📍vR | 4 Jun, 2026, 12:56 PM
S-400 Bodyguard Pantsir System: भारत को अपना चौथा एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 मिल गया है। भारत और रूस के बीच साल 2018 में पांच एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद का समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत भारत को कुल पांच स्क्वाड्रन मिलने हैं। भारतीय वायुसेना ने रूस निर्मित एस-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम को “सुदर्शन चक्र” नाम दिया है। यह दुनिया के सबसे आधुनिक और लंबी दूरी तक मार करने वाले एयर डिफेंस सिस्टमों में गिना जाता है। इसकी क्षमता इतनी ज्यादा है कि यह सैकड़ों किलोमीटर दूर उड़ रहे लड़ाकू विमान, क्रूज मिसाइल, बैलिस्टिक मिसाइल और निगरानी विमानों को निशाना बना सकता है।
लेकिन चाहे कोई भी हथियार कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो, उसकी सुरक्षा के लिए भी एक सुरक्षा कवच की जरूरत होती है। यही वजह है कि रूस अपनी एस-400 बैटरियों को अकेले तैनात नहीं करता। इनके साथ हमेशा एक विशेष शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम लगाया जाता है, जिसका नाम है पेंटसिर-एस1 या पेंटसिर-एस1एम।
इसी वजह से दुनिया भर के सैन्य विश्लेषक पेंटसिर को एस-400 का “बॉडीगार्ड” कहते हैं।
S-400 Bodyguard Pantsir System: आखिर एस-400 को क्यों पड़ती है बॉडीगार्ड की जरूरत?
पहली नजर में यह सवाल अजीब लग सकता है कि जब एस-400 खुद 400 किलोमीटर दूर तक टारगेट को मार सकता है, तो उसे सुरक्षा की क्या जरूरत है।
दरअसल आधुनिक युद्ध में खतरे केवल लड़ाकू विमानों या बड़ी मिसाइलों से नहीं आते। पिछले कुछ सालों में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदला है। यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व के संघर्ष और हाल के सैन्य अभियानों ने दिखाया है कि छोटे ड्रोन, कामिकाजे ड्रोन, लॉयटरिंग म्यूनिशन और कम ऊंचाई पर उड़ने वाली क्रूज मिसाइलें भी बड़े एयर डिफेंस सिस्टम के लिए चुनौती बन सकते हैं।
ऐसे हथियार बहुत कम ऊंचाई पर उड़ते हैं और कई बार रडार की पकड़ से बचने की कोशिश करते हैं। यदि इनमें से कोई हथियार एस-400 की बैटरी, उसके रडार या कमांड सेंटर तक पहुंच जाए तो पूरे एयर डिफेंस नेटवर्क को नुकसान हो सकता है। (S-400 Bodyguard Pantsir System)
क्या है पेंटसिर सिस्टम?
पेंटसिर रूस का ही बनाया हुआ एक शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम है। इसे केबीपी इंस्ट्रूमेंट डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें मिसाइल और गन दोनों लगे होते हैं। यानी यह दो तरह से हमला कर सकता है।
वहींस, पेंटसिर कोई एस-400 की तरह बड़ा एयर डिफेंस सिस्टम नहीं है। यह एक छोटा लेकिन बेहद तेज शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसे आमतौर पर एक कॉम्बैट व्हीकल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यानी पूरा सिस्टम एक ट्रक पर लगा होता है और जरूरत पड़ते ही कुछ मिनटों में कार्रवाई शुरू कर सकता है।
एक पेंटसिर यूनिट में 12 मिसाइलें लगी होती हैं, जो लॉन्च के लिए हमेशा तैयार रहती हैं। ये मिसाइलें हवाई जहाज, हेलीकॉप्टर, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और लॉयटरिंग म्यूनिशन जैसे लक्ष्यों को मार सकती हैं। इसकी मारक क्षमता लगभग 20 किलोमीटर तक होती है।
