📍नई दिल्ली | 31 Aug, 2026, 8:42 PM
India GCAP Dialogue Partner: भारत को यूनाइटेड किंगडम, जापान और इटली के नेतृत्व वाले ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम (जीसीएपी) में “डायलॉग पार्टनर” यानी संवाद भागीदार का दर्जा मिला है। जीसीएपी दुनिया के सबसे महत्वाकांक्षी छठी पीढ़ी (सिक्स्थ जेनरेशन) के लड़ाकू विमान कार्यक्रमों में से एक माना जाता है। इस कार्यक्रम का नेतृत्व ब्रिटेन, जापान और इटली कर रहे हैं। इसका लक्ष्य वर्ष 2035 के आसपास एक अत्याधुनिक लड़ाकू विमान को सेवा में शामिल करना है।
भारत को डायलॉग पार्टनर बनाने का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब भारत अपने स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है और साथ ही भविष्य की एयर कॉम्बैट टेक्नोलॉजी पर भी नजर बनाए हुए है।
India GCAP Dialogue Partner: क्या है जीसीएपी कार्यक्रम?
ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम की शुरुआत साल 2022 में हुई थी, जब ब्रिटेन, जापान और इटली ने अपने-अपने अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रमों को एक मंच पर लाने का फैसला किया था। इसका उद्देश्य एक ऐसा एयर कॉम्बैट सिस्टम तैयार करना है, जिसमें स्टेल्थ तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, हाई-स्पीड डाटा लिंक और मानवरहित प्लेटफॉर्म के साथ मिलकर काम करने की क्षमता शामिल हो।
जीसीएपी के तहत डेवलप होने वाला विमान ड्रोन, सैटेलाइट, एयरबोर्न सेंसर और अन्य प्लेटफॉर्म के साथ नेटवर्क के रूप में काम करेगा। इसलिए इसे केवल एक विमान नहीं बल्कि भविष्य के युद्ध का पूरा कॉम्बैट इकोसिस्टम माना जा रहा है।
भारत को क्या फायदा होगा?
भारत को मिले डायलॉग पार्टनर स्टेटस का मतलब यह नहीं है कि वह फिलहाल कार्यक्रम का पूर्ण सदस्य बन गया है। लेकिन इससे भारत को भविष्य की युद्धक विमान तकनीकों, सुरक्षा जरूरतों और औद्योगिक सहयोग के अवसरों पर तीनों देशों के साथ बातचीत करने का मौका मिलेगा।
डायलॉग पार्टनर का दर्जा मिलने के बाद भारत को कार्यक्रम की दिशा, तकनीकी जरूरतों और औद्योगिक सहयोग के विषयों पर चर्चा का अवसर मिलेगा।
हालांकि भारत को इस स्तर पर सीक्रेट डिजाइन जानकारी, संवेदनशील तकनीकों या कार्यक्रम के प्रबंधन में कोई भूमिका नहीं मिलेगी। वह अभी कार्यक्रम की फंडिंग या विकास का साझेदार भी नहीं है।
इसके बावजूद रक्षा विशेषज्ञ इसे महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं क्योंकि इससे भारत को उन तकनीकों को करीब से समझने का अवसर मिलेगा जिन्हें डेवलप करने में सामान्य तौर पर कई दशक लग सकते हैं।
साथ ही, भारतीय कंपनियों के लिए भी भविष्य में ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बनने के अवसर खुल सकते हैं। (India GCAP Dialogue Partner)
एएमसीए बना हुआ है भारत की सबसे बड़ी उम्मीद
भारत का अपना एएमसीए कार्यक्रम देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एएमसीए एक स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ लड़ाकू विमान है जिसे भारतीय वायु सेना की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर डेवलप किया जा रहा है।
इस प्रोजेक्ट के जरिए भारत केवल एक नया लड़ाकू विमान नहीं बना रहा, बल्कि स्टेल्थ डिजाइन, एडवांस्ड एवियोनिक्स, सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और वेपन इंटीग्रेशन जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों में भी अनुभव हासिल कर रहा है। (India GCAP Dialogue Partner)
