिधि और स्टार्टअप्स हिस्सा लेंगे।

North Tech Symposium 2026: प्रयागराज में जुटेंगे सेना, उद्योग और वैज्ञानिक

प्रयागराज को इस आयोजन के लिए इसलिए चुना गया है क्योंकि इसे ‘संगम नगरी’ के रूप में जाना जाता है। इसी सोच के साथ इस सिम्पोजियम का नाम ‘रक्षा त्रिवेणी संगम’ रखा गया है। यहां सेना, टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री एक प्लेटफॉर्म पर आएंगे।

इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह भी शामिल होंगे।

284 कंपनियां दिखाएंगी अपनी टेक्नोलॉजी

इस सिम्पोजियम की सबसे खास बात यह है कि इसमें करीब 284 कंपनियां अपने स्टॉल लगाकर नई तकनीकों का प्रदर्शन करेंगी। इनमें एमएसएमई, प्राइवेट डिफेंस टेक कंपनियां, स्टार्टअप्स और सेना से जुड़े इनोवेटर्स शामिल होंगे।

यहां कई तरह की आधुनिक तकनीकें दिखाई जाएंगी, जिनका सीधा इस्तेमाल सेना के ऑपरेशन में हो सकता है। इसका मकसद यह समझना है कि कौन-सी तकनीक फील्ड में काम आ सकती है और किस तरह उसे जल्दी अपनाया जा सकता है।

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सेना की जरूरतों के हिसाब से तकनीक

भारतीय सेना लगातार यह कोशिश कर रही है कि बदलते युद्ध के माहौल के अनुसार नई तकनीकों को अपनाया जाए। आज के समय में युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नेटवर्क सिस्टम से भी लड़ा जा रहा है।

इस सिम्पोजियम में सेना उन तकनीकों पर ध्यान दे रही है, जो सीधे ऑपरेशनल चुनौतियों को हल कर सकें। इसमें निगरानी, कम्युनिकेशन, मोबिलिटी और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी तकनीकें शामिल हैं।

North Tech Symposium 2026

लाइव डेमो में दिखेगा भविष्य का युद्ध

इस आयोजन में कई तकनीकों का लाइव डेमोंस्ट्रेशन भी किया जाएगा। इसमें खास तौर पर एआई आधारित सर्विलांस सिस्टम और हैवी-लिफ्ट लॉजिस्टिक्स ड्रोन शामिल हैं। ये ड्रोन दूर-दराज और कठिन इलाकों में सेना की मदद कर सकते हैं।

इसके अलावा ऐसे सिस्टम भी दिखाए जाएंगे, जो सैनिकों की सुरक्षा बढ़ाने और ऑपरेशन को ज्यादा प्रभावी बनाने में मदद करते हैं। इन तकनीकों को खासतौर पर पहाड़ी और दुर्गम इलाकों के लिए तैयार किया गया है।

स्वदेशी हथियारों और सिस्टम पर फोकस

सिम्पोजियम में स्वदेशी यानी इंडिजिनस तकनीकों पर खास ध्यान दिया जाएगा। इसमें आर्टिलरी सिस्टम, नए प्रोटोटाइप और अन्य रक्षा उपकरण शामिल होंगे, जो देश में ही डेवलप किए गए हैं।

सरकार का फोकस ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर है, इसलिए इस तरह के आयोजनों के जरिए विदेशी निर्भरता कम करने की कोशिश की जा रही है। यहां कंपनियां यह दिखाएंगी कि कैसे उनके इनोवेशन को असली रक्षा उत्पाद में बदला जा सकता है।

इंडस्ट्री और सेना के बीच सीधा संपर्क

इस आयोजन का एक बड़ा मकसद यह भी है कि सेना और इंडस्ट्री के बीच सीधा संपर्क बने। अक्सर देखा जाता है कि तकनीक तैयार होने के बाद भी उसे फील्ड में लाने में समय लग जाता है।

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नॉर्थ टेक सिम्पोजियम को ‘सिंगल विंडो प्लेटफॉर्म’ की तरह तैयार किया गया है, जहां सेना अपनी जरूरत सीधे कंपनियों के सामने रख सकती है और कंपनियां उसी हिसाब से समाधान दे सकती हैं।

मेंटेनेंस और प्रोक्योरमेंट पर भी ध्यान

इस कार्यक्रम में सिर्फ नई तकनीक पर ही नहीं, बल्कि उसके रखरखाव और खरीद प्रक्रिया पर भी चर्चा होगी। इसका उद्देश्य यह है कि सिस्टम को फील्ड में तैनात करने के बाद उसे लंबे समय तक सही तरीके से चलाया जा सके।

साथ ही प्रोक्योरमेंट यानी खरीद प्रक्रिया को भी आसान बनाने पर जोर दिया जाएगा, ताकि नई तकनीकों को तेजी से सेना तक पहुंचाया जा सके।

सिम्पोजियम के दौरान कई थीमैटिक सेशन भी आयोजित किए जाएंगे, जहां वैज्ञानिक, रक्षा विशेषज्ञ और इंडस्ट्री लीडर्स अपने अनुभव साझा करेंगे। इन सेशन्स में रक्षा निर्माण, नई तकनीक और ऑपरेशन से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी।

यह मंच रिसर्च, डेवलपमेंट और फील्ड एक्सपीरियंस को जोड़ने का काम करेगा, जिससे नई तकनीकों को बेहतर तरीके से समझा जा सके।

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