📍नई दिल्ली | 3 Sep, 2026, 12:17 PM
India-Belgium Defence Pact: भारत और बेल्जियम ने रक्षा सहयोग को नई गति देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। गुरुवार को नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और बेल्जियम के रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रैंकेन के बीच हुई बैठक में दोनों देशों ने रक्षा उद्योग, सैन्य तकनीक, संयुक्त उत्पादन और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की। इस दौरान कई एमओयू, लेटर ऑफ इंटेंट और औद्योगिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
राजनाथ सिंह ने बैठक के बाद कहा कि मौजूदा समय में दुनिया भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे माहौल में भारत और बेल्जियम जैसे साझेदार देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने भारतीय और बेल्जियम रक्षा कंपनियों के बीच अधिक साझेदारी का स्वागत किया।
India-Belgium Defence Pact: भारत-बेल्जियम डिफेंस पैक्ट पर खास फोकस
इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा भारत और बेल्जियम के बीच बना नया डिफेंस इंडस्ट्रियल फ्रेमवर्क रहा। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डे वेवर और रक्षा मंत्री थियो फ्रैंकेन 2 से 4 सितंबर तक भारत दौरे पर हैं।
बेल्जियम सरकार द्वारा जारी दस्तावेजों के अनुसार, दोनों देशों के बीच रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने के लिए 10 बड़े औद्योगिक समझौतों को आगे बढ़ाया जा रहा है। इन समझौतों का मकसद बेल्जियम की रक्षा तकनीक को भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के साथ जोड़ना है।
बैठक में भारत और बेल्जियम ने डिफेंस प्रोडक्शन, समुद्री सुरक्षा, काउंटर-ड्रोन सिस्टम, मिसाइल, रॉकेट, रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर और सैन्य वाहनों से जुड़ी तकनीकों पर सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
भारत में बनेगी बेल्जियम की 70 मिमी रॉकेट तकनीक
थेल्स बेल्जियम और कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स के बीच अहम समझौता हुआ है। इस साझेदारी के तहत थेल्स बेल्जियम की 70 मिमी रॉकेट तकनीक का उत्पादन भारत में किया जाएगा। भारतीय सप्लायर्स भी उत्पादन प्रक्रिया में शामिल होंगे। वहीं, भारत में पूरी तरह निर्मित पहला रॉकेट वर्ष 2027 की शुरुआत में तैयार होने की उम्मीद है। (India-Belgium Defence Pact)
भारत में बनेगा एफएन हर्स्टल का संयुक्त उत्पादन केंद्र
बेल्जियम की प्रसिद्ध हथियार निर्माता कंपनी एफएन हर्स्टल और भारत फोर्ज की डिफेंस युनिट कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स भारत में एक संयुक्त उत्पादन केंद्र स्थापित करने की संभावना पर काम कर रही हैं।
इस प्रस्तावित सुविधा में एफएन के हथियार, इंटीग्रेटेड वेपन सिस्टम और काउंटर-ड्रोन सिस्टम का उत्पादन किया जा सकता है। यदि भारतीय सशस्त्र बलों से ऑर्डर मिलते हैं तो यह प्रोजेक्ट दोनों देशों के रक्षा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। (India-Belgium Defence Pact)
भारत आएंगे काउंटर-ड्रोन सिस्टम
बेल्जियम की ड्रोन कंपनी सोल.वन भारतीय साझेदार डीजीवीके एंटरप्राइजेज के साथ मिलकर अपने सबोटर ड्रोन और बज़किल तथा हिचहाइकर इंटरसेप्टर सिस्टम भारत में लाने पर काम कर रही है।
भारतीय सशस्त्र बलों ने इन प्रणालियों के बारे में जानकारी मांगी है और परीक्षण में भी रुचि दिखाई है। ये सिस्टम दुश्मन के ड्रोन को पहचानने और रोकने के लिए विकसित किए गए हैं। (India-Belgium Defence Pact)
🇮🇳🤝🇧🇪 India-Belgium Defence Partnership Gets a Major Boost
