HomeIndian Armyक्यों "शाहबाज डिविजन है अजीत", क्यों है भारतीय सेना की सबसे घातक...

क्यों “शाहबाज डिविजन है अजीत”, क्यों है भारतीय सेना की सबसे घातक RAPID फॉर्मेशन?

शाहबाज डिविजन भारतीय सेना की 36 इन्फैंट्री डिविजन (RAPID) है। इसका पूरा नाम रीऑर्गेनाइज्ड आर्मी प्लेन्स इन्फैंट्री डिविजन है। यह भारतीय सेना की सुदर्शन चक्र कोर (XXI Corps) का हिस्सा है...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US

📍नई दिल्ली | 20 Jul, 2026, 1:43 PM

Shahbaaz Division: भारतीय सेना तेजी से अपने मिलिट्री स्ट्रक्चर और युद्ध लड़ने के तरीकों में बदलाव कर रही है। नई तकनीक, स्वदेशी हथियार, ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सेना की लड़ाकू क्षमता का हिस्सा बनाया जा रहा है। हाल ही में सदर्न कमांड के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर ने सुदर्शन चक्र कोर और उसके अधीन आने वाली शाहबाज डिविजन का दौरा कर युद्ध तैयारी और आधुनिक सैन्य क्षमताओं की समीक्षा की।

Shahbaaz Division: सुदर्शन चक्र कोर की तैयारियों का लिया जायजा

लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर ने सबसे पहले सुदर्शन चक्र कोर (XXI Corps) की ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा की। उन्हें मिशन तैयारी, आधुनिक प्रशिक्षण, नई तकनीकों को अपनाने और युद्ध क्षमता बढ़ाने के लिए चल रहे कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी गई। सेना ने उन्हें यह भी बताया कि अलग-अलग यूनिटों में आधुनिक हथियारों और स्वदेशी तकनीकों को तेजी से शामिल किया जा रहा है।

शाहबाज डिविजन में देखा स्वदेशी ड्रोन का प्रदर्शन

दौरे के दौरान आर्मी कमांडर ने शाहबाज डिविजन में स्वदेशी मानवरहित हवाई प्लेटफॉर्म (यूएवी) का प्रदर्शन भी देखा। इन ड्रोन ने सटीक लक्ष्य भेदन क्षमता का प्रदर्शन किया। साथ ही यह भी दिखाया गया कि आधुनिक ड्रोन किस तरह उभरते खतरों की पहचान कर सकते हैं और उन पर सटीक कार्रवाई में मदद कर सकते हैं।

भारतीय सेना अब निगरानी, लक्ष्य की पहचान, रियल टाइम जानकारी जुटाने और सटीक हमले के लिए स्वदेशी ड्रोन का उपयोग लगातार बढ़ा रही है। इसके साथ ही दुश्मन के ड्रोन से निपटने के लिए काउंटर-ड्रोन तकनीकों पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें:  देवलाली में गरजी भारतीय आर्टिलरी; Exercise TOPCHI 2026 में पहली बार शामिल हुई BSF और नौसेना

नई तकनीक अपनाने पर दिया जा रहा जोर

आर्मी कमांडर को अधिकारियों ने बताया कि सुदर्शन चक्र कोर के तहत आने वाली फॉर्मेशन लगातार टेक्नोलॉजी एब्जॉर्प्शन यानी नई तकनीकों को अपने मिलिट्री स्ट्रक्चर में शामिल कर रही हैं। यह भारतीय सेना के ‘डेकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन‘ कार्यक्रम के तहत चल रहे सैन्य आधुनिकीकरण का हिस्सा हैं।

इसके तहत आधुनिक संचार प्रणाली, डिजिटल कमांड नेटवर्क, ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और स्वदेशी सैन्य उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है।

भारतीय सेना का उद्देश्य ऐसी लड़ाकू क्षमता विकसित करना है, जिसमें सैनिक, टैंक, तोप, ड्रोन और अन्य हथियार एक नेटवर्क के रूप में काम करें।

सैनिकों से भी की बातचीत

लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर ने शाहबाज डिविजन के अधिकारियों और जवानों से भी मुलाकात की। उन्होंने सभी रैंकों के सैनिकों की पेशेवर कार्यशैली, अनुशासन और युद्ध तैयारी की सराहना की। साथ ही उन्हें नई तकनीकों को अपनाने, स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने और हर समय मिशन के लिए तैयार रहने का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि बदलते युद्ध के स्वरूप को देखते हुए सेना को लगातार सीखते रहना होगा और आधुनिक तकनीकों के साथ खुद को ढालना होगा।

