📍नई दिल्ली | 20 Aug, 2026, 7:51 PM
India-Japan Defence Agreement: भारत और जापान ने रक्षा सहयोग को नई मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। गुरुवार को नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी के बीच हुई बैठक में दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, रक्षा तकनीक, सैन्य अभ्यास, नौसैनिक सहयोग और रक्षा उद्योग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति जताई। बैठक में दोनों देशों के बीच मेरीटाइम सिक्योरिटी कोऑपरेशन पर मेमोरेंडम ऑफ अरेंजमेंट (एमओए) पर दस्तखत भी किए गए, जिसे दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग का नया अध्याय माना जा रहा है।
दोनों देशों ने साझा बयान में स्पष्ट किया कि वे किसी भी ऐसे एकतरफा कदम का विरोध करते हैं जो समुद्री और हवाई मार्गों की सुरक्षा को प्रभावित करे या बल प्रयोग के जरिए यथास्थिति बदलने का प्रयास करे। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर कई चुनौतियां सामने हैं।
India-Japan Defence Agreement: मेरीटाइम सिक्योरिटी समझौते पर लगी मुहर
नई दिल्ली में हुई भारत-जापान रक्षा मंत्रियों की बैठक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा समुद्री सुरक्षा सहयोग समझौते पर दस्तखत रहे। इस समझौते के तहत भारत के रक्षा मंत्रालय और जापान के रक्षा मंत्रालय के बीच समुद्री क्षेत्र में सहयोग का एक फॉर्मल फ्रेमवर्क तैयार किया गया है।
इसके तहत भारतीय नौसेना और जापान मेरीटाइम सेल्फ डिफेंस फोर्स के बीच कॉर्डिनेशन बढ़ाया जाएगा। दोनों देश समुद्री गतिविधियों की निगरानी, समुद्री खतरों की पहचान और समुद्री डोमेन अवेयरनेस से जुड़ी जानकारी साझा करेंगे।
बता दें कि समुद्री डोमेन अवेयरनेस का मतलब समुद्र में होने वाली गतिविधियों पर लगातार नजर रखना है। इसमें जहाजों की आवाजाही, संदिग्ध गतिविधियां, समुद्री सुरक्षा खतरे और रणनीतिक समुद्री क्षेत्रों की निगरानी शामिल होती है।

सर्च एंड रेस्क्यू और आपदा राहत में भी सहयोग
समझौते के तहत केवल रक्षा और सुरक्षा ही नहीं बल्कि मानवीय सहायता से जुड़े क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है।
भारत और जापान ने सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन तथा ह्यूमैनिटेरियन असिस्टेंस एंड डिजास्टर रिलीफ मिशनों में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। समुद्र में दुर्घटनाओं, प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय संकट की स्थिति में दोनों देशों की सेनाएं मिलकर काम कर सकेंगी। इस सहयोग का उद्देश्य समुद्री क्षेत्र में बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
India and Japan have signed a Memorandum of Arrangement on Maritime Security Cooperation, strengthening information sharing, naval cooperation, SAR and HADR. The two sides will also explore joint naval shipbuilding, ship repair, mine-countermeasure capabilities and deeper defence… pic.twitter.com/ZbjLD1zgZP
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) August 20, 2026
नौसैनिक जहाजों को मिलेगी नई सुविधाएं
बैठक में समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों ने समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित रखने के लिए नौसैनिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
इस सहयोग के तहत भारतीय और जापानी नौसैनिक जहाज एक-दूसरे के बंदरगाहों का उपयोग कर सकेंगे। जहाजों की मरम्मत, रखरखाव और लॉजिस्टिक सहायता से जुड़े क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ेगा।
दोनों देशों ने जहाजों और नौसैनिक युनिट्स की पारस्परिक यात्राओं को बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की। इसके अलावा सैन्य विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर भी चर्चा हुई। (India-Japan Defence Agreement)