मिसाइलों के अलावा पेंटसिर में दो शक्तिशाली 30 मिमी ऑटोमैटिक गन भी लगी होती हैं। ये गन प्रति मिनट लगभग 5,000 राउंड फायर कर सकती हैं और करीब 4 किलोमीटर तक के टारगेट्स को हिट कर सकती हैं। किसी ड्रोन या मिसाइल के बहुत करीब आने पर ये गन तुरंत एक्टिव हो जाती हैं।
पेंटसिर की एक और खासियत यह है कि यह एक समय में कई हवाई खतरों पर नजर रख सकता है और लगभग 4 टारगेट्स को एक साथ निशाना बना सकता है। पूरे सिस्टम को चलाने के लिए आमतौर पर तीन लोगों की जरूरत होती है, जिनमें एक ड्राइवर और दो ऑपरेटर शामिल होते हैं। (S-400 Bodyguard Pantsir System)
एस-400 में जहां “स्क्वाड्रन” शब्द इस्तेमाल होता है, वहीं पेंटसिर के लिए आमतौर पर “बैटरी” शब्द इस्तेमाल किया जाता है। एक बैटरी में आमतौर पर 4 से 6 पेंटसिर व्हीकल्स होते हैं। इनके साथ एक कमांड वाहन, मिसाइल री-लोडिंग वाहन और अन्य सहायक उपकरण भी तैनात किए जाते हैं।
अगर किसी बैटरी में 6 पेंटसिर वाहन हों, तो उसके पास कुल 72 मिसाइलें और 12 ऑटोमैटिक गन उपलब्ध होती हैं। यही वजह है कि यह छोटी दूरी की हवाई सुरक्षा के लिए बेहद प्रभावी माना जाता है।
भारत में पेंटसिर सिस्टम को एस-400 की सुरक्षा के लिए देखा जा रहा है। इसका मुख्य काम एस-400 के रडार, कमांड पोस्ट और लॉन्चरों को ड्रोन, कम ऊंचाई पर उड़ने वाली क्रूज मिसाइलों और अन्य नजदीकी हवाई खतरों से बचाना होगा। इसी कारण इसे अक्सर एस-400 का “बॉडीगार्ड” कहा जाता है।
सरल शब्दों में कहें तो एस-400 दूर बैठे दुश्मन को मारता है, जबकि पेंटसिर उन खतरों को खत्म करता है जो एस-400 के बहुत करीब पहुंच जाते हैं। दोनों मिलकर एक मजबूत और बहुस्तरीय हवाई सुरक्षा कवच तैयार करते हैं। (S-400 Bodyguard Pantsir System)

ड्रोन वॉरफेयर में बढ़ी जरूरत
कुछ साल पहले तक एयर डिफेंस सिस्टम मुख्य रूप से लड़ाकू विमानों और बड़ी मिसाइलों के खिलाफ बनाए जाते थे। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। आज हजारों डॉलर की कीमत वाला एक छोटा ड्रोन करोड़ों रुपये के मिलिट्री सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध में कई बार ऐसे वीडियो सामने आए जिनमें सस्ते एफपीवी ड्रोन ने टैंक, रडार और सैन्य वाहनों को निशाना बनाया। यही कारण है कि बड़े एयर डिफेंस सिस्टमों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सुरक्षा परत की जरूरत महसूस की जाने लगी। वहीं, पेंटसिर इसी जरूरत को पूरा करता है। (S-400 Bodyguard Pantsir System)
एस-400 और पेंटसिर मिलकर कैसे बनाते हैं सुरक्षा कवच?
सैन्य भाषा में इसे “लेयर्ड एयर डिफेंस” कहा जाता है। इसका मतलब है कि दुश्मन के हमले को रोकने के लिए सुरक्षा की कई परतें बनाई जाएं। सबसे बाहरी परत एस-400 की होती है।
यह 40 किलोमीटर से लेकर 400 किलोमीटर तक की दूरी पर दुश्मन के बड़े टारगेटों को निशाना बनाता है।
इसके बाद मध्यम दूरी वाले सिस्टम काम करते हैं। सबसे अंदर की सुरक्षा परत पेंटसिर संभालता है। यदि कोई ड्रोन, क्रूज मिसाइल या अन्य हथियार सभी परतों को पार करके अंदर तक पहुंच जाए तो पेंटसिर उसे लास्ट फेज में नष्ट करने का प्रयास करता है। इसलिए इसे एस-400 का निजी सुरक्षा गार्ड भी कहा जाता है।
रूस कैसे करता है अपनी एस-400 साइटों की सुरक्षा?
