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मोदी सरकार का बड़ा फैसला: अब दुनिया के ज्यादा देशों को हथियार बेच सकेगा भारत, रक्षा निर्यात नियमों में बड़ा बदलाव

ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस यानी ओजीईएल एक ऐसा स्थायी निर्यात प्राधिकरण है, जिसके तहत पात्र डिफेंस एक्सपोर्ट हर खेप के लिए अलग-अलग मंजूरी लेने के बजाय एक ही लाइसेंस के आधार पर कई बार निर्यात कर सकते हैं...

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📍नई दिल्ली | 28 Aug, 2026, 8:33 PM

India Defence Export Reforms: भारत सरकार ने रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बड़े सुधारों की घोषणा की है। रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग ने डिफेंस एक्सपोर्ट स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) और ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (ओजीईएल) फ्रेमवर्क में कई अहम बदलाव किए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य भारतीय डिफेंस कंपनियों के लिए निर्यात प्रक्रिया को आसान बनाना, कागजी कार्यवाही कम करना और वैश्विक बाजारों तक तेज पहुंच सुनिश्चित करना है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत का रक्षा उत्पादन और रक्षा निर्यात दोनों रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर दर्ज किया गया।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार ये सुधार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन को आगे बढ़ाने के लिए किए गए हैं। इन बदलावों से भारतीय रक्षा उद्योग, खासकर एमएसएमई सेक्टर को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

India Defence Export Reforms: क्या है ओजीईएल और क्यों है महत्वपूर्ण?

ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस यानी ओजीईएल एक ऐसा स्थायी निर्यात प्राधिकरण है, जिसके तहत पात्र डिफेंस एक्सपोर्ट हर खेप के लिए अलग-अलग मंजूरी लेने के बजाय एक ही लाइसेंस के आधार पर कई बार निर्यात कर सकते हैं।

अब तक कंपनियों को हर निर्यात के लिए अलग प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, जिससे समय और संसाधनों की खपत होती थी। ओजीईएल का उद्देश्य इसी दोहराव को कम करना और निर्यात प्रक्रिया को तेज बनाना है।

रक्षा मंत्रालय का मानना है कि इससे भारतीय कंपनियां विदेशी ग्राहकों की मांगों पर अधिक तेजी से प्रतिक्रिया दे सकेंगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनेंगी।

तीन अलग-अलग नियमों को मिलाकर बनाया गया एक फ्रेमवर्क

सरकार ने ओजीईएल से जुड़े तीन अलग-अलग एसओपी को मिलाकर इंटीग्रेटेड स्ट्रक्चर तैयार किया है। पहले बड़े प्लेटफॉर्म और उपकरणों, पुर्जों एवं कंपोनेंट्स तथा कंपनी के भीतर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए अलग-अलग प्रक्रियाएं थीं। अब इन्हें एक ही एसओपी में समाहित कर दिया गया है।

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इस बदलाव से निर्यातकों को अलग-अलग नियमों और प्रक्रियाओं को समझने की जरूरत नहीं होगी। पूरी प्रक्रिया अधिक सरल और एक समान हो जाएगी। (India Defence Export Reforms)

लाइसेंस की वैधता बढ़ाई गई

सरकार ने ओजीईएल की वैधता अवधि भी बढ़ा दी है। पहले यह लाइसेंस दो वर्ष के लिए मान्य होता था, लेकिन अब इसकी अवधि तीन वर्ष कर दी गई है।

इससे कंपनियों को बार-बार लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। साथ ही अनुपालन संबंधी बोझ भी कम होगा। (India Defence Export Reforms)

लगभग पूरी दुनिया होगी दायरे में

सुधारों में सबसे बड़ा बदलाव ओजीईएल के भौगोलिक दायरे को लेकर किया गया है। पहले यह सुविधा केवल 41 देशों तक सीमित थी। अब इसे लगभग सभी देशों तक विस्तारित कर दिया गया है। केवल संवेदनशील देशों, नकारात्मक सूची में शामिल देशों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंध या हथियार प्रतिबंध झेल रहे देशों को इससे बाहर रखा गया है।

इस फैसले से भारतीय रक्षा कंपनियों के लिए संभावित बाजार का दायरा कई गुना बढ़ जाएगा।

