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पाकिस्तान सीमा पर तैनात होंगे नए स्वदेशी हथियार, सेना को मिले ULPGM मिसाइल और AGNIKAA ड्रोन

इन हथियारों को खास तौर पर ऐसे युद्ध के लिए तैयार किया गया है, जहां दुश्मन जीपीएस सिग्नल को जाम करने, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को बाधित करने और हाई वैल्यू टारगेट को छिपाने की कोशिश करता है...

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📍नई दिल्ली | 7 May, 2026, 7:29 PM

ULPGM Missile And AGNIKAA Drone: अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने भारतीय सेना की वेस्टर्न कमांड को दो नए स्वदेशी हथियार सिस्टम सौंपे हैं, जिन्हें आधुनिक युद्ध के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। अदाणी डिफेंस ने भारतीय सेना को यूएवी लॉन्च्ड प्रिसीजन गाइडेड मिसाइल (ULPGM) और अग्निका (AGNIKAA) VTOL-1 एफपीवी कामिकाजे ड्रोन सप्लाई किए हैं। दोनों सिस्टम इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट-6 (EP-6) के तहत दिए गए हैं। इनका हैंडओवर हैदराबाद में हुआ।

इन दोनों हथियार प्रणालियों को ऊंचाई वाले इलाकों और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर वाले माहौल में सफलतापूर्वक टेस्ट किया जा चुका है। यही वजह है कि इन्हें सीधे ऑपरेशनल जरूरतों के लिए शामिल किया गया है।

इन हथियारों को खास तौर पर ऐसे युद्ध के लिए तैयार किया गया है, जहां दुश्मन जीपीएस सिग्नल को जाम करने, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को बाधित करने और हाई वैल्यू टारगेट को छिपाने की कोशिश करता है। भारतीय सेना का मानना है कि ये सिस्टम सीमावर्ती इलाकों में तैनात सैनिकों की ताकत को काफी बढ़ाएंगे।

ULPGM Missile And AGNIKAA Drone: क्या है ULPGM और कैसे करती है काम

ULPGM यानी यूएवी लॉन्च्ड प्रिसीजन गाइडेड मिसाइल एक हल्की लेकिन बेहद सटीक मिसाइल है, जिसे ड्रोन या छोटे यूएवी से दागा जा सकता है। इसे डीआरडीओ के रिसर्च सेंटर इमारत ने तैयार किया है। इसके निर्माण में अदाणी डिफेंस, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और कई भारतीय एमएसएमई कंपनियों ने मिलकर काम किया है।

यह मिसाइल “फायर एंड फॉरगेट” तकनीक पर आधारित है। यानी मिसाइल लॉन्च होने के बाद खुद अपने लक्ष्य तक पहुंचती है और ऑपरेटर को लगातार उसे कंट्रोल नहीं करना पड़ता।

सेना के अधिकारियों के अनुसार यह मिसाइल छोटे बंकर, दुश्मन की पोस्ट, हल्के बख्तरबंद वाहन और आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बहुत कम नुकसान के साथ सटीक हमला करती है।

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ULPGM Missile And AGNIKAA Drone

ULPGM के कई वर्जन

इस मिसाइल के कई वर्जन बनाए गए हैं। शुरुआती मॉडल हल्के वजन का था और उसे ऊंचाई से गिराकर इस्तेमाल किया जाता था। बाद के वर्जन में रॉकेट मोटर जोड़ी गई, जिससे इसकी मारक दूरी बढ़ गई।

सबसे एडवांस वर्जन ULPGM-V3 माना जा रहा है। इसमें हाई डेफिनिशन इंफ्रारेड सीकर, लेजर गाइडेंस और टू-वे डाटा लिंक जैसी तकनीक शामिल है। सेना के सूत्रों के मुताबिक यह मिसाइल दिन और रात दोनों समय इस्तेमाल की जा सकती है।

इसमें अलग-अलग तरह के वॉरहेड लगाए जा सकते हैं। जरूरत के हिसाब से इसे टैंक, बंकर या दुश्मन के सैनिकों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

जीपीएस जाम होने पर भी काम करेगी मिसाइल

आधुनिक युद्ध में सबसे बड़ी चुनौती इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर को माना जाता है। कई बार दुश्मन जीपीएस सिग्नल को जाम कर देता है। ऐसे हालात में सामान्य हथियार टारगेट तक नहीं पहुंच पाते।

लेकिन ULPGM को इस तरह तैयार किया गया है कि यह जीपीएस जाम होने के बाद भी काम कर सके। इसमें इमेजिंग इंफ्रारेड और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल गाइडेंस सिस्टम लगाया गया है। यही वजह है कि इसे इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर वाले माहौल में भी प्रभावी माना जा रहा है।

