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चीन ने पहली बार कबूला, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान एयरफोर्स के साथ थे चीनी एक्सपर्ट, दिया था ऑन-साइट सपोर्ट

दक्षिण चीन मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के सरकारी चैनल सीसीटीवी पर प्रसारित एक इंटरव्यू में चीनी इंजीनियरों ने बताया कि वे मई 2025 में भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान पाकिस्तान में मौजूद थे...

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📍नई दिल्ली | 8 May, 2026, 8:22 PM

Operation Sindoor China Helps Pakistan: चीन ने पहली बार आधिकारिक तौर पर माना है कि उसने पिछले साल 6-7 मई से 10 मई तक चले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान वायुसेना को तकनीकी मदद दी थी। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ मनाई जा रही है।

दक्षिण चीन मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के सरकारी चैनल सीसीटीवी पर प्रसारित एक इंटरव्यू में चीनी इंजीनियरों ने बताया कि वे मई 2025 में भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान पाकिस्तान में मौजूद थे और वहां चीनी लड़ाकू विमानों को टेक्निकल सपोर्ट दे रहे थे।

यह पहली बार है जब चीन ने सार्वजनिक रूप से माना है कि उसके कर्मचारी युद्ध के दौरान पाकिस्तान वायुसेना के साथ काम कर रहे थे। हालांकि चीन ने सीधे इस लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया।

22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बेहद बढ़ गया था। जिसके बाद भारत ने बेहद कंट्रोल्ड/कैलिब्रेटेड/लिमिटेड तरीके से 6-7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू करते हुए पाकिस्तान और पीओके में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था।

Operation Sindoor China Helps Pakistan: क्या कहा चीनी इंजीनियरों ने

सीसीटीवी को दिए इंटरव्यू में एविएशन इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन ऑफ चाइना यानी एवीआईसी के इंजीनियर झांग हेंग ने बताया कि वह पाकिस्तान में सपोर्ट बेस पर तैनात थे।

उन्होंने कहा, “हम लगातार लड़ाकू विमानों के टेकऑफ की आवाज सुनते थे। एयर रेड सायरन लगातार बजते रहते थे। मई की गर्मी में तापमान 50 डिग्री तक पहुंच जाता था। यह मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद कठिन समय था।”

झांग हेंग ने कहा कि ऑन-साइट सपोर्ट को लेकर उनकी टीम का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना था कि चीनी उपकरण पूरी लड़ाकू क्षमता के साथ काम करें।

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एक दूसरे इंजीनियर जु दा ने जे-10सीई लड़ाकू विमान की तुलना “बच्चे” से की। उन्होंने कहा, “हमने इसे पाला, इसकी देखभाल की और फिर यूजर को सौंप दिया। अब यह अपनी सबसे बड़ी परीक्षा से गुजर रहा था।”

उन्होंने यह भी कहा कि जे-10सीई के प्रदर्शन से उन्हें कोई आश्चर्य नहीं हुआ। उनके मुताबिक विमान को सिर्फ सही मौका चाहिए था।

ये दोनों इंजीनियर जे-10सीई के मेंटेनेंस, सॉफ्टवेयर अपडेट, हार्डवेयर सपोर्ट, पीएल-15 मिसाइलों के इंटीग्रेशन और AESA रडार की परफॉर्मेंस सुनिश्चित करने के लिए पाकिस्तान गए थे। उन्होंने पाकिस्तानी ग्राउंड क्रू और पायलटों के साथ मिलकर काम किया था।

क्या है जे-10सीई लड़ाकू विमान

जे-10सीई चीन के जे-10सी फाइटर जेट का एक्सपोर्ट वर्जन है। इसे 4.5 जनरेशन मल्टी रोल फाइटर माना जाता है। इसमें एईएसए रडार लगा है, जो दुश्मन के विमान को काफी दूर से ट्रैक कर सकता है। यह पीएल-15 जैसी लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल ले जा सकता है। पीएल-15 मिसाइल की रेंज 200 किलोमीटर से ज्यादा बताई जाती है। कई विशेषज्ञ इसे यूरोप की मीटियोर मिसाइल के बराबर या उससे बेहतर मानते हैं।

पाकिस्तान ने 2020 में चीन से 36 जे-10सीई विमान और 250 पीएल-15 मिसाइलें खरीदी थीं। चीन के बाहर पाकिस्तान ही इस विमान का सबसे बड़ा ऑपरेटर है।

भारत ने पहले ही लगाए थे आरोप

इससे पहले पिछले साल भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने पहले ही चीन पर पाकिस्तान को मदद देने का आरोप लगाया था।

भारतीय सेना के डिप्टी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह ने जुलाई 2025 में कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को चीन से रियल टाइम इंटेलिजेंस मिल रही थी।

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उन्होंने कहा था कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच डीजीएमओ स्तर की बातचीत चल रही थी, तब पाकिस्तान को भारतीय सैन्य गतिविधियों की लाइव जानकारी चीन से मिल रही थी।

लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने इसे “वन बॉर्डर, टू एडवर्सरीज” की स्थिति बताया था। उनके मुताबिक पाकिस्तान सामने था, लेकिन चीन पूरी तरह उसकी मदद कर रहा था।

सैटेलाइट और रडार सपोर्ट दिया

सेंटर फॉर जॉइंट वॉरफेयर स्टडीज (CENJOWS) के डीजी मेजर जनरल अशोक कुमार ने भी मई 2025 में दावा किया था कि चीन ने पाकिस्तान को सैटेलाइट और रडार सपोर्ट दिया। उन्होंने कहा था कि चीन ने भारत पर अपनी सैटेलाइट निगरानी बढ़ाई और पाकिस्तान को भारतीय सैनिकों और एयर मूवमेंट की जानकारी दी।

कई रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि चीन के बेइदोउ सैटेलाइट सिस्टम और याओगन-गाओफेन सैटेलाइट नेटवर्क का इस्तेमाल पाकिस्तान की मदद के लिए किया गया।

चीन-पाकिस्तान रक्षा साझेदारी कितनी गहरी

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी SIPRI की रिपोर्ट के मुताबिक 2021 से 2025 के बीच पाकिस्तान के कुल हथियार आयात का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा चीन से आया। चीन ने पाकिस्तान को जेएफ-17 लड़ाकू विमान, अवाक्स सिस्टम, ड्रोन, मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम भी दिए हैं। जेएफ-17 लड़ाकू विमान तो चीन और पाकिस्तान ने मिलकर तैयार किया था। अब जे-10सीई पाकिस्तान वायुसेना का सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान माना जाता है।

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