📍नई दिल्ली/चंडीगढ़ | 5 Jun, 2026, 12:03 PM
Army Colonel Sexual Harassment Case: भारतीय सेना ने महिला अधिकारियों के साथ कथित यौन उत्पीड़न और अभद्र व्यवहार के मामले में एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। जनरल कोर्ट मार्शल (जीसीएम) ने आर्मी मेडिकल कॉर्प्स (एएमसी) के एक कर्नल को सेवा से बर्खास्त करने और तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। मामला राजस्थान के नसीराबाद सैन्य अस्पताल में तैनाती के दौरान महिला अधिकारियों के साथ कथित अनुचित व्यवहार से जुड़ा है।
हालांकि यह फैसला अभी अंतिम रूप से लागू नहीं हुआ है। सेना की प्रक्रिया के अनुसार इसे उच्च सैन्य अधिकारियों की अनुमति मिलने के बाद लागू किया जाएगा।
Army Colonel Sexual Harassment Case: क्या है पूरा मामला?
यह मामला उस समय का है जब संबंधित कर्नल राजस्थान के नसीराबाद स्थित मिलिट्री हॉस्पिटल में डॉक्टर के रूप में तैनात थे। उसी अस्पताल में एक मेजर और एक कैप्टन रैंक की महिला अधिकारी भी कार्यरत थीं।
बाद में कर्नल को 97 आर्टिलरी ब्रिगेड मुख्यालय से अटैच किया गया, जहां उनके खिलाफ जनरल कोर्ट मार्शल की कार्रवाई शुरू हुई। अक्टूबर 2025 में उनके खिलाफ सेना अधिनियम के तहत छह अलग-अलग आरोप लगाए गए थे।
कोर्ट मार्शल की सुनवाई के बाद अधिकारी को पांच आरोपों में दोषी पाया गया, जबकि एक आरोप में उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया। (Army Colonel Sexual Harassment Case)
महिला मेजर से जुड़े आरोप
चार्जशीट के अनुसार पहला आरोप नवंबर 2022 का था। आरोप लगाया गया कि कर्नल ने एक महिला मेजर को उसकी इच्छा के विरुद्ध गले लगाया। शिकायत में कहा गया कि यह कृत्य महिला अधिकारी की गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला था।
दूसरा आरोप मार्च 2023 का है। इसमें कहा गया कि कर्नल ने उसी महिला अधिकारी के साथ अनुचित शारीरिक संपर्क किया और उसकी गर्दन तथा जांघ को छुआ। शिकायतकर्ता के मुताबिक यह व्यवहार प्रोफेशनल सीमाओं के खिलाफ था।
व्हाट्सएप संदेश भी बने जांच का हिस्सा
जांच के दौरान कुछ व्हाट्सएप संदेशों को भी रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया गया। आरोप था कि मार्च और अप्रैल 2023 के बीच कर्नल ने महिला मेजर को कई ऐसे संदेश भेजे, जिनमें दोहरे अर्थ वाले और यौन संकेत वाले शब्दों का इस्तेमाल किया गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार कुछ संदेशों में उन्होंने खुद को महिला अधिकारी का “करीबी दोस्त” बताया और निजी संबंध बनाने की कोशिश की। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि उन्होंने महिला अधिकारी को कई बार पर्सनल और इमोशनल मैसेज भेजे। कोर्ट मार्शल के दौरान इन डिजिटल मैसेज को भी सबूत के तौर पर पेश किया गया।
अश्लील सामग्री भेजने का आरोप
मामले का एक अन्य गंभीर आरोप यह था कि मार्च 2023 में देर रात महिला मेजर को व्हाट्सएप के जरिए एक तस्वीर और वीडियो भेजा, जिसे सेना ने आपत्तिजनक सामग्री की श्रेणी में माना।
आरोप पत्र में कहा गया कि ऐसा व्यवहार एक सैन्य अधिकारी के पद, जिम्मेदारी और अपेक्षित आचरण के अनुरूप नहीं था।
सेना के नियमों के अनुसार अधिकारियों से उच्च स्तर के पेशेवर और नैतिक व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। इसी आधार पर इस आरोप को भी सुनवाई में शामिल किया गया। (Army Colonel Sexual Harassment Case)
महिला कैप्टन की शिकायत भी शामिल
कोर्ट मार्शल में एक महिला कैप्टन की शिकायत को भी शामिल किया गया। आरोप था कि फरवरी और मार्च 2023 के दौरान कर्नल ने उनके प्रति भी अनुचित टिप्पणियां की थीं।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कहा कि यह मामला केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं था और अलग-अलग शिकायतों में समान प्रकार के व्यवहार का आरोप सामने आया।
हालांकि तीसरी महिला अधिकारी, जो मेजर रैंक की थीं, से जुड़े एक आरोप में कोर्ट मार्शल ने कर्नल को दोषी नहीं माना।
क्या होता है जनरल कोर्ट मार्शल?
भारतीय सेना में अनुशासन बनाए रखने के लिए कोर्ट मार्शल की व्यवस्था होती है। जनरल कोर्ट मार्शल सेना की सबसे गंभीर न्यायिक प्रक्रिया मानी जाती है।
जब किसी अधिकारी या सैनिक पर गंभीर आरोप लगते हैं, तब मामले की सुनवाई जनरल कोर्ट मार्शल के माध्यम से की जाती है। इसमें गवाहों के बयान, दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य सबूतों की जांच की जाती है।
यदि आरोप सिद्ध हो जाते हैं तो सेवा से बर्खास्तगी, पदावनति, वेतन कटौती या जेल जैसी सजा दी जा सकती है।
सेना ने किन धाराओं के तहत की कार्रवाई?
आरोपों में सेना अधिनियम की विभिन्न धाराओं का इस्तेमाल किया गया। इनमें कुछ आरोप भारतीय दंड संहिता की उन धाराओं से भी जुड़े थे जो महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने और यौन उत्पीड़न से संबंधित हैं।
सेना अधिनियम की धारा 69 के तहत ऐसे मामलों में नागरिक कानूनों के प्रावधान भी लागू किए जा सकते हैं। इसके अलावा अधिकारियों के आचरण से संबंधित नियमों का भी परीक्षण किया गया। (Army Colonel Sexual Harassment Case)
बचाव पक्ष ने क्या कहा?
कर्नल की ओर से पेश हुए वकील ने कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सुनवाई के दौरान कई प्रक्रियागत अनियमितताएं हुईं।
बचाव पक्ष का आरोप है कि अदालत में दर्ज किए गए बयानों और बाद में तैयार किए गए दस्तावेजों में अंतर पाया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ मूल रिकॉर्ड सुरक्षित नहीं रखे गए और कुछ सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई।
वकील के अनुसार इस संबंध में सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) में भी याचिकाएं दायर की गई थीं। उनका कहना है कि निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मूल अधिकार है।
वहीं, इस फैसले के बाद सेना में महिला अधिकारियों की सुरक्षा और कार्यस्थल पर सम्मानजनक वातावरण को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले कुछ सालों में भारतीय सेनाओं में महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ी है। आज महिलाएं चिकित्सा सेवाओं से लेकर स्थायी कमीशन और कई महत्वपूर्ण भूमिकाओं में कार्य कर रही हैं।
ऐसे में सेना के भीतर पेशेवर आचरण, अनुशासन और लैंगिक सम्मान से जुड़े नियमों को लेकर संवेदनशीलता और जवाबदेही को महत्वपूर्ण माना जाता है। (Army Colonel Sexual Harassment Case)


