📍नई दिल्ली | 31 Aug, 2026, 12:32 PM
Arjun Mk-1 Tank Upgrade: भारतीय सेना के स्वदेशी मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन एमके-1 को अब नई तकनीक और बेहतर क्षमताओं के साथ अपग्रेड करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आवडी स्थित हेवी व्हीकल्स फैक्ट्री (एचवीएफ) दो अर्जुन एमके-1 टैंकों के पायलट ओवरहॉल का काम शुरू करने जा रही है। यह काम आर्म्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (एवीएनएल) के तहत किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के तहत सिर्फ टैंकों की मरम्मत नहीं होगी, बल्कि उनमें अर्जुन एमके-1ए वर्जन के 26 महत्वपूर्ण अपग्रेड भी लगाए जाएंगे।
Arjun Mk-1 Tank Upgrade: भारत का स्वदेशी मुख्य युद्धक टैंक है अर्जुन
अर्जुन एमके-1 भारत का स्वदेशी मेन बैटल टैंक है, जिसे डीआरडीओ की चेन्नई स्थित कॉम्बैट व्हीकल्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (सीवीआरडीई) ने डेवलप किया था। इसका उत्पादन आवडी में हेवी व्हीकल्स फैक्ट्री में किया गया। अब तक करीब 124 अर्जुन एमके-1 टैंक भारतीय सेना को सौंपे जा चुके हैं और ये दो रेजिमेंट में तैनात हैं।
टैंक में 1400 हॉर्सपावर का जर्मन एमटीयू वी-10 डीजल इंजन और रेंक ट्रांसमिशन लगाया गया है। इस पावरपैक की निर्धारित उम्र 600 इंजन घंटे या 5,000 किलोमीटर तक मानी जाती है। इसके बाद टैंक को बड़े स्तर के ओवरहॉल की जरूरत होती है।
अब तक अर्जुन टैंकों के लिए व्यापक ओवरहॉल प्रक्रिया नहीं थी। इसी वजह से पहले चरण में दो टैंकों को चुनकर पायलट ओवरहॉल किया जा रहा है।
चार चरणों में होगा पूरा ओवरहॉल
ओवरहॉल प्रक्रिया कई स्तरों पर पूरी की जाएगी। सबसे पहले आवडी स्थित ऑर्डनेंस डिपो में टैंकों की प्रारंभिक जांच होगी। यहां टैंक की मौजूदा स्थिति, क्षतिग्रस्त हिस्सों, यूसेज हिस्ट्री और तकनीकी रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।
इसके बाद टैंकों को एचवीएफ आवडी भेजा जाएगा, जहां विशेषज्ञ उसके प्रमुख सिस्टमों की जांच करेंगे। इसमें पावरपैक, गन कंट्रोल सिस्टम और गन माउंटिंग सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण हिस्से शामिल होंगे।
तीसरे चरण में टैंक को पूरी तरह खोला जाएगा। इसके बाद सभी प्रमुख सिस्टमों का अलग-अलग निरीक्षण और ओवरहॉल होगा। जरूरत पड़ने पर कई पुराने हिस्सों को पूरी तरह नए सिस्टम से बदला जाएगा। (Arjun Mk-1 Tank Upgrade)
एमके-1ए के 26 बड़े अपग्रेड लगाए जाएंगे
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पुराने अर्जुन एमके-1 टैंकों को एमके-1ए वर्जन की कई आधुनिक क्षमताएं मिलेंगी।
टैंक में नया कमांडर पैनोरामिक साइट लगाया जाएगा, जिससे कमांडर को युद्धक्षेत्र में बेहतर निगरानी क्षमता मिलेगी। गनर मेन साइट को एमके-2 संस्करण में अपग्रेड किया जाएगा। इसके साथ ऑटोमैटिक टारगेट ट्रैकर भी लगाया जाएगा, जो टारगेट को स्वतः ट्रैक कर सकेगा।
फायर कंट्रोल सिस्टम को भी आधुनिक बनाया जाएगा। नया फायर कंट्रोल कंप्यूटर और एडवांस सेंसर टैंक की सटीकता बढ़ाएंगे। बेहतर ट्रैक सिस्टम और एडवांस्ड रनिंग गियर सिस्टम से टैंक की मोबिलिटी में सुधार होगा।
इसके अलावा 8 किलोवाट का कॉम्पैक्ट ऑक्जिलरी पावर यूनिट (एपीयू), एडवांस फायर डिटेक्शन और सप्रेशन सिस्टम, केमिकल सेंसर, एलईडी हेडलैंप और कई अन्य सुधार भी किए जाएंगे। (Arjun Mk-1 Tank Upgrade)
परीक्षण के बाद ही सेना को मिलेंगे टैंक