विदेशी कंपनियों के साथ लंबे अनुबंधों को राहत

नई व्यवस्था में उन भारतीय कंपनियों के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है, जिनके विदेशी ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (ओईएम) के साथ लंबे समय के अनुबंध हैं।

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अब पात्र उत्पादों के लिए विशेष ओजीईएल जारी किया जा सकेगा और उसकी वैधता संबंधित अनुबंध की अवधि के अनुरूप रखी जा सकेगी।

इससे भारतीय कंपनियों को विदेशी रक्षा कंपनियों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी में सुविधा मिलेगी। (India Defence Export Reforms)

गैर-घातक रक्षा उपकरणों के निर्यात में कम होगी प्रक्रिया

सरकार ने निर्यात मंजूरी प्रक्रिया को भी आसान बनाया है। अधिकांश देशों को गैर-घातक रक्षा उपकरणों के निर्यात के लिए अब विभिन्न हितधारकों से अनिवार्य परामर्श की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि संवेदनशील देशों के मामले में सुरक्षा प्रावधान पहले की तरह लागू रहेंगे। इस बदलाव का उद्देश्य नियमित और कम जोखिम वाले निर्यात मामलों में समय बचाना है। (India Defence Export Reforms)

अंतरराष्ट्रीय टेंडर और प्रदर्शनियों में मिलेगा फायदा

रक्षा मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय टेंडर और रक्षा प्रदर्शनियों में भागीदारी को लेकर भी प्रक्रिया आसान कर दी है।

अब ऐसे मामलों में हितधारक परामर्श की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है। इससे भारतीय कंपनियां विदेशी रक्षा प्रदर्शनियों में अपने उत्पाद तेजी से प्रदर्शित कर सकेंगी और अंतरराष्ट्रीय टेंडरों में समय पर भाग ले पाएंगी।

रक्षा उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक रक्षा बाजार में प्रतिस्पर्धा बहुत तेज होती है और कई बार प्रक्रियागत देरी के कारण अवसर हाथ से निकल जाते हैं। नए नियम इस समस्या को कम कर सकते हैं।

अधिक उत्पादों को मिला निर्यात का मौका

सरकार ने ओजीईएल के तहत आने वाले उत्पादों की सूची का भी विस्तार किया है। अब छोटे हथियारों के कुछ विशेष पुर्जों और सुरक्षात्मक उपकरणों के कंपोनेंट्स को नागरिक उपयोग के लिए निर्यात करने की अनुमति भी दी गई है। इससे वैध अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नए अवसर खुलेंगे और भारतीय कंपनियों के लिए निर्यात के अतिरिक्त रास्ते बनेंगे। (India Defence Export Reforms)

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एमएसएमई को होगा बड़ा लाभ

रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इन सुधारों का सबसे बड़ा फायदा देश की छोटी और मध्यम रक्षा निर्माण कंपनियों को मिलेगा। एमएसएमई कंपनियां अक्सर जटिल प्रक्रियाओं और बार-बार मंजूरी लेने की बाध्यता के कारण निर्यात अवसरों का पूरा लाभ नहीं उठा पाती थीं। नई व्यवस्था उन्हें वैश्विक बाजारों तक तेज पहुंच देने में मदद करेगी।

इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय टेंडरों और रक्षा प्रदर्शनियों में तेजी से भागीदारी संभव होने से नई व्यापारिक संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

रिकॉर्ड रक्षा उत्पादन और निर्यात के बीच आया फैसला

भारत का रक्षा क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।

इसी अवधि में रक्षा निर्यात भी बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। भारतीय कंपनियां अब मिसाइल, रडार, आर्टिलरी सिस्टम, बुलेटप्रूफ उपकरण, नौसैनिक प्लेटफॉर्म, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और विभिन्न रक्षा पुर्जों का निर्यात कर रही हैं।

रक्षा मंत्रालय का मानना है कि नई नीति सुधारों से भारतीय रक्षा उद्योग को वैश्विक बाजार में और मजबूत स्थिति मिलेगी तथा निर्यात प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और तेज होगी। (India Defence Export Reforms)

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