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सिर्फ जनरल नहीं, ‘वॉर आर्किटेक्ट’ हैं लेफ्टिनेंट जनरल राजा सुब्रमणि, इसलिए सरकार ने उन्हें चुना नया CDS

राजा सुब्रमणि को ऐसे अधिकारी के रूप में देखा जा रहा है जो ऑपरेशनल अनुभव और रणनीतिक समझ दोनों रखते हैं। यही वजह है कि सरकार ने उन्हें देश की सबसे बड़ी सैन्य जिम्मेदारी सौंपी है...

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📍नई दिल्ली | 9 May, 2026, 12:01 PM

CDS Appointment 2026: भारत सरकार ने रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि को देश का नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) नियुक्त किया है। वह 30 मई को पदभार संभालेंगे। वर्तमान में वह नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट यानी एनएससीएस में मिलिट्री एडवाइजर के पद पर कार्यरत हैं। सेना में चार दशक से ज्यादा सेवा देने वाले राजा सुब्रमणि को पाकिस्तान और चीन दोनों मोर्चों का अनुभवी अधिकारी माना जाता है।

उनकी नियुक्ति को केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं बल्कि भारतीय सेना के बड़े सैन्य सुधारों से जोड़कर देखा जा रहा है। खासतौर पर थिएटर कमांड, ट्राई-सर्विस इंटीग्रेशन और जॉइंट वॉरफेयर जैसे लंबे समय से चल रहे सैन्य सुधार अब अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं। ऐसे समय में सरकार ने एक ऐसे अधिकारी को चुना है, जिसे ऑपरेशनल अनुभव के साथ-साथ रणनीतिक और सुधारवादी सोच वाला अधिकारी माना जाता है।

राजा सुब्रमणि मौजूदा सीडीएस जनरल अनिल चौहान की जगह लेंगे। जनरल चौहान को पिछले साल छह महीने का एक्सटेंशन दिया गया था ताकि वह मिलिट्री इंटीग्रेशन और थिएटराइजेशन से जुड़े काम को आगे बढ़ा सकें।

CDS Appointment 2026: सरकार ने फिर चुना रिटायर्ड अधिकारी

लेफ्टिनेंट जनरल राजा सुब्रमणिकी नियुक्ति ने यह भी साफ कर दिया है कि अब सीडीएस का पद केवल सबसे वरिष्ठ सेवा प्रमुख के लिए तय नहीं माना जा रहा। इस बार भी सरकार ने मौजूदा फोर स्टार सर्विस चीफ्स को पीछे छोड़ते हुए एक रिटायर्ड थ्री-स्टार अधिकारी को चुना है।

इससे पहले पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत और मौजूदा सीडीएस जनरल अनिल चौहान भी सेना से आए थे। जनरल चौहान भी रिटायरमेंट के बाद सीडीएस बने थे। अब राजा सुब्रमणि तीसरे सेना अधिकारी होंगे जो यह पद संभालेंगे।

रणनीतिक हलकों में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी और सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी को भी मजबूत दावेदार माना जा रहा था। लेकिन सरकार ने अनुभव और सैन्य सुधारों से जुड़े ट्रैक रिकॉर्ड को प्राथमिकता दी।

सूत्रों का कहना है कि वर्तमान समय में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां जमीन आधारित हैं। चीन और पाकिस्तान दोनों सीमाओं पर तनाव को देखते हुए सरकार ऐसे अधिकारी को आगे लाना चाहती थी, जिसे दोनों मोर्चों का अनुभव हो।

थिएटर कमांड सुधारों के बीच बड़ी जिम्मेदारी

राजा सुब्रमणि ऐसे समय में सीडीएस का पद संभाल रहे हैं जब भारतीय सेना के सबसे बड़े सैन्य पुनर्गठन पर काम तेजी से चल रहा है। थिएटर कमांड सुधारों को आजादी के बाद भारतीय सेना का सबसे बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव माना जा रहा है।

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पिछले कई सालों से सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच थिएटर कमांड मॉडल को लेकर चर्चा चल रही थी। हालांकि कमांड स्ट्रक्चर, संसाधनों के बंटवारे और ऑपरेशनल कंट्रोल जैसे मुद्दों पर तीनों सेनाओं के बीच मतभेद भी रहे।

