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चीन की सेना में बड़ा भूचाल! शी जिनपिंग के ‘आंख और कान’ माने जाने वाले सबसे करीबी जनरल पर गिरी गाज

राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निजी सहयोगी माने जाने वाले लेफ्टिनेंट जनरल झोंग शाओजुन को पद से हटाया गया, वहीं गलवान और डोकलाम संकट के दौरान पश्चिमी थिएटर कमांड संभालने वाले झाओ जोंगकी पर भी कार्रवाई हुई...

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📍बीजिंग | 7 Sep, 2026, 8:31 PM

Zhong Shaojun PLA Purge: चीन की सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) में चल रही बड़े स्तर पर कार्रवाई लगातार जारी है।28 अगस्त को चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) की स्थायी समिति ने कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को उनके पदों से हटाने की घोषणा की। इनमें चीन के सबसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों में शामिल झांग यूक्सिया, लियू जेनली, जू कियानशेंग शामिल थे। लेकिन अब एक ऐसा चौंकाने वाला नाम सामने आया है, जिसने चीन की राजनीति और सेना पर नजर रखने वालों को भी चौंका दिया है। यह नाम है लेफ्टिनेंट जनरल झोंग शाओजुन का। झोंग शाओजुन को सालों तक राष्ट्रपति शी जिनपिंग का सबसे करीबी सहयोगी, निजी सचिव और सेना के भीतर उनका सबसे भरोसेमंद व्यक्ति माना जाता रहा।

वहीं, पूर्व वेस्टर्न थिएटर कमांडर झाओ जोंगकी को भी चीनी पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस (सीपीपीसीसी) से बाहर कर दिया गया। झाओ जोंगकी वही सैन्य कमांडर थे जो 2017 के डोकलाम संकट और 2020 के गलवान संघर्ष के दौरान पश्चिमी थिएटर कमांड की कमान संभाल रहे थे।

Zhong Shaojun PLA Purge: अब तक 57 जनरल जांच के दायरे में

28 अगस्त को चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) की स्थायी समिति ने झोंग शाओजुन समेत चार वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की प्रतिनिधि सदस्यता समाप्त करने की घोषणा की। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब चीन की सेना में पिछले तीन वर्षों के दौरान अभूतपूर्व स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई देखने को मिली है। रिपोर्टों के अनुसार, 2023 से अब तक 57 जनरल या तो जांच के दायरे में आए हैं, पदों से हटाए गए हैं या सार्वजनिक जीवन से गायब हो चुके हैं।

कौन हैं झोंग शाओजुन?

झोंग शाओजुन का जन्म 19 अक्टूबर 1968 को चीन के झेजियांग प्रांत के काइहुआ काउंटी में हुआ था। उन्होंने 1990 में हांगझोउ विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एप्लिकेशन विषय में स्नातक की डिग्री हासिल की। बाद में झेजियांग विश्वविद्यालय से एप्लाइड साइकोलॉजी में मास्टर्स किया और आगे चलकर सिंघुआ विश्वविद्यालय में डॉक्टरेट अध्ययन से भी जुड़े।

दिलचस्प बात यह है कि झोंग शाओजुन का शुरुआती करियर सेना में नहीं बल्कि चीन की पार्टी और प्रशासनिक व्यवस्था में रहा। वे झेजियांग प्रांतीय पार्टी समिति के संगठन विभाग में काम करते थे। इसी दौरान उनका संपर्क उस समय के झेजियांग पार्टी सचिव शी जिनपिंग से हुआ। (Zhong Shaojun PLA Purge)

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2002 में शुरू हुआ शी जिनपिंग के साथ सफर

वर्ष 2002 में शी जिनपिंग को फुजियान से झेजियांग प्रांत का पार्टी सचिव बनाकर भेजा गया था। बताया जाता है कि उसी दौरान झोंग शाओजुन उनके करीबी सहयोगियों में शामिल हुए।

