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ऑपरेशन कोराग: 18 महीने तक चकमा देता रहा हाशिम मूसा, आखिर कैसे ट्रैक हुआ लश्कर का ‘फौजी कमांडर’?

मूसा के मारे जाने के साथ ही इस पूरे चार सदस्यीय समूह का सफाया हो गया है। इससे पहले सुरक्षा बलों ने दिसंबर 2024 में दाचीगाम में हुए ऑपरेशन में जुनैद भट, जुलाई 2025 में ऑपरेशन महादेव के दौरान सुलेमान और सितंबर 2026 में ऑपरेशन असधर में यासिर को मार गिराया था...

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📍श्रीनगर/बडगाम | 30 Sep, 2026, 8:58 PM

Hashim Moosa Killed: जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले के यूसमर्ग, कोराग और दूधपथरी के घने जंगलों में सुरक्षा बलों ने एक बड़े आतंकवाद विरोधी अभियान में लश्कर-ए-तैयबा के मोस्ट वॉन्टेड विदेशी आतंकी हाशिम मूसा उर्फ आसिफ फौजी उर्फ सुलेमान को मार गिराया। सूत्रों का कहना है कि मूसा के खिलाफ चलाया गया यह ऑपरेशन मई 2026 में शुरू किए गए लंबे समय से जारी “ऑपरेशन शेरूवाली” का हिस्सा था। सुरक्षा एजेंसियां लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही थीं और सही मौके का इंतजार कर रही थीं।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार हाशिम मूसा पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से सुरक्षा बलों की निगरानी सूची में था। वह पाकिस्तान का नागरिक था और माना जाता है कि 2023 में घुसपैठ कर जम्मू-कश्मीर पहुंचा था। मूसा को पाकिस्तान सेना की स्पेशल सर्विस ग्रुप (एसएसजी) की ट्रेनिंग भी हासिल थी। इसी वजह से आतंकी नेटवर्क में उसे “फौजी मूसा” कहा जाता था।

Hashim Moosa Killed: इंटेलिजेंस ने बदली ऑपरेशन की दिशा

इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत वह “एक्शनएबल इंटेलिजेंस” थी, जिसने सीधे मूसा तक सुरक्षा बलों को पहुंचाया। सूत्रों के मुताबिक हाल के दिनों में मूसा की गतिविधियों को लेकर तकनीकी और ह्यूमन इंटेलिजेंस दोनों तरह के इनपुट मिले थे।

टेक्निकल इंटेलिजेंस में सर्विलांस इक्विप्मेंट्स, कम्युनिकेशन सिग्नल्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से जानकारी जुटाई गई। वहीं ह्यूमन इंटेलिजेंस के तहत स्थानीय स्तर पर मिले इनपुट्स ने उसकी मौजूदगी की पुष्टि की। इन दोनों स्रोतों से मिली जानकारी को जोड़कर एजेंसियों ने उसकी संभावित लोकेशन का पता लगाया।

29 सितंबर को बडगाम के गुरवेत कलां और कोराग इलाका में उसकी मौजूदगी की सूचना मिली। यह जानकारी तुरंत भारतीय सेना की 15 कोर यानी चिनार कॉर्प्स तक पहुंचाई गई। इसके बाद बिना देरी किए संयुक्त अभियान शुरू किया गया।

कैसे चला ऑपरेशन कोराग?

इस अभियान को “ऑपरेशन कोराग” नाम दिया गया। इसमें भारतीय सेना की चिनार कोर, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने मिलकर काम किया।

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यूसमर्ग और दूधपथरी के बीच का इलाका घने जंगलों, ऊंची पहाड़ियों और संकरे रास्तों से भरा हुआ है। यह इलाका लंबे समय से आतंकियों के लिए छिपने की सुरक्षित जगह माना जाता रहा है। ऐसे इलाकों में ऑपरेशन चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है।

29 सितंबर की रात संयुक्त टीमों ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी शुरू की। सेना के अनुसार जवानों ने संदिग्ध गतिविधि देखी और चुनौती दी। जवाब में आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद मुठभेड़ शुरू हुई।

करीब रात 10:30 बजे के आसपास हुई इस मुठभेड़ में हाशिम मूसा मारा गया। ऑपरेशन के बाद भी सुरक्षा बलों ने इलाका को खाली नहीं किया और सुबह तक तलाशी जारी रखी।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार मुठभेड़ स्थल से एक एके-47 राइफल, दो एके मैगजीन, एक लोरा/अल्ट्रा कम्युनिकेशन डिवाइस हैंडसेट, एक लोरा/अल्ट्रा मोबाइल डिवाइस और एक मोबाइल फोन बरामद किया गया।

लोरा बेस्ड कम्युनिकेशन इक्विपमेंट्स का इस्तेमाल लंबी दूरी संदेश भेजने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ऐसे उपकरण आतंकियों को दूरदराज के जंगलों में भी संपर्क बनाए रखने में मदद करते हैं। (Hashim Moosa Killed)

कौन था हाशिम मूसा?

