📍नई दिल्ली | 20 Jul, 2026, 4:20 PM
Tripeak Brigade Indian Army: भारतीय सेना लगातार नई तकनीकों को अपनाकर अपनी युद्ध क्षमता को मजबूत कर रही है। भारतीय सेना की सेंट्रल कमांड यानी सूर्या कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने हाल ही में ट्राईपीक ब्रिगेड का दौरा किया। वहीं, ट्राईपीक ब्रिगेड की फायरिंग रेंज के पोस्टरों की काफी चर्चा हो रही है। पोस्टरों के जरिए भारतीय सेना ने चीन को बड़ा संदेश दिया है।
दौरे के दौरान आर्मी कमांडर को अगली पीढ़ी के उपकरण, ऑटोमेटेड फायरिंग रेंज स्कोरिंग सिस्टम, जियोथर्मल परियोजनाओं और अन्य आधुनिक तकनीकों के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने सैनिकों की ऑपरेशनल तैयारी और नई तकनीकों को तेजी से अपनाने के प्रयासों की सराहना की।
Tripeak Brigade Indian Army: क्या है ट्राईपीक ब्रिगेड
ट्राईपीक ब्रिगेड भारतीय सेना की एक विशेष माउंटेन इन्फैंट्री ब्रिगेड है, जो सूर्या कमांड (सेंट्रल कमांड) के तहत कम करती है। ट्राईपीक ब्रिगेड हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में तैनात है, जो शिपकी-ला से लेकर पुह तक का इलाका संभालती है। इस ब्रिगेड के मध्य हिमालय के ऊंचाई वाले रणनीतिक इलाकों में तैनात होने से यहां सैनिकों को अत्यधिक ठंड, बर्फबारी और दुर्गम पहाड़ी परिस्थितियों में ऑपरेशन करने पड़ते हैं।
सूर्य कमांड का मुख्यालय लखनऊ, उत्तर प्रदेश में है और इसकी जिम्मेदारी उत्तराखंड सहित मध्य हिमालयी क्षेत्र में भारत की सुरक्षा व्यवस्था संभालना है। हालांकि सुरक्षा कारणों से भारतीय सेना ने ट्राईपीक ब्रिगेड का आधिकारिक नंबर और इसकी सटीक तैनाती सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन यह ब्रिगेड मध्य हिमालय के ऊंचाई वाले रणनीतिक इलाकों में तैनात मानी जाती है, जहां सैनिकों को अत्यधिक ठंड, बर्फबारी और दुर्गम पहाड़ी परिस्थितियों में ऑपरेशन करने पड़ते हैं।
आर्मी कमांडर पहुंचे ट्राईपीक ब्रिगेड
लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता को ब्रिगेड अधिकारियों ने विभिन्न क्षमता विकास कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि यूनिट में कई विशेष तकनीकी परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है, जिनका उद्देश्य सैनिकों की तैयारी को और बेहतर बनाना है।
दौरे के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने अधिकारियों और जवानों से भी बातचीत की। उन्होंने सैनिकों की पेशेवर कार्यशैली, प्रशिक्षण और ऑपरेशनल तैयारी की सराहना की।
आर्मी कमांडर ने इन पहलों को भारतीय सेना के तकनीक आधारित बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक उपकरणों और स्वदेशी समाधानों का इस्तेमाल सेना की युद्ध क्षमता को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। (Tripeak Brigade Indian Army)
“𝗙𝗼𝗰𝘂𝘀𝗲𝗱 𝗩𝗶𝘀𝗶𝗼𝗻, 𝗙𝘂𝘁𝘂𝗿𝗲-𝗥𝗲𝗮𝗱𝘆 𝗖𝗮𝗽𝗮𝗯𝗶𝗹𝗶𝘁𝘆.”
Lt Gen Anindya Sengupta, GOC-in-C, #SuryaCommand, reviewed capability development initiatives and niche technology projects undertaken by the #TripeakBrigade.
