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पलक झपकते ही दुश्मन ड्रोनों का होगा काम तमाम, डीआरडीओ बना रहा 30 किलोवाट डायरेक्टेड एनर्जी वेपन

डायरेक्टेड एनर्जी वेपन ऐसे हथियार होते हैं जो बारूद या मिसाइल की जगह अत्यधिक शक्तिशाली लेजर बीम या माइक्रोवेव एनर्जी का इस्तेमाल करते हैं। जब तक एनर्जी उपलब्ध है, सिस्टम बार-बार फायर कर सकता है...

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📍हैदराबाद | 29 Sep, 2026, 9:40 PM

DRDO 30kW Laser Weapon System: भारत अब अपने सबसे शक्तिशाली स्वदेशी लेजर हथियार को प्रोडक्शन फेज में ले जाने की तैयारी कर रहा है। डीआरडीओ की हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला सेंटर फॉर हाई एनर्जी सिस्टम्स एंड साइंसेज (सीएचईएस) ने 30 किलोवॉट क्षमता वाले काउंटर-ड्रोन डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (डीईडब्ल्यू) के लिए स्पेक्ट्रल बीम कंबाइंड (एसबीसी) लेजर सिस्टम के डेवलपमेंट और इंटीग्रेशन के लिए इंडस्ट्री से प्रस्ताव मांगे हैं। यह सिस्टम मुख्य रूप से ड्रोन, ड्रोन स्वार्म, फिक्स्ड-विंग यूएवी और दुश्मन के सर्विलांस सेंसर को नष्ट करने के लिए विकसित किया गया है।

यह ट्रक पर लगाया जाने वाला हाई-पावर लेजर सिस्टम है, जो लगभग 5 किलोमीटर तक की दूरी पर हवाई खतरों को निशाना बना सकता है। अगस्त 2025 में इसके अंतिम ट्रायल्स पूरे हो चुके हैं।

DRDO 30kW Laser Weapon System: क्या है नया लेजर प्रोजेक्ट?

डीआरडीओ चाहता है कि भारतीय इंडस्ट्री पूरा सिस्टम खुद डिजाइन करे, बनाए, टेस्ट करे और सभी हिस्सों को एक साथ इंटीग्रेट करे। इस सिस्टम में हाई-पावर लेजर सोर्स, बीम डिलीवरी सिस्टम, कमांड एंड कंट्रोल मॉड्यूल, मैकेनिकल स्ट्रक्चर और टेस्टिंग फैसिलिटी शामिल होंगी।

मुख्य लक्ष्य ऐसा स्वदेशी लेजर सिस्टम तैयार करना है जो बहुत ज्यादा एनर्जी वाली एक सिंगल लेजर बीम पैदा कर सके और उसे बेहद सटीक तरीके से लक्ष्य पर फोकस कर सके।

कैसे काम करेगी यह तकनीक?

इस प्रोजेक्ट की सबसे खास तकनीक है स्पेक्ट्रल बीम कंबाइनिंग (एसबीसी)। आम तौर पर एक अकेले फाइबर लेजर की पावर सीमित होती है। लेकिन एसबीसी तकनीक में कई छोटे और बेहद सटीक फाइबर लेजर चैनलों को एक साथ जोड़कर एक शक्तिशाली लेजर बीम बनाई जाती है।

डीआरडीओ की योजना के अनुसार सिस्टम में लगभग 30 नैरो-लाइनविड्थ फाइबर लेजर चैनल होंगे। इन सभी चैनलों को विशेष डिफ्रैक्शन ग्रेटिंग की मदद से जोड़ा जाएगा। जब सभी चैनलों की एनर्जी एक साथ मिलती है तो एक हाई-पावर लेजर बीम तैयार होती है।

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इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पावर बढ़ने के बावजूद बीम की क्वालिटी खराब नहीं होती। इसका मतलब है कि लंबी दूरी पर भी टारगेट तक पर्याप्त एनर्जी पहुंचाई जा सकती है।

स्पेक्ट्रल बीम कंबाइनिंग आधुनिक लेजर तकनीक की सबसे एडवांस सिस्टम्स में से एक मानी जाती है। इसमें कई छोटे लेकिन बेहद सटीक फाइबर लेजर चैनलों को एक साथ जोड़कर एक ताकतवर बीम बनाई जाती है। (DRDO 30kW Laser Weapon System)

क्या है बीम डायरेक्टर?

