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INS विक्रांत से उड़ा भारत का पहला स्वदेशी मैरिटाइम स्पॉटर ड्रोन, भारतीय नौसेना को मिली नई ‘आंख’

अब तक समुद्री निगरानी के लिए बड़े हेलीकॉप्टर या विमान का इस्तेमाल करना पड़ता था। लेकिन छोटे मिशनों के लिए ऐसा करना हमेशा आसान नहीं होता। स्पॉटर ड्रोन इस कमी को पूरा करता है...

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📍नई दिल्ली | 6 May, 2026, 12:34 PM

INS Vikrant Maritime Spotter Drone: देश के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत से भारत के पहले स्वदेशी मैरिटाइम स्पॉटर ड्रोन का सफल ऑपरेशन किया गया है। इस ड्रोन को खास तौर पर समुद्री मिशनों के लिए तैयार किया गया है। यह ड्रोन समुद्र में निगरानी, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने, एंटी-पाइरेसी ऑपरेशन और अवैध तस्करी रोकने जैसे मिशनों में नौसेना की मदद करेगा। भारतीय नौसेना ने इस उपलब्धि को देश में एडवांस्ड ऑटोनॉमस नेवल सिस्टम के विकास की दिशा में अहम मील का पत्थर बताया है। नौसेना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह सिस्टम अब समुद्र में भारतीय जहाजों की “आंख” की तरह काम करेगा।

अब तक समुद्री निगरानी के लिए बड़े हेलीकॉप्टर या विमान का इस्तेमाल करना पड़ता था। लेकिन छोटे मिशनों के लिए ऐसा करना हमेशा आसान नहीं होता। स्पॉटर ड्रोन इस कमी को पूरा करता है। यह कम समय में उड़ान भर सकता है और कम खर्च में निगरानी कर सकता है।

INS Vikrant Maritime Spotter Drone: आईएनएस विक्रांत से भरी उड़ान

इस ड्रोन को भारत के पहले स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत के डेक से उड़ाया गया। चलते हुए विशाल युद्धपोत से किसी ड्रोन का सुरक्षित टेकऑफ और लैंडिंग आसान नहीं माना जाता, क्योंकि समुद्र में जहाज लगातार हिलता रहता है और तेज हवाएं भी चुनौती पैदा करती हैं। इसके बावजूद इस ड्रोन ने सफलतापूर्वक उड़ान भरी और मिशन पूरा करने के बाद सुरक्षित वापसी भी की। इस उपलब्धि को नौसेना की तकनीकी तैयारी और भारतीय कंपनियों की क्षमता का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

आईएनएस विक्रांत भारत का पहला पूरी तरह स्वदेशी विमानवाहक पोत है। इसे कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में डिजाइन और तैयार किया गया। यह युद्धपोत भारतीय नौसेना की ब्लू वॉटर क्षमता का प्रमुख हिस्सा माना जाता है। करीब 45 हजार टन वजनी यह पोत लंबी दूरी के समुद्री अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है।

इस विमानवाहक पोत पर मिग-29के लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और दूसरे एयर प्लेटफॉर्म तैनात किए जा सकते हैं। अब इसमें स्वदेशी मैरिटाइम स्पॉटर ड्रोन की क्षमता भी जुड़ गई है। इससे इसकी समुद्री निगरानी और इंटेलिजेंस क्षमता और मजबूत हो गई है। (INS Vikrant Maritime Spotter Drone)

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क्या है मैरिटाइम स्पॉटर ड्रोन

मैरिटाइम स्पॉटर ड्रोन एक छोटा लेकिन बेहद आधुनिक समुद्री निगरानी सिस्टम है। इसे पुणे की कंपनी सागर डिफेंस इंजीनियरिंग ने बनाया है। यह ड्रोन खास तौर पर नौसेना के लिए बनाया गया है ताकि समुद्र में जहाजों को दूर तक नजर रखने में मदद मिल सके। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह समुद्र के कठिन वातावरण में भी काम कर सके। तेज हवा, नमकीन पानी और लगातार हिलते प्लेटफॉर्म पर भी इसकी कार्यक्षमता बनी रहती है।

बता दें कि भारतीय नौसेना के नए स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस तारागिरी को भी स्वदेशी मैरिटाइम स्पॉटर ड्रोन भी जोड़ा गया है, जिसे सागर डिफेंस इंजीनियरिंग ने बनाया है। (INS Vikrant Maritime Spotter Drone)

चलते जहाज से उड़ान भरने की क्षमता

इस ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह चलते हुए युद्धपोत से भी उड़ान भर सकता है और उसी पर वापस उतर सकता है। आम तौर पर यह काम बेहद मुश्किल माना जाता है। यह ड्रोन 20 से 45 नॉट की रफ्तार से चल रहे जहाज से भी ऑपरेट हो सकता है। दुनिया की बहुत कम कंपनियों के पास ऐसी तकनीक है। समुद्री इलाकों में तेज हवा, नमी और लगातार बदलती परिस्थितियों के बीच ड्रोन ऑपरेट करना आसान नहीं होता। इसी वजह से इस सिस्टम को कठिन समुद्री माहौल में काम करने के लिए तैयार किया गया है।

