📍सियोल | 29 Aug, 2026, 4:07 PM
South Korea 6th Generation Fighter: दुनिया में लड़ाकू विमानों की नई दौड़ शुरू हो चुकी है। जहां भारत अपने स्वदेशी एएमसीए (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) कार्यक्रम के जरिए 5वीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट विकसित कर रहा है, वहीं दक्षिण कोरिया अब सीधे 6वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने की तैयारी कर रहा है। दक्षिण कोरिया की डिफेंस एक्विजिशन प्रोग्राम एडमिनिस्ट्रेशन (DAPA) ने हाल ही में 21 अगस्त “कोरियन नेक्स्ट जेनरेशन फाइटर” के लिए कॉन्सेप्चुअल स्टडी का टेंडर जारी किया है।
यह 14 महीने का स्टडी कार्यक्रम है, जिसका बजट 90 करोड़ कोरियाई वॉन यानी करीब 6 करोड़ रुपये रखा गया है। इस स्टडी का उद्देश्य भविष्य के लड़ाकू विमान का ऑपरेशनल कॉन्सेप्ट, डिजाइन, मिशन क्षमता और टेक्नोलॉजी रोडमैप तैयार करना है। दक्षिण कोरिया की वायुसेना और रक्षा उद्योग इसे देश की अगली बड़ी सैन्य परियोजना के रूप में देख रहे हैं।
South Korea 6th Generation Fighter: 6वीं पीढ़ी के फाइटर के लिए तय होंगी बुनियादी जरूरतें
डीएपीए की ओर से जारी दस्तावेजों के अनुसार इस स्टडी में यह तय किया जाएगा कि भविष्य का कोरियाई फाइटर जेट किन क्षमताओं से लैस होगा। इसमें मैनड-अनमैनड टीमिंग (एमयूएम-टी), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्रॉडबैंड स्टील्थ और नई पीढ़ी के सेंसर सिस्टम पर विशेष जोर दिया गया है।
स्टडी के दौरान विमान की बेसलाइन कॉन्फिगरेशन, मिशन प्रभावशीलता, ऑपरेशनल आवश्यकताएं और तकनीकी विकास की अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक योजना तैयार की जाएगी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तिथि अक्टूबर 2026 के आसपास रखी गई है।
कैसा होगा दक्षिण कोरिया का नया फाइटर जेट
दक्षिण कोरिया की एजेंसी फॉर डिफेंस डेवलपमेंट (ADD) ने जुलाई 2026 में डेयजॉन में आयोजित एयरोस्पेस कॉन्फ्रेंस के दौरान 6वीं पीढ़ी के फाइटर का एक संभावित डिजाइन भी पेश किया था।
इस डिजाइन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि विमान पूरी तरह टेललेस स्टील्थ डिजाइन पर आधारित है। इसमें न तो पारंपरिक वर्टिकल टेल दिखाई देती है और न ही हॉरिजॉन्टल टेल। विमान में डबल डेल्टा विंग और कैनार्ड कॉन्फिगरेशन का उपयोग किया गया है। फ्यूजलेज और विंग्स को इस तरह जोड़ा गया है कि रडार पर इसकी पहचान बेहद कठिन हो जाए।
विमान की लंबाई लगभग 16 मीटर और विंगस्पैन करीब 11 मीटर होगा। इसके नीचे तीन इंटरनल वेपन बे दिखाई देते हैं। बीच वाले बे में चार एमबीडीए मेटेओर मिसाइल और दोनों साइड बे में एक-एक आईरिस-टी मिसाइल रखी जा सकती है।

ब्रॉडबैंड स्टील्थ पर सबसे ज्यादा जोर
अब तक अधिकांश स्टील्थ फाइटर मुख्य रूप से एक्स-बैंड रडार से बचने के लिए डिजाइन किए जाते रहे हैं। लेकिन दक्षिण कोरिया के नए कॉन्सैप्टे में एल-बैंड, एस-बैंड और एक्स-बैंड जैसे कई रडार स्पेक्ट्रम से बचाव की क्षमता पर जोर दिया गया है।
इसे ब्रॉडबैंड स्टील्थ कहा जाता है। इसका उद्देश्य केवल एक प्रकार के रडार से नहीं बल्कि विभिन्न प्रकार की निगरानी प्रणालियों से विमान की पहचान को कठिन बनाना है। (South Korea 6th Generation Fighter)
AI और ड्रोन के साथ मिलकर करेगा मिशन
दक्षिण कोरिया के स्टडी में मैनड-अनमैनड टीमिंग को मुख्य जरूरत के तौर पर शामिल किया गया है। इसका मतलब है कि भविष्य का फाइटर जेट केवल अकेले मिशन नहीं उड़ाएगा, बल्कि उसके साथ कई अनमैनड कॉम्बैट एयरक्राफ्ट और ड्रोन भी काम करेंगे।
पायलट मुख्य विमान में रहेगा जबकि एआई आधारित सिस्टम कई ड्रोन को कंट्रोल करने में सहायता करेंगे। इससे युद्ध क्षेत्र में निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और वेपन ऑपरेशन की क्षमता बढ़ सकती है। (South Korea 6th Generation Fighter)
✈️🇰🇷 South Korea Accelerates Development of Indigenous Sixth-Generation Fighter Jet
