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उज्बेकिस्तान में चल रही भारत-उज्बेकिस्तान मिलिट्री एक्सरसइज ‘दस्तलिक 2026’, ड्रोन से लेकर स्नाइपर तक हो रही ट्रेनिंग

कुल 14 दिनों के इस अभ्यास में दोनों सेनाओं के लगभग 60-60 सैनिकों हिस्सा ले रहे हैं। भारत की तरफ से भारतीय सेना की महार रेजिमेंट के 45 सैनिक और भारतीय वायुसेना के 15 जवान इस अभ्यास में शामिल हैं...

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📍नई दिल्ली | 20 Apr, 2026, 12:57 PM

Exercise Dustlik 2026: भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘एक्सरसाइज दस्तलिक 2026’ इन दिनों उज्बेकिस्तान के नमांगन क्षेत्र में आयोजित की जा रही है। यह अभ्यास 12 अप्रैल से शुरू होकर 25 अप्रैल तक चलेगा। यह इस सीरीज का सातवां संस्करण है और दोनों देशों की सेनाएं इसमें मिलकर ट्रेनिंग कर रही हैं।

इस अभ्यास का मकसद दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना और एक साथ ऑपरेशन करने की क्षमता को मजबूत करना है। यह अभ्यास हर साल आयोजित किया जाता है और बारी-बारी से दोनों देशों में होता है। इस बार इसकी मेजबानी उज्बेकिस्तान कर रहा है।

Exercise Dustlik 2026: गुरुमसराय फील्ड ट्रेनिंग एरिया में ट्रेनिंग

कुल 14 दिनों के इस अभ्यास में दोनों सेनाओं के लगभग 60-60 सैनिकों हिस्सा ले रहे हैं। भारत की तरफ से भारतीय सेना की महार रेजिमेंट के 45 सैनिक और भारतीय वायुसेना के 15 जवान इस अभ्यास में शामिल हैं।

इस बार अभ्यास का आयोजन गुरुमसराय फील्ड ट्रेनिंग एरिया में किया जा रहा है, जो अर्ध-पहाड़ी इलाका है। यहां का भूभाग ऊबड़-खाबड़ है और ऑपरेशन के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ऐसे इलाके में काम करने के लिए सैनिकों को खास तरह की ट्रेनिंग की जरूरत होती है।

इसी वजह से इस अभ्यास में ऐसे हालात तैयार किए गए हैं, जहां सैनिकों को असली ऑपरेशन जैसा अनुभव मिल सके। दोनों देशों के सैनिक एक साथ मिलकर प्लानिंग और अभ्यास कर रहे हैं। (Exercise Dustlik 2026)

अभ्यास के शुरुआती दिनों में सैनिकों ने इलाके को समझने पर ध्यान दिया। इसे एरिया फैमिलराइजेशन कहा जाता है। इसमें सैनिक उस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, रास्तों और संभावित खतरे वाले इलाकों को समझते हैं।

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इसके साथ ही दोनों देशों की सेनाओं ने एक-दूसरे के तरीके भी सीखे। इसमें टैक्टिक्स, टेक्नीक और प्रोसीजर्स यानी काम करने के तरीके का आदान-प्रदान किया गया। इससे संयुक्त ऑपरेशन के दौरान काम आसान होता है।

अलग-अलग तरह की ट्रेनिंग

अभ्यास के दौरान जवानों को कई तरह की ट्रेनिंग दी जा रही हैं। इसमें हथियार चलाने से लेकर नजदीकी लड़ाई तक के कौशल शामिल हैं। सैनिकों ने एम्बिडेक्स्ट्रस पिस्टल फायरिंग का अभ्यास किया, जिसमें दोनों हाथों से फायर करना सिखाया जाता है।

इसके अलावा रिफ्लेक्स शूटिंग पर भी काम किया गया, जिसमें तेजी से प्रतिक्रिया देना और तुरंत निशाना लगाना शामिल है। इसमें आरपीजी फायरिंग का अभ्यास भी कराया गया, जिससे भारी हथियारों के इस्तेमाल की समझ बढ़ती है। निहत्थे मुकाबले और बेयोनेट फाइटिंग की ट्रेनिंग भी दी गई, जिससे नजदीकी लड़ाई में सैनिकों की क्षमता मजबूत होती है।

