📍नई दिल्ली/येरेवन | 30 Sep, 2026, 11:22 AM
Trajan 155mm Howitzer: भारत और फ्रांस की साझेदारी में बनी ट्राजन 155 मिमी/52 कैलिबर होवित्जर तोपों का हाल ही में आर्मेनिया ने अपने सैन्य अभ्यास के दौरान लाइव-फायर परीक्षण किया। ट्राजन एक एडवांस टोड आर्टिलरी सिस्टम है, जिसे फ्रांस की केएनडीएस (पूर्व नेक्स्टर सिस्टम्स) और भारत की लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) ने मिलकर बनाया है। यह लंबी दूरी तक सटीक फायर करने वाली आधुनिक तोप मानी जाती है और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी प्रभावी ढंग से काम करने के लिए डिजाइन की गई है।
बता दें कि यह परीक्षण ऐसे समय हुआ है जब आर्मेनिया तेजी से अपने पुराने सोवियत दौर के हथियारों की जगह आधुनिक पश्चिमी और भारतीय हथियारों को शामिल कर रहा है।
Trajan 155mm Howitzer: आर्मेनिया ने क्यों चुनी भारतीय ट्राजन तोप?
पिछले कुछ सालों में आर्मेनिया ने अपने डिफेंस प्रोक्योरमेंट सोर्सेज में बड़ा बदलाव किया है। लंबे समय तक रूस पर निर्भर रहने वाला यह देश अब भारत, फ्रांस और अन्य देशों से भी सैन्य उपकरण खरीद रहा है।
अजरबैजान, तुर्किये और पाकिस्तान के बढ़ते रक्षा सहयोग के बीच आर्मेनिया अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने में जुटा है। इसी रणनीति के तहत उसने भारतीय डिफेंस सिस्टम्स में रुचि दिखाई है। ट्राजन होवित्जर की खरीद भी इसी व्यापक सैन्य आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा मानी जा रही है।
ट्राजन 155 मिमी/52 कैलिबर होवित्जर
ट्राजन 155 मिमी, 52 कैलिबर की टोड आर्टिलरी गन है। इसका डिजाइन फ्रांस की प्रसिद्ध सीजर (सीएईएसएआर) सेल्फ प्रोपेल्ड होवित्जर सिस्टम से प्रेरित है। इसकी बैरल तकनीक सीजर से ली गई है, जबकि इसका कैरिज फ्रांसीसी टीआरएफ-1 गन जैसा है।
इस तोप का वजन लगभग 13 टन यानी करीब 13,000 किलोग्राम है। यही वजह है कि इसे भारी तोपों की तुलना में तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है।
इसका ऑपरेशन आमतौर पर पांच से सात सैनिकों की टीम करती है। गन में ऑटोमैटिक शेल-लोडिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे फायरिंग की रफ्तार बढ़ जाती है।
🇦🇲🤝🇮🇳 Armenia has conducted live-fire trials of the Trajan 155mm/52-calibre towed artillery gun, jointly developed by India and France, marking another significant step in the country’s artillery modernisation efforts. pic.twitter.com/ETwGJppgth
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) September 30, 2026
कितनी दूर तक मार कर सकती है ट्राजन?
ट्राजन की सबसे बड़ी ताकत इसकी लंबी मारक क्षमता है। सामान्य हाई एक्सप्लोसिव गोले के साथ यह लगभग 30 किलोमीटर तक निशाना साथ सकती है। एक्सटेंडेड रेंज फुल बोर बेस ब्लीड (ईआरएफबी-बीबी) गोला-बारूद के साथ इसकी रेंज करीब 42 किलोमीटर तक पहुंच जाती है।
वहीं, वेलोसिटी एन्हांस्ड लॉन्ग रेंज आर्टिलरी प्रोजेक्टाइल (वीएलएपी) या रॉकेट-असिस्टेड गोले के इस्तेमाल से यह लगभग 55 किलोमीटर दूर तक फायर कर सकती है।
ट्राजन डायरेक्ट फायर मोड में करीब 2 किलोमीटर दूरी पर भी टारगेट को निशाना बना सकती है। (Trajan 155mm Howitzer)
आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से लैस
ट्राजन में कई आधुनिक डिजिटल सिस्टम भी लगाए गए हैं। गन में इंटीग्रेटेड इनर्शियल नेविगेशन यूनिट (आईएनयू), ऑटोमैटिक लेइंग सिस्टम, मजल वेलोसिटी रडार और बैलिस्टिक कंप्यूटर मौजूद हैं। ये सभी सिस्टम फायरिंग की सटीकता बढ़ाने में मदद करते हैं।
ट्राजन आधुनिक सैन्य नेटवर्क के साथ भी जुड़ सकती है, जिससे कमांड सेंटर से मिले डेटा के आधार पर तेजी से फायर मिशन पूरा किया जा सकता है।
यह गन बोनस एंटी-आर्मर स्मार्ट गोला-बारूद और स्पेसिडो कोर्स करेक्टिंग फ्यूज जैसे उन्नत गोला-बारूद का इस्तेमाल भी कर सकती है। (Trajan 155mm Howitzer)
एक मिनट से भी कम समय में तैनाती