South Korea’s Defense Acquisition Program Administration (DAPA) has launched a new study to shape its future 6th-generation fighter aircraft, issuing a request for proposals (RFP) for a 14-month… pic.twitter.com/endkFD478g— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) August 29, 2026
इंजन बना सबसे बड़ी चुनौती
दक्षिण कोरिया ने 2026 में अपने केएफ-21 बोरामे लड़ाकू विमान का सिस्टम डेवलपमेंट पूरा कर लिया है और इसके शुरुआती ब्लॉक-1 विमान अब दक्षिण कोरियाई वायुसेना में शामिल होने लगे हैं। केएफ-21 को 4.5 पीढ़ी का लड़ाकू विमान माना जाता है। यह दो जीई एफ414 इंजनों की ताकत से उड़ान भरता है। फिलहाल इसमें हथियार विमान के बाहरी पाइलन पर लगाए जाते हैं, इसलिए इसे पूरी तरह स्टील्थ फाइटर नहीं माना जाता।
दक्षिण कोरिया की सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती इंजन तकनीक को माना जा रहा है। डीएपीए ने अपने स्टडी में ऐसे दो अडैप्टिव-साइकिल इंजन की मांग रखी है जो सुपरसोनिक क्रूज क्षमता प्रदान कर सकें। अडैप्टिव-साइकिल इंजन उड़ान के दौरान वे जरूरत पड़ने पर वे अधिक थ्रस्ट और दूसरी स्थिति में बेहतर ईंधन दक्षता उपलब्ध कराते हैं। हालांकि यह तकनीक दुनिया के चुनिंदा देशों के पास ही है।
दक्षिण कोरिया ने अपने 6वीं पीढ़ी के फाइटर के लिए एफ-414 का नाम नहीं लिखा है, लेकिन एडीडी के दिखाए गए कॉन्सेप्ट मॉडल के साइज और इंजन सेक्शन देखकर कई रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि शुरुआती वर्जन में एफ-414 इंजन लगाया जा सकता है।
वैसे तो दक्षिण कोरिया फिलहाल केटीएफ-16000 इंजन डेवलप कर रहा है। यह इंजन केएफ-21 कार्यक्रम के लिए बनाया जा रहा है। इसकी अनुमानित क्षमता 16,000 पाउंड ड्राई थ्रस्ट और 24,000 पाउंड आफ्टरबर्नर थ्रस्ट की है।
रिपोर्टों के अनुसार केवल केटीएफ-16000 के आधार पर 6वीं पीढ़ी के विमान की सभी जरूरतों को पूरा करना आसान नहीं होगा। इसी वजह से इंजन कार्यक्रम को पूरे प्रोजेक्ट की सबसे कठिन कड़ी माना जा रहा है।
केएफ-21 से मिले अनुभव का होगा इस्तेमाल
दक्षिण कोरिया का मौजूदा केएफ-21 बोरामे कार्यक्रम भविष्य की इस परियोजना की नींव माना जा रहा है।
केएफ-21 एक 4.5 पीढ़ी का ट्विन इंजन लड़ाकू विमान है जिसने 2026 में अपना सिस्टम डेवलपमेंट चरण पूरा किया। शुरुआती ब्लॉक-1 संस्करण मुख्य रूप से एयर-टू-एयर मिशन के लिए तैयार किया गया है।
आने वाले वर्षों में ब्लॉक-2 और ब्लॉक-3 संस्करणों में ग्राउंड अटैक क्षमता, बेहतर स्टील्थ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मैनड-अनमैनड टीमिंग जैसी तकनीकें जोड़ी जाएंगी।
दक्षिण कोरिया की कंपनियां केएफ-21 को 5.5 पीढ़ी के फाइटर में बदलने की संभावनाओं पर भी काम कर रही हैं। इसी अनुभव का उपयोग अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान में किया जाएगा। (South Korea 6th Generation Fighter)
कई बड़ी कंपनियां दौड़ में शामिल
इस स्टडी कार्यक्रम के लिए दक्षिण कोरिया की प्रमुख रक्षा कंपनियां दौड़ में हैं। एजेंसी फॉर डिफेंस डेवलपमेंट , कोरिया एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज और कोरियन एयर को प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। डीएपीए ने संयुक्त बोली की भी अनुमति दी है ताकि कई संस्थान मिलकर प्रस्ताव दे सकें।
इसके अलावा एलआईजी नेक्स1 जैसी कंपनियां इंटरनल वेपन बे और लो-ऑब्जर्वेबल टेक्नोलॉजी पर अलग से काम कर रही हैं। (South Korea 6th Generation Fighter)
दुनिया में तेज हो रही अगली पीढ़ी के फाइटरों की दौड़
दक्षिण कोरिया ऐसे समय में यह स्टडी शुरू कर रहा है जब दुनिया की कई बड़ी शक्तियां नई पीढ़ी के लड़ाकू विमानों पर काम कर रही हैं।
अमेरिका का एफ-47 कार्यक्रम, चीन के जे-36 और जे-50 प्लेटफॉर्म तथा जीकैप जैसे प्रोजेक्ट पहले से चर्चा में हैं। चीन के कुछ नए विमान उड़ान परीक्षण चरण तक पहुंच चुके हैं, जबकि अमेरिका का एफ-47 कार्यक्रम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। (South Korea 6th Generation Fighter)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