हाशिम मूसा पाकिस्तान मूल का लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार वह 2023 में नियंत्रण रेखा पार कर जम्मू-कश्मीर में घुसा था। उसे आसिफ फौजी और सुलेमान के नाम से भी जाना जाता है। वह मिलिट्री ट्रेनिंग में एक्सपर्ट था, इसी वजह से वह जंगल में गुरिल्ला रणनीति, घात लगाकर हमला करने और सुरक्षा बलों से बच निकलने में माहिर माना जाता था।

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मूसा पिछले 18 महीनों से अधिक समय से सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था। कई बार उसके बारे में इनपुट मिले, लेकिन वह घने जंगलों और पहाड़ी रास्तों का फायदा उठाकर बच निकलता था।

मूसा के मारे जाने के साथ ही इस पूरे चार सदस्यीय समूह का सफाया हो गया है। इससे पहले सुरक्षा बलों ने दिसंबर 2024 में दाचीगाम में हुए ऑपरेशन में जुनैद भट, जुलाई 2025 में ऑपरेशन महादेव के दौरान सुलेमान और सितंबर 2026 में ऑपरेशन असधर में यासिर को मार गिराया था। (Hashim Moosa Killed)

सितंबर की शुरुआत में भी बच निकला था

5 सितंबर 2026 को यूसमर्ग इलाका में एक अन्य ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने उसके नेटवर्क को निशाना बनाया था। उस मुठभेड़ में उसका करीबी सहयोगी यासिर मारा गया था।

हालांकि उस समय मूसा बचकर निकल गया था। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उसके संभावित मूवमेंट पर लगातार नजर रखी। पूंछ-राजौरी के जंगलों से लेकर मध्य कश्मीर तक उसके नेटवर्क की गतिविधियों की निगरानी की गई।

इसी लगातार दबाव और निगरानी ने अंततः ऑपरेशन कोराग की सफलता का रास्ता तैयार किया। (Hashim Moosa Killed)

किन हमलों से जुड़ा था मूसा?

गृह मंत्रालय के मुताबिक यह समूह हालन हमला (अगस्त 2023), कांडी हमला (मई 2023), डीकेजी हमला (दिसंबर 2023), शाहसितार हमला (मई 2024), शिव खोरी हमला (जून 2024), गगनगीर हमला (अक्टूबर 2024), बूटापाथरी हमला (अक्टूबर 2024) और बैसरन हमला (अप्रैल 2025) जैसे कई बड़े आतंकी हमलों से जुड़ा रहा है।

4 अगस्त 2023 को कुलगाम के हलान इलाके में हुए हमले में तीन भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। एजेंसियों का दावा है कि इस हमले में उसका हाथ था।

21 दिसंबर 2023 को पूंछ सेक्टर के डेरा की गली इलाका में सेना के काफिले पर घात लगाकर हमला किया गया था। इस हमले में चार सैनिक शहीद हुए थे। जांच एजेंसियों ने इस हमले को भी उसके नेटवर्क से जोड़ा।

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4 मई 2024 को पूंछ के शाहसितार इलाका में भारतीय वायुसेना के काफिले पर हमला हुआ था। इसमें एक वायुसेना कर्मी की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। इसे पीछे भी मूसा का हाथ था।

जून 2024 में शिव खोरी जा रहे तीर्थयात्रियों की बस पर हुई फायरिंग में भी मूसा शामिल था।

24 अक्टूबर 2024 को गुलमर्ग के बोटापथरी इलाके में सेना के काफिले पर हमला हुआ था। इस घटना में दो सैनिक और दो पोर्टर मारे गए थे। जांच में उसका नाम सामने आया था।

इसके बाद 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन घाटी में पर्यटकों पर बड़ा आतंकी हमला हुआ। इस हमले में 26 लोगों की जान गई, जिनमें अधिकांश पर्यटक थे और एक स्थानीय नागरिक भी शामिल था। सुरक्षा एजेंसियों की जांच में मूसा का नाम इस हमले के संदिग्धों में शामिल बताया गया था। (Hashim Moosa Killed)

सज्जाद जट्ट से लगातार संपर्क में था

खुफिया एजेंसियों के अनुसार मूसा लगातार लश्कर कमांडर सज्जाद जट्ट के संपर्क में था। जट्ट को घाटी में सक्रिय लश्कर नेटवर्क का ऑपरेटर माना जाता है।

एजेंसियों का कहना है कि मूसा की जट्ट से लगातार बातचीत होती थी। इसी वजह से वह केवल एक फील्ड कमांडर नहीं बल्कि बड़े नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा था।

सुरक्षा एजेंसियां उसके कम्युनिकेशन नेटवर्क को ट्रैक कर रही थीं। माना जाता है कि इसी दौरान उसकी लोकेशन का पता लगा। (Hashim Moosa Killed)

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