📍नई दिल्ली | 29 Sep, 2026, 7:19 PM
Naval Commanders Conference 2026: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत आज हिंद महासागर क्षेत्र में फर्स्ट रिस्पॉन्डर, पसंदीदा सुरक्षा साझेदार और भरोसे के प्रतीक के तौर पर उभर चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय नौसेना की मौजूदगी अब केवल हिंद महासागर तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण चीन सागर, भूमध्यसागर और अटलांटिक महासागर तक दिखाई दे रही है। यह भारत की बढ़ती ब्लू-वॉटर नेवी की क्षमता का प्रमाण है।
Naval Commanders Conference 2026: चुनौतियां पहले के मुकाबले बढ़ीं
मंगलवार को नई दिल्ली में नौसेना भवन में आयोजित भारतीय नौसेना की दूसरी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस 2026 को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कह कि आज समुद्री क्षेत्र में भीड़भाड़, धोखाधड़ी और तथाकथित ग्रे-जोन गतिविधियों के चलते चुनौतियां पहले के मुकाबले बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि बदलते सुरक्षा माहौल को देखते हुए निगरानी और प्रतिक्रिया तंत्र को नए स्तर पर ले जाने की जरूरत है।
यह तीन दिवसीय सम्मेलन 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें नौसेना के शीर्ष अधिकारी ऑपरेशनल तैयारी, समुद्री सुरक्षा और भविष्य की क्षमताओं की समीक्षा कर रहे हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा, “भारत हिंद महासागर क्षेत्र में फर्स्ट रिस्पॉन्डर और पसंदीदा सुरक्षा साझेदार के रूप में मजबूती से खड़ा है। पूरी दुनिया हमारी रणनीतिक स्थिति और क्षेत्रीय जिम्मेदारी में हो रही बढ़ोतरी को देख रही है।”
दक्षिण चीन सागर से अटलांटिक तक नौसेना की मौजूदगी
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय युद्धपोत अब दक्षिण चीन सागर, भूमध्यसागर और अटलांटिक महासागर तक नियमित रूप से तैनात हो रहे हैं। उनके अनुसार यह केवल समुद्र में मौजूदगी नहीं है, बल्कि भारत की दूर-दराज क्षेत्रों में ऑपरेशन करने की क्षमता को भी दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना देश को रणनीतिक गहराई प्रदान करने के साथ-साथ क्षेत्रीय प्रभाव स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसी वजह से नौसेना भारत की व्यापक सुरक्षा नीति का अहम हिस्सा बन चुकी है।
विकसित भारत 2047 के विजन में नौसेना की बड़ी भूमिका
राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नौसेना के आधुनिकीकरण पर लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने नौसेना को “विकसित भारत 2047” के विजन का रणनीतिक आधार बताया।
उनके अनुसार नौसेना केवल समुद्री सीमाओं की रक्षा नहीं करती, बल्कि आर्थिक सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और शक्ति प्रदर्शन में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है। उन्होंने नौसेना को भविष्य के लिए तैयार, युद्ध के लिए सक्षम और वैश्विक स्तर पर सम्मानित बल बनाने पर जोर दिया। (Naval Commanders Conference 2026)
ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा का किया उल्लेख
रक्षा मंत्री ने पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकट के दौरान भारतीय नौसेना की भूमिका की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय झंडे वाले व्यापारिक जहाजों, खासकर एलपीजी टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना एक बड़ी उपलब्धि रही।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल और करीब 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस समुद्री मार्गों के जरिए आयात करता है। इसलिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा सीधे देश की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और रक्षा तैयारियों से जुड़ी हुई है। (Naval Commanders Conference 2026)
At the Indian Navy Commanders’ Conference, Raksha Mantri Shri @rajnathsingh underlined the Navy’s role as a strategic anchor for the vision of #ViksitBharat2047. In an era of rapid technological change and geopolitical uncertainty, he called for moving beyond ‘business as usual’,… pic.twitter.com/DmwGqGkEhv