ड्रोन और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल

इस अभ्यास में आधुनिक तकनीक पर भी खास ध्यान दिया गया है। सैनिकों को यूएवी एप्लीकेशन यानी ड्रोन के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी गई। ड्रोन की मदद से निगरानी करना, जानकारी जुटाना और लक्ष्य पहचानना सिखाया गया। आज के समय में ड्रोन युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं, इसलिए दोनों सेनाएं इस क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं।

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शहरी इलाके में ऑपरेशन की तैयारी

अभ्यास का एक हिस्सा शहरी इलाके में ऑपरेशन से भी जुड़ा है। इसमें फायर एंड मूव ड्रिल्स कराई गईं। इसका मतलब है कि सैनिक एक-दूसरे को कवर देते हुए आगे बढ़ते हैं और दुश्मन की स्थिति पर हमला करते हैं। हाउस इंटरवेंशन ड्रिल्स के जरिए इमारतों के अंदर ऑपरेशन करने की ट्रेनिंग दी गई। यह खास तौर पर आतंकवाद विरोधी अभियानों में इस्तेमाल होती है। (Exercise Dustlik 2026)

Exercise Dustlik 2026
Exercise Dustlik 2026

घायल सैनिकों को निकालने की ट्रेनिंग

अभ्यास में कॉम्बैट कैजुअल्टी एवैकुएशन पर भी ध्यान दिया गया। इसमें सिखाया जाता है कि घायल सैनिक को सुरक्षित तरीके से कैसे बाहर निकाला जाए और उसे प्राथमिक इलाज कैसे दिया जाए। यह किसी भी ऑपरेशन का अहम हिस्सा होता है, क्योंकि इससे जान बचाने में मदद मिलती है।

सैनिकों को माउंटेनियरिंग और रैपलिंग की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। इसमें ऊंचे इलाकों में चढ़ाई करना और रस्सी के सहारे नीचे उतरना शामिल है। स्नाइपर ट्रेनिंग के जरिए दूर से सटीक निशाना लगाने की क्षमता पर काम किया गया। नेविगेशन एक्सरसाइज में सैनिकों को बिना गलती के रास्ता तय करना सिखाया गया। (Exercise Dustlik 2026)

फिटनेस और टीमवर्क पर जोर

अभ्यास के दौरान सिर्फ हथियारों की ट्रेनिंग ही नहीं, बल्कि फिटनेस और टीमवर्क पर भी ध्यान दिया गया। इसके लिए रनिंग, कैलिस्थेनिक्स और योग जैसी गतिविधियां कराई गईं। इनसे सैनिकों की शारीरिक क्षमता बढ़ती है और टीम के रूप में काम करने की आदत मजबूत होती है।

अभ्यास के अगले चरण में और कठिन मिशनों की तैयारी की जा रही है। इसमें दुश्मन के ठिकानों पर स्ट्राइक ऑपरेशन, तय लक्ष्यों पर कब्जा और हेलिबोर्न ऑपरेशन शामिल हैं।

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हेलिबोर्न ऑपरेशन में हेलीकॉप्टर के जरिए सैनिकों को उतारकर ऑपरेशन किया जाता है। इसके साथ ही संयुक्त कमांड और कंट्रोल सिस्टम बनाने का भी अभ्यास होगा।

इस पूरे अभ्यास का मुख्य फोकस यही है कि दोनों देशों की सेनाएं एक साथ बेहतर तरीके से काम कर सकें। इसके लिए हर स्तर पर समन्वय बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

अभ्यास के दौरान अलग-अलग परिस्थितियों में मिलकर काम करने की ट्रेनिंग दी जा रही है, जिससे वास्तविक ऑपरेशन में तालमेल बना रहे। (Exercise Dustlik 2026)

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  • News Desk

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