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म्यूनिख में राजनाथ सिंह का बड़ा ऐलान, जर्मन कंपनियों को दिया भारत के साथ काम करने का ऑफर

राजनाथ सिंह ने साफ कहा कि आने वाले समय में वही साझेदार टिक पाएंगे जिनके बीच भरोसा और साझा हित होंगे। उन्होंने जर्मन कंपनियों से कहा कि भारत उनके लिए सिर्फ एक बाजार नहीं है, बल्कि एक लंबे समय का स्ट्रैटेजिक पार्टनर बन सकता है...

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📍नई दिल्ली/म्यूनिख | 23 Apr, 2026, 4:26 PM

India Germany Defence Cooperation: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जर्मनी दौरे के आखिरी दिन म्यूनिख में आयोजित डिफेंस इन्वेस्टर समिट में कहा कि जर्मनी का उद्योग जगत भारत के साथ मिलकर काम करे। उन्होंने जर्मन डिफेंस इंडस्ट्री को भारत आने का निमंत्रण भी दिया और एडवांस टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में साथ मिलकर साथ विकास करने और उत्पादन करने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा दुनिया से अलग होने की नहीं, बल्कि भरोसेमंद साझेदारों के साथ मिलकर डिजाइन, डेवलपमेंट और प्रोडक्शन करने की है।

म्यूनिख में आयोजित डिफेंस इन्वेस्टर समिट में रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज के दौर में केवल मजबूत देश ही नहीं, बल्कि भरोसेमंद साझेदारी भी जरूरी हो गई है। दुनिया में तेजी से बदल रहे जियोपॉलिटिकल हालात, सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतें और टेक्नोलॉजी में तेज बदलाव के बीच देशों और कंपनियों को अपने साझेदारों का चयन सोच-समझकर करना पड़ रहा है।

India Germany Defence Cooperation: भरोसे पर आधारित साझेदारी पर जोर

राजनाथ सिंह ने साफ कहा कि आने वाले समय में वही साझेदार टिक पाएंगे जिनके बीच भरोसा और साझा हित होंगे। उन्होंने जर्मन कंपनियों से कहा कि भारत उनके लिए सिर्फ एक बाजार नहीं है, बल्कि एक लंबे समय का स्ट्रैटेजिक पार्टनर बन सकता है।

उन्होंने भारत की खासियतों को भी सामने रखा। भारत को उन्होंने एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, युवा और स्किल्ड वर्कफोर्स वाला देश बताया। साथ ही कहा कि यहां का इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है और निवेश के लिए स्थिर माहौल मौजूद है। सरकार की नीतियां पारदर्शी हैं और कानून व्यवस्था मजबूत है, जो किसी भी बड़े निवेश के लिए जरूरी होती है।

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आत्मनिर्भर भारत का नया मतलब

अपने भाषण में रक्षा मंत्री ने “आत्मनिर्भर भारत” को लेकर भी स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता का मतलब यह नहीं है कि भारत दुनिया से अलग होकर काम करेगा। बल्कि इसका अर्थ है कि भारत अपने भरोसेमंद साझेदारों के साथ मिलकर डिजाइन, डेवलपमेंट और प्रोडक्शन करेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत अब केवल डिफेंस उपकरण खरीदने वाला देश नहीं रहना चाहता। लक्ष्य यह है कि भारत खुद डिजाइन और निर्माण में भागीदार बने। इससे देश की तकनीकी क्षमता भी बढ़ेगी और इंडस्ट्री को भी मजबूती मिलेगी।

India Germany Defence Cooperation

किन क्षेत्रों में सहयोग की बात

म्यूनिख समिट के दौरान उन्होंने ‘री-आर्म यूरोप’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और जर्मनी के बीच मिलकर काम करने की काफी संभावनाएं हैं। राजनाथ सिंह ने कुछ खास क्षेत्रों का जिक्र किया, जहां भारत जर्मनी के साथ मिलकर काम करना चाहता है। इनमें एडवांस्ड रडार और सेंसर टेक्नोलॉजी, मल्टी-सेंसर सिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई आधारित ड्रोन सिस्टम, सोनाबॉय और अंडरवॉटर कम्युनिकेशन सिस्टम शामिल हैं।

इन क्षेत्रों को “निश टेक्नोलॉजी” कहा जाता है, यानी ऐसी एडवांस टेक्नोलॉजी, जो भविष्य के युद्ध और सुरक्षा जरूरतों के लिए बेहद अहम मानी जाती हैं।

2047 तक विकसित राष्ट्र बन जाएगा भारत

रक्षा मंत्री ने भारत के विकास के लक्ष्य का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि देश 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में काम कर रहा है। इस लक्ष्य को हासिल करने में डिफेंस सेक्टर को अहम भूमिका दी गई है।

उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप और डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तेजी से बढ़े हैं। बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों को उन्होंने इनोवेशन के बड़े केंद्र बताया, जहां नई तकनीकों पर काम हो रहा है।

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सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने के लिए कई सुधार किए हैं, जिससे विदेशी कंपनियों के लिए भारत में निवेश करना आसान हुआ है।

सप्लाई चेन और इंडस्ट्री सहयोग पर फोकस

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत ने डिफेंस सेक्टर को अपनी इंडस्ट्रियल और टेक्नोलॉजिकल रणनीति के केंद्र में रखा है। उनका कहना था कि मजबूत डिफेंस इंडस्ट्री न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करती है, बल्कि आर्थिक विकास में भी योगदान देती है।

रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि दुनिया भर की कंपनियां अब अपनी सप्लाई चेन को विविध बनाने पर ध्यान दे रही हैं। ऐसे में भारत एक भरोसेमंद विकल्प बनकर उभर रहा है।

उन्होंने बताया कि भारत में निर्माण लागत कम है, स्किल्ड मैनपावर उपलब्ध है और सप्लायर का बड़ा नेटवर्क मौजूद है। इससे कंपनियों को उत्पादन और सप्लाई दोनों में फायदा मिल सकता है।

भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम भी तेजी से बढ़ रहा है, जिससे नई तकनीकों के विकास के लिए अच्छा माहौल तैयार हो रहा है।

म्यूनिख समिट से पहले रक्षा मंत्री ने बर्लिन में जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। इस बैठक में दोनों देशों ने डिफेंस इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन रोडमैप पर सहमति जताई। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र पीसकीपिंग ट्रेनिंग में सहयोग के लिए एक इम्प्लीमेंटिंग अरेंजमेंट भी साइन किया गया।

इस दौरान दोनों देशों ने मिलिट्री-टू-मिलिट्री कोऑपरेशन को बढ़ाने पर भी चर्चा की, जिसमें संयुक्त अभ्यास और ट्रेनिंग शामिल हैं।

India Germany Defence Cooperation

कील में सबमरीन फैसिलिटी का दौरा

जर्मनी यात्रा के दौरान राजनाथ सिंह ने कील शहर में स्थित टीकेएमएस सबमरीन बिल्डिंग फैसिलिटी का भी दौरा किया। इस दौरान उन्होंने समुद्री रक्षा क्षमताओं और नौसेना से जुड़ी एडवांस तकनीकों को करीब से देखा।

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इस दौरे को भारत की नौसेना के आधुनिकीकरण और सबमरीन प्रोजेक्ट्स के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यहां दोनों पक्षों के बीच तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

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