📍जयपुर | 7 May, 2026, 6:14 PM
Operation Sindoor Military Strategy: ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद भारतीय सेना और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने पहली बार खुलकर बताया कि इस अभियान से भारत ने क्या सीखा और अब देश की सैन्य रणनीति किस दिशा में आगे बढ़ रही है। जयपुर में आयोजित एक विशेष प्रेस ब्रीफिंग में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने साफ कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि इसने भारत की युद्ध नीति, हथियार खरीद रणनीति, एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन युद्ध, स्पेस क्षमताओं और मिसाइल स्ट्रक्चर को बदलने का काम किया।
उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबक के बाद भारत अब अपने मिलिट्री स्ट्रक्चर, हथियार प्रणालियों और ऑपरेशनल तैयारी में बड़े बदलाव कर रहा है।
Operation Sindoor Military Strategy: “ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ”
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जब ऑपरेशन सिंदूर की मौजूदा स्थिति को लेकर सवाल पूछा गया, तो अधिकारियों ने साफ संकेत दिया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई अभी रुकी नहीं है।
अधिकारियों ने कहा कि भारत की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लगातार जारी रहेगी। उनके मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर को किसी एक दिन की सैन्य कार्रवाई की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। यह एक लंबी रणनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा, “भारत की आतंकवाद के खिलाफ जंग जारी रहेगी। ऑपरेशन उतने समय तक जारी रहेगा, जितनी जरूरत होगी।”
ऑपरेशन सिंदूर से क्या सीखा भारत ने
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। इसके बाद पाकिस्तान ने ड्रोन, मिसाइल और अन्य हथियारों के जरिए भारत के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की थी।
एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने कहा कि इस पूरे 88 घंटे तक चलते संघर्ष ने भारत को कई महत्वपूर्ण सबक दिए। उन्होंने कहा कि सेना लगातार अपनी ट्रेनिंग, तैयारी और हथियार प्रणालियों की समीक्षा करती रहती है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस प्रक्रिया को और तेज किया गया।
उन्होंने कहा, “हम लगातार यह देखते रहते हैं कि हमारी ट्रेनिंग कैसी है, हमारे उपकरण कैसे हैं और हमारी तैयारी किस स्तर की है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी यह प्रक्रिया लगातार चल रही है।”
भरोसेमंद इंटेलिजेंस के लिए आईएसआर पर निवेश
एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय वायुसेना अपनी खरीद रणनीति और सैन्य क्षमताओं को और मजबूत करने पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि भारत के पास जरूरी क्षमताएं तो थीं, लेकिन कुछ सिस्टम्स की संख्या उतनी नहीं थी जितनी बड़े स्तर के ऑपरेशन के लिए होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी कार्रवाई में सही जानकारी और भरोसेमंद इंटेलिजेंस सबसे अहम होती है। अगर दुश्मन के बारे में सही जानकारी ही नहीं होगी, तो सटीक लक्ष्य तय करना मुश्किल हो जाएगा। इसी वजह से भारत अब अपनी आईएसआर यानी इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस क्षमताओं को तेजी से मजबूत कर रहा है।
उन्होंने बताया कि एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट, मेडिकल इवैक्युएशन सिस्टम और दूसरे “फोर्स मल्टीप्लायर” प्लेटफॉर्म्स की खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। उनका कहना था कि ये सिस्टम युद्ध के दौरान सेना की पहुंच, निगरानी क्षमता और ऑपरेशनल ताकत को कई गुना बढ़ा देते हैं।
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— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) May 7, 2026
मिसाइल और एयर डिफेंस क्षमताओं को मजबूत करने पर फोकस
