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ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की परमाणु धमकी हुई थी फेल, भारत ने खोल दी थी न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग की पोल

वाइस एडमिरल प्रमोद ने कहा, भारत ने लंबी दूरी के प्रिसीजन हथियारों का इस्तेमाल करते हुए आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया और यह दिखाया कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को परमाणु धमकियों से रोका नहीं जा सकता...

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📍जयपुर | 7 May, 2026, 3:25 PM

Operation Sindoor anniversary: ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर भारतीय नौसेना के डायरेक्टर जनरल नेवल ऑपरेशंस (DGNO) वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने कहा कि भारत ने इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान की “न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग” को पूरी तरह बेनकाब कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत ने पाकिस्तान के अंदर गहराई तक मौजूद आतंकी ठिकानों पर लंबी दूरी के सटीक हथियारों से हमला करके साफ संदेश दिया कि परमाणु धमकियों के पीछे छिपकर आतंकवाद नहीं चलाया जा सकता।

जयपुर में आयोजित विशेष प्रेस ब्रीफिंग के दौरान वाइस एडमिरल प्रमोद ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत की सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि भारत की नई सोच, तेज जवाबी क्षमता और तीनों सेनाओं के तालमेल का उदाहरण था।

Operation Sindoor anniversary: “ऑपरेशन सिंदूर भारत के संकल्प का प्रतीक”

वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट नीति को दिखाता है। उन्होंने कहा, “यह ऑपरेशन भारत के संकल्प और राष्ट्रीय नेतृत्व की रणनीतिक सोच का मजबूत उदाहरण था।”

उन्होंने बताया कि पहलगाम आतंकी हमले के तुरंत बाद सरकार ने सेना को साफ और बिना किसी भ्रम वाला आदेश दिया। इसके साथ ही तीनों सेनाओं को कार्रवाई की पूरी ऑपरेशनल स्वतंत्रता भी दी गई।

उनके मुताबिक, इसी वजह से भारतीय सेनाएं तेजी से कार्रवाई कर सकीं।

पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ ऑपरेशन

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम इलाके में बड़ा आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकी ढांचे को निशाना बनाने का फैसला लिया।

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7 मई 2025 की रात भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना ने मिलकर ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया।

इस ऑपरेशन के दौरान लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन से जुड़े नौ बड़े आतंकी ठिकानों पर हमला किया गया। भारतीय कार्रवाई में 100 से ज्यादा आतंकियों के मारे जाने की जानकारी सामने आई थी।

“भारत ने पाकिस्तान की न्यूक्लियर धमकियों की पोल खोली”

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वाइस एडमिरल प्रमोद ने सबसे बड़ा बयान पाकिस्तान की परमाणु धमकियों को लेकर दिया।
उन्होंने कहा, “पाकिस्तान लंबे समय से परमाणु हथियारों की धमकी देकर दबाव बनाने की कोशिश करता रहा है। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान के अंदर गहराई तक हमला करके उसकी इस ब्लैकमेलिंग की पोल खोल दी।”

उनके मुताबिक, भारत ने लंबी दूरी के प्रिसीजन हथियारों का इस्तेमाल करते हुए आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया और यह दिखाया कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को परमाणु धमकियों से रोका नहीं जा सकता।

समुद्र में भारतीय नौसेना ने बनाई बढ़त

वाइस एडमिरल प्रमोद ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान भारतीय नौसेना ने बहुत तेजी से खुद को युद्ध के लिए तैयार किया। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना ने उत्तरी अरब सागर में अपने कैरियर बैटल ग्रुप, फ्रंटलाइन युद्धपोत, सबमरीन, समुद्री निगरानी विमान और स्पेशल फोर्स को तैनात किया।

उनके मुताबिक, नौसेना की इस “फॉरवर्ड डिप्लॉयमेंट” ने पाकिस्तान की नौसेना और वायुसेना को डिफेंसिव स्थिति में पहुंचा दिया। उन्होंने कहा, “पाकिस्तानी नौसैनिक और हवाई यूनिट्स अपने बंदरगाहों या समुद्री तट के पास ही सीमित होकर रह गए थे।”

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INS विक्रांत और स्वदेशी युद्धपोतों का जिक्र

वाइस एडमिरल प्रमोद ने भारतीय नौसेना के स्वदेशी युद्धपोतों की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के दौरान एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत, कोलकाता क्लास और विशाखापट्टनम क्लास डेस्ट्रॉयर ने शानदार प्रदर्शन किया।

उन्होंने कहा कि इससे यह साबित हुआ कि भारत की “आत्मनिर्भर” रक्षा क्षमता अब बड़े ऑपरेशनों को संभालने में सक्षम है। उनके मुताबिक, “भारतीय नौसेना का ब्लू वॉटर रेडीनेस और इंटीग्रेटेड वॉर फाइटिंग सिस्टम पूरी तरह प्रभावी साबित हुआ।”

ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम ने किया कमाल

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ड्रोन, एयर डिफेंस और काउंटर-ड्रोन सिस्टम का भी बड़े स्तर पर इस्तेमाल हुआ। वाइस एडमिरल प्रमोद ने कहा कि हाल के युद्धों ने यह दिखा दिया है कि बिना चालक वाले सिस्टम यानी अनक्रूड और ऑटोनॉमस प्लेटफॉर्म अब युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय सेनाओं ने ड्रोन, लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्टम और काउंटर यूएवी सिस्टम का प्रभावी इस्तेमाल किया।

“इनफॉरमेशन वॉरफेयर भी उतना ही अहम”

वाइस एडमिरल प्रमोद ने कहा कि आज के समय में युद्ध सिर्फ जमीन, हवा और समुद्र तक सीमित नहीं है। सूचना और नैरेटिव का मोर्चा भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान गलत जानकारी और भ्रामक प्रचार का भी जवाब दिया गया। उनके मुताबिक, सरकार और अलग-अलग एजेंसियों ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि भारत का पक्ष मजबूत तरीके से सामने आए।

तीनों सेनाओं के तालमेल पर जोर

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने “जॉइंटनेस” यानी तीनों सेनाओं के तालमेल को ऑपरेशन की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच लगातार बैठकें होती रहीं और हर फैसले को रियल टाइम जानकारी के आधार पर लिया गया। उन्होंने बताया कि जॉइंट ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर ने तीनों सेनाओं की कार्रवाई को एक साथ जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा भारतीय तटरक्षक बल, खुफिया एजेंसियों और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने भी मिलकर काम किया।

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“भारत कहीं भी, कभी भी हमला करने में सक्षम”

वाइस एडमिरल प्रमोद ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि भारतीय नौसेना, सेना और वायुसेना हर समय तैयार हैं। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर ने दिखा दिया कि भारत दूर तक, गहराई तक और पूरी सटीकता के साथ हमला करने की क्षमता रखता है।” उन्होंने कहा कि भारतीय सेनाओं ने यह साबित किया है कि जरूरत पड़ने पर वे “कहीं भी, कभी भी और किसी भी तरीके से” कार्रवाई कर सकती हैं।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन तक सैन्य तनाव बना रहा। पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई में ड्रोन और गोलाबारी की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेनाओं ने कई हमलों को नाकाम किया। 10 मई 2025 को दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम पर सहमति बनी थी।

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