📍नई दिल्ली/बीजिंग | 29 Aug, 2026, 12:15 PM
Zhao Zongqi Corruption Probe: भारत के साथ 2017 के डोकलाम गतिरोध और 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के दौरान चीन की पश्चिमी थिएटर कमांड का नेतृत्व करने वाले पूर्व पीएलए जनरल झाओ जोंगकी पर चीन में बड़ी कार्रवाई हुई है। चीन की शीर्ष राजनीतिक सलाहकार संस्था चीनी पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस (सीपीपीसीसी) ने 26 अगस्त को उनकी सदस्यता समाप्त कर दी। इसके साथ ही उन्हें सीपीपीसीसी की स्थायी समिति और जातीय एवं धार्मिक मामलों की समिति के उप निदेशक पद से भी हटा दिया गया।
हॉन्गकॉन्ग के अखबार मिंग पाओ और अन्य मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, झाओ जोंगकी चीन की सेना में चल रहे भ्रष्टाचार विरोधी अभियान की चपेट में आ गए हैं। वहीं यह भी दावा किया गया है कि उन्हें जांच के तहत हिरासत में लिया गया है। हालांकि चीन सरकार ने उनकी गिरफ्तारी या जेल भेजे जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के भीतर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चल रहा है और कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को पदों से हटाया जा चुका है।
Zhao Zongqi Corruption Probe: भारत-चीन सीमा विवाद से जुड़ा बड़ा नाम
जनरल झाओ जोंगकी का नाम भारत-चीन सीमा पर हुई दो महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ा रहा है। साल 2017 में भूटान के डोकलाम क्षेत्र में भारत और चीन की सेनाओं के बीच 73 दिन तक फेसऑफ चला था। उस समय झाओ पश्चिमी थिएटर कमांड के प्रमुख थे।
इसके बाद साल 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। 15 जून 2020 की रात हुए संघर्ष में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हुए थे। यह 1962 के युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच सबसे गंभीर सैन्य टकरावों में से एक माना जाता है।
उस समय यह दावा किया गया था कि सीमा पर आक्रामक रुख अपनाने के पीछे झाओ की महत्वपूर्ण भूमिका थी। हालांकि चीन ने इन दावों पर कभी सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की।
झाओ का भारत के प्रति बेहद सख्त रुख
अमेरिकी खुफिया आकलन और यूएस न्यूज एंड वर्ल्ड रिपोर्ट में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, उस समय पश्चिमी थिएटर कमांड के प्रमुख रहे जनरल झाओ जोंगकी को इस कार्रवाई का प्रमुख योजनाकार माना गया था। रिपोर्ट में अमेरिकी सूत्रों के हवाले से कहा गया था कि झाओ भारत के प्रति बेहद सख्त रुख रखते थे और सीमा पर चीन की स्थिति को कमजोर दिखाने के पक्ष में नहीं थे। इसी कारण उन्होंने आक्रामक रणनीति अपनाने का समर्थन किया था।
गलवान संघर्ष के बाद भारत-चीन संबंधों में तनाव लंबे समय तक बना रहा। दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई। कुछ क्षेत्रों में दोनों सेनाओं ने चरणबद्ध तरीके से पीछे हटने की प्रक्रिया पूरी की, लेकिन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के कई संवेदनशील इलाकों में आज भी बफर जोन मौजूद हैं।
सीमा पर तनाव कम करने के लिए कोर कमांडर स्तर की कई बैठकें आयोजित की गईं, जबकि दोनों देशों ने सैन्य तैनाती और बुनियादी ढांचे को भी मजबूत किया। (Zhao Zongqi Corruption Probe)
झाओ जोंगकी पर क्या हैं आरोप
जनरल झाओ जोंगकी को हटाए जाने के बाद चीन सरकार ने उनके खिलाफ किसी विशिष्ट मामले या आरोप का सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं किया है। 26 अगस्त 2026 को चीनी जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन (सीपीपीसीसी) ने केवल इतना घोषित किया कि झाओ को उसकी सदस्यता, स्थायी समिति की सदस्यता और जातीय एवं धार्मिक मामलों की समिति के उप निदेशक पद से हटा दिया गया है।
हालांकि, हॉन्गकॉन्ग के अखबार मिंग पाओ की रिपोर्ट में दावा किया गया कि चीन में आमतौर पर जब किसी वरिष्ठ सैन्य अधिकारी पर गंभीर अनुशासनात्मक या भ्रष्टाचार संबंधी जांच शुरू होती है, तो सबसे पहले उसके राजनीतिक और सार्वजनिक पद वापस लिए जाते हैं। इसके बाद आंतरिक जांच आगे बढ़ाई जाती है और विस्तृत आरोप बाद में सामने आते हैं।
शी जिनपिंग के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान में जिन बड़े सैन्य अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है, उन पर आमतौर पर सेना के ठेकों और हथियार खरीद में गड़बड़ी करने, रिश्वत लेने, अपने पद का इस्तेमाल कर परिवार या करीबी लोगों को फायदा पहुंचाने और पार्टी के प्रति पूरी निष्ठा नहीं दिखाने जैसे आरोप लगाए जाते हैं। (Zhao Zongqi Corruption Probe)
🚨🇨🇳 China Removes Two Top Generals from Central Military Commission