जनरल अनिल चौहान के कार्यकाल में इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया गया। उन्होंने अलग-अलग सेनाओं के बीच बातचीत और सहमति बनाने पर जोर दिया। हाल ही में जयपुर में आयोजित एक सेमिनार में जनरल चौहान ने कहा था कि थिएटर कमांड से जुड़ी तीन सिफारिशें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सौंप दी गई हैं।

उन्होंने कहा था, “इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड के तहत सेनाओं के पुनर्गठन को लेकर तीन सेट की सिफारिशें रक्षा मंत्री को भेजी गई हैं।” जनरल चौहान ने यह भी बताया था कि मई के अंत तक एक नया जॉइंट ऑपरेशंस सेंटर शुरू हो जाएगा, जिसका उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और इंटीग्रेशन को मजबूत करना है। उनके मुताबिक थिएटर कमांड की पूरी नींव “जॉइंटनेस” और “इंटीग्रेशन” पर आधारित होगी।

क्या है थिएटर कमांड

वर्तमान में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना अपने-अपने कमांड सिस्टम के तहत काम करती हैं। थिएटर कमांड मॉडल में तीनों सेनाओं के रिर्सोसेज को इंटीग्रेट किया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत किसी खास क्षेत्र के लिए एक संयुक्त कमांडर होगा, जिसके पास आर्मी, एयरफोर्स और नेवी की ताकत एक साथ होगी।

मौजूदा योजना के अनुसार उत्तरी थिएटर का फोकस चीन सीमा पर होगा। वहीं, पश्चिमी थिएटर पाकिस्तान मोर्चे को संभालेगा। वहीं मैरिटाइम थिएटर हिंद महासागर क्षेत्र की जिम्मेदारी देखेगा।

सेना के अधिकारियों का मानना है कि इससे युद्ध के दौरान तेजी से फैसले लेने और संयुक्त ऑपरेशन चलाने में मदद मिलेगी।

पाकिस्तान और चीन मोर्चे का अनुभव

राजा सुब्रमणि को सेना में बेहद अनुभवी ऑपरेशनल कमांडर माना जाता है। उन्होंने अपने करियर में पाकिस्तान और चीन दोनों सीमाओं पर अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं। दिसंबर 1985 से 31 जुलाई 2025 तक करीब 39 वर्ष सेवा करने के बाद वे 47वें वाइस चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ (VCOAS) के पद से रिटायर हुए थे। उन्होंने यह पद 1 जुलाई 2024 से संभाला था।

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उन्होंने भारतीय सेना की 2 कोर की कमान संभाली थी, जिसे पश्चिमी मोर्चे की सबसे अहम स्ट्राइक कोर माना जाता है। यह फॉर्मेशन पाकिस्तान सीमा पर बड़े ऑपरेशंस के लिए जानी जाती है।

इसके अलावा उन्होंने जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर और उत्तरी सीमाओं पर भी कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया।

उन्होंने असम में ऑपरेशन राइनो के दौरान 16 गढ़वाल राइफल्स की कमान संभाली। जम्मू-कश्मीर में 168 इन्फैंट्री ब्रिगेड और सेंट्रल सेक्टर में 17 माउंटेन डिवीजन का नेतृत्व भी किया।

सेना में उन्हें शांत लेकिन सख्त अधिकारी माना जाता है। कई अधिकारी उन्हें “सोल्जर-स्कॉलर” यानी सैन्य रणनीति समझने वाला युद्ध अनुभव रखने वाला अधिकारी बताते हैं।

एनएससीएस में निभा रहे थे अहम भूमिका

सेना से रिटायर होने के बाद सितंबर 2025 में उन्हें नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट में मिलिट्री एडवाइजर बनाया गया था। यह संस्था राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के नेतृत्व में काम करती है।

एनएससीएस राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की कार्यकारी इकाई मानी जाती है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में सरकार को सलाह और अलग-अलग मंत्रालयों के बीच समन्वय का काम करती है।

इस संस्था में मिलिट्री अफेयर्स, टेक्नोलॉजी, इंटेलिजेंस कोऑर्डिनेशन और मैरिटाइम सिक्योरिटी जैसे कई विभाग होते हैं। मिलिट्री एडवाइजर का दफ्तर सेना और एनएससीएस के बीच मुख्य कड़ी माना जाता है। यहां से ऑपरेशनल तैयारी, फोर्स प्लानिंग और क्षमता विकास से जुड़ी जानकारी दी जाती है।