यूरोप का एफसीएएस भी विकल्पों में शामिल
जीसीएपी के अलावा भारत यूरोप के फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (एफसीएएस) कार्यक्रम पर भी नजर रखे हुए है।
एफसीएएस की शुरुआत फ्रांस, जर्मनी और स्पेन के संयुक्त कार्यक्रम के रूप में हुई थी। इसका फोकस नेक्स्ट जेनरेशन फाइटर, ड्रोन, सेंसर और कॉम्बैट क्लाउड नेटवर्क था।
हालांकि जून 2026 में फ्रांस और जर्मनी के बीच औद्योगिक जिम्मेदारियों को लेकर मतभेद बढ़ने के बाद संयुक्त फाइटर प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सकी।
इसके बावजूद फ्रांस अपने अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम पर काम जारी रखे हुए है। एफसीएएस के भविष्य के स्ट्रक्चर और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को लेकर अभी भी चर्चाएं जारी हैं।
भारत दोनों कार्यक्रमों पर नजर बनाए हुए है और विभिन्न स्तरों पर सहयोग की संभावनाओं का अध्ययन कर रहा है। (India GCAP Dialogue Partner)
केवल विमान नहीं, पूरी तकनीकी क्षमता पर नजर
छठवीं पीढ़ी के लड़ाकू की असली ताकत विभिन्न तकनीकों के इंटीग्रेशन में होगी। इनमें लो-ऑब्जर्वेबल डिजाइन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड डिसिजन सिस्टम, लंबी दूरी की सेंसर क्षमता, सिक्योर कम्युनिकेशन, नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशन और मैन्ड-अनमैन्ड टीमिंग जैसी खूबियां शामिल होंगी।
इसी वजह से भारत केवल विमान खरीदने के बजाय डिजाइन, सॉफ्टवेयर, सेंसर, प्रोपल्शन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भी भागीदारी चाहता है। (India GCAP Dialogue Partner)
चीन की बढ़ती ताकत के बीच बढ़ा महत्व
भारत की इस पहल को एशिया में बदलते सैन्य संतुलन से भी जोड़कर देखा जा रहा है। चीन साल 2025 के अंत तक कम से कम 13 रेजिमेंट में करीब 300 जे-20 स्टेल्थ लड़ाकू विमान तैनात कर चुका था। कुछ विश्लेषणों का अनुमान है कि 2026 के मध्य तक यह संख्या 500 से अधिक हो सकती है।
चीन का जे-20 पहले से ही उसकी वायु सेना का प्रमुख स्टेल्थ फाइटर बन चुका है। इसके अलावा चीन नए जे-36 और जे-50 जैसे एडवांस प्रोग्राम पर भी तेजी से काम कर रहा है।
दिसंबर 2024 में जे-36 ने पहली उड़ान भरी थी। इस विमान की खासियत इसका डायमंड विंग डिजाइन, बिना टेल वाला ढांचा और तीन इंजन वाला कॉन्फिगरेशन है। इसके कई प्रोटोटाइप उड़ान परीक्षणों में देखे जा चुके हैं।
चीन के इन कार्यक्रमों ने दुनिया की प्रमुख वायु सेनाओं के बीच नई पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की दौड़ को और तेज कर दिया है। (India GCAP Dialogue Partner)
भारतीय वायु सेना के सामने स्क्वाड्रन की चुनौती
भारतीय वायु सेना को अधिकृत जरूरत 42 फाइटर स्क्वाड्रन की है, लेकिन वर्तमान में उसके पास लगभग 29 से 32 स्क्वाड्रन ही मौजूद हैं। आने वाले सालों में जगुआर, मिग-29 और मिराज-2000 जैसे पुराने विमानों की संख्या धीरे-धीरे कम होगी। 110 से 120 जगुआर विमान 2028 से लेकर अगले दशक के मध्य तक सेवा से बाहर होने वाले हैं। ऐसे में भारतीय वायु सेना को एक तरफ मौजूदा लड़ाकू बेड़े को मजबूत रखना है, वहीं दूसरी तरफ भविष्य की तकनीकों के लिए भी तैयारी करनी है। (India GCAP Dialogue Partner)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