अगले पांच सालों में दोनों के बीच राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर मजबूत कार्य संबंध बने। जब 2007 में शी जिनपिंग को शंघाई का पार्टी सचिव बनाया गया तो झोंग भी उनके साथ चले गए। इसके बाद जब शी बीजिंग पहुंचे और चीन के शीर्ष नेता बने, तब भी झोंग शाओजुन उनके सबसे करीबी अधिकारियों में शामिल रहे।

करीब 22 सालों तक झोंग शाओजुन को शी जिनपिंग का भरोसेमंद सहयोगी माना जाता रहा।

बिना सैन्य पृष्ठभूमि के पहुंचे पीएलए में

झोंग शाओजुन के करियर का सबसे असाधारण पहलू यह रहा कि वे पारंपरिक सैन्य अधिकारी नहीं थे। इसके बावजूद शी जिनपिंग के सत्ता में आने के बाद उन्हें सीधे केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) के जनरल ऑफिस में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई।

2013 में उन्हें केंद्रीय सैन्य आयोग के जनरल ऑफिस का उपनिदेशक बनाया गया। बाद में वे निदेशक बने और तेजी से प्रमोशन पाते हुए लेफ्टिनेंट जनरल के पद तक पहुंच गए।

2016 में उन्हें मेजर जनरल और 2019 में लेफ्टिनेंट जनरल बनाया गया।

केंद्रीय सैन्य आयोग चीन की सेना की सबसे बड़ी मिलिट्री बॉडी है और उसके अध्यक्ष स्वयं शी जिनपिंग हैं। ऐसे में जनरल ऑफिस का प्रमुख होना बेहद प्रभावशाली पद माना जाता है। (Zhong Shaojun PLA Purge)

Zhong Shaojun PLA Purge
Zhong Shaojun, a longtime “informant” of Xi Jinping and a close confidant in the military, has also been removed from his post. (Quote from the website of the National People’s Congress)

सेना में शी जिनपिंग की ‘आंख और कान’

झोंग शाओजुन को पीएलए के भीतर शी जिनपिंग की “आंख और कान” कहा जाता था। माना जाता था कि सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, नियुक्तियों, पदोन्नतियों और आंतरिक गतिविधियों की जानकारी सीधे उन्हीं के माध्यम से शी जिनपिंग तक पहुंचती थी।

झोंग शाओजुन का नाम अक्सर एडमिरल मियाओ हुआ के साथ भी जोड़ा जाता रहा। दोनों को सेना में अधिकारियों की नियुक्तियों और पदोन्नतियों पर प्रभाव रखने वाला समूह माना जाता था।

कुछ विश्लेषकों का दावा है कि पिछले वर्षों में जिन अधिकारियों को महत्वपूर्ण सैन्य पद मिले, उनकी सिफारिशों में झोंग शाओजुन की भूमिका रही थी। (Zhong Shaojun PLA Purge)

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गलवान में भी अहम भूमिका

झोंग शाओजुन सीधे तौर पर सीमा पर तैनात कमांडर नहीं थे, लेकिन 2020 के पूर्वी लद्दाख और गलवान घाटी संकट के दौरान वे केंद्रीय सैन्य आयोग के जनरल ऑफिस के प्रमुख थे। उस समय चीन की सेना से जुड़े संवेदनशील फैसलों और मिलिट्री कॉर्डिनेशन सिस्टम्स तक उनकी पहुंच थी। यही कारण है कि हाल के घटनाक्रमों के बाद उनका नाम फिर चर्चा में आया है।

इससे पहले 26 अगस्त को सीपीपीसीसी की बैठक में झाओ जोंगकी को 14वीं राष्ट्रीय समिति की स्थायी समिति और जातीय एवं धार्मिक मामलों की समिति के उपाध्यक्ष पद से हटा दिया गया। साथ ही उनकी सदस्यता भी समाप्त कर दी गई।

