📍नई दिल्ली | 29 Sep, 2026, 12:37 PM
Pakistan Rocket Mine Dispensing System: सितंबर के आखिरी सप्ताह में पाकिस्तान आर्मी ने एक ऐसे हथियार सिस्टम का लाइव फायर टेस्ट किया, जो वाकई चौंकाने वाला है। इस सिस्टम का नाम है रॉकेट माइन डिस्पेंसिंग सिस्टम (आरएमडीएस)। इस सिस्टम के जरिए पाकिस्तान की सेना रॉकेटों के जरिए दूर बैठे-बैठे बड़े इलाके में माइंस बिखेरने की तैयारी कर रही है। पाकिस्तान ने अरब सागर के किनारे बलूचिस्तान तट पर फायरिंग एक्सरसाइज के दौरान 25-26 सितंबर को इस सिस्टम का टेस्ट किया।
Pakistan Rocket Mine Dispensing System: मई 2026 में पहली बार दिखाया गया था सिस्टम
यह कोई पारंपरिक माइन बिछाने वाला सिस्टम नहीं है। इसकी खूबी यह है कि सैनिकों को सीमा के पास जाकर जमीन में माइंस लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। इसके बजाय रॉकेट कई किलोमीटर दूर से दागे जाते हैं और टारगेट एरिया के ऊपर पहुंचकर दर्जनों माइंस फैला देते हैं। पाकिस्तान ने इसे अपनी नई “डायनामिक एरिया डिनायल” क्षमता के तौर डेवलप कर रहा है।
पाकिस्तान आर्मी ने मई 2026 में इस सिस्टम को पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया था। उस समय इसे अन्य स्वदेशी हथियार प्रणालियों के साथ दिखाया गया था। हालांकि सितंबर 2026 में पहली बार इसका लाइव फायर टेस्ट सामने आया।
यह सिस्टम पाकिस्तान की आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड के तहत रॉकेट आर्टिलरी प्लेटफॉर्म के साथ काम करता है। इसमें 122 मिमी और 300 मिमी मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है।
122 मिमी रॉकेट घजब और आजर प्रकार के लॉन्चरों से दागे जाते हैं, जबकि 300 मिमी रॉकेट ए-100ई और फतह-1 फैमिली के लॉन्चरों से छोड़े जाते हैं। यह सिस्टम एक साथ छह राकेट फायर कर सकता है, जिनके वॉरहेड्स में प्लास्टिक माइंस भरी होती हैं, ताकि मैग्नेट से भी इन्हें खोजा नहीं जा सके।
पाकिस्तान का कहना है कि इस सिस्टम को पूरी तरह से पाकिस्तान के अंदर ‘डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ डिफेंस डिज़ाइन एंड डेवलपमेंट’ (DGRDE) की देखरेख में डिजाइन और डेवलप किया गया था। यह सिस्टम मिलिट्री व्हीकल (शाहीन 6×6) पर लगाया गया है, जिसे रेगिस्तान और पहाड़ी इलाकों जैसे मुश्किल माहौल में तेजी से चलने-फिरने के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है।
रॉकेट से माइन डिस्पेंसिंग
आम तौर पर माइनफील्ड बनाने के लिए इंजीनियर यूनिट्स को जमीन पर जाकर माइंस बिछानी पड़ती हैं। यह प्रक्रिया समय लेने वाली होती है और दुश्मन की फायरिंग के बीच काफी जोखिम भरी भी हो सकती है।
रॉकेट माइन डिस्पेंसिंग सिस्टम में कार्गो रॉकेट टारगेट एरिया तक पहुंचने के बाद हवा में खुल जाते हैं और अपने अंदर मौजूद माइंस को बड़े इलाके में बिखेर देते हैं।
ये माइंस जमीन पर गिरने के बाद एक्टिव हो जाती हैं। इनमें लगे मैग्नेटिक सेंसर किसी टैंक, बख्तरबंद वाहन या भारी सैन्य प्लेटफॉर्म की धातु को पहचान सकते हैं। जैसे ही कोई व्हीकल इनके पास में आता है, माइन एक्टिव हो सकती है।