रूस लंबे समय से इस रणनीति का उपयोग कर रहा है। सीरिया में रूसी एयरबेसों की सुरक्षा के दौरान एस-400 और पेंटसिर को एक साथ तैनात किया गया था। यूक्रेन युद्ध के दौरान भी कई एस-400 बैटरियों के आसपास पेंटसिर सिस्टम देखे गए।
इनका मुख्य काम एस-400 के रडार, कमांड पोस्ट और लॉन्चर वाहनों को छोटे लेकिन खतरनाक हवाई खतरों से बचाना था। (S-400 Bodyguard Pantsir System)

भारत ने पेंटसिर खरीदने में दिखाई रुचि
भारत ने 2018 में रूस के साथ एस-400 की खरीद का समझौता किया था। इसके तहत पांच स्क्वाड्रन भारत को मिलने थे। इनमें से तीन स्क्वाड्रन पहले ही भारतीय वायुसेना को मिल चुके हैं। वहीं, चौथा स्क्वाड्रन हाल ही में भारत पहुंचा है। इसके पांच और अतिरिक्त स्क्वाड्रन भारत ने ऑर्डर किए हैं, जिन्हें रक्षा मंत्रालय से भी मंजूरी मिल चुकी है।
वहीं, हाल के सालों में ड्रोन खतरों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। पश्चिमी सीमा और उत्तरी सीमा दोनों क्षेत्रों में ड्रोन, स्वार्म अटैक और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले हथियारों का खतरा बढ़ा है।
रक्षा सूत्रों के अनुसार इसी वजह से भारतीय वायुसेना ने एस-400 बैटरियों की नजदीकी सुरक्षा के लिए पेंटसिर जैसे सिस्टम में रुचि दिखाई है। भारत ने अपनी हवाई सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए रूस से 13 पेंटसिर-एस1 एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद का प्रस्ताव रखा है। इनमें से 10 सिस्टम भारतीय वायुसेना को दिए जाने की योजना है, जिनका मुख्य काम एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की सुरक्षा करना होगा। वहीं 3 सिस्टम भारतीय थलसेना को मिल सकते हैं, जिन्हें सीमा क्षेत्रों में ड्रोन, क्रूज मिसाइल और अन्य कम ऊंचाई वाले हवाई खतरों से निपटने के लिए तैनात किया जाएगा।
इस प्रस्ताव को मार्च 2026 में रक्षा खरीद बोर्ड (डीपीबी) ने मंजूरी दी थी। इसके बाद रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने भी इसके लिए “एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी” यानी आवश्यकता की औपचारिक स्वीकृति दे दी। इसी दौरान एस-400 के लिए अतिरिक्त 288 मिसाइलों की खरीद के प्रस्ताव के साथ पेंटसिर सिस्टम को भी शामिल किया गया। (S-400 Bodyguard Pantsir System)
इस परियोजना पर काम पहले से चल रहा था। साल 2024 में भारत की भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) और रूस की रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर दस्तखत किए थे।
खरीद प्रक्रिया को तेज करने के लिए फास्ट-ट्रैक रूट अपनाया गया है, ताकि सिस्टम जल्द से जल्द भारतीय सेनाओं को मिल सकें। योजना के अनुसार शुरुआती कुछ पेंटसिर सिस्टम सीधे रूस से आयात किए जाएंगे। इसके बाद आने वाले सिस्टम भारत में ही “मेक इन इंडिया” कार्यक्रम के तहत बीडीएल और अन्य भारतीय रक्षा कंपनियों की भागीदारी से बनाए जा सकते हैं।
