📍नई दिल्ली | 9 Sep, 2025, 1:30 PM
Ka-226T helicopter deal: भारत और रूस के बीच लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़े के-226टी (Kamov Ka-226) यूटिलिटी हेलिकॉप्टर सौदे को फिर से जिंदा करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि इस साल दिसंबर में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नई दिल्ली यात्रा के दौरान इस पर बातचीत की जा सकती है।
सूत्रों का कहना है कि इस बार रूस ने इस प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू करने के लिए नई पेशकश की है। मॉस्को अब इस हेलिकॉप्टर को अपने स्वदेशी वीके-650वी (VK-650V) इंजन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पैकेज के साथ भारत को देने की तैयारी में है।
Ka-226T helicopter deal: क्यों अहम है यह सौदा?
भारत के पास अभी भी बड़ी संख्या में पुराने चीता और चेतक हेलिकॉप्टर हैं, जो कई दशक से सेवा में हैं। ये हेलिकॉप्टर ऊंचाई वाले इलाकों में ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन अब इन्हें तुरंत बदलने की जरूरत महसूस की जा रही है।
Indian Navy NUH RFI: भारत ने अपनी सशस्त्र सेनाओं के लिए 276 नए हेलिकॉप्टरों की खरीद प्रक्रिया तेज की। आर्मी, एयरफोर्स, नेवी और कोस्ट गार्ड के लिए जारी हुए दो बड़े RFI। https://t.co/ke6XD4Mzez#IndianArmy #IndianAirForce #IndianNavy #CoastGuard #HelicopterProcurement #MakeInIndia…
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) August 30, 2025
इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए 2015 में भारत और रूस के बीच इंटर-गवर्नमेंटल एग्रीमेंट (IGA) हुआ था। इसके तहत 200 के-226टी हेलिकॉप्टर बनाने का फैसला हुआ। इसमें से 60 हेलिकॉप्टर रूस से सीधे फ्लाई-अवे कंडीशन में आने थे, जबकि 140 हेलिकॉप्टर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की तुमकुर फैक्ट्री में बनाए जाने थे।
Ka-226T helicopter deal: क्यों अटका यह प्रोजेक्ट?
साल 2022 में यह प्रोजेक्ट अचानक ठप हो गया। इसके पीछे जो वजह बताई जाती है वह है फ्रांस के सफरान कंपनी के एरियस 2G1 इंजन की सप्लाई पर रोक। यूरोपीय यूनियन ने रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के चलते इन इंजनों की सप्लाई बंद कर दी था।
इसके अलावा भारत और रूस के बीच टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और स्वदेशीकरण की शर्तों पर भी सहमति नहीं बन पाई। इसी बीच एचएएल ने अपना खुद का लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर (LUH) डेवलप करना शुरू कर दिया।
हालांकि भारतीय सेना और वायुसेना को 400 से ज्यादा नए हेलिकॉप्टरों की जरूरत है। हाल ही में एयरबस हेलीकॉप्टर्स ने अपने H125 हेलीकॉप्टर के मेन फ्यूजलाज (ढांचा) को बनाने के लिए महिंद्रा एयरोस्ट्रक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ साझेदारी भी की है। एचएएल का LUH औऱ एयरबस के H125 हेलीकॉप्टर को इस साल एरो इंडिया में भी शोकेस किया गया था।
ये हेलीकॉप्टर हैं रेस में
सेना को भी पुराने बेड़े को बदलने के लिए लगभग 250 नए हेलीकॉप्टर्स की जरूरत है। सेना के लिए प्रस्तावित मुख्य हेलिकॉप्टरों में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड का लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर, रूस का कामोव-226T, और एयरबस H125 शामिल हैं। वहीं, कामोव-226T एक डबल इंजन वाला हेलीकॉप्टर है, जो अपनी सेफ्टी और मॉड्यूलर डिजाइन के लिए जाना जाता है। इसके अलावा एमडी हेलिकॉप्टर्स MD 530F ला रही है। साथ ही, मुंबई की मैक्स एयरोस्पेस Bell 407Xi मॉडल लेकर उतरी है, जिसे ऊंचाई वाले इलाकों में काम करने के लिए बेहतरीन माना जाता है।
जारी किए दो बड़े RFI
रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में दो बड़े रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन (RFI) जारी किए हैं, जिनके तहत कुल 276 नए हेलिकॉप्टर खरीदे जाएंगे। इनका इस्तेमाल भारतीय सेना, वायुसेना, नौसेना और कोस्ट गार्ड द्वारा किया जाएगा।
पहला रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन अगस्त महीने की शुरुआत में जारी हुआ है। इसमें 200 रिकॉनिसेंस एंड सर्विलांस हेलिकॉप्टर (RSH) की जरूरत बताई गई है। इनमें से 120 हेलिकॉप्टर सेना और 80 वायुसेना को मिलेंगे। ये हेलिकॉप्टर सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी, सैनिकों की त्वरित तैनाती और दुर्गम इलाकों में छोटे लेकिन अहम ऑपरेशनों के लिए उपयोग होंगे।
दूसरा RFI 22 अगस्त को जारी किया गया, जिसमें 76 नेवल यूटिलिटी हेलिकॉप्टर (NUH) शामिल हैं। इनमें से 51 हेलिकॉप्टर नौसेना और 25 कोस्ट गार्ड को मिलेंगे। इनका प्रयोग समुद्री निगरानी और तटीय सुरक्षा मजबूत करने के लिए होगा।
दोनों ही खरीद प्रक्रियाओं में मेक इन इंडिया पहल को प्राथमिकता दी गई है। इसका अर्थ है कि हेलीकॉप्टरों का उत्पादन और तकनीकी हस्तांतरण अधिकतम स्तर पर भारत में ही होगा। RSH के लिए कंपनियों को 18 अक्टूबर तक प्रस्ताव भेजने का समय दिया गया है और 2026 की शुरुआत में रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी होगा। इसके बाद 2027 के मध्य तक कॉन्ट्रैक्ट साइन होने और 2028 से डिलीवरी शुरू होने की संभावना है।
Ka-226T helicopter deal: रूस ने बनाया नया VK-650V इंजन
इंजन की समस्या को हल करने के लिए रूस की यूनाइटेड इंजन कॉर्पोरेशन ने VK-650V टर्बोशाफ्ट इंजन डेवलप किया है। इस इंजन के ट्रायल्स भी पूरे हो चुके हैं और इसे 2025 की शुरुआत में सर्टिफिकेशन भी मिल चुका है।
VK-650V इंजन 650 से 750 हॉर्सपावर तक की ताकत देता है और इसे खासतौर पर गर्म और ऊंचाई वाले इलाकों के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें फुल अथॉरिटी डिजिटल इंजन कंट्रोल (FADEC) सिस्टम लगा है, जिससे यह कम ईंधन की खपत करता है। वीके-650वी इंजन को खासतौर पर 4 टन तक वजन वाले मल्टी-पर्पज हेलिकॉप्टरों के लिए बनाया गया है। यह फ्रेंच Safran Arrius 2G1 इंजन और Pratt & Whitney PW 207K जैसे विदेशी इंजनों का विकल्प बनेगा।
रूस ने भारत को यह प्रस्ताव दिया है कि फुल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के तहत भविष्य में इस इंजन की असेंबली और निर्माण भारत में भी किया जा सकता है।
Ka-226T helicopter deal: हेलीकॉप्टर की खूबियां
कामोव-226T हेलिकॉप्टर अपने खास को-एक्सियल रोटर डिजाइन की वजह से चर्चा में है। इसमें टेल रोटर नहीं होता, जिससे यह हेलिकॉप्टर ज्यादा कॉम्पैक्ट और हवा के तेज झोंकों में भी स्थिर रहता है। साथ ही, संकरी घाटियों जैसे इलाकों में भी सुरक्षित रूप से ऑपरेट कर सकता है।
इसका मॉड्यूलर डिजाइन इसे मल्टीपर्पज बनाता है। यानी इसके केबिन को तुरंत बदलकर अलग-अलग कामों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल सैनिकों और सामान की ढुलाई, मेडिकल इवैक्यूएशन, टोही मिशन और आपदा राहत जैसे कार्यों में किया जा सकता है। हेलिकॉप्टर का अधिकतम टेकऑफ वेट लगभग 3.8-4 टन है और इसमें 6 लोग (2 पायलट और 4 यात्री) बैठ सकते हैं।
HAL और रूस का जॉइंट वेंचर
इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए एचएएल और रूस की कंपनियों ने मिलकर एक जॉइंट वेंचर इंडो-रशियन हेलीकॉप्टर्स लिमिटेड (IRHL) बनाया था। भारत सरकार ने इसे मेक इन इंडिया प्रोग्राम का हिस्सा मानते हुए मंजूरी दी थी।
अगर नया प्रस्ताव मंजूर होता है तो एएचएल की भूमिका और भी अहम होगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सौदा उसी तरह का मॉडल बन सकता है जैसा एएचएल पहले ही सुखोई-30MKI फाइटर जेट के इंजन AL-31FP के लिए अपनाता आ रहा है।