122 मिमी रॉकेट अपेक्षाकृत कम दूरी पर बड़े क्षेत्र को कवर करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। वहीं 300 मिमी रॉकेट ज्यादा दूरी तक अधिक संख्या में माइंस पहुंचाने में सक्षम होते हैं। इन माइंस की रेंज 15 से 20 किलोमीटर तक हो सकती है। (Pakistan Rocket Mine Dispensing System)
चीन से आई है यह तकनीक
हालांकि पाकिस्तान इसे अपनी उपलब्धि के रूप में पेश कर रहा है, लेकिन असल में यह तकनीक चीन से मिली है।
122 मिमी घजब और आजर सिस्टम मूल रूप से सोवियत बीएम-21 ग्रैड रॉकेट सिस्टम के लोकल वर्जन हैं। पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्रीज इनके लिए यरमुक रॉकेट तैयार करती है।
दूसरी ओर 300 मिमी ए-100ई सिस्टम को चीन की डिफेंस कंपनियों ने बनाया था। चीन ने लगभग 2015 के आसपास पाकिस्तान को ये लॉन्चर दिए थे। 2019 में पाकिस्तान ने इसे “स्वदेशी” बताकर शामिल किया, लेकिन यह लाइसेंस के तहत स्थानीय उत्पादन या रॉकेट का स्थानीय संस्करण है।
वहीं, स्कैटरेबल माइन तकनीक भी चीनी टाइप-84 एंटी-टैंक माइन सिस्टम से जुड़ी हुई है। चीन लंबे समय से ऐसे रॉकेटों का इस्तेमाल कर रहा है जो हवा में जाकर माइंस बिखेर सकते हैं। चीन का टाइप-84 स्कैटरेबल एंटी-टैंक माइन ठीक इसी तरह 122 मिमी रॉकेट से दागा जाता है। हर रॉकेट में 6 से 8 माइंस होती हैं और मैग्नेटिक फ्यूज वाला वर्जन भी मौजूद है। यही सिस्टम पाकिस्तान ने अपने 122 मिमी और 300 मिमी लॉन्चरों पर लगाया है।
पाकिस्तान ने भी इस तकनीक को अपने मौजूदा रॉकेट लॉन्चरों के साथ जोड़कर इसका इस्तेमाल करना शुरू किया है। (Pakistan Rocket Mine Dispensing System)
क्या होता है “डायनामिक एरिया डिनायल”?
सैन्य भाषा में एरिया डिनायल का मतलब होता है किसी इलाके को दुश्मन के लिए असुरक्षित बना देना ताकि वह वहां आसानी से आगे न बढ़ सके।
पहले यह काम स्थायी माइनफील्ड, खाइयों और अन्य बाधाओं के जरिए किया जाता था। पाकिस्तान लंबे समय से सीमा क्षेत्रों में डिट्च-कम-बंड जैसी डिफेंसिव फॉरमेशंस पर निर्भर रहा है।
लेकिन डायनामिक एरिया डिनायल का मतलब है कि जरूरत पड़ने पर किसी भी समय और किसी भी स्थान पर नई बाधा खड़ी कर दी जाए।
रॉकेट माइन डिस्पेंसिंग सिस्टम इसी कॉन्सैप्ट पर आधारित है। अगर किसी इलाके में आर्मर्ड टुकड़ी आगे बढ़ रही हो तो उसके पीछे या आसपास अचानक माइनफील्ड बनाया जा सकता है।
इससे रफ्तार धीमी पड़ सकती है और उसकी सप्लाई लाइन प्रभावित हो सकती है। (Pakistan Rocket Mine Dispensing System)
कोल्ड स्टार्ट और आईबीजी के खिलाफ इस्तेमाल
पाकिस्तान सेना की सोच यह है कि इस सिस्टम के जरिए कैसे भारत की “कोल्ड स्टार्ट” स्ट्रेटेजी और इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स (आईबीजी) को काउंटर किया जाए।
कोल्ड स्टार्ट रणनीति में सीमित समय में तेजी से सैन्य कार्रवाई की जाती है। इसके तहत अग्रिम मोर्चे पर मौजूद सैन्य बल कम समय में जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं।