Belgium and India have unveiled 10 major defence industry cooperation agreements, covering ammunition production, rockets, counter-drone systems, maritime security, armoured vehicles, drones, sensors, air defence… pic.twitter.com/vcs018Rdqk— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) September 3, 2026
अर्जुन टैंक के लिए बेल्जियम की तकनीक
ओआईपी सेंसर सिस्टम्स और इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड के बीच सहयोग भी जारी रहेगा। ओआईपी पहले अर्जुन एमके-1 टैंक के लिए 130 से अधिक विजन सिस्टम उपलब्ध करा चुकी है। अर्जुन एमके-1ए के लिए कंपनी ने नया फायर कंट्रोल सिस्टम डेवलप किया है जो लेजर गाइडेड मिसाइल भी दाग सकता है।
यह सहयोग इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम और आर्मर्ड व्हीकल्स की अगली पीढ़ी की तकनीक से जुड़ा हुआ है।
जोरावर लाइट टैंक प्रोजेक्ट के लिए हुआ समझौता
बेल्जियम की जॉन कॉकरिल डिफेंस और लार्सन एंड टुब्रो के बीच भी सहयोग पर काम हो रहा है।
जॉन कॉकरिल डिफेंस भारतीय सेना के लिए विकसित किए जा रहे जोरावर लाइट टैंक के टर्रेट की सप्लाई की दावेदार कंपनियों में शामिल है। यह टैंक विशेष रूप से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑपरेशन के लिए विकसित किया जा रहा है। (India-Belgium Defence Pact)
एयर डिफेंस सिस्टम नेटवर्क में भी सहयोग
ऑक्टेव और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के बीच भी सहयोग जारी है। ऑक्टेव का विजुअलाइजेशन सॉफ्टवेयर पहले से ही भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम प्रोग्राम्स में इस्तेमाल हो रहा है। इनमें आकाश तीर, अरुध्रा, आईपीएसएस और आईएसीसीएस जैसे महत्वपूर्ण एयर डिफेंस नेटवर्क शामिल हैं। यह तकनीक विभिन्न सेंसरों और डिफेंस सिस्टम्स से मिली जानकारी को इंटीग्रेट करती है। (India-Belgium Defence Pact)
नौसेना के लिए इंजन और माइन काउंटरमेजर तकनीक
एंग्लो बेल्जियन कॉरपोरेशन और किरलोस्कर ऑयल इंजन्स के बीच समुद्री इंजन तकनीक पर बातचीत चल रही है।
किर्लोस्कर को भारत का पहला 6 मेगावाट मरीन डीजल इंजन डेवलप करने का कार्य मिला है। इस परियोजना में बेल्जियम की विशेषज्ञता का उपयोग किया जा सकता है।
वहीं एक्साइल बेल्जियम और लार्सन एंड टुब्रो माइन काउंटरमेजर वेसल प्रोग्रााम में सहयोग कर रहे हैं। इस परियोजना के तहत समुद्र में बिछाई गई नेवी माइंस का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने वाले ऑटोनॉमस सिस्टम डेवलप किए जा रहे हैं। (India-Belgium Defence Pact)
गोला-बारूद उत्पादन क्षमता बढ़ाने की तैयारी
न्यू लाचौसे और टेम्बो क्लासिक इंजीनियरिंग के बीच एक बड़ा औद्योगिक समझौता हुआ है। इसके तहत भारत में दो प्रकार के गोला-बारूद के लिए पूरी उत्पादन लाइन स्थापित की जाएगी। इस सुविधा की अनुमानित क्षमता प्रति वर्ष करीब 10 करोड़ राउंड उत्पादन की होगी। परियोजना का मूल्य लगभग 5 करोड़ यूरो बताया गया है। (India-Belgium Defence Pact)
एसआईडीएम और बीएसडीआई के बीच सहयोग
भारत की सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) और बेल्जियन सिक्योरिटी एंड डिफेंस इंडस्ट्री (BSDI) के बीच भी सहयोग समझौता हुआ है।
इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों की रक्षा कंपनियों को को-डेवलपमेंट, संयुक्त उत्पादन और तकनीकी साझेदारी के लिए एक मंच उपलब्ध कराना है। बेल्जियम के रक्षा मंत्री थियो फ्रैंकेन ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य आधुनिकीकरण प्रक्रियाओं में से एक पर काम कर रहा है और इसमें शामिल होने वाली कंपनियों के लिए बड़े अवसर मौजूद हैं। (India-Belgium Defence Pact)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





