📍बीजिंग | 10 Sep, 2026, 11:24 AM
PLA Nuclear Attack Warning: चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) रॉकेट फोर्स से जुड़े एक मेडिकल रिसर्च दल की नई स्टडी ने चीन के रणनीतिक और सुरक्षा हलकों में चर्चा बढ़ा दी है। इस स्टडी में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर बड़े परमाणु युद्ध की संभावना फिलहाल कम है, लेकिन किसी छोटे या मध्यम परमाणु शक्ति वाले देश अथवा किसी आतंकी संगठन द्वारा सीमित परमाणु हमला किए जाने की आशंका को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। रिपोर्ट में खास तौर पर चीन के बड़े शहरों को ऐसे किसी संभावित हमले की स्थिति के लिए तैयार रहने की जरूरत बताई गई है।
बता दें कि 4 सितंबर को प्रकाशित इस स्टडी को पीएलए रॉकेट फोर्स कैरेक्टरिस्टिक मेडिकल सेंटर के रिसर्चर्स ने तैयार किया है।
PLA Nuclear Attack Warning: जापान का नाम लेकर जताई चिंता
रिपोर्ट में जापान का जिक्र किया गया है। स्टडी में कहा गया है कि जापान अभी तक “ट्रीटी ऑन द प्रोहिबिशन ऑफ न्यूक्लियर वेपन्स” यानी परमाणु हथियार प्रतिबंध संधि में शामिल नहीं हुआ है। यह संधि 2017 में लागू हुई थी और जो परमाणु हथियारों के इस्तेमाल पर रोक लगाती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जापान में लंबे समय से लागू “तीन गैर-परमाणु सिद्धांतों” को लेकर बहस चल रही है। इन सिद्धांतों के तहत जापान परमाणु हथियार न रखने, न बनाने और अपने क्षेत्र में उन्हें प्रवेश की अनुमति न देने की नीति अपनाता रहा है।
पीएलए से जुड़े शोधकर्ताओं ने लिखा, “जापान अभी तक परमाणु हथियार प्रतिबंध संधि में शामिल नहीं हुआ है और जापानी सरकार तीन गैर-परमाणु सिद्धांतों के अंतर्गत परमाणु हथियारों के प्रवेश संबंधी नियमों पर पुनर्विचार कर रही है। यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक बड़ा खतरे का संकेत है।”
हालांकि जापानी सरकार सार्वजनिक रूप से लगातार कहती रही है कि वह परमाणु अप्रसार संधि के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन कर रही है और तीन गैर-परमाणु सिद्धांत अभी भी लागू हैं। (PLA Nuclear Attack Warning)

बड़े परमाणु युद्ध की संभावना कम, लेकिन जोखिम खत्म नहीं
रिपोर्ट के अनुसार शोधकर्ताओं का मानना है कि अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे प्रमुख परमाणु देशों के बीच पूर्ण पैमाने का परमाणु युद्ध होने की संभावना फिलहाल कम दिखाई देती है।
जनवरी 2022 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य देशों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा था कि “परमाणु युद्ध जीता नहीं जा सकता और इसे कभी लड़ा नहीं जाना चाहिए।”
इसके बावजूद चीनी स्टडी में चेतावनी दी गई है कि भू-राजनीतिक तनाव, धार्मिक संघर्ष या आतंकवाद से प्रेरित कोई समूह या देश सीमित स्तर पर परमाणु हथियार का इस्तेमाल कर सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया, “यदि कोई देश या आतंकी संगठन ऐसा जोखिम उठाता है, तो यह संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं होती कि चीन का कोई बड़ा शहर परमाणु आतंकवादी हमले का शिकार बन सकता है।” (PLA Nuclear Attack Warning)
हिरोशिमा के आंकड़ों से तैयार किया मॉडल
स्टडी में एक कल्पना की गई है कि अगर किसी बड़े चीनी शहर पर कम क्षमता वाले टैक्टिकल परमाणु हथियार से हमला किया जाता है, तो क्या होगा।
इसके लिए शोधकर्ताओं ने 1945 में जापान के हिरोशिमा पर हुए परमाणु हमले के ऐतिहासिक आंकड़ों का उपयोग किया। साथ ही दुनिया भर में किए गए आधुनिक कंप्यूटर सिमुलेशन और आपदा मॉडलिंग के परिणामों को भी शामिल किया गया।
शोधकर्ताओं ने पाया कि ऐसे हमले के बाद सबसे पहले शहर का बुनियादी ढांचा प्रभावित होगा। सड़कें, बिजली व्यवस्था, संचार नेटवर्क और अस्पतालों की कार्यक्षमता गंभीर रूप से बाधित हो सकती है।