लेफ्टिनेंट जनरल जुबिन ए मिनवाला ने कहा, “हम ऐसा इंटीग्रेटेड और मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम तैयार कर रहे हैं, जो ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन और मिसाइल जैसे कई तरह के खतरों से एक साथ सुरक्षा दे सके।”
उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मिले अनुभवों के बाद भारत ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को और मजबूत बनाने पर तेजी से काम शुरू किया है।
वहीं, एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने कहा कि भारत लगातार अपनी स्वदेशी मिसाइल और एयर डिफेंस क्षमताओं को मजबूत कर रहा है। उन्होंने बताया कि स्वदेशी अस्त्र मिसाइल, क्यूआर-एसएएम और दूसरे कई प्रोजेक्ट्स पर लगातार काम चल रहा है। उनका कहना था कि यह एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और सेना अपनी क्षमताओं को समय-समय पर बेहतर करती रहती है।
उन्होंने कहा कि आज खतरा तेजी से बदल रहा है। अब सुपरसोनिक और हाइपरसोनिक मिसाइलों का दौर है। इसी वजह से भारत नए सेंसर और एडवांस एयर डिफेंस तकनीकों पर काम कर रहा है, ताकि ऐसी तेज रफ्तार मिसाइलों को भी समय रहते ट्रैक और इंटरसेप्ट किया जा सके।
एस-400 सिस्टम की नई खेप जल्द मिलेगी
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका काफी अहम रही। इस पर बोलते हुए अधिकारियों ने बताया कि भारत जल्द ही रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की नई यूनिट्स हासिल करेगा।
एयर मार्शल भारती ने कहा कि कुछ एस-400 यूनिट्स पहले ही आ चुकी हैं और बाकी यूनिट्स भी अगले कुछ महीनों में भारत को मिल जाएंगी। उन्होंने बताया, “अगले एक महीने के भीतर एस-400 की अगली यूनिट हमारे पास होगी और इस साल के अंत तक आखिरी यूनिट भी मिलने की उम्मीद है।”
एस-400 को दुनिया के सबसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम में गिना जाता है। यह लंबी दूरी से दुश्मन के विमान, ड्रोन और मिसाइलों को ट्रैक कर उन्हें मार गिराने में सक्षम माना जाता है।
“सुदर्शन चक्र” और “कुशा” पर तेजी से काम
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान अधिकारियों ने पहली बार “सुदर्शन चक्र” और “कुशा” जैसे प्रोजेक्ट्स का भी खुलकर जिक्र किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही “सुदर्शन चक्र” को लेकर दिशा-निर्देश दे चुके हैं और इस पर काम जारी है।
इसके साथ ही स्वदेशी लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस सिस्टम “कुशा” पर भी तेजी से काम हो रहा है। अधिकारियों ने कहा कि अब खतरे बदल रहे हैं। पहले जहां सामान्य मिसाइलें चुनौती थीं, वहीं अब सुपरसोनिक और हाइपरसोनिक मिसाइलों का खतरा बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत ऐसे सेंसर और सिस्टम डेवलप कर रहा है जो इन तेज रफ्तार वाली मिसाइलों का भी समय रहते पता लगा सकें।
ड्रोन वॉरफेयर ने बदली रणनीति
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन का इस्तेमाल किया था। इसके बाद भारत ने ड्रोन और काउंटर ड्रोन सिस्टम (C-UAS) पर अपना फोकस और बढ़ा दिया।
एयर मार्शल भारती ने कहा कि अब भारत बड़ी संख्या में ड्रोन और अनमैन्ड सिस्टम तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे सिस्टम युद्ध के दौरान सेना की ताकत कई गुना बढ़ा देते हैं। इसके अलावा भारत अब बड़ी संख्या में ड्रोन और अनमैन्ड सिस्टम्स की जरूरत को भी समझ रहा है। इसी वजह से सरकार ड्रोन सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रोत्साहन दे रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर तेजी से बड़े स्तर पर उत्पादन किया जा सके।
उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार की पीएलआई योजना के तहत एमएसएमई और निजी कंपनियों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “अगर युद्ध के समय हमें हजारों ड्रोन की जरूरत पड़े, तो हमारी इंडस्ट्री उन्हें तेजी से बना सके। हम इसी क्षमता को विकसित कर रहे हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब हार्ड किल और सॉफ्ट किल दोनों तरह के काउंटर ड्रोन सिस्टम पर काम कर रहा है।