आसानी से ले जा सकेंगे सैनिक

इस मिसाइल को हल्का और पोर्टेबल बनाया गया है। सेना के जवान इसे आसानी से साथ लेकर चल सकते हैं। इसे क्वाडकॉप्टर, हेक्साकॉप्टर और दूसरे छोटे ड्रोन प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों और सीमा पर छोटी टीमों के लिए यह सिस्टम काफी उपयोगी साबित होगा, क्योंकि इसमें भारी लॉन्चर या बड़े वाहन की जरूरत नहीं पड़ती।

ULPGM Missile And AGNIKAA Drone

AGNIKAA VTOL-1 क्या है

अदाणी डिफेंस ने सेना को जो दूसरा सिस्टम दिया है, वह अग्निका VTOL-1 एफपीवी कामिकाजे ड्रोन है। यह एक ऐसा ड्रोन है, जो लक्ष्य पर जाकर खुद विस्फोट करता है।

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यह वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग यानी VTOL तकनीक पर आधारित है। इसका मतलब है कि इसे उड़ान भरने के लिए रनवे की जरूरत नहीं होती। इसे पहाड़ी इलाकों, जंगलों और सीमित जगहों से भी लॉन्च किया जा सकता है।

एफपीवी यानी फर्स्ट पर्सन व्यू सिस्टम की वजह से ऑपरेटर को ड्रोन से रियल टाइम वीडियो दिखाई देता है। इससे लक्ष्य पर बेहद सटीक हमला करना आसान हो जाता है।

कामिकाजे ड्रोन कैसे करता है हमला

यह ड्रोन सीधे दुश्मन के लक्ष्य से टकराकर विस्फोट करता है। इसमें करीब एक से डेढ़ किलो तक का वॉरहेड लगाया जा सकता है।

सेना के अधिकारियों के मुताबिक इसका इस्तेमाल दुश्मन के वाहन, रडार, बंकर, कमांड पोस्ट और सैनिकों के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है।

इस ड्रोन को खास तौर पर फ्रंटलाइन सैनिकों के लिए डिजाइन किया गया है ताकि जरूरत पड़ने पर कुछ मिनटों में इसे लॉन्च किया जा सके।

इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में भी असरदार

AGNIKAA VTOL-1 को एंटी-जैमिंग तकनीक के साथ तैयार किया गया है। यानी दुश्मन अगर कम्युनिकेशन सिस्टम को जाम करने की कोशिश करे, तब भी यह काम कर सकता है। इसे हाई एल्टीट्यूड और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर वाले माहौल में टेस्ट किया गया है। सेना का कहना है कि यह सिस्टम सीमा पर तेजी से बदलते युद्ध माहौल में काफी उपयोगी रहेगा।

पश्चिमी सीमा पर बढ़ेगी ताकत

दोनों हथियार सिस्टम भारतीय सेना की वेस्टर्न कमांड को दिए गए हैं। यह कमांड पाकिस्तान सीमा से जुड़े इलाकों की जिम्मेदारी संभालती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रेगिस्तानी इलाकों, सीमा चौकियों और संभावित पहाड़ी ऑपरेशन में ये सिस्टम काफी अहम साबित होंगे।

सेना के एक अधिकारी ने बताया कि आधुनिक युद्ध में छोटे लेकिन सटीक हथियारों की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। ऐसे सिस्टम सैनिकों को कम जोखिम में ज्यादा प्रभावी हमला करने की क्षमता देते हैं।

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आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती

इन दोनों सिस्टम को पूरी तरह भारत में विकसित किया गया है। इसमें डीआरडीओ, अदाणी डिफेंस, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और कई भारतीय स्टार्टअप्स ने योगदान दिया है।

रक्षा मंत्रालय लंबे समय से विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में इन स्वदेशी सिस्टम्स को रक्षा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

रक्षा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इससे न केवल सेना की ताकत बढ़ेगी, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग को भी मजबूती मिलेगी। इसके जरिए देश में नई तकनीक, रोजगार और उत्पादन क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।

आधुनिक युद्ध में बढ़ रही ड्रोन और प्रिसीजन हथियारों की भूमिका

हाल के वर्षों में दुनिया के कई संघर्षों में ड्रोन और प्रिसीजन हथियारों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। यूक्रेन-रूस युद्ध के बाद लगभग हर देश ने छोटे ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया है।

भारतीय सेना भी अब ऐसे हथियारों को तेजी से शामिल कर रही है। सेना का मानना है कि भविष्य के युद्ध में ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सटीक गाइडेड हथियारों की भूमिका काफी बड़ी होगी।

इसी वजह से अब छोटे, हल्के और सटीक हथियारों पर जोर दिया जा रहा है, जिन्हें सीमित समय में तैनात किया जा सके और दुश्मन को तुरंत निशाना बनाया जा सके।

Adani Defence Delivers Indigenous ULPGM Missiles And AGNIKAA Kamikaze Drones To Indian Army.

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  • News Desk

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