इसके बाद बहुत कम समय में बड़ी संख्या में घायल लोग मेडिकल सिस्टम पर दबाव डालेंगे। इनमें जलने वाले मरीज, विस्फोट से घायल लोग और रेडिएशन एक्सपोजर का शिकार नागरिक शामिल हो सकते हैं। (PLA Nuclear Attack Warning)
अस्पतालों के सामने होगी सबसे बड़ी चुनौती
रिपोर्ट के अनुसार परमाणु हमले के बाद अस्पतालों को एक साथ कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
सामान्य आपदाओं में अधिकतर मरीज एक जैसी चोटों के साथ आते हैं, लेकिन परमाणु हमले की स्थिति अलग होती है। इसमें जलन, हड्डियों की चोट, आंतरिक रक्तस्राव, रेडिएशन बीमारी और मानसिक आघात जैसी समस्याएं एक साथ सामने आती हैं।
शोधकर्ताओं ने कहा कि ऐसी स्थिति में स्थानीय मेडिकल क्षमता जल्दी ही अपनी सीमा तक पहुंच सकती है। इसी कारण विशेष प्रशिक्षण प्राप्त मेडिकल टीमों और रेडिएशन विशेषज्ञों की जरूरत होगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि परमाणु हमले के बाद सामाजिक अव्यवस्था और डर के हालात राहत कार्यों को और मुश्किल बना सकते हैं। (PLA Nuclear Attack Warning)
चीन ने पहले से बना रखा है आपातकालीन नेटवर्क
स्टडी के मुताबिक चीन ने पहले ही परमाणु आपात स्थितियों से निपटने के लिए एक बड़ा इमरजेंसी रेस्क्यू नेटवर्क तैयार किया है। देशभर में 30 से अधिक विशेष बेस स्थापित किए गए हैं, जहां परमाणु हमले या रेडिएशन आपदा के पीड़ितों का इलाज किया जा सकता है।
हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि मौजूदा क्षमता को और बढ़ाने की जरूरत है। रिपोर्ट में अधिक संसाधन, अतिरिक्त मेडिकल सुविधाएं और विशेषज्ञ प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की सिफारिश की गई है। (PLA Nuclear Attack Warning)
एंटीबायोटिक्स और रेडिएशन सुरक्षा उपकरण जमा करने की सलाह
स्टडी में स्थानीय प्रशासन को आपातकालीन सामग्री का पर्याप्त भंडार रखने की सलाह दी गई है। इनमें एंटीबायोटिक्स, रेडिएशन सुरक्षा उपकरण, व्यक्तिगत सुरक्षा किट और अन्य मेडिकल संसाधन शामिल हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि इन सभी संसाधनों को “कॉम्बैट रेडीनेस” यानी तत्काल उपयोग की स्थिति में रखा जाना चाहिए।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि केवल सरकारी एजेंसियों को तैयार करना पर्याप्त नहीं होगा। आम नागरिकों को भी परमाणु और रेडिएशन सुरक्षा के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए। (PLA Nuclear Attack Warning)
जनता को जागरूक बनाने पर जोर
शोधकर्ताओं का मानना है कि किसी भी बड़े संकट के दौरान गलत जानकारी और घबराहट स्थिति को और गंभीर बना सकती है। इसी वजह से रिपोर्ट में परमाणु सुरक्षा, बचाव प्रक्रियाओं और रेडिएशन से बचाव के उपायों पर सार्वजनिक जागरूकता अभियान चलाने की सिफारिश की गई है।
स्टडी के अनुसार यदि लोगों को पहले से जानकारी होगी तो आपातकालीन स्थिति में अनावश्यक अफरातफरी और गलत फैसलों को कम किया जा सकेगा। (PLA Nuclear Attack Warning)
चीन-जापान संबंधों पर पड़ सकता है असर
यह स्टडी ऐसे समय सामने आई है जब चीन लगातार जापान पर “री-मिलिटरीकरण” यानी सैन्य क्षमताओं के विस्तार का आरोप लगाता रहा है।
बीजिंग लंबे समय से जापान की परमाणु क्षमताओं को लेकर संदेह जताता रहा है। जनवरी 2026 में जारी एक चीनी सरकारी रिपोर्ट में दावा किया गया था कि जापान के पास वेपन-ग्रेड प्लूटोनियम तैयार करने की तकनीकी और औद्योगिक क्षमता मौजूद है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि जापान ने एक व्यापक न्यूक्लियर फ्यूल साइकिल सिस्टम विकसित कर लिया है और उसके पास मजबूत परमाणु उद्योग आधार मौजूद है। (PLA Nuclear Attack Warning)
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रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"