फिलहाल अंतिम अनुबंध पर हस्ताक्षर और सिस्टम की डिलीवरी का इंतजार किया जा रहा है। पेंटसिर सिस्टम को एस-400 की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा परत माना जा रहा है, क्योंकि यह ड्रोन, कामिकाजे ड्रोन, क्रूज मिसाइल और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले अन्य हवाई खतरों को नष्ट करने में सक्षम है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ड्रोन और कम ऊंचाई वाले हवाई खतरों ने एयर डिफेंस की नई चुनौतियों को सामने रखा। लंबी दूरी वाले सिस्टम अपने काम में सफल रहे, लेकिन छोटे और तेजी से बदलते टारगेटों के खिलाफ एक अतिरिक्त सिक्योरिटी लेयर की जरूरत महसूस की गई।
इसी के चलते पेंटसिर की खरीद को लेकर चर्चा शुरू हुई। हालांकि भारत पहले से ही मल्टीलेवल एयर डिफेंस नेटवर्क डेवलप कर रहा है। इसमें एस-400, आकाश, एमआरएसएएम, क्यूआरएसएएम और दूसरे सिस्टम्स भी शामिल हैं।
वहीं, पेंटसिर को इस नेटवर्क की सबसे अंदरूनी सुरक्षा परत के रूप में देखा जा रहा है। यह उन टारगेटों को रोकने का काम करेगा जो अन्य परतों को पार करके बेहद करीब पहुंच जाएं। (S-400 Bodyguard Pantsir System)
एस-400 के एक स्क्वाड्रन में कितने लॉन्चर
भारतीय वायुसेना के एस-400 सिस्टम की एक स्क्वाड्रन में कुल 12 लॉन्चर होते हैं। यह स्क्वाड्रन दो बैटरियों में बंटी होती है और हर बैटरी में 6-6 लॉन्चर लगाए जाते हैं। इस तरह एक स्क्वाड्रन में कुल 12 लॉन्चर तैनात रहते हैं।
हर लॉन्चर में एक समय पर 4 मिसाइलें तैयार रखी जा सकती हैं। यानी 12 लॉन्चरों में कुल 48 मिसाइलें तुरंत दागने के लिए तैयार रहती हैं।
एक एस-400 स्क्वाड्रन के पास बड़ी संख्या में मिसाइलें होती हैं। इसमें करीब 256 मिसाइलों का स्टॉक रखा जाता है। इनमें अलग-अलग दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें शामिल होती हैं। 40N6E मिसाइल लगभग 400 किलोमीटर दूर तक लक्ष्य को निशाना बना सकती है, 48N6E3 की मारक क्षमता करीब 240 किलोमीटर है, जबकि 9M96E2 मिसाइल करीब 120 किलोमीटर तक के हवाई खतरों को नष्ट कर सकती है। जरूरत के अनुसार अलग-अलग मिसाइलों का इस्तेमाल किया जाता है। (S-400 Bodyguard Pantsir System)
रडार नेटवर्क है एस-400 की ताकत
एस-400 की ताकत सिर्फ उसकी मिसाइलें नहीं हैं, बल्कि उसका रडार नेटवर्क भी है। इसका 92N6E “ग्रेव स्टोन” रडार लगभग 600 किलोमीटर दूर तक हवाई गतिविधियों पर नजर रख सकता है। इसके अलावा 30K6E कमांड पोस्ट पूरे सिस्टम का दिमाग होता है, जो रडार से मिली जानकारी का विश्लेषण करके लॉन्चरों को निर्देश देता है। इसके साथ सर्च रडार, एंगेजमेंट रडार और कई सपोर्ट वाहन भी तैनात रहते हैं।
एक पूरे एस-400 स्क्वाड्रन में लॉन्चर, रडार, कमांड वाहन और रीलोडिंग ट्रकों सहित लगभग 16 प्रमुख वाहन होते हैं। यह पूरी यूनिट बहुत तेजी से काम शुरू कर सकती है और आमतौर पर 5 से 10 मिनट के भीतर ऑपरेशन के लिए तैयार हो जाती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक एस-400 स्क्वाड्रन एक साथ 36 अलग-अलग एरियल टारगेट्स पर नजर रखकर उन्हें निशाना बना सकती है। यही वजह है कि इसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली एयर डिफेंस सिस्टमों में गिना जाता है।
भारत ने रूस से कुल 5 एस-400 स्क्वाड्रन खरीदी हैं। इसका मतलब है कि पूरी डील के तहत भारतीय वायुसेना को कुल 60 लॉन्चर मिलने हैं। ताकि इन्हें जरूरत के अनुसार पाकिस्तान या चीन सीमा के अलग-अलग क्षेत्रों में तेजी से तैनात किया जा सके। (S-400 Bodyguard Pantsir System)