वहीं, आईबीजी भी इसी सोच का हिस्सा माने जाते हैं। आईबीजी छोटी लेकिन अत्यधिक मोबाइल कॉम्बैट ग्रुप होते हैं, जिनमें टैंक, मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री, आर्टिलरी और इंजीनियरिंग रिसोर्सेज शामिल होते हैं।
पाकिस्तान का सोचना है कि अगर ऐसे कॉम्बैट ग्रुप तेजी से आगे बढ़ते हैं तो उनके पीछे के ब्रिजहेड, सप्लाई कॉरिडोर और रसद मार्गों पर माइंस बिखेरकर उनकी रफ्तार को धीमा किया जा सकता है। (Pakistan Rocket Mine Dispensing System)
बढ़ जाता है जोखिम
यदि किसी मिलिट्री ऑपरेशन के दौरान पीछे के इलाकों में अचानक माइनफील्ड बन जाएं तो केवल आगे चल रहे टैंक ही प्रभावित नहीं होते, बल्कि ईंधन, गोला-बारूद और अन्य रसद ले जाने वाले वाहन भी प्रभावित हो सकते हैं।
इस स्थिति में इंजीनियर यूनिट्स को कई स्थानों पर एक साथ माइन क्लियरेंस करनी पड़ सकती है। इससे रफ्तार में 24 से 48 घंटे की देरी हो सकती है। इतने समय में पाकिस्तान अपनी रिजर्व फोर्स लाकर जवाबी हमला कर सकता है।
बता दें कि भारतीय सेना पहले से ही माइन प्लॉ, माइन रोलर, लाइन चार्ज सिस्टम और विशेष इंजीनियरिंग व्हीकल्स का इस्तेमाल करती है। इसके अलावा ड्रोन बेस्ड माइन डिटेक्शन और आधुनिक सर्विलांस सिस्टम्स पर भी काम चल रहा है। (Pakistan Rocket Mine Dispensing System)
गलत दिशा में गिर सकती हैं माइंस
रॉकेट माइन डिस्पेंसिंग सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा इसकी रफ्तार है। कुछ मिनटों में कई किलोमीटर लंबे इलाके में माइंस बिखेरी जा सकती हैं।
दूसरा फायदा यह है कि सैनिकों को दुश्मन के करीब जाने की जरूरत नहीं पड़ती। पूरा काम सुरक्षित दूरी से किया जा सकता है।
तीसरा फायदा यह है कि रियल टाइम खुफिया जानकारी के आधार पर किसी भी इलाके को तत्काल माइनफील्ड में बदला जा सकता है।
हालांकि इसकी कुछ सीमाएं भी हैं। स्कैटरेबल माइंस हमेशा एक समान तरीके से जमीन पर नहीं गिरतीं। कुछ माइंस गलत दिशा में गिर सकती हैं या पूरी तरह प्रभावी स्थिति में नहीं पहुंच पातीं। वहीं, अगर माइंस में भरोसेमंद सेल्फ-डिस्ट्रक्ट मैकेनिज्म नहीं है तो लंबे समय तक इलाके को प्रभावित कर सकती हैं।
मौसम, मिट्टी और घने पेड़-पौधे या नरम जमीन माइन की कार्यक्षमता कम कर सकते हैं। इसके अलावा रॉकेट दागने वाले लॉन्चर दुश्मन की काउंटर-बैटरी फायर का निशाना भी बन सकते हैं। (Pakistan Rocket Mine Dispensing System)
आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड की ताकत बढ़ा रहा है पाकिस्तान
पाकिस्तान लगातार अपनी आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड को मजबूत कर रहा है। इस कमांड का उद्देश्य लंबी दूरी की पारंपरिक फायरपावर को इंटीग्रेट करना है।
फतह सीरीज के गाइडेड रॉकेट, लंबी दूरी की मारक क्षमता और अब माइन डिस्पेंसिंग सिस्टम को एक साथ जोड़कर पाकिस्तान अपनी काउंटर-मोबिलिटी क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
पहले जहां माइंस मुख्य रूप से इंजीनियर यूनिट्स की जिम्मेदारी मानी जाती थीं, वहीं अब यह क्षमता सीधे आर्टिलरी और रॉकेट फोर्स के हाथ में भी आ गई है। (Pakistan Rocket Mine Dispensing System)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।