ओवरहॉल पूरा होने के बाद टैंकों पर कई तरह के परीक्षण किए जाएंगे। पहले हल और टर्रेट का अलग-अलग परीक्षण होगा। इसके बाद दोनों को जोड़कर स्थिरता परीक्षण और रनिंग ट्रायल किए जाएंगे।
टैंक की फायरिंग सटीकता की जांच भी की जाएगी। सभी परीक्षण सफल होने के बाद सेना, ईएमई और अन्य एजेंसियों की मौजूदगी में अंतिम निरीक्षण होगा। इसके कुछ परीक्षण राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज या अन्य सैन्य परीक्षण क्षेत्रों में भी किए जा सकते हैं। (Arjun Mk-1 Tank Upgrade)
18 महीने में पूरा करना होगा काम
रक्षा मंत्रालय ने प्रोजेक्ट के लिए 18 महीने की समयसीमा तय की है। कॉन्ट्रैक्ट मिलने के बाद एचवीएफ को दोनों टैंकों का ओवरहॉल और अपग्रेड पूरा करके सेना को सौंपना होगा। समयसीमा से देरी होने पर आर्थिक दंड का भी प्रावधान रखा गया है। वहीं टैंकों पर 24 महीने या 150 इंजन घंटे की वारंटी भी दी जाएगी।
इस प्रोजेक्ट में एचवीएफ के अलावा डीआरडीओ की सीवीआरडीई, क्वालिटी एश्योरेंस एजेंसियां, ईएफए आवडी, रेंक इंडिया, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और अन्य रक्षा उद्योग भी शामिल हैं। (Arjun Mk-1 Tank Upgrade)
वजनी होने से ऑपरेशन में हैं दिक्कतें
साल 2004 से 2012 के बीच कुल 124 अर्जुन एमके-1 टैंक भारतीय सेना को सौंपे गए थे। ये टैंक वर्तमान में 43वीं आर्मर्ड रेजिमेंट और 75वीं आर्मर्ड रेजिमेंट में तैनात हैं। इनकी तैनाती मुख्य रूप से राजस्थान के पश्चिमी रेगिस्तानी इलाकों में की गई है, जहां इनकी क्षमताओं का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। लगभग 58.5 टन वजन होने के चलते कुछ पुलों और कठिन इलाकों में इनके संचालन की सीमाएं हैं, इसलिए इन्हें रेगिस्तानी युद्धक्षेत्र के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है।
अर्जुन एमके-1 टैंक अभी भी भारतीय सेना की सक्रिय सेवा में हैं। हालांकि शुरुआत में स्पेयर पार्ट्स की कमी के कारण कई टैंकों के रखरखाव में दिक्कतें आई थीं और 2013 से 2015 के बीच कुछ टैंक लंबे समय तक खड़े रहे थे। बाद में इन्हें जरूरी स्पेयर उपलब्ध कराए गए। हाल के सालों में युद्धक्षेत्र की बदलती चुनौतियों को देखते हुए कुछ अर्जुन टैंकों पर ड्रोन हमलों से सुरक्षा के लिए “कोप केज” जैसी स्ट्रक्चर भी लगाए गए हैं।
इसके अलावा अर्जुन एमके-1 टैंकों में गन से लॉन्च होने वाली एसएएमएचओ एंटी-टैंक मिसाइल को अभी तक नियमित रूप से शामिल नहीं किया गया है, हालांकि इसका सफल परीक्षण किया जा चुका है। (Arjun Mk-1 Tank Upgrade)
अर्जुन एमके-1ए का ऑर्डर अभी पेंडिंग
वहीं, साल 2021 में भारतीय सेना ने 118 अर्जुन एमके-1ए टैंकों का ऑर्डर दिया था। एमके-1ए वर्जन में कई नई क्षमताएं जोड़ी गई हैं, जिनमें बेहतर फायर कंट्रोल सिस्टम, आधुनिक निगरानी उपकरण और एडवांस सुरक्षा सुविधाएं शामिल हैं। हालांकि इस प्रोजेक्ट को इंजन संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अर्जुन टैंक में इस्तेमाल होने वाले जर्मन एमटीयू इंजन की प्रोडक्शन लाइन बंद होने के कारण सीरियल प्रोडक्शन शुरू नहीं हो पाया है। जुलाई-अगस्त 2026 तक सेना को एक भी सीरियल प्रोडक्शन एमके-1ए टैंक नहीं मिला है। वर्तमान में दो प्रोटोटाइप उपलब्ध हैं, जबकि बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए नए इंजन का इंतजार किया जा रहा है। इसके लिए स्वदेशी डैट्रान 1500 हॉर्सपावर इंजन और एमटीयू बेस्ड नए विकल्पों पर काम चल रहा है। (Arjun Mk-1 Tank Upgrade)
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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