एक नौसैनिक अधिकारी ने कहा, “समुद्र में जहाज लगातार गति और दिशा बदलता रहता है। ऐसे में ड्रोन का सुरक्षित उतरना तकनीकी रूप से बहुत चुनौतीपूर्ण होता है।” (INS Vikrant Maritime Spotter Drone)

कितनी है इसकी क्षमता

यह ड्रोन करीब 20 किलोमीटर तक निगरानी कर सकता है। एक बार उड़ान भरने के बाद यह लगभग एक घंटे तक हवा में रह सकता है। इसमें आधुनिक कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी मदद से दिन और रात दोनों समय निगरानी की जा सकती है। ड्रोन रियल टाइम वीडियो और डेटा सीधे जहाज तक भेजता है। यानी समुद्र में क्या हो रहा है, उसकी जानकारी तुरंत कंट्रोल रूम तक पहुंच जाती है।

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ड्रोन में AIS रिसीवर और दूसरे इंटेलिजेंस उपकरण लगाने की क्षमता भी है। इससे समुद्र में जहाजों की गतिविधियों और संदिग्ध मूवमेंट पर नजर रखना आसान हो जाता है।

कंपनी के अनुसार यह ड्रोन करीब 5 किलो तक पेलोड ले जा सकता है। इसमें रीयल टाइम डेटा ट्रांसमिशन सिस्टम लगाया गया है, जिससे जहाज पर मौजूद ऑपरेटर को तुरंत जानकारी मिलती रहती है। (INS Vikrant Maritime Spotter Drone)

समुद्र में कैसे करेगा मदद

भारतीय नौसेना के लिए यह ड्रोन कई तरह के मिशनों में उपयोगी साबित हो रहा है। अगर किसी जहाज के आसपास संदिग्ध नाव दिखाई देती है, तो यह ड्रोन तुरंत वहां पहुंचकर तस्वीरें और वीडियो भेज सकता है। एंटी पाइरेसी ऑपरेशन में भी इसकी बड़ी भूमिका मानी जा रही है। समुद्र में समुद्री लुटेरों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए यह काफी उपयोगी है। इसके अलावा अवैध तस्करी रोकने, संदिग्ध जहाजों की पहचान करने और खोज एवं बचाव अभियान में भी इसका इस्तेमाल किया जाएगा। (INS Vikrant Maritime Spotter Drone)

पहले भी ऑपरेशन में हो चुका इस्तेमाल

भारतीय नौसेना पहले भी इस तरह के ड्रोन का इस्तेमाल एंटी-पाइरेसी मिशनों में कर चुकी है। साल 2024 में यमन के पास एक मर्चेंट जहाज को समुद्री लुटेरों ने हाईजैक कर लिया था। उस दौरान आईएनएस कोलकाता ने ऑपरेशन चलाकर जहाज को सुरक्षित कराया था।

उस मिशन में स्पॉटर ड्रोन ने रीयल टाइम तस्वीरें और जानकारी उपलब्ध कराई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार ऑपरेशन के दौरान एक समुद्री लुटेरे ने ड्रोन पर गोली भी चलाई थी, लेकिन ड्रोन सुरक्षित वापस लौट आया।

सागर डिफेंस इंजीनियरिंग के को-फाउंडर कैप्टन निकुंज पराशर ने उस समय कहा था, “अगर ड्रोन पर गोली चलती है तो इसका मतलब है कि हमारे सैनिक सुरक्षित हैं। यही इस तकनीक की सबसे बड़ी ताकत है।”

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कई मिशनों में मदद करेगा यह सिस्टम

भारतीय नौसेना के लिए यह ड्रोन सिर्फ निगरानी तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल समुद्री तस्करी रोकने, संदिग्ध नौकाओं की पहचान करने, सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन और फ्लीट कोऑर्डिनेशन में भी किया जा सकता है।

ड्रोन की मदद से जहाजों को आसपास के समुद्री इलाके की ज्यादा स्पष्ट जानकारी मिलती है। इससे ऑपरेशन के दौरान तेजी से फैसले लेने में मदद मिलती है और जोखिम भी कम होता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय नौसेना में इस तरह के 60 से ज्यादा ड्रोन शामिल किए जा चुके हैं। इन्हें अलग-अलग युद्धपोतों और समुद्री मिशनों में इस्तेमाल किया जा रहा है। (INS Vikrant Maritime Spotter Drone)

हिंद महासागर में बढ़ती चुनौतियां

भारतीय नौसेना लगातार हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है। इस क्षेत्र में समुद्री तस्करी, पाइरेसी और विदेशी जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखना जरूरी माना जाता है।

भारत की समुद्री सीमा लगभग 7,500 किलोमीटर लंबी है। ऐसे में समुद्री निगरानी के लिए एडवांस्ड ड्रोन और ऑटोनॉमस सिस्टम की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। यह ड्रोन नौसेना को समुद्र में दूर तक निगरानी रखने में मदद करेगा और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जल्दी पहचान हो सकेगी। (INS Vikrant Maritime Spotter Drone)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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