“हर हथियार का अपना रोल होता है”
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल की लागत और सस्ते विकल्पों को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर एयर मार्शल भारती ने कहा कि आधुनिक युद्ध में हाई कॉस्ट और लो कॉस्ट दोनों तरह के हथियार जरूरी होते हैं।
उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस जैसी हाई एंड मिसाइलों की अपनी अलग भूमिका होती है, जिन्हें सस्ते ड्रोन या छोटे सिस्टम पूरी तरह रिप्लेस नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि ड्रोन और छोटे अनमैन्ड सिस्टम दुश्मन को परेशान कर सकते हैं, लेकिन निर्णायक असर पैदा करने के लिए भारी और ताकतवर हथियारों की जरूरत होती है। ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें बड़े लक्ष्य को भारी नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखती हैं।
एयर मार्शल भारती ने कहा कि ब्रह्मोस भारत की स्वदेशी ताकत का बड़ा उदाहरण है और देश को इस पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने बताया कि आने वाले एक-दो साल में कई नए स्वदेशी हथियार सिस्टम भारतीय सेनाओं में शामिल होते दिखाई देंगे।
भारतीय वायुसेना बढ़ा रही अपनी ताकत
एयर मार्शल भारती ने कहा कि भारतीय वायुसेना अब अपनी ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाने वाले सिस्टम्स और प्लेटफॉर्म्स पर बड़े स्तर पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट जैसे महत्वपूर्ण “फोर्स मल्टीप्लायर” सिस्टम्स की खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और इसके लिए आरएफपी यानी रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल पहले ही जारी किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि एलसीए मार्क-1ए जल्द वायुसेना में शामिल होगा। इसके अलावा एलसीए मार्क-2 और पांचवीं पीढ़ी के एएमसीए फाइटर जेट पर भी काम जारी है।
उन्होंने एमआरएफए प्रोजेक्ट का भी जिक्र किया, जिसके तहत भारतीय वायुसेना 114 नए मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट खरीदने की योजना पर काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि इस बार वायुसेना के बजट में भी बढ़ोतरी की गई है। पिछले साल जहां लगभग 1.30 लाख करोड़ रुपये का बजट था, वहीं अब यह बढ़कर करीब 1.55 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
मिसाइल फोर्स और नए स्ट्रक्चर पर काम कर रहा भारत
इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के डिप्टी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल जुबिन मिनवाला ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान के “न्यूक्लियर ब्लैकमेल” को भी चुनौती दी।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अपने मिसाइल स्ट्रक्चर और रॉकेट फोर्स को मजबूत करने की कोशिश शुरू की है, लेकिन भारत उसकी पूरी क्षमता को अच्छी तरह समझता है।
उन्होंने कहा कि भारत अब पारंपरिक मिसाइल फोर्स और नए स्ट्रक्चर पर भी काम कर रहा है।
मिनवाला ने कहा कि दुनिया में मिसाइलों का इस्तेमाल अब केवल परमाणु हथियारों तक सीमित नहीं रह गया है। अब उन्हें पारंपरिक युद्ध में भी बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “यह एक बड़ा पैराडाइम शिफ्ट है। मिसाइलों की भूमिका अब केवल स्ट्रैटेजिक नहीं रही।”
लेफ्टिनेंट जनरल मिनवाला ने बताया कि भारत अलग-अलग रेंज और अलग-अलग प्रकार की मिसाइल क्षमताओं पर काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि डीआरडीओ द्वारा हाल के महीनों में किए गए कई परीक्षण इसी दिशा का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के पास पहले से ही प्रभावी डिलीवरी सिस्टम मौजूद हैं और दुश्मन यह जानता है कि भारत के पास मजबूत स्ट्राइक क्षमता है।
India Revamps Military Strategy After Operation Sindoor, Focus on Missiles, Drones and Air Defence.
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।