The #ArmyCdr appreciated the Brigade’s… pic.twitter.com/FKXZlD9HoY
— SuryaCommand_IA (@suryacommand) July 18, 2026
ऑटोमेटेड फायरिंग रेंज स्कोरिंग सिस्टम की खासियत
दौरे का एक प्रमुख आकर्षण ऑटोमेटेड फायरिंग रेंज स्कोरिंग सिस्टम रहा। यह ऐसी आधुनिक सिस्टम है जिसमें निशानेबाजी के दौरान हर गोली का परिणाम डिजिटल तरीके से रिकॉर्ड किया जाता है।
पहले फायरिंग अभ्यास के बाद इंस्ट्रक्टर्स को टारगेट के पास जाकर मैनुअल तरीके से निशानों की जांच करनी पड़ती थी। नए सिस्टम में सेंसर, कैमरा और डिजिटल प्रोसेसिंग तकनीक की मदद से तुरंत पता चल जाता है कि गोली टारगेट के किस हिस्से पर लगी है।
इससे ट्रेनिंग की रफ्तार बढ़ती है, समय की बचत होती है और निशानेबाजी का मूल्यांकन अधिक सटीक तरीके से किया जा सकता है। प्रशिक्षकों को भी तुरंत फीडबैक देने में आसानी होती है।

टारगेट के तौर पर दिखाई दिए पीएलए सैनिकों के पोस्टर
दौरे के दौरान सामने आई तस्वीरों में फायरिंग रेंज पर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिकों की तस्वीर वाले टारगेट पोस्टर भी दिखाई दिए। इन पोस्टरों का इस्तेमाल निशानेबाजी अभ्यास के दौरान टारगेट के तौर पर किया जा रहा था। चीनी सैनिकों की तस्वीरों वाले टारगेट्स पर भारतीय जवान निशानेबाजी का अभ्यास करते दिखाई दे रहे हैं।
ऐसे टारगेट पोस्टर सैनिकों को वास्तविक परिस्थितियों के अधिक करीब प्रशिक्षण देने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। इन पर बने विभिन्न निशान और दूरी के घेरे फायरिंग की सटीकता मापने में मदद करते हैं। तस्वीर में लक्ष्य पर अलग-अलग दूरी के घेरे भी दिखाई देते हैं, जिनकी मदद से शूटिंग का मूल्यांकन किया जाता है। (Tripeak Brigade Indian Army)
जियोथर्मल प्रोजेक्ट्स पर भी दिया गया जोर
ट्राईपीक ब्रिगेड में जियोथर्मल प्रोजेक्ट्स को भी अपनाया गया है। जियोथर्मल तकनीक का इस्तेमाल धरती के अंदर मौजूद प्राकृतिक ताप ऊर्जा का इस्तेमाल करने के लिए किया जाता है।
ऊंचाई वाले और अत्यधिक ठंडे इलाकों में यह तकनीक ऊर्जा की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकती है। इससे ईंधन पर निर्भरता कम करने और दूरदराज के सैन्य ठिकानों पर सुविधाओं को बेहतर बनाने में सहायता मिलती है। (Tripeak Brigade Indian Army)
नेक्स्ट जेनरेशन इक्विपमेंट हो रहे शामिल
ब्रिगेड में कई नेक्स्ट जेनरेशन इक्विपमेंट भी शामिल किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य सैनिकों की लड़ाकू क्षमता बढ़ाना और आधुनिक युद्धक्षेत्र की जरूरतों के अनुसार उन्हें तैयार करना है।
भारतीय सेना पिछले कुछ वर्षों से संचार प्रणाली, निगरानी उपकरण, डिजिटल नेटवर्क, ड्रोन और अन्य आधुनिक सैन्य तकनीकों को तेजी से अपने ढांचे का हिस्सा बना रही है। इससे अलग-अलग सैन्य इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिलती है।
तकनीक आधारित बदलाव पर सेना का फोकस
सूर्य कमांड ने अपने संदेश में कहा कि ट्राईपीक ब्रिगेड की पहलें भारतीय सेना के टेक्नोलॉजी ड्रिवन ट्रांसफॉर्मेशन को आगे बढ़ा रही हैं। सेना का लक्ष्य ऐसी आधुनिक, चुस्त और तकनीकी रूप से सक्षम फोर्स तैयार करना है, जो बदलते युद्धक्षेत्र की चुनौतियों के अनुरूप काम कर सके। (Tripeak Brigade Indian Army)
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