China has removed Vice Chairman Zhang Youxia and Joint Staff Chief Liu Zhenli from the Central Military Commission (CMC), the country’s highest military command body, following investigations into alleged…— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) August 29, 2026
साधारण परिवार से सेना के शीर्ष पद तक का सफर
झाओ जोंगकी का जन्म अप्रैल 1955 में चीन के हेइलोंगजियांग प्रांत के बिन काउंटी में हुआ था। उन्होंने 1970 में केवल 15 वर्ष की आयु में पीएलए ज्वॉइन की थी।
सैन्य करियर की शुरुआत उन्होंने यूनान क्षेत्र की 14वीं सेना से की। बाद में वे टोही इकाइयों में शामिल हुए और 1979 के चीन-वियतनाम युद्ध के दौरान सीमा क्षेत्रों में ऑपरेशन का हिस्सा रहे।
1985 में, दस लाख सैनिकों की कटौती के दौरान, 11वीं और 14वीं सेनाओं के मुख्यालयों का विलय करके 14वीं समूह सेना बनाई गई, और उन्हें 14वीं समूह सेना की 40वीं डिवीजन की 118वीं रेजिमेंट का कमांडर नियुक्त किया गया। 1987 में, वे सैन्य सलाहकार समूह के प्रमुख के रूप में सेवा देने के लिए जैरे गए, और चीन लौटने के बाद, उन्होंने 40वीं डिवीजन के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ के तौर पर काम किया।
1990 के दशक में उन्होंने तिब्बत सैन्य क्षेत्र में लंबे समय तक काम किया। ऊंचाई वाले इलाकों में ऑपरेशन और सीमा सुरक्षा से जुड़े अनुभव के कारण उन्हें धीरे-धीरे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती गईं।
1992 में उन्हें 52वीं माउंटेन इन्फैंट्री ब्रिगेड का कमांडर बनाया गया। इसके बाद वे तिब्बत सैन्य क्षेत्र में चीफ ऑफ स्टाफ और फिर वरिष्ठ पदों पर पहुंचे। 2001 में उन्हें मेजर जनरल का रैंक मिला। (Zhao Zongqi Corruption Probe)
पश्चिमी थिएटर कमांड के पहले कमांडर बने
चीन ने 2016 में अपनी सेना का व्यापक पुनर्गठन किया और सात सैन्य क्षेत्रों की जगह पांच थिएटर कमांड बनाए गए। उसी दौरान झाओ जोंगकी को पश्चिमी थिएटर कमांड का पहला कमांडर नियुक्त किया गया।
पश्चिमी थिएटर कमांड चीन की सबसे बड़ी सैन्य कमांड मानी जाती है। इसके जिम्मे तिब्बत, शिनजियांग, भारत सीमा, पाकिस्तान सीमा और मध्य एशिया से जुड़े क्षेत्र आते हैं।
भारत के साथ पूरी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) इसी कमांड के अधिकार क्षेत्र में आती है। इस वजह से झाओ चीन के सबसे प्रभावशाली सैन्य अधिकारियों में गिने जाते थे।
2015 में उन्हें पूर्ण जनरल रैंक प्रदान किया गया था, जो पीएलए में सर्वोच्च सक्रिय सैन्य रैंकों में से एक है।
जनरल झाओ जोंगकी को पश्चिमी थिएटर कमांड की पहचान के रूप में भी देखा जाता था। उन्होंने इस कमांड का युद्ध गीत भी लिखा था, जिसमें सीमा की रक्षा, सैनिकों के कर्तव्य और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति वफादारी जैसे विषयों को प्रमुखता दी गई थी। (Zhao Zongqi Corruption Probe)
रिटायरमेंट के बाद भी मिला था अहम पद
दिसंबर 2020 में आयु सीमा पूरी होने के बाद झाओ पश्चिमी थिएटर कमांड से सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय पीपुल्स कांग्रेस और फिर सीपीपीसीसी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं।
2023 में उन्हें सीपीपीसीसी की स्थायी समिति का सदस्य तथा जातीय एवं धार्मिक मामलों की समिति का उप निदेशक बनाया गया था। यह पद आमतौर पर चीन के वरिष्ठ और प्रभावशाली सेवानिवृत्त अधिकारियों को दिया जाता है।
लेकिन साल 2026 की शुरुआत से उनकी सार्वजनिक गतिविधियां कम होने लगीं। मार्च 2026 में सीपीपीसीसी की बैठकों में उनकी गैरमौजूदगी ने अटकलों को जन्म दिया। अगस्त 2026 में उनकी सदस्यता समाप्त किए जाने के साथ इन अटकलों को और बल मिला।
चीन में ऐसे मामलों में अधिकारियों को अक्सर “लियूझी” यानी पार्टी की आंतरिक हिरासत प्रणाली में रखा जाता है। यह व्यवस्था गुप्त होती है। उन्हें गुप्त जेल में भेजे जाने की बात कही गई है। हालांकि चीन सरकार ने अभी तक आधिकारिक तौर पर जेल भेजने की पुष्टि नहीं की है। (Zhao Zongqi Corruption Probe)
शी जिनपिंग के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का असर
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2012 में सत्ता संभालने के बाद सेना में भ्रष्टाचार के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू किया था। पिछले कुछ वर्षों में यह अभियान और तेज हुआ है।
रॉकेट फोर्स, स्ट्रैटेजिक सपोर्ट फोर्स, हथियार खरीद एजेंसियों और केंद्रीय सैन्य आयोग से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी जांच के दायरे में आए हैं। 28 अगस्त 2026 को चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि दो पूर्व रक्षा मंत्री और केंद्रीय सैन्य आयोग के उपाध्यक्ष तक इस अभियान में फंस चुके हैं। कुछ को मौत की सजा या आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। (Zhao Zongqi Corruption Probe)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