लेजर सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा केवल लेजर सोर्स नहीं बल्कि बीम डायरेक्टर भी होता है। लेजर सोर्स एनर्जी पैदा करता है, लेकिन उस एनर्जी को सही टारगेट तक पहुंचाने का काम बीम डायरेक्टर करता है। यह ऑप्टिकल और मैकेनिकल सिस्टम का एक कॉम्बिनेशन होता है जो लेजर किरण को अत्यधिक सटीकता के साथ लक्ष्य की ओर गाइड करता है।

हाई-पावर लेजर सिस्टम में बहुत छोटी गलती भी टारगेट को मिस कर सकती है। इसी कारण डीआरडीओ ने इस प्रोजेक्ट में सिक्स-एक्सिस हेक्सापॉड, इलेक्ट्रॉनिक ऑटोकॉलिमेटर और इंटरफेरोमीटर जैसे हाई-प्रिसिजन उपकरणों की मांग की है।

इन उपकरणों की मदद से लेजर बीम को लगातार सही दिशा में रखा जा सकेगा और उसकी सटीकता बनी रहेगी।

गर्मी को कंट्रोल करना सबसे बड़ी चुनौती

30 किलोवाट कैटेगरी का लेजर सिस्टम बहुत अधिक एनर्जी पैदा करता है। इसके साथ बड़ी मात्रा में गर्मी भी उत्पन्न होती है। अगर इस गर्मी को कंट्रोल नहीं किया जाए तो ऑप्टिकल सिस्टम को नुकसान पहुंच सकता है और लेजर की कार्यक्षमता कम हो सकती है। इसी वजह से डीआरडीओ ने इस प्रोजेक्ट में एडवांस्ड कूलिंग सिस्टम को जरूरी बनाया है। (DRDO 30kW Laser Weapon System)

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ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी जरूरत

मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दोनों देशों ने बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया था। वहीं, पाकिस्तान ने कम लागत वाले ड्रोन का उपयोग भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम की लोकेशन पता लगाने और महंगे इंटरसेप्टर मिसाइलों को खर्च करवाने के लिए किया।

छोटे और कम लागत वाले ड्रोन एयरबेस, रडार स्टेशन, कमांड सेंटर और महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। ऐसे ड्रोनों को पारंपरिक मिसाइलों से मार गिराना अक्सर महंगा साबित होता है। कई बार जिस ड्रोन की कीमत लाखों रुपये होती है, उसे गिराने के लिए करोड़ों रुपये की मिसाइल खर्च करनी पड़ती है।

डायरेक्टेड एनर्जी वेपन ऐसे हथियार होते हैं जो बारूद या मिसाइल की जगह अत्यधिक शक्तिशाली लेजर बीम या माइक्रोवेव एनर्जी का इस्तेमाल करते हैं। जब तक एनर्जी उपलब्ध है, सिस्टम बार-बार फायर कर सकता है।

जब लेजर बीम किसी ड्रोन या एरियल टारगेट पर फोकस की जाती है तो वह उसके मोटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर या अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे लक्ष्य काम करना बंद कर देता है या पूरी तरह नष्ट हो जाता है।

लेजर बीम लगभग प्रकाश की गति से टारगेट तक पहुंचती है, जिससे प्रतिक्रिया समय बेहद कम हो जाता है और ड्रोन जैसे तेज लक्ष्यों को निशाना बनाना आसान हो जाता है। (DRDO 30kW Laser Weapon System)

एयर डिफेंस में कैसे काम करेगा?

आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम “ओओडीए लूप” पर आधारित होते हैं। इसका मतलब है ऑब्जर्व, ओरिएंट, डिसाइड और एक्ट। सबसे पहले रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर, इन्फ्रारेड सिस्टम और अन्य निगरानी उपकरण हवाई क्षेत्र पर नजर रखते हैं। इसके बाद कंप्यूटर और ऑपरेटर यह पहचानते हैं कि कौन-सा टारगेट फ्रेंडली है और कौन-सा एनिमी।

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जब खतरे की पहचान हो जाती है तो सिस्टम तय करता है कि किस हथियार का इस्तेमाल करना है। इसी चरण में हाई-एनर्जी लेजर एक विकल्प के रूप में सामने आता है। पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य टारगेट की पहचान और प्रतिक्रिया के बीच का समय न्यूनतम रखना होता है। (DRDO 30kW Laser Weapon System)

2 से 10 किलोवाट कैटेगरी के लेजर सिस्टम तैयार

भारत पिछले कई सालों से डायरेक्टेड एनर्जी वेपन तकनीक पर काम कर रहा है। डीआरडीओ पहले ही 2 किलोवाट और 10 किलोवाट कैटेगरी के लेजर सिस्टम तैयार कर चुका है।

इसके बाद अप्रैल 2025 में आंध्र प्रदेश के कुरनूल स्थित नेशनल ओपन एयर रेंज में वाहन पर लगे मल्टी-किलोवाट लेजर सिस्टम का सफल प्रदर्शन किया गया था।

इस परीक्षण के दौरान फिक्स्ड-विंग ड्रोन, स्वॉर्म ड्रोन और निगरानी उपकरणों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया गया था।

अभी तक हाई-पावर लेजर तकनीक वर्तमान में दुनिया के चुनिंदा देशों के पास है। अमेरिका, चीन और कुछ अन्य देशों ने इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। नया 30 किलोवाट एसबीसी लेजर प्रोग्राम इसी क्षमता को अगले स्तर तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। (DRDO 30kW Laser Weapon System)

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  • herry passport

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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