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उड़ने वाला ‘कलाश्निकोव’ बना भारत का नया हथियार, ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा प्रोडक्शन

भारतीय कंपनी आईजी डिफेंस ने दावा किया है कि वह अब रोजाना 200 एफपीवी कामिकाजे ड्रोन तैयार कर रही है। कंपनी को भारतीय सेना और नौसेना से 5000 से ज्यादा ड्रोन का बड़ा ऑर्डर भी मिला है...

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📍नई दिल्ली | 7 May, 2026, 8:31 PM

IG Defence Kamikaze Drone: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने जिस तरह बड़े पैमाने पर ड्रोन और प्रिसीजन स्ट्राइक सिस्टम का इस्तेमाल किया, उसके बाद देश में स्वदेशी कामिकाजे ड्रोन की मांग तेजी से बढ़ गई है। भारतीय कंपनी आईजी डिफेंस ने दावा किया है कि वह अब रोजाना 200 एफपीवी कामिकाजे ड्रोन तैयार कर रही है। कंपनी को भारतीय सेना और नौसेना से 5000 से ज्यादा ड्रोन का बड़ा ऑर्डर भी मिला है।

पहले आईजी ड्रोंस के नाम से पहचान रखने वाली यह कंपनी अब भारतीय रक्षा क्षेत्र में तेजी से उभरती हुई कंपनियों में गिनी जा रही है। कंपनी के ड्रोन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल किए गए थे। इन ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी, टारगेट की पहचान और सटीक हमलों के लिए किया गया।

IG Defence Kamikaze Drone: ऑपरेशन सिंदूर में दिखी ड्रोन वॉरफेयर की ताकत

मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर को भारत का बड़ा मल्टी-डोमेन ऑपरेशन माना जाता है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुए इस अभियान में सेना, वायुसेना और नौसेना ने मिलकर कार्रवाई की थी। इस ऑपरेशन में ड्रोन वॉरफेयर की भूमिका काफी अहम रही।

भारतीय सेना ने कई स्वदेशी ड्रोन सिस्टम का इस्तेमाल किया। इनमें एफपीवी यानी फर्स्ट पर्सन व्यू कामिकाजे ड्रोन भी शामिल थे। इन ड्रोन की मदद से दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करना आसान हुआ।

आईजी डिफेंस के मुताबिक कंपनी के ड्रोनों ने ऑपरेशन के दौरान आईएसआर यानी इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस मिशन में मदद की। इसके अलावा प्रिसीजन स्ट्राइक और टारगेट ट्रैकिंग में भी इनका इस्तेमाल किया गया।

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क्या होता है एफपीवी कामिकाजे ड्रोन

एफपीवी कामिकाजे ड्रोन को ऑपरेटर लाइव वीडियो फीड के जरिए कंट्रोल करता है। इसमें कैमरा लगा होता है और ऑपरेटर को ऐसा विजुअल दिखाई देता है जैसे वह खुद ड्रोन के अंदर बैठा हो।

यह ड्रोन सीधे टारगेट से टकराकर विस्फोट करता है। इसी वजह से इसे कामिकाजे ड्रोन कहा जाता है। आधुनिक युद्ध में ऐसे ड्रोन तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं क्योंकि ये कम लागत में बड़े नुकसान पहुंचा सकते हैं।

“ड्रोन युग का कलाश्निकोव”

आईजी डिफेंस अपने एफपीवी स्ट्राइकर ड्रोन को “ड्रोन युग का कलाश्निकोव” बताती है। कंपनी का कहना है कि यह ड्रोन सस्ता, हल्का और बड़े पैमाने पर तेजी से तैयार किया जा सकता है।

कंपनी के मुताबिक यह ड्रोन 15 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक काम कर सकता है। इसकी फ्लाइट टाइम करीब 45 से 50 मिनट तक है। यह लगभग 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंच सकता है।

इस ड्रोन को ऊंचाई वाले इलाकों में भी सफलतापूर्वक टेस्ट किया गया है। सेना के सूत्रों के मुताबिक इसे एलएसी जैसे कठिन इलाकों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

अलग-अलग तरह के हमले करने में सक्षम

आईजी डिफेंस के एफपीवी ड्रोन में अलग-अलग तरह के वॉरहेड लगाए जा सकते हैं। इसका इस्तेमाल टैंक, बंकर, सैन्य वाहन और दुश्मन की पोस्ट को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है।

कंपनी का दावा है कि इसके ड्रोन में 95 प्रतिशत से ज्यादा फर्स्ट स्ट्राइक एक्यूरेसी है। यानी पहली बार में ही लक्ष्य को सटीक तरीके से हिट करने की क्षमता।

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इन ड्रोन को मोबाइल लॉन्चर, पोर्टेबल सिस्टम और फिक्स्ड प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है। यही वजह है कि इन्हें फ्रंटलाइन सैनिक भी आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में भी असरदार

आधुनिक युद्ध में इलेक्ट्रॉनिक जामिंग बड़ी चुनौती मानी जाती है। दुश्मन कई बार कम्युनिकेशन और जीपीएस सिस्टम को बाधित करने की कोशिश करता है।

आईजी डिफेंस का कहना है कि उसके ड्रोन जैम-रेजिस्टेंट कम्युनिकेशन सिस्टम के साथ आते हैं। इनमें एआई आधारित स्वार्म कोऑर्डिनेशन तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया है।

कंपनी के अनुसार ये ड्रोन बारिश, बर्फ और अत्यधिक गर्म मौसम में भी काम कर सकते हैं। इन्हें माइनस 20 डिग्री से लेकर 70 डिग्री तापमान तक टेस्ट किया गया है।

रोज 200 ड्रोन बना रही कंपनी

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना ने बड़ी संख्या में एफपीवी कामिकाजे ड्रोन की मांग की है। इसके बाद आईजी डिफेंस ने अपने प्रोडक्शन को “वार फुटिंग” पर बढ़ा दिया है।

कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल रोजाना करीब 200 ड्रोन तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के झांसी और ओडिशा के गंजाम में नई फैक्ट्री लगाने की तैयारी चल रही है।

कंपनी ने इसके लिए करीब 300 करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश की योजना बनाई है। लक्ष्य बड़े पैमाने पर उत्पादन बढ़ाना है ताकि सेना की जरूरतें तेजी से पूरी की जा सकें।

सेना और नौसेना से मिला बड़ा ऑर्डर

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना और नौसेना ने कंपनी पर भरोसा जताया है। आईजी डिफेंस को 5000 से ज्यादा एफपीवी कामिकाजे ड्रोन का ऑर्डर मिला है।

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कंपनी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट मेजर जनरल आर.सी. पाढ़ी (रिटायर्ड) ने कहा कि यह ऑर्डर भारतीय सेना के भरोसे को दिखाता है।

उन्होंने कहा, “युद्ध का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब केवल बड़े हथियार काफी नहीं हैं। कम लागत वाले स्मार्ट ड्रोन की भी बड़ी भूमिका है। हमारे ड्रोन ने हर मौसम और हर इलाके में अच्छा प्रदर्शन किया है।”

इन ड्रोन को पूरी तरह भारत में विकसित किया गया है। कंपनी का दावा है कि उसके पास 25 से ज्यादा पेटेंट हैं और उसने कई स्वदेशी तकनीकों पर काम किया है।

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  • News Desk

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