लंबा सैन्य और अकादमिक अनुभव

राजा सुब्रमणि ने 14 दिसंबर 1985 को 8वीं बटालियन गढ़वाल राइफल्स में कमीशन लिया था। वह नेशनल डिफेंस अकादमी और इंडियन मिलिट्री अकादमी के पूर्व छात्र हैं।

उन्होंने ब्रिटेन के ब्रैकनेल स्थित जॉइंट सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज से भी प्रशिक्षण लिया। इसके अलावा नई दिल्ली के नेशनल डिफेंस कॉलेज से उच्च सैन्य शिक्षा हासिल की।

उनके पास किंग्स कॉलेज लंदन से मास्टर ऑफ आर्ट्स की डिग्री और मद्रास यूनिवर्सिटी से डिफेंस स्टडीज में एमफिल की डिग्री भी है।

मिलिट्री इंटेलिजेंस और ऑपरेशंस का अनुभव

राजा सुब्रमणि ने सेना में कई रणनीतिक पदों पर भी काम किया है। वह मिलिट्री इंटेलिजेंस में डिप्टी डायरेक्टर जनरल रहे। इसके अलावा ईस्टर्न कमांड में ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ ऑपरेशंस और कर्नल जनरल स्टाफ ऑपरेशंस की जिम्मेदारी भी संभाली।

उन्होंने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज वेलिंगटन में चीफ इंस्ट्रक्टर के रूप में भी काम किया। नॉर्दर्न कमांड में चीफ ऑफ स्टाफ और बाद में सेंट्रल कमांड के प्रमुख भी रहे।

विदेश में भारत के डिफेंस अटैची के तौर पर उन्होंने कजाकिस्तान में भी सेवा दी हैं।

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जॉइंटनेस पर रहेगा बड़ा फोकस

राजा सुब्रमणि ऐसे समय में सीडीएस बन रहे हैं जब भारतीय सेना “जॉइंट वॉरफेयर” मॉडल पर तेजी से काम कर रही है। हाल ही में जयपुर में हुई जॉइंट कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में भी मल्टी-डोमेन ऑपरेशन, साइबर वॉरफेयर, एआई और जॉइंटनेस पर जोर दिया गया था।

सीडीएस जनरल अनिल चौहान लगातार कह रहे थे कि भविष्य के युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों से नहीं बल्कि डेटा, नेटवर्किंग, साइबर और इंटीग्रेटेड ऑपरेशन से तय होंगे।

राजा सुब्रमणि अब उसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे, जिसमें तीनों सेनाओं को अलग-अलग सोच से निकालकर एक जॉइंट कॉम्बैट स्ट्रक्चर्स में लाने की कोशिश हो रही है।

सेना के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि थिएटराइजेशन केवल नया कमांड सिस्टम नहीं बल्कि पूरी सैन्य सोच में बदलाव है। इसमें संसाधनों का साझा इस्तेमाल, संयुक्त ऑपरेशन और तेज फैसले लेने पर जोर दिया जा रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा फोकस

सैन्य हलकों में यह भी माना जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद जॉइंट ऑपरेशन और मल्टी-डोमेन वॉरफेयर को लेकर फोकस और बढ़ा है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना, वायुसेना और दूसरे सुरक्षा तंत्रों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत महसूस की गई थी। इसके बाद थिएटर कमांड और जॉइंट ऑपरेशंस सेंटर को लेकर काम तेज हुआ।

राजा सुब्रमणि को ऐसे अधिकारी के रूप में देखा जा रहा है जो ऑपरेशनल अनुभव और रणनीतिक समझ दोनों रखते हैं। यही वजह है कि सरकार ने उन्हें देश की सबसे बड़ी सैन्य जिम्मेदारी सौंपी है।

अब वह सीडीएस के साथ-साथ डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स के सचिव की भूमिका भी निभाएंगे। इस पद पर रहते हुए उन्हें सैन्य सुधारों, तीनों सेनाओं के तालमेल और थिएटर कमांड जैसे बड़े बदलावों को जमीन पर लागू करने की जिम्मेदारी संभालनी होगी।

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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