क्यों कहा जाता है शाहबाज

भारतीय सेना अपनी कई डिविजनों को उनके आधिकारिक नंबर के साथ विशेष नाम भी देती है। जैसे व्हाइट टाइगर डिविजन, बाइसन डिविजन, अग्निबाज डिविजन और शाहबाज डिविजन। “शाहबाज” फारसी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है शाही बाज या ऊंची उड़ान भरने वाला शक्तिशाली बाज। यह नाम तेज गति, सटीक हमला और आक्रामक युद्ध क्षमता का प्रतीक माना जाता है।

RAPID है Shahbaaz Division

शाहबाज डिविजन भारतीय सेना की 36 इन्फैंट्री डिविजन (RAPID) है। इसका पूरा नाम रीऑर्गेनाइज्ड आर्मी प्लेन्स इन्फैंट्री डिविजन है। यह भारतीय सेना की सुदर्शन चक्र कोर (XXI Corps) का हिस्सा है, जो दक्षिणी कमान की प्रमुख स्ट्राइक कोर मानी जाती है। इस डिविजन का मुख्यालय सागर, मध्य प्रदेश में स्थित है।

यह भी पढ़ें:  K9 Vajra-T Howitzers: लद्दाख से रेगिस्तान तक अब दुश्मन की नहीं है खैर, भारतीय सेना के पास आ रहे हैं 100 और K9 वज्र

कब हुआ था गठन

Shahbaaz Division का गठन 18 सितंबर 1966 को रंगिया (असम) में एक माउंटेन डिविजन के रूप में किया गया था। उस समय इसका मुख्य दायित्व पूर्वोत्तर क्षेत्र और चीन सीमा की सुरक्षा से जुड़ा था।

बाद में भारतीय सेना ने अपनी जरूरतों के अनुसार इसका पुनर्गठन किया और इसे आरएपीआईडी में बदल दिया। इसके बाद इसकी भूमिका मैदानी क्षेत्रों में तेज गति से युद्ध संचालन करने वाली फॉर्मेशन की हो गई।

बता दें कि आरएपीआईडी सामान्य इन्फैंट्री डिविजन से काफी अलग होती है।

इसमें केवल पैदल सैनिक ही नहीं होते, बल्कि मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री, टैंक रेजिमेंट, आर्टिलरी, एयर डिफेंस, इंजीनियर, सिग्नल यूनिट, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, ड्रोन, इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस संसाधन भी शामिल होते हैं।

यही वजह है कि यह फॉर्मेशन कम समय में तेज गति से आगे बढ़कर संयुक्त अभियान चलाने में सक्षम होती है।

सुदर्शन चक्र कोर में व्हाइट टाइगर डिविजन, शाहबाज डिविजन, बाइसन डिविजन और अन्य सहयोगी सैन्य फॉर्मेशन कार्य करती हैं। इनका उद्देश्य आवश्यकता पड़ने पर संयुक्त अभियान चलाना और अलग-अलग हथियार प्रणालियों को एक साथ इस्तेमाल करना होता है।

कई महत्वपूर्ण अभियानों का हिस्सा रही है डिविजन

Shahbaaz Division भारतीय सेना के कई बड़े अभियानों में शामिल रही है। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान यह सेना की सक्रिय फॉर्मेशनों में थी। ऑपरेशन पराक्रम (2001-02) के दौरान संसद हमले के बाद पश्चिमी सीमा पर हुई बड़े पैमाने की सैन्य तैनाती में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके अलावा यह समय-समय पर आयोजित बड़े सैन्य अभ्यासों में भी भाग लेती रही है।

आधुनिक युद्धाभ्यास में दिखा दम

साल 2022 में राजस्थान के रेगिस्तान में आयोजित एक्सरसाइज सुदर्शन प्रहार में शाहबाज डिविजन ने अपनी संयुक्त युद्ध क्षमता का प्रदर्शन किया। इस अभ्यास में टैंक, मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री, आर्टिलरी, आर्मी एविएशन और अन्य आधुनिक सैन्य संसाधनों को एक साथ इस्तेमाल किया गया।

यह भी पढ़ें:  4,000 करोड़ की लागत से भारतीय सेना खरीदेगी 300 धनुष तोपें, 15 नई रेजिमेंट्स होंगी तैयार

इसके बाद एक्सरसाइज मारू ज्वाला, जो बड़े एक्सरसाइज त्रिशूल का हिस्सा थी, उसमें भी Shahbaaz Division ने भाग लिया। इस अभ्यास में एएच-64ई अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर, आर्मी एविएशन, पैरा स्पेशल फोर्स और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध इकाइयों के साथ संयुक्त अभियान का अभ्यास किया गया।

Author

  • News Desk

    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
News Desk
News Desk
रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

Most Popular