ट्राजन की एक और खासियत इसकी तुरंत तैनाती क्षमता है। इसमें ऑक्जिलियरी पावर यूनिट (एपीयू) लगी है, जो इसे सीमित दूरी तक खुद चलने की क्षमता देती है। यह लगभग 10 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से खुद चल सकती है। जब इसे ट्रक से टो किया जाता है तो इसकी गति 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। यह गन एक मिनट 30 सेकंड से भी कम समय में फायरिंग पोजीशन में तैनात हो सकती है। (Trajan 155mm Howitzer)
भारतीय सेना ने नहीं खरीदी ट्राजन
आर्मेनिया इस समय भारत की दो अलग-अलग 155 मिमी/52 कैलिबर टोइड होवित्जर तोपों का इस्तेमाल कर रहा है, इनमें एटीएजीएस (ATAGS) और ट्राजन (Trajan) हैं। लेकिन भारतीय सेना के पास अभी इस कैटेगरी की दोनों तोपें सर्विस में नहीं हैं, जबकि आर्मेनिया इन्हें पहले ही अपने सैन्य बेड़े में शामिल कर चुका है।
दिलचस्प बात यह है कि ट्राजन को भारतीय सेना की टोड आर्टिलरी जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया था। इसने रेगिस्तान, दलदली क्षेत्रों और ऊंचाई वाले ठंडे इलाकों में परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरे किए थे। इसके बावजूद भारतीय सेना ने इसे सेवा में शामिल नहीं किया। बाद में संबंधित खरीद कार्यक्रम को आगे नहीं बढ़ाया गया।
इस कारण आर्मेनिया ट्राजन का पहला प्रमुख ऑपरेशनल यूजर बन गया है।
जून 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के हजीरा स्थित एलएंडटी संयंत्र का दौरा किया था। उस दौरान दिखाई गई ट्राजन गन भी आर्मेनिया के लिए तैयार की जा रही युनिट्स में से एक बताई गई थी।
ट्राजन का उत्पादन गुजरात के हजीरा स्थित एलएंडटी संयंत्र में किया जा रहा है। गन के कई महत्वपूर्ण सबसिस्टम भारत में तैयार किए गए हैं। इनमें ऑक्जिलियरी पावर यूनिट, कंट्रोल पैनल और रोलिंग गियर असेंबली शामिल हैं।
इसी वजह से ट्राजन उन देशों के लिए आकर्षक विकल्प बन रही है जो एडवांस 155 मिमी आर्टिलरी चाहते हैं लेकिन अत्यधिक महंगे प्लेटफॉर्म नहीं खरीदना चाहते। (Trajan 155mm Howitzer)
आर्मेनिया के पास अब कई भारतीय तोप सिस्टम्स
ट्राजन अकेली भारतीय प्रणाली नहीं है जिसे आर्मेनिया ने खरीदा है। आर्मेनिया पहले ही भारत से एमएआरजी 155-बीआर सेल्फ प्रोपेल्ड होवित्जर और एटीएजीएस 155 मिमी गन सिस्टम खरीद कर चुका है।
नवंबर 2022 में आर्मेनिया ने 72 एमएआरजी 155-बीआर सिस्टम का ऑर्डर दिया था। जनवरी 2026 तक इनकी डिलीवरी पूरी होने की जानकारी सामने आई थी। यह ट्रक पर लगी माउंटेड गन है, जो तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाकर फायरिंग करने में सक्षम है।
इसके अलावा कल्याणी ग्रुप और डीआरडीओ की बनाई एटीएजीएस की भी सीमित संख्या सेवा में शामिल की जा चुकी है। वहीं, फ्रांस से खरीदी गई सीजर स्वचालित होवित्जर भी आर्मेनियाई सेना के पास मौजूद हैं।
इस तरह आर्मेनिया के पास अब 155 मिमी कैलिबर की कई आधुनिक प्रणालियां हैं, जो नाटो मानक गोला-बारूद का इस्तेमाल कर सकती हैं। (Trajan 155mm Howitzer)
भारत-आर्मेनिया रक्षा सहयोग तेजी से बढ़ा
भारत और आर्मेनिया के बीच रक्षा सहयोग पिछले चार वर्षों में काफी तेजी से बढ़ा है। 2022 में आर्मेनिया ने लगभग 720 मिलियन डॉलर के सौदे में आकाश-1एस एयरर डिफेंस सिस्टम खरीदा थाा। वह इस मिसाइल सिस्टम का पहला विदेशी ग्राहक बना।
इसके बाद 250 मिलियन डॉलर के अनुबंध के तहत पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम का निर्यात भी किया गया। 2026 में भारत ने गाइडेड पिनाका रॉकेट की सप्लाई शुरू की।
आर्मेनिया ने स्वाति वेपन लोकेटिंग रडार भी खरीदे हैं, जो दुश्मन की तोपों और रॉकेटों की स्थिति का पता लगाने में सक्षम हैं। साथ ही आर्मेनिया टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के बनाए एएलएस-50 लोइटरिंग म्यूनिशन का भी ग्राहक है।
इस साल 17 अगस्त को येरेवन में भारत के रक्षा सचिव और आर्मेनिया के हाई-टेक इंडस्ट्री मंत्री के बीच एक एमओयू पर भी दस्तखत हुए थे। इस समझौते का उद्देश्य रक्षा अनुसंधान, तकनीकी सहयोग और संयुक्त उत्पादन को बढ़ावा देना है। वहीं, दोनों देशों के बीच कुल कॉन्ट्रैक्ट्स का मूल्य अब 1.7 अरब यूरो से अधिक बताया जाता है, जिससे आर्मेनिया भारत के सबसे बड़े रक्षा निर्यात बाजारों में शामिल हो गया है। (Trajan 155mm Howitzer)
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