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) September 29, 2026
स्वदेशी युद्धपोत निर्माण में बड़ी प्रगति
रक्षा मंत्री ने आत्मनिर्भरता की दिशा में नौसेना के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना का युद्धपोत निर्माण तंत्र अब वैश्विक मानकों तक पहुंच चुका है।
उन्होंने बताया कि हाल के सालों में नौसेना में शामिल किए गए कई युद्धपोतों में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इससे भारत का रक्षा औद्योगिक आधार मजबूत हुआ है।
राजनाथ सिंह ने कहा, “आने वाले समय में हमें केवल अपनी जरूरतें पूरी नहीं करनी हैं, बल्कि मित्र देशों को भारतीय युद्धपोतों का निर्यात भी करना है।”
समुद्री निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत
रक्षा मंत्री ने कहा कि समुद्री यातायात की मात्रा और मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में केवल निगरानी पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि डेटा विश्लेषण और खतरे की पहचान की क्षमता भी बढ़ानी होगी।
उन्होंने भारत की मैरीटाइम सर्विलांस आर्किटेक्चर को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि आधुनिक समुद्री सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए एडवांस तकनीक और बेहतर विश्लेषण तंत्र जरूरी है। (Naval Commanders Conference 2026)
2026 नौसेना के लिए ऐतिहासिक वर्ष
राजनाथ सिंह ने वर्ष 2026 को भारतीय नौसेना के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष नौसेना में 18 युद्धपोतों के शामिल होने या कमीशन होने की योजना है।
यह भारतीय नौसेना के इतिहास में एक साल के भीतर होने वाली सबसे बड़ी क्षमता वृद्धि मानी जा रही है। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि देश के नौसैनिक जहाज निर्माण उद्योग की बढ़ती परिपक्वता को दर्शाती है।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की सराहना
रक्षा मंत्री ने नौसेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि “ऑल रैंक्स, ऑल रोल्स” नीति के तहत महिलाओं को विभिन्न जिम्मेदारियां दी जा रही हैं।
उन्होंने अग्रिम मोर्चे के युद्धपोतों और विमानों पर महिला अधिकारियों की तैनाती का विशेष उल्लेख किया। साथ ही नाविका सागर परिक्रमा जैसी समुद्री यात्राओं में महिलाओं की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। (Naval Commanders Conference 2026)
अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग में बढ़ी भूमिका
राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना द्वारा कम्बाइंड टास्क फोर्स-154 की कमान संभालने को क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग में महत्वपूर्ण योगदान बताया।
उन्होंने कोच्चि में आयोजित ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस का भी जिक्र किया। इस अभ्यास में 27 देशों के 276 कर्मियों, 76 विशेषज्ञों और चार अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने हिस्सा लिया था।
इसके अलावा उन्होंने आईएनएस सुदर्शिनी की लोकायन-26 तैनाती की सराहना की। इस अभियान के जरिए अमेरिका, अटलांटिक और भूमध्यसागर क्षेत्र में भारत की समुद्री विरासत और कूटनीतिक पहुंच को प्रदर्शित किया गया। (Naval Commanders Conference 2026)
समुद्री सुरक्षा और विकसित भारत का संबंध
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय नौसेना लगातार उच्च स्तर की युद्ध तैयारी बनाए हुए है और बदलती चुनौतियों के बीच अपनी जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभा रही है।
उन्होंने कहा, “अगर समुद्र सुरक्षित रहेंगे तो भारत सुरक्षित रहेगा और यदि भारत सुरक्षित रहेगा तो विकसित भारत का संकल्प और मजबूत होगा।”
रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि भारत की समुद्री शक्ति केवल समुद्र में तिरंगा दिखाने के लिए नहीं है, बल्कि जहां भी भारतीय ध्वज दिखाई दे, वहां सुरक्षा, भरोसा और विश्वास का संदेश पहुंचना चाहिए। (Naval Commanders Conference 2026)
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