नौसैनिक जहाज निर्माण में साथ काम करने पर चर्चा
बैठक में नौसैनिक जहाज निर्माण और डिजाइन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
जापान ने एडवांस नौसैनिक तकनीकों के क्षेत्र में काफी अनुभव हासिल किया है, जबकि भारत के पास तेजी से बढ़ता डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का आधार मौजूद है। दोनों देश नौसैनिक जहाज निर्माण और डिजाइन में संयुक्त परियोजनाओं की संभावनाओं पर काम करेंगे।
“मेक इन इंडिया” पहल के तहत जापानी कंपनियों द्वारा भारतीय उत्पादन क्षमताओं का उपयोग करने पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने डिफेंस शिपबिल्डिंग और उससे जुड़े क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।
धर्मा गार्जियन, जैमेक्स और वीर गार्जियन पर चर्चा
बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच चल रहे सैन्य अभ्यासों की समीक्षा भी की गई।
भारत और जापान के बीच आयोजित होने वाला थलसेना अभ्यास “धर्मा गार्जियन” और नौसैनिक अभ्यास “जैमेक्स” पहले से ही दोनों देशों के रक्षा संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
वहीं, इस साल होने वाले “वीर गार्जियन-26” वायुसेना अभ्यास को लेकर भी चर्चा हुई। यह अभ्यास कई कारणों से खास माना जा रहा है क्योंकि पहली बार जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के लड़ाकू विमान भारत आएंगे और भारतीय वायुसेना के साथ संयुक्त अभ्यास में शामिल होंगे।
बैठक में सैन्य अभ्यासों को और जटिल बनाने, अनमैन्ड सिस्टम्स को शामिल करने और जरूरत पड़ने पर कम समय में संयुक्त अभ्यास आयोजित करने पर भी सहमति बनी।

स्पेशल फोर्सेज और थिएटर कमांड पर सहयोग
दोनों देशों ने स्पेशल ऑपरेशंस फोर्सेज के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। इसके साथ ही भारत में बनने जा रही इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड्स के साथ जापान के सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने सैन्य सेवाओं के बीच समन्वय को और मजबूत करने पर सहमति जताई। (India-Japan Defence Agreement)
यूनिकॉर्न प्रोजेक्ट बना सहयोग का प्रतीक
भारत और जापान के बीच रक्षा उपकरण और तकनीक हस्तांतरण के क्षेत्र में यूनिकॉर्न इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशन एंटीना सिस्टम प्रोजेक्ट को लेकर भी बात हुई।
यह दोनों देशों के बीच पहला प्रमुख डिफेंस इक्विपमेंट ट्रांसफर प्रोग्राम माना जा रहा है। बैठक में दोनों मंत्रियों ने इस परियोजना को रक्षा तकनीकी सहयोग का प्रतीक बताया।
यह सिस्टम नौसैनिक जहाजों पर आधुनिक संचार सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विकसित की जा रही है। दोनों पक्षों ने इस परियोजना को आगे बढ़ाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। (India-Japan Defence Agreement)
डीआरडीओ और एटीएलए के बीच बढ़ेगा अनुसंधान सहयोग
बैठक में भारत के डीआरडीओ और जापान की एक्विजिशन, टेक्नोलॉजी एंड लॉजिस्टिक्स एजेंसी (एटीएलए) के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।
दोनों देशों ने अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान और विकास कार्यक्रमों को मजबूत करने पर जोर दिया। इसके अलावा एक डिफेंस इंडस्ट्री फोरम आयोजित करने को लेकर भी बातचीत हुई है।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर साझा दृष्टिकोण
भारत और जापान ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम आधारित व्यवस्था के समर्थन को दोहराया।
दोनों देशों ने फरवरी 2026 में आयोजित भारत-जापान-इंडोनेशिया त्रिपक्षीय नौसैनिक पासेक्स अभ्यास का स्वागत किया। साथ ही तीसरे देशों के साथ रक्षा सहयोग, उच्च स्तरीय आदान-प्रदान और संयुक्त गतिविधियों को बढ़ाने पर भी सहमति जताई।
इंडो-पैसिफिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के तहत भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। यह व्यवस्था प्राकृतिक आपदाओं और आपात स्थितियों में साझेदार देशों को सहायता पहुंचाने के लिए बनाई गई है। (India-Japan Defence Agreement)

नई कार्यसमिति का होगा गठन
बैठक की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि एक संयुक्त वर्किंग ग्रुप के गठन पर सहमति रही।
यह समूह ऑपरेशनल, इंटेलिजेंस, रक्षा उपकरण, तकनीक और रक्षा उद्योग से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग को कॉर्डिनेट करेगा। इसका नेतृत्व दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी करेंगे।
वर्किंग ग्रुप का उद्देश्य रक्षा सहयोग से जुड़े फैसलों के क्रियान्वयन में तेजी लाना और विभिन्न क्षेत्रों में तालमेल बढ़ाना होगा। (India-Japan Defence Agreement)
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और पश्चिमी नौसैनिक कमान का दौरा
रक्षा मंत्रियों की बैठक से पहले जापानी रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर भारत के शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।
उन्हें ट्राई-सर्विसेज गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। इसके अलावा उन्होंने मुंबई में पश्चिमी नौसैनिक कमान का दौरा किया और भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस चेन्नई का भी निरीक्षण किया। (India-Japan Defence Agreement)
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