झाओ जोंगकी चीन की सेना के उन अधिकारियों में रहे हैं जिनका नाम भारत-चीन सीमा से जुड़ी घटनाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा। वे 2020 के पूर्वी लद्दाख संकट और गलवान घाटी टकराव के समय वेस्टर्न थिएटर कमांड के प्रमुख थे। इससे पहले 2017 के डोकलाम गतिरोध के दौरान भी वही इस क्षेत्र की सैन्य कमान संभाल रहे थे।

हालांकि चीन की ओर से उनकी हटाने की कार्रवाई को गलवान प्रकरण से जोड़ने वाला कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। (Zhong Shaojun PLA Purge)

अचानक गायब होने के बाद बढ़ी थीं अटकलें

करीब दो साल पहले झोंग शाओजुन कुछ समय के लिए सार्वजनिक गतिविधियों से गायब हो गए थे। बाद में जानकारी सामने आई कि उन्हें नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी का राजनीतिक आयुक्त बनाया गया था। लेकिन इस पद पर भी उनका कार्यकाल ज्यादा लंबा नहीं रहा। इसके बाद उनके भविष्य को लेकर लगातार अटकलें लगती रहीं।

कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि सेना के भीतर चल रही जांच का असर उन तक भी पहुंच चुका है। हालांकि उस समय चीन की सरकार ने कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी। (Zhong Shaojun PLA Purge)

केंद्रीय सैन्य आयोग में अब कितने सदस्य

केंद्रीय सैन्य आयोग चीन की सेना का सर्वोच्च सैन्य निकाय है। इसके अध्यक्ष स्वयं शी जिनपिंग हैं। हालिया कार्रवाई के बाद आयोग के कई प्रमुख सदस्य बाहर हो चुके हैं। इनमें पूर्व रक्षा मंत्री ली शांगफू, पूर्व उपाध्यक्ष हे वेइडोंग और पूर्व राजनीतिक कार्य विभाग प्रमुख मियाओ हुआ जैसे नाम शामिल हैं।

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28 अगस्त को झांग यूक्सिया और लियू जेनली के खिलाफ कार्रवाई की पुष्टि के बाद आयोग के स्ट्रक्चर को लेकर भी चर्चा बढ़ गई। झांग यूक्सिया पीएलए के सबसे वरिष्ठ वर्दीधारी अधिकारी माने जाते थे, जबकि लियू जेनली संयुक्त स्टाफ विभाग के प्रमुख थे। (Zhong Shaojun PLA Purge)

चीन के सरकारी मीडिया की चुप्पी

दिलचस्प बात यह रही कि चीन के प्रमुख सरकारी मीडिया संस्थानों ने झोंग शाओजुन जैसे वरिष्ठ अधिकारी को हटाए जाने की खबर को सीमित कवरेज दी। कुछ रिपोर्टों में उनका नाम तक प्रमुखता से नहीं लिया गया।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार चीन में जब किसी वरिष्ठ नेता या अधिकारी से जुड़ा मामला संवेदनशील माना जाता है तो सरकारी मीडिया अक्सर नियंत्रित और सीमित जानकारी जारी करता है। (Zhong Shaojun PLA Purge)

रॉकेट फोर्स से शुरू हुआ बड़ा अभियान

पीएलए में मौजूदा कार्रवाई की शुरुआत 2023 में सामने आए रॉकेट फोर्स घोटाले से जुड़ी मानी जाती है। उस समय चीन की रणनीतिक मिसाइल इकाई रॉकेट फोर्स के कई वरिष्ठ अधिकारियों को हटाया गया था।

इसके बाद पूर्व रक्षा मंत्री ली शांगफू भी जांच के दायरे में आए। ली शांगफू पहले केंद्रीय सैन्य आयोग के उपकरण विकास विभाग के प्रमुख रह चुके थे।

रॉकेट फोर्स के अलावा उपकरण विकास विभाग, राजनीतिक कार्य विभाग और विभिन्न थिएटर कमांडों के वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई। (Zhong Shaojun